नंगी भाभी गाँव की देखी मैंने तालाब पर नहाती हुई। तभी से मेरा मन उसकी चुदाई का था। एक दिन वही भाभी गाँव से दूर अपनी सहेलियों के साथ जा रही थी. मैं पीछे गया.
हाय दोस्तो, मेरा नाम समीर है। मैं 23 साल का हूँ।
ये नंगी भाभी कहानी कुछ महीने पुरानी है।
एक दिन दोपहर के करीब मैं तालाब पर नहाने गया।धूप तेज थी, लेकिन पानी ठंडा और ताज़ा था।चारों तरफ जंगल में चिड़ियों की आवाज़ें और पत्तियों की सरसराहट थी।
मैं बिलकुल अकेला था, इसलिए सारे कपड़े उतारकर पूरी तरह नंगा होकर पानी में कूद पड़ा।ठंडे पानी का स्पर्श त्वचा पर अलग ही सुकून दे रहा था।
अचानक झाड़ियों में हल्की सरसराहट हुई।
मैंने मुड़कर देखा तो गाँव की ही एक लड़की आ रही थी।उसकी उम्र 20-21 साल की रही होगी।उसकी शादी अभी कुछ महीने पहले ही हुई थी.अब वह मायके आई हुई थी.
वो लाल साड़ी पहने थी, सिर पर घड़ा रखे थी।
तालाब के पास उसका खेत था इसलिए वो भी नहाने आई थी।
जैसे ही वो किनारे पर आई, मैं एक बड़े पत्थर के पीछे छुप गया।
उसने घड़ा नीचे रखा, पल्लू सरकाया और धीरे-धीरे साड़ी खोलने लगी।उसकी साँवली त्वचा पर धूप चमक रही थी।
ब्लाउज़ उतारा तो उसकी बड़ी-बड़ी गोल बूब्स उछलकर बाहर आईं।निप्पल गहरे भूरे और सख्त थे।
फिर उसने पेटीकोट खोला, और आखिर में सफेद पैंटी भी नीचे सरका दी।
क्या बताऊँ दोस्तो, कमाल का फिगर था!थोड़ी मोटी थी, इसलिए बूब्स भारी और लटकते हुए थे।नंगी भाभी गाँव की गांड एकदम गोल, भरी-भरी और चिकनी थी।
जब वो पानी में उतरी तो उसकी गाँवली साँवली चमड़ी पर पानी की बूंदें चमकने लगीं।हवा में उसकी देह से आती हल्की पसीने और मिट्टी की खुशबू मेरे नाक तक पहुँच रही थी।
वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हुई और साबुन लगाने लगी।झाग उसकी पीठ पर बह रहे थे, उसकी कमर की गड्ढियों में रुक रहे थे।
फिर वो आगे झुकी पैरों में साबुन लगाने और उसकी भरी हुई गांड पूरी तरह फैल गई।बीच में गुलाबी-भूरी होल साफ दिख रही थी।
उसकी चूत भी फूली हुई, हल्के काले बालों वाली थी।उसकी होल और चूत देखते ही मेरा लंड एकदम पत्थर जैसा हो गया।मैंने वहीं छुपकर मुठ मारनी शुरू कर दी।
वो जल्दी से नहाकर चली गई।उसकी भीगी साड़ी उसकी गांड पर चिपकी हुई थी, चलते वक्त गांड हिल रही थी।मैं भी घर चला आया, लंड अभी भी खड़ा था।
एक शाम को मैं घूमने निकला।
दूर से देखा कि पुष्पा अपनी सहेलियों के साथ जा रही थी।उसने जींस टॉप पहना हुआ था.
सब लड़कियां हँसते-बातें करते हुए जा रही थीं।
मैं चुपके से पीछे-पीछे चल पड़ा।
वो सब एक सुनसान जगह पर रुक गईं जहाँ चारों तरफ घने पेड़-पौधे थे।
उन्होंने थैले में से बीयर की बोतलें निकाली और प्लास्टिक के गिलास में डाल कर और 1-2 लड़की सीधे बोतल से गटागट पीने लगी।
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हवा में शराब की तेज़ महक आने लगी।
पीने के बाद सब चली गईं लेकिन पुष्पा को बहुत ज़्यादा चढ़ गई थी।
वो लड़खड़ाते हुए एक बड़े पीपल के नीचे बैठ गई।उसकी आँखें लाल थीं, मुँह से शराब की तेज़ गंध आ रही थी।
बाकी सहेलियाँ चली गईं, वो अकेली रह गई।
अचानक उसने जीन्स की बटन खोली, ज़िप नीचे की और जीन्स-पैंटी एक साथ घुटनों तक खींच ली।उसकी मोटी-मोटी जाँघें और भरी हुई गांड खुल गई।
वो बैठी और पेशाब करने लगी।गरम पेशाब की आवाज़ और उसकी तेज़ गंध हवा में फैल गई।
उसकी गांड पूरी तरह खुली हुई थी, बीच में गुलाबी होल साफ दिख रही थी।
मेरा लंड फटने को हो रहा था।
वो पैंटी ऊपर करने की कोशिश कर रही थी लेकिन नशे में वहीं लड़्खड़ा कर गिर पड़ी।
उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी,चूत और गांडका छेद दोनों साफ दिख रहे थे।उसकी साँसें तेज़ थीं, मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी।
मुझसे रहा नहीं गया।मैं बाहर निकला, उसके पीछे गया, उसकी कमर पकड़ी और घुटनों के बल उठाया।
उसकी त्वचा गर्म और पसीने से चिपचिपी थी।
मैंने अपना लंड निकाला – एकदम लौह जैसा खड़ा था।उसकी चूत पर मैंने लगाया, वो पहले से ही गीली थी।
एक जोरदार धक्का मारा तो पूरा लंड फचाक से अंदर चला गया।उसकी चूत गर्म, नरम और चिपचिपी थी।
मैंने 10 मिनट तक ज़ोर-ज़ोर से ठोका।उसकी चूत से चप-चप की आवाज़ आ रही थी।
जब मैं झड़ने वाला था तो लंड बाहर निकाला और उसकी गांड पर गरम वीर्य की फुहारें छोड़ दीं।
वीर्य उसकी गांड की दरार में बहने लगा।
उसकी गांड देखकर मैं पागल हो रहा था।5 मिनट बाद फिर से लंड खड़ा हो गया।
मैंने उसकी कमर ऊपर उठाई, लंड उसकी गांड के होल पर रखा।बहुत टाइट थी लेकिन मैंने थूक लगाया और पूरी ताकत से धक्का मारा।लंड फटाक से अंदर घुस गया।
उसकी गांड एकदम गर्म और जकड़ने वाली थी।मैंने 15 मिनट तक ज़ोर-ज़ोर से पेला।
हर धक्के पर उसकी गांड हिल रही थी।आखिर में उसकी गांड में ही सारा माल झाड़ दिया।
फिर उसकी पैंटी-जीन्स ठीक की, उसे घर के पास छोड़ा और चुपके से निकल लिया।वो अभी भी नशे में बेहोश थी।
दोस्तो, क्या मस्त चुदाई थी! आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है!मजा आ गया!
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