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भाभी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 717 बार

नई नवेली भाभी की चुदाई देवर से-2

निक

18 Jan 2026 को प्रकाशित

नई नवेली भाभी की चुदाई देवर से-2
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कहानी के पिछले भागनई नवेली भाभी की चुदाई देवर से-1में आपने पढ़ा कि जब मैं बाथरूम में पेशाब कर रहा था तो मेरी शादीशुदा भाभी ने मेरे लंड को चुपके से देख लिया था. उस दिन के बाद से ही मेरी नजर भाभी के लिए बदल गई थी.

मैंने कई बार भाभी के बारे में सोच कर मुठ मारी थी. उधर भैया और भाभी अपनी सुहागरात की चुदाई के मजे लेते थे और इधर मैं अपने कमरे में भाभी चूत चुदाई के सपने देखने लगा था.

फिर एक दिन दोपहर के समय मैं भाभी के कमरे में सो रहा था तो नींद में भाभी की चूचियों पर मेरे हाथ चले गये और उसने कुछ नहीं कहा. उस दिन हम दोनों ही गर्म हो गये और मैंने भाभी की चूत में उंगली करते हुए उसकी चूत को अपने मोटे लंड से रौंद डाला.

फिर शाम को भैया का फोन आया कि उस दिन वो अपने दोस्त के साथ काम के सिलसिले में उसके घर पर ही रुकेंगे. भाभी ने जल्दी से मेरे पास आकर मुझसे ये बात बताई और यह जानकर हम दोनों ही खुश हो गये. हमने जल्दी से खाना खाया और फिर भैया वाले कमरे में ही सोने के लिए आ गये.

दोनों को ही चुदाई का जोश चढ़ा हुआ था. लेटते ही दोनों ने एक दूसरे के जिस्मों को नंगा कर प्रिया. चूमा-चाटी करने के बाद जोश-जोश में ही मैंने एक बार फिर से भाभी की चूत में अपना वीर्य गिरा प्रिया. इस बार ज्यादा समय तक चुदाई नहीं चली. उत्तेजना ज्यादा थी.

एक तो भैया घर पर नहीं थे और मुझे नई-नई चूत चोदने का चान्स मिला था. इधर भाभी को भी शादी के बाद एक मोटा लंड मिला था. इसलिए दोनों का ही जोश उफान मार रहा था. दोनों जल्दी ही झड़ गये थे.

भाभी की चूत में वीर्य छोड़ने के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ नंगे ही पड़े रहे. भाभी को नींद आ गई थी. जब मेरी आंख खुली तो देखा कि भाभी गहरी नींद में थी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो घोड़े बेच कर सो रही है.

मेरी भाभी का जिस्म सच में कमाल था. चुदाई के जोश में मैं ध्यान से उसके जिस्म को नहीं देख पाया था. अब जब वो सो रही थी तो मैं ध्यान से उसके पूरे जिस्म को निहार रहा था.

भाभी की चूचियों के निप्पल पहाड़ की चोटियों के जैसे तन कर खड़े हुए थे. उसके गुलाबी होंठ जैसे कमल के फूल की पत्तियों की तरह थे. एकदम से नर्म और मुलायम, जैसे कह रहे हों कि इनके रस की एक-एक बूंद को निचोड़ लो.

उसकी नाभि जैसे किसी गहरी अंधेरी गुफा के समान अंदर तक धंसी हुई थी और चूत का तो कहना ही क्या. भाभी की चूत एकदम से उठी हुई थी. दो बार चुदाई के कारण थोड़ी सूजी हुई सी लग रही थी. चूत के छेद पर चुदाई के समय निकला हुआ कामरस लगा हुआ था. जोश-जोश में चुदाई में हल्का सा खून भी निकल आया था. जिसे देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे शेरनी के मुंह पर खून लगा हो.

भाभी की गांड को मैंने ध्यान से अभी तक नहीं देखा था. मन तो कर रहा था कि अभी पलट कर उनकी गांड को भी इत्मिनान से निहारूं मगर मैं जल्दी नहीं करना चाह रहा था. जब तक चूत की रानी खुद अपनी गांड को चोदने के लिए न कहे तो मजा नहीं आता है.

मैं भाभी के मुंह से कहलवाना चाहता था. अभी इस बारे में भी आश्वस्त नहीं था कि उनको गांड की चुदाई पसंद है भी या नहीं. मगर मेरा तो बहुत मन कर रहा था भाभी की गांड चुदाई करने का.

मगर अभी मैं अपनी प्यारी भाभी के नग्न जिस्म को अपनी मनोस्मृति में बसा लेना चाहता था. कुछ देर तक ऐसे ही उनके जिस्म को निहारने के बाद मैं उनके बगल में ही लेट गया. रात के 10 बजे का टाइम हो चला था.

लेकिन ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया और उनको अपनी बांहों में भर कर हग करने लगे.भाभी नींद में ही बड़बड़ाने लगी- क्या कर रहे हो, सोने दो ना प्लीज … मैं बहुत थक गई हूं. अब परेशान मत करो जानू.

भाभी मुझे ऐसे नाम से पुकार रही थी जैसे मैं ही उनका पति हूं, मैं ही उनका बॉयफ्रेंड हूं.मैंने कहा- उनकी चूचियों के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने उनसे कहा- परेशान तो आपके इस कयामती जिस्म ने मुझे कर रखा है भाभी. इसको देख देख कर मेरे अंदर की आग फिर से भड़क रही है.

यह सुन कर अब भाभी ने भी आंखें खोल दीं. मैंने अपने तने हुए लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए भाभी को दिखाया और कहा- देखो, कैसे उतावला हो रहा है मेरा औजार आपकी इस प्यारी सी मुनिया (चूत) को एक बार फिर से प्यार करने के लिए.

मेरा लंड जोर जोर से झटके दे रहा था. लंड की नसें फूल गई थीं.मैंने कहा- देखो भाभी, कैसे तड़प रहा है. कहीं फट ही न जाये.भाभी बोली- खबरदार जो इसके बारे में कुछ उल्टा सीधा कहा तो! तुमसे ज्यादा प्यार करती हूं मैं इस शेर के बच्चे को। इसके (लंड के) बारे में मैं कुछ भी उल्टा सीधा नहीं सुन सकती.

भाभी ने मेरे तने हुए लंड को पकड़ कर जोर से अपनी तरफ खींचते हुए कहा- इसमें मेरी जान बसती है.वो जोर से मेरे लंड को अपनी तरफ खींच रही थी और मेरे लंड में असहनीय दर्द हो रहा था.

मैंने कहा- आराम से भाभी, दर्द दे रही हो आप इसको.भाभी ने लंड को प्यार करते हुए उसके करीब मुंह ले जाकर कहा- हाय, मेरा शोना … मेरा बाबू, मैंने तुमको दर्द कर प्रिया. सॉरी बाबू, माफ कर दो मुझे. आई लव यू बाबू!कहते हुए भाभी ने मेरे लंड के टोपे पर एक किस कर प्रिया और मेरे मुंह से एक कामुक आह्ह … करके सिसकारी सी निकल गई.

भाभी ने लंड को छोड़ा तो वो झटके देते हुए ऊपर-नीचे होने लगा.भाभी बोली- देखो, इसने मुझे माफ भी कर प्रिया.यह बोल कर वो जोर से हंसने लगी.

मुझे भी भाभी की इस हरकत पर हंसी आ गयी. मैंने कहा- इसको इतना प्यार दे रही हो, थोड़ा प्यार अपने देवर को भी कर लो भाभी!

वो बोली- नहीं, मेरी चूत की खुजली तो यही शांत करता है. इसी से मेरी गर्म चूत की प्यास बुझती है. मैं तो इसी को प्यार करूंगी.ऐसा कहते हुए भाभी ने मेरे फनफना रहे लंड को एक बार फिर से अपने हाथ में ले लिया. उसके टोपे को पूरा खोल प्रिया और एकदम गलप् करके उसको अपने मुंह में भर लिया.

भाभी के गर्म मुंह में लंड गया तो मुझे भी चैन सा मिला और मेरी आह्ह … निकल गई. वो तेजी के साथ मेरे लंड को अपने मुंह में भरते हुए चूसने लगी. मैं उनके बालों को सहलाने लगा.

वो बड़े ही प्यार से मेरे लंड को चूस रही थी. उसके गोरे हाथों का लाल चूड़ा और मांग का सिंदूर मेरे लंड के पास देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वो भैया की नहीं बल्कि मेरी बीवी हो. उसके होंठ तेजी के साथ मेरे लंड पर चल रहे थे.

अचानक हुए इस हमले के लिए मैं मानसिक रूप से तैयार नहीं था. भाभी के मुंह में लंड को देकर इतना मजा आ रहा था कि मैं दो-तीन मिनट की लंड चुसाई के बाद ही अपना संयम खो बैठा और मैंने भाभी के मुंह में ही वीर्य निकाल प्रिया. भाभी ने मेरे वीर्य को अंदर ही पी लिया.

पूरा लंड साफ करके भाभी उठी और बोली- देखा, पिला प्रिया ना इसने अपना पानी मुझे. ये ऐसे ही मेरी प्यास बुझाता है. इसलिए मैं इसको इतना प्यार करती हूं.अब मैंने भाभी को लिटाते हुए उनकी टांगों की तरफ अपना मुंह कर लिया और मेरे होंठ भाभी की चूत पर जा सटे.

अब हम 69 की पोजीशन में आ गये. वो मेरे लंड को अभी भी चूस रही थी. मेरे लंड में गुदगुदी हो रही थी मगर मजा भी आ रहा था. मैं भाभी की चूत में उंगली करने लगा और फिर उसकी चूत को चाटने लगा.

भाभी की गर्म चूत पर जब मेरी जीभ लग रही तो भाभी के मुंह से सिसकारी निकल जाती थी. एक बात यहां पर मैं पाठकों को बता देना चाहता हूं कि औरत के शरीर में दो प्रकार होंठ होते हैं.इस समय उसके ऊपर वाले होंठ मेरे लंड का मर्दन कर रहे थे. नीचे वाले होंठों का यानि कि चूत का मर्दन मैं अपने होंठों से कर रहा था.

दोनों ही प्रकार के होंठों का रस बहुत ही मीनूर आनंद देने वाला होता है. पांच मिनट तक मैं भाभी की चूत को चाटता रहा और फिर वो एकदम से उठ कर बैठ गई.भाभी बोली- आह्ह निक … बस करो अब, इसमें अपना लंड डाल दो. अब चूसने से काम नहीं चलेगा.

मैंने कहा- जो हुक्म सरकार! बताओ कैसे चुदना पसंद करोगी?वो बोली- बस जैसे तुम्हारा मन हो, चोद दो मुझे. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है.मैंने कहा- कुत्ता और कुतिया वाली पोज कैसी रहेगी?

इतना सुनते ही वो झट से कुतिया वाली पोज में आ गयी. इस पोज में भाभी की गांड साफ दिख रही थी. मैं ध्यान से भाभी की गांड को देखने लगा. उसकी गांड का छेद देख कर मेरा औजार भी एकदम से टाइट हो गया.

भाभी की गांड का छेद गुलाबी सा था. एकदम छोटा सा. उसके गोरे चूतड़ों के बीच में उसकी गांड का गुलाबी सा छेद बहुत सुंदर दिखाई दे रहा था. कुछ देर तक तो मैं उसको देखता ही रहा. मन तो कर रहा था कि इसकी गांड को अभी फाड़ दूं.

मगर अभी मैं नीरज से काम लेना चाह रहा था. फिर मैंने चूत पर निशाना बनाया और गच्च से उसकी चूत में लंड को घुसा प्रिया. मैं भाभी की चूत में लंड घुसा कर उस पर चढ़ गया. उसके चूचों को दबा प्रिया.

वो चीखने लगी. मैंने कुत्ते की तरह उसकी चूत को चोदना शुरू कर प्रिया. कुछ देर के बाद वो खुद ही अपनी गांड को हिलाते हुए अपनी चूत को चुदवाने लगी. अब दोनों के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.

भाभी बोली- आह्ह … और जोर से चोद निक. तेरे लंड से चुद कर ऐसा लगता है जैसे कि मेरी चूत में मूसल घुसा प्रिया गया हो. बहुत मजा देता है तेरा लंड. तेरे भैया के लंड से तो ऐसा मजा कभी नहीं ले पाती मैं.मैंने कहा- आह्ह … मेरी कुतिया, मुझे भी तेरी चूत चोद कर बहुत मजा आ रहा है. मगर मेरी एक और भी ख्वाहिश है.

वो बोली- क्या इच्छा है, जो मन में हो कह दो मेरे राजा.मैंने कहा- मैं तेरी गांड की चुदाई का स्वाद भी चखना चाह रहा हूं मेरी रानी.अब मैं पूरे लंड को बाहर निकाल कर फिर से पूरे लंड को अंदर कर रहा था. इस तरह से भाभी की चूत में अंदर तक चोट लग रही थी.

मेरी बात सुन कर भाभी कहने लगी- आह्ह … हरामी मुझे पता था कि तू मेरी गांड भी चोदने के लिए सोच रहा होगा. मगर अभी तू सिर्फ चूत की प्यास को शांत करने पर ध्यान दे. मेरी गांड फिर कभी चोद लेना.

मैंने कहा- भाभी, आपको तो बहुत टाइम लग रहा है अब झड़ने में.वो बोली- साले मादरचोद, दस मिनट से मेरी चूत को रगड़ रहा है, तेरा ध्यान किधर है? मैं दूसरी बार झड़ने जा रही हूं. जोर से चोद कुत्ते.

मैंने कहा- सॉरी भाभी, मैं आपकी गांड के बारे में सोचने लगा था.

भाभी अब बेड पर चित लेट गयी और अपने पैरों को खोल कर फैला दी. उसकी चूत मेरे लंड को खुला बुलावा दे रही थी.अब मैंने भी दम भरा और एक बार फिर से उसकी चूत में लंड को पेल प्रिया. उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में लंड को घुसाने लगा.

मेरे हाथ उसके निप्पलों को मसल रहे थे. कभी उसकी चूचियों को दबा रहा था तो कभी उसके निप्पलों को मसल रहा था. फिर मैंने सोचा कि भाभी का पानी ऐसे नहीं निकलेगा.मैंने भाभी के निप्पलों को मुंह में भर लिया और जोर से काटने और चूसने लगा.

अब मैंने पूरे जोश के साथ चूत में लंड को पेलना शुरू कर प्रिया. अब भाभी के मुंह से चीखें निकलने लगीं और कहने लगी- आह्ह … अहह बस होने ही वाला है निक, और जोर से चोद, आह्ह … घुसेड़ दे पूरा लंड मेरी चूत में. फाड़ दे अपनी रंडी भाभी की चूत को आज!

मैंने कहा- मेरा भी होने ही वाला है भाभी, बस थोड़ा रुक जाओ. दोनों साथ में ही झड़ेंगे.इतना कहने के बाद मैंने 15-20 जोर के शॉट मारे और हम दोनों साथ में ही झड़ने लगे. उम्म्ह… अहह… हय… याह… करके दोनों के मुंह से ही आहें निकलने लगीं.

भाभी की चूत मेरे वीर्य से भर गई थी. मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया. लंड पूरा भीगा हुआ था. उसने मेरे लंड को चाट कर साफ कर प्रिया.

फिर वो उठ कर बाथरूम की ओर जाने लगी. जब उठी तो उसकी चूत से मेरा वीर्य और उसकी चूत का पानी दोनों साथ में मिल कर उसकी जांघों से बह रहे थे. उसने अपनी जांघों पर बहते रस को अपनी हथेली से पोंछा और उसको चाटने लगी.

उसके बाद वो मुस्कराती हुई बाथरूम में घुस गई. मैं वहीं बेड पर निढाल होकर पड़ा रहा. कुछ देर के बाद वो बाहर निकली और कहने लगी कि अब सोने की तैयारी करते हैं. तुम भी अपने कपड़े पहन लो.

हम दोनों अपने कपड़े पहन कर सो गये. मैं तो सच में बहुत थक गया था. सुबह ही मेरी आंख खुली. मैंने सोचा था कि रात में भाभी की गांड चुदाई भी कर डालूंगा, मगर रात बीत जाने के बाद सुबह कब हुई मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह उठा तो भाभी नहा-धोकर तैयार हो चुकी थी. मुझे उठाते हुए बोली- जल्दी से उठ कर फ्रेश हो जाओ. तुम्हारे भैया कभी भी आ सकते हैं.मैं भी फटाक से उठ गया. फ्रेश होकर मैं बाहर टहलने के लिए निकल गया.

दोस्तो, यह थी भाभी के साथ मेरी पहली चुदाई के पहले दिन की कहानी. भाभी की गांड चुदाई करने में मैं सफल हो पाया या नहीं, इसके बारे में मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा. अगर आपको मेरी आपबीती पसंद आई हो तो मुझे जरूर बतायें.

मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा. भाभी ने अपनी गांड चोदने की इजाजत दी या नहीं, यह सब मैं आपको फिर कभी बताऊंगा. कहानी पर अपने कमेंट के जरिये मुझे जरूर बतायें कि आपको मेरी कहानी में मजा आया या नहीं.आपका अपना निक!support@mohakkisse.com

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