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Office Sex पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 396 बार

स्वर्ग का अनुभव-२

उमेश चावडा

15 Mar 2013 को प्रकाशित

स्वर्ग का अनुभव-२
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प्रेषक : उमेश

गुरूजी आपने मेरी सही अनुभव वाली कहानी स्वर्ग का अनुभव प्रस्तुत की, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था किमुझे इतने सारे मेल आयेंगे, खास करके लड़कियों और औरतो के मुझे बहुत मेल आए। आपका इतना प्यार देखकर मुझे एक और सही अनुभव वाली कहानी प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिली है। इस कहानी में मेरी कोई अर्चना नहीं है बल्कि मेरे साथ जो हो चुका है वो ही मैं आपको बता रहा हूँ।कहानी को रसदार बनाने के लिए मैंने इसमें कोई बात भी अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ी है।

कहानी प्रस्तुत करने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मैं अहमदाबाद में रहने वाला लड़का हूँ, मेरी उम्र ३५ साल की है। दिखने में स्मार्ट हूँ। मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट एक्जीक्यूटिव की जॉब करता हूँ। मैं जिस कंपनी में काम करता हूँ, उसकी मैडम के साथ मेरा सम्बंध है। उसकी उम्र ४५ साल है। वो दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसको मेरे पर बहुत भरोसा है और वो भरोसा मैं कभी नहीं तोडूंगा। यह उसी की कहानी है।

एक दिन छुट्टी से पहले वाले दिन हमने छुट्टी के दिन कहीं पर मिलने का नक्की किया(कार्यक्रम बनाया)।

उसने कहा- घर मे मिलने से कोई न कोई आता जाता रहता है, इसलिए हम किसी होटल में मिलते हैं। तुम कोई अच्छा सा ए सी कमरा बुक करना।

फ़िर दूसरे दिन मैं सुबह होटल का कमरा खोजने निकल गया। मैंने एक अच्छे होटल में ए सी कमरे का रेट पूछा, उसने मुझे ४ घंटे के ७०० रूपए बताये, मैंने कमरा बुक कर लिया फ़िर मैंने मैडम को बताया के मैंने एसी कमरा बुक कर लिया है। मैंने होटल का पता मैडम को दे प्रिया और कहा- मैंने यहाँ पर अपने नाम बदल कर कमरा बुक किया है। आप यहाँ आ कर अपना नाम नेहा बताना और कहना कि मुझे सुनील से मिलना है जो २०३ नम्बर के कमरा में ठहरे हैं। तो उसने सब बात समझ ली और मुझे दोपहर को २ बजे वहाँ आने का बोल प्रिया।

मैंने तो १ बजे कमरे में जा कर स्नान कर लिया।

अब वो करीब २ बजे मेरे कमरे में आ गई। उसने भी ‘मैं फ्रेश होकर आती हूँ’ कह के स्नान कर लिया, क्योकि जब हम स्नान कर के सेक्स करते हैं तो मजा दुगना हो जाता है। फ़िर वो स्नान कर के सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। मैं तो उसको देख कर देखता ही रह गया। वो तौलिये में बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैं तो पहले से ही तौलिये में था।

फ़िर हम दोनों पलंग पर आ गए। हमने कुछ बीते हुए पलों के बारे में बात की। फ़िर मैंने उसके गाल पर और होठों पर किस किया, उसका तौलिया निकाला, उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। मैंने उसे एक बार कहा था कि तुम पर लाल रंग की ब्रा और पैंटी खूब जमती है। उसने वो याद रख लिया था और ऐसा ही किया था। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

फ़िर मैंने उसके सारे बदन पे चुम्मी ली। उसकी पैंटी के साथ में ही उसके चूतड़ को भी चूमा, उसके पैर के अंगूठे को भी चूमा, उसके कान को भी चूमा। उसका कोई अंग ऐसा नहीं रहा था कि मैंने उसे वहाँ चूमा न हो। फ़िर मैंने उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया। हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूसरे के मुँह में मुँह रख कर चूमते रहे। उसकी जीभ से अपनी जीभ लगा कर हम दोनों ने एक दूसरे का रसपान किया। हम दोनों दो नहीं बल्कि एक ही हैं ऐसा हमको महसूस होता था।

फ़िर मैंने उसकी ब्रा को निकाला। उसके स्तन बहुत बड़े और रसीले थे। मैं करीब ५ मिनट तक उनको चूसता रहा। मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ ऐसा मुझे महसूस होने लगा। अब वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। फ़िर उसने मेरे तौलिए को निकाला और मेरी छाती को चूसने लगी। फ़िर उसने मेरे होठों को चूमा, वो चूमते चूमते नीचे तक आई। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था, वो उसने निकाल प्रिया।

मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुका था, उसने मेरे ७” लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह वो तो उसे चूसने लगी। अब मैं आपे में नहीं रह पाया। वो करीब ५ मिनट तक मेरा लंड चूसती रही। उसके ऐसा करने से मैं झड़ गया। मैंने बाथरूम में जा कर साफ़ कर लिया। फ़िर मैं वापिस आ गया, मैंने उसे बोला- अभी तो शुरूआत है, अब मेरा सेक्स लम्बी देर तक चलता रहेगा।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी को निकाला, उसने अपनी चूत के सारे बाल हटा के रखे थे। फ़िर मैंने उसकी चूत को चाटने का शुरू किया, उसकी चूत में से अजीब सा पानी निकल रहा था, मैं वो सारा पानी निगल गया। वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और लम्बी लम्बी आहें भरने लगी थी। हम दोनों कहीं स्वर्ग में पहुँच गए हो और आनंद लूट रहे हों, ऐसा हम दोनों को महसूस हो रहा था। मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में बहुत अन्दर तक ले जाता था।

फ़िर मैंने अपना ७” का लण्ड उसकी चूत में डाल प्रिया। फ़िर मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा. करीब २० मिनट तक मैं ऐसे ही पेलता रहा। मैं एक बार झड़ चुका था इसलिए दूसरी बार जल्दी झड़ जाने की कोई गुन्जायिश नहीं थी। अब मैं बहुत जोरों से धक्के देने लगा। वो भी उसमें धक्के दे कर मुझे साथ देने लगी। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फ़िर हम दोनों साथ में ही झड़ चुके।

फ़िर थोड़ी बात हमने की और हम दोबारा शुरू हो गए। मैंने उसके साथ फ़ोर-प्ले शुरू कर प्रिया इसलिए वो दुबारा तैयार हो गई। मैंने उसकी चूतड़ को बहुत चाटा और फ़िर मैंने अपना लण्ड उसमें डाल प्रिया। फ़िर हम दोनों साथ में झड़ गए। यह झड़ना मेरा तीसरी बार का और उसका दूसरी बार का था। वो तो सोचते ही रह गई कि मैं एक ही साथ में तीन बार सेक्स कर सकते हूँ। उसने मुझे कहा- तुम्हारी पत्नी बहुत खुशकिस्मत है जिसे तुम जैसा पति मिला है। मेरे हसबंड बिज़नस के टेंशन में ही रहते हैं। और ६ महीने में एक बार सेक्स करते है और उसमें भी मुझे तो मजा नहीं आता। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ सकती।

फ़िर मैंने भी उसे ऐसा वादा करके अपने गले से लगा लिया। हमने करीब ३ घंटे तक सेक्स किया। उसने कहा कि तुम्हारे साथ तो पूरी रात हो तो भी कम है। ऐसा स्वर्ग का अनुभव हम दोनों ने कभी नहीं किया. मैं अपने बारे में कम और उसके बारे में ज्यादा सोचता हूँ कि उसको ज्यादा से ज्यादा आनंद कैसे मिल पाये।

हम ऐसे ही होटल में एक ही बार नहीं बल्कि बहुत बार मिल चुके हैं।

ऑफिस से निकलते हैं तो रात को उसकी गाड़ी में भी अंधेरे में मिलते रहते हैं।

मैं कोई कथाकार नहीं हूँ, पर यह मेरे सही अनुभव की कहानी है इसीलिए मैं कहानी में जान डाल सकता हूँ।

मेरी सही अनुभव वाली दूसरी कहानी मैं बाद में बताऊंगा अगर तुम्हारे मेल मुझको आते रहेंगे तो ! ख़ास करके लड़की और औरत के।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

शेखर वर्मा

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

अमन वर्मा

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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