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Office Sex पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 625 बार

लच्छेदार झांटों वाली-2

श्रुति वर्मा

25 Jun 2010 को प्रकाशित

लच्छेदार झांटों वाली-2
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सर्वप्रथम सभी अर्न्तवासना के पाठको, चूत-प्रेमियों और रण्डियों को मेरा नमस्कार।

यह मेरी दूसरी कहानी है, मेरा नाम श्रुति उर्फ़ प्रज्ञाली सिंह है,उम्र 20 साल और मैं एक खुले विचारों वाली लड़की हूँ। मुझे ब्लू फ़िल्म और चुदाई सीन देखना बहुत पसन्द है। मुझे सेक्सी बातें करना बहुत पसन्द है, मैंने इस कहानी में उत्तेजना पैदा करने के लिये सेक्सी शब्दों का प्रयोग किया है।

मेरी पहली कहानीमें मैंने बताया कि मेरे परिवार का माहौल ही चुदाई वाला है, मेरा भी मन करता है कि कोई मुझे जम कर चोदे और मेरे बदन की प्यास को बुझाये।

यह कहानी भी एकदम सत्य है।

मैं लखनऊ में अपनी मम्मी, भाई के साथ किराये के मकान में रहती हूँ, अभी दो महीने पहले मेरे पापा का स्वर्गवास हो गया। सभी लोग दुख में थे, मम्मी के ऊपर घर की जिम्मेदारियाँ आ गई, मैं और भाई नीरज, दोनों इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं जिसकी फ़ीस बहुत ज्यादा है, हम एक मध्यम वर्गीय परिवार से हैं, पापा की मौत के बाद घर का खर्चा चलाना बहुत कठिन हो रहा था, मेरी मम्मी उमा ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है पर मेरी मम्मी जवान, खूबसुरत एक सुडौल शरीर की चुदक्कड़ महिला है, वो बहुत हँसमुख, कामुक और खुले विचारों वाली है, एक लण्ड से उनका मन कभी नहीं भरा, उनकी चूचियाँ 34 की है पर वो 32 नम्बर की ब्रा पहनती है ताकि उनकी चूचियाँ और सेक्सी लगें, कमर और चूतड़ों का आकार 34-36 है, उन्होंने एक लेडीज अन्डरगारमेन्ट की दुकान में नौकरी कर ली और कुछ ही दिनों के बाद रोज रात को कोई ना कोई नया आदमी मम्मी के साथ आता, मम्मी डिनर साथ पैक करा के लाती और हम दोनों को खिला कर सोने को कहती और उस आदमी को अन्दर वाले कमरे में ले जाकर दरवाजा बन्द कर लेती।

मैंने भइया से पूछा- ये कौन लोग हैं जो मम्मी से मिलने रात को आते हैं और सुबह होते ही चले जाते हैं?

तो भइया ने टालते हुए कहा- ये मम्मी के क्लाइन्ट है जिनसे वो रात में मीटिंग करती हैं, रात ज्यादा हो जाने की वजह से वे यहीं सो जाते हैं, सुबह होते ही चले जाते हैं।

मैंने मन में सोचा कि यह कौन सी मीटिंग है जिसमें आ उई आह की आवाजें निकलती हैं। खैर हम लोग बहुत खुश थे, टाईम पर फ़ीस भी जमा हो जाती थी और जेब खर्च भी मिलता था।

एक दिन मम्मी के साथ दुकान वाले अंकल अनिल आये, वो जब भी आते, हमारे लिये कई सारे गिफ़्ट लाते। वो मम्मी से छोटे लगते थे, लगभग 30 साल के होंगे और मेरी मम्मी उमा 38 की होंगी पर वो देखने में बहुत छोटी लगती हैं, कालेज में मेरी टीचर उन्हें मेरी दीदी समझती थी क्योंकि उन्होंने अपना फ़िगर मेंटेन कर रखा है। देखने में वो बहुत सेक्सी, कामुक चुदक्क्ड़ हैं, दूर से चेहरा देख कर ही कोई भी अन्दाजा लगा सकता है कि वो एक नंबर की रण्डी है।

उस दिन भइया अपने दोस्त के यहाँ गये थे, घर पर मैं मम्मी और अनिल अंकल ही थे। हम सभी ने रोज की तरह डिनर किया और मम्मी और अनिल अंकल अन्दर वाले कमरे में चले गये, मम्मी ने सारे घर की लाईट बन्द कर दी और मुझे सोने को कहा।

लगभग 15 मिनट बाद मम्मी के कमरे की लाईट जली और मम्मी फ़्रिज के पास आई, मैंने चुपके से आँखें खोली और देखा कि मम्मी ने फ्रिज से रम की बोतल निकाली, दो ग्लास लिये, थोड़ी बर्फ ली, अन्दर चली गई और दरवाजा बन्द कर लिया।

मम्मी पूरी नंगी बैठी थी और एक हाथ से रम का ग्लास होठों पर लगा कर पी रही थी और दूसरे हाथ से अनिल अंकल का लण्ड हाथ में लेकर सहला रही थी और अनिल अंकल लेटे लेटे मम्मी की चूचियाँ दबा रहे थे और कह रहे थे- यार उमा, क्या मस्त आईटम हो तुम, तुम्हारी चूत चोद कर मैं धन्य हो गया, जीवन भर तुम्हारा कुत्ता बन कर रहूँगा, पर वादा करो कि हमेशा इस चूत को मुझसे ही चुदवाओगी?

मम्मी बोली- हाँ जानू, यह चूत फिलहाल तेरे लिये ही बुक कर दी है, मजा ले इसका !

अनिल अंकल उनकी चूचियाँ खूब जोर जोर से सहला रहे थे और एकाएक वो चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगे।

मम्मी ने अंकल से कहा- और जोर से चूस मेरे राजा ! मेरी गर्मी शान्त कर दे ! चूस मादरचोद, जम कर चूस, ये जवानी के पहाड़ तेरे हैं, चूस जमके चूस !

अंकल काफ़ी देर तक मम्मी की चूचियाँ चूसते रहे और सहलाते रहे, फिर मम्मी झुकी और अंकल के लण्ड को चूसने लगी और जोर जोर से मुँह में आगे-पीछे करने लगी।

अंकल बोले- और जोर से चूस, मजा आ रहा है।

20 मिनट तक मम्मी अंकल का लण्ड चूसती रही और अचानक एक तेज तर्राट पिचकारी अंकल के लण्ड से निकली और अंकल ने

उसे मम्मी के मुँह पर छोड़ दिया और देखते ही देखते मम्मी वो सफ़ेद क्रीम चट कर गई।

मम्मी पूरी नंगी थी, अंकल उनकी चूत को हाथों से सहला रहे थे और कह रहे थे- क्या मस्त चूत है !

मम्मी बोली- अब नहीं सहा जा रहा है, मेरे राजा चोद डाल इस प्यासी चूत को, फाड़ डाल, मुझे चोद, जम के चोद, आज सारी प्यास बुझा दे ,अब देर ना कर, चोद डाल इसे।

अंकल बोले- अभी ले कुतिया ! तेरा यह कुत्ता तेरी चूत की गर्मी निकालता है।

इतना कह कर अनिल अंकल ने अपना लण्ड मम्मी की चूत में डाल दिया और तेजी के साथ चोदने लगे। मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी- उई माँ उम्प्फ़ अह, चोद यार अनिल, क्या मस्त चुदाई करता है, मजा आ रहा है, और तेजी के साथ चोद।

इतने में अनिल अंकल ने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज कर दी, 20 मिनट तक जम के चुदाई की, फिर दहकता हुआ अपना लण्ड मम्मी की चूत से निकाला, मम्मी उसे सहलाने लगी, उसे मुँह में डाल दिया और फिर से चूसने लगी।

थोड़ी देर में अनिल अंकल ने मम्मी के मुँह में सफ़ेद क्रीम छोड़ दी, मम्मी उसे पूरा चट कर गई।

यह मेरी दूसरी सच्ची कहानी थी जो मेरी आँखों के सामने हुई थी। आपको मेरी कहानी कैसी लगी, अपने विचार जरूर भेजना।

मैं फेसबुक में भी हूँ।

support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

मिकिन चौधरी

3 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

शेख अरकान

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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