प्रिय पाठको नमस्कार.. मैं दीपक एक कहानी लेकर हाजिर हूँ.. जिसको पढ़कर लड़कियों की बुर गीली हो जाएगी और लड़कों का लंड खड़ा हो जाएगा।
यह बात कुछ दिन पहले की ही है। मेरे पड़ोस में एक नया परिवार आकर रहने लगा था।
परिवार में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की भी थी.. जिसका नाम प्रिया था। उसके मोटे-मोटे चूचों और उठी हुई गांड को देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.. ऐसी मस्त माल थी वो।
वो अक्सर हमारे घर पर आया करती थी। मैं भी उसके घरवालों से काफी खुल गया था। उसकी माँ किसी भी काम के लिए मुझे ही मार्किट भेजती थीं.. जिससे मेरा उनके घर पर आना-जाना लगा रहता था।
मैं प्रिया को बहुत पसंद करने लगा था और उसके बारे में ही सोचता रहता था।
एक दिन उसकी माँ हमारे घर पर आईं। वो बोलीं- मैं किसी काम से बाहर जा रही हूँ और प्रिया घर पर अकेली है.. तुम उसका ध्यान रखना।मैंने ‘हाँ’ कर दी।
मैं दोपहर को उसके घर पर गया तो प्रिया ने दरवाजा खोला।
मैं उसको देखकर हैरान रह गया। उसने टी-शर्ट और जीन्स पहनी हुई थी। उसके मोटे-मोटे चूचे टी-शर्ट में से अलग ही नजर आ रहे थे। मेरी नजर उन पर टिक गई।इतने में प्रिया बोली- क्या देख रहे हो?मैंने कहा- कुछ नहीं।उसने अन्दर आने के लिए कहा, हम दोनों अन्दर जाकर बैठ गए।
वो चाय बनाने के लिए चली गई, मैंने टीवी ऑन किया और मूवी देखने लगा।वो कुछ देर मैं चाय बनाकर ले आई। हम दोनों चाय पीते-पीते मूवी देखने में लग गए। मूवी में एक रोमांटिक सीन आ गया.. जिसमें हीरो हीरोइन को चूम रहा था।
इस सीन को देखकर मेरा लंड सलामी देने लगा।
प्रिया ये सब देख रही थी.. वो भी गरम हो रही थी। उसने मेरा लंड पकड़ लिया और मसलने लगी।
मैं ये सब देख हैरान रह गया। मैं उठा और प्रिया को चूमने लगा.. वो मेरा साथ दे रही थी।
मैं उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी। वो लगातार गरम हो रही थी। उसने मेरी पेंट उतारी और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझे बहुत ही आनन्द मिल रहा था। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर आगे-पीछे करने लगी।
कुछ देर में मेरा सारा वीर्य उसके मुँह में निकल गया और वो सारा का सारा रस पी गई।
मैंने उसकी टी-शर्ट और जीन्स निकाल दी। उसने गुलाबी रंग की पेंटी और ब्रा पहनी हुई थी, जिसमें वो बहुत ही मस्त लग रही थी।
मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसकी ब्रा भी निकाल दी।
उसके गोरे मोटे मोटे चूचे मेरे सामने फुदकने लगे।
मैं उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा। प्रिया के मुँह से ‘आह.. उह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उह्ह..’ की आवाजें निकल रही थीं।
मैं पाँच मिनट तक उसके चूचों को चूसता रहा। फिर मैंने उसकी पेंटी को उतार दिया। उसकी बुर पर एक भी बाल नहीं था।
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मैं उसकी बुर की फांक को मुँह से चोदने लगा.. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था।
कुछ ही देर में उसकी बुर से पानी निकलने लगा.. मैं पानी को पी गया। उसका स्वाद नमकीन था।
अब प्रिया तड़पने लगी और कहने लगी- बस अब नहीं रहा जाता.. अब डाल दो और फाड़ दो मेरी बुर को.. बना दे इसको भोसड़ा।
मैं उसकी बुर पर आ गया। मैंने मेरा लंड उसकी बुर पर लगाया। मैंने धक्का लगाया, तो मेरा लंड फिसल गया। मैंने लंड पर थूक लगाया और बुर पर लगाकर एक धक्का मारा.. मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया।
वो दर्द के मार चिल्लाने लगी और बाहर निकालने के लिए कहने लगी।
मैंने उसे समझाया कि पहली बार में थोड़ा दर्द तो होगा ही। मेरे समझाने पर वो चुप हो गई। मैं उसके चूचों को चूसने लगा।
जब उसका दर्द कम हुआ तो मैंने एक धक्का और मारा। इस बार मेरा सारा लंड उसकी बुर को चीरता हुआ अन्दर चला गया।
दर्द के मारे उसकी आखों से आँसू निकलने लगे। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। उसका दर्द कम हुआ तो मैं धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा।
उसको मजा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी। वो गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। हम पाँच मिनट तक चुदाई करते रहे। फिर वो झड़ गई और मुझे कसकर पकड़ लिया।
मेरा अभी भी नहीं हुआ था। मैं जोर-जोर से लंड को आगे-पीछे करने लगा।
कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था.. तो उसने कहा- मेरी बुर के अन्दर ही निकाल दो।
मैंने तीन-चार झटके मारे और उसकी बुर में ही माल निकाल दिया।
कुछ देर बाद हम उठे और बाथरूम में जाकर सब साफ़ किया। एक-दूसरे को चूमा और कपड़े पहन लिए।
इसके बाद मैंने थोड़ी देर टीवी देखा और घर पर चला गया। अब हमें जैसे ही मौका मिलता हम दोनों चुदाई करने में लग जाते।
मैंने उसकी गांड कैसे मारी.. वो मैं आपको मेरी अगली कहानी में बताऊँगा। मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी। आप अपने विचार मुझे जरूर भेजें।
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मुझे आपके विचारो का इंतजार रहेगा।