हमारे पड़ोस में में एक नया परिवार रहने आया, उस परिवार में एक पति पत्नी और उनके पिताजी थे. वो दोनों पति पत्नी भी नौकरी करते थे.
पड़ोसी होने के नाते दोनों परिवारों में अच्छे सम्बन्ध बन गए. अंकल से पता लगा कि उनकी मम्मी गुजर चुकी हैं और उनकी बहन अमरीका में है, उनके पापा रिटायर हो चुके हैं.
मेरे मम्मी पापा उनके पापा को चाचाजी बोलने लगे और उस हिसाब से मैं उनको अंकल, आँटी और दादाजी कहने लगी. दादाजी 5’9″ मजबूत बदन के हैं, उनकी उम्र साठ साल के पास थी लेकिन वो 50-52 से ज्यादा के नहीं दीखते!
एक दोपहर मैं स्कूल से घर आने के लिए लोकल बस स्टॉप पर आई तो देखा वहाँ दादा जी भी बस की प्रतीक्षा कर रहे थे. बस आई, हम दोनों बस में चढ़ गये और बस हमारे घर की तरफ निकल पड़ी.जुलाई का महीना था, हल्की बारिश होने लगी थी, बस स्टॉप पर हम उतरे, हम दोनों के पास छतरी नहीं थी तो बारिश में भीगते हुए हम घर की ओर चल दिए.तभी बारिश तेज हो गई.. तो हम दोनों तेज तेज चलने लगे. ज़्यादा बारिश होने पर दादाजी बोले- साईड के पेड़ के नीचे इंतजार कर लेते हैं बारिश कम होने का!हम पेड़ के नीचे खड़े हो गए लेकिन तब तक हम पूरे तर हो चुके थे.
टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 2
मैं स्कूल ड्रेस सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट पहने हुई थी मेरी सफ़ेद शर्ट पारदर्शी हो कर मेरे बदन से चिपक गई… मैंने ब्रा भी पहनी थी लेकिन गीली शर्ट से मेरी चूचियाँ उभर कर दिख रही थी.मैंने दादाजी की ओर देखा तो उनकी नजरें मेरी गीली पारदर्शी शर्ट में दिख रही चूची पर थी.
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