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भाभी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 891 बार

पड़ोस वाली भाभी को खींचा घर के अंदर-1(Pados wali bhabhi ko kheencha ghar ke andar-1)

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03 Aug 2024 को प्रकाशित

पड़ोस वाली भाभी को खींचा घर के अंदर-1(Pados wali bhabhi ko kheencha ghar ke andar-1)
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हेलो दोस्तों, मेरा नाम प्रत्यूष द्विवेदी, जैसे कि आप जानते हैं। आपने मेरी पिछली स्टोरी पढ़ी होगी। आज मैं आपके लिए फिर से एक नई स्टोरी लेकर आया हूं। यह भी स्टोरी मेरे सच्ची घटना पर आधारित है। आशा करता हूं यह कहानी भी आपको पसंद आएगी। तो चलो अब देर ना करते हुए सीधा स्टोरी पर आते हैं।

मुंबई की हलचल भरी जिंदगी के बीच एक पुरानी इमारत खड़ी है। जहां लगता है जैसे समय ठहर सा गया हो। नीचे वाली मंजिल पर मैं रहता हूं—एक बैचलर लड़का, जो आईटी कंपनी में काम करता है। मेरा छोटा सा 1RK फ्लैट है—एक कमरा, एक रसोई और एक बाथरूम। जगह छोटी है, लेकिन मुझे अब अकेलेपन की आदत पड़ चुकी है। इमारत की दीवारें इतनी पतली हैं कि पड़ोसियों की हर आवाज साफ सुनाई देती है।

मेरे बगल वाले घर में एक बड़ा परिवार रहता है—दो बुजुर्ग माता-पिता, दो छोटे बच्चे, पति रमेश जो दुकान चलाते हैं, और उनकी पत्नी सीमा। मैं उसे भाभी कहता हूं, क्योंकि वो पड़ोस की बड़ी बहू जैसी लगती है। सीमा खूबसूरत है—गोरा रंग, लंबे बाल जो वो साड़ी के साथ बांधती है, और आंखों में हल्की सी शरारत। सीमा भाभी के शरीर की बनावट ऐसी है कि किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा कर दे। उनके फिगर सुनोगे तो आप भी पागल हो जाओगे। उनका फिगर है 32-28-36।

हर सुबह वो घर के बाहर झाड़ू लगाती है, और मेरा कमरा ठीक सामने पड़ता है।शुरू में मैं बस चुप-चाप देखता रहता हूं। सुबह की धूप में सीमा झुक कर झाड़ू लगाती है, और कभी-कभी उसकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक जाता है और मुझे उनके 32 साइज के बूब्स दिख जाते हैं। मैं हाथ में चाय का कप लेकर दरवाजे में खड़ा रहता हूं। और रोज सुबह में उन्हें देख कर अपना लंड पेंट के ऊपर से ही मसलता हूं। एक दिन वो मुझे देख लेती है और मुस्कुरा कर कहती है, “अरे भैया, रोज देखते हो क्या? कुछ मदद चाहिए?”

मैं थोड़ा घबरा जाता हूं, “नहीं भाभी, बस… सुबह की आदत है।”

वो हंसती है, “तो चाय पियो ना, मैंने अभी बनाई है।”

यहीं से हमारी बातें शुरू होती हैं। अब हर सुबह एक रूटीन बन जाता है। सीमा झाड़ू लगाती है और मैं बाहर आ जाता हूं।“भाभी, बच्चे स्कूल गए?”

“हां, और तुम? ब्रेकफास्ट किया? अकेले कैसे खाते हो?”

धीरे-धीरे ये छोटी-छोटी बातें गहरी होने लगती हैं।

एक सुबह बारिश हो रही थी। सीमा भीगते हुए झाड़ू लगा रही थी। मैं जल्दी से एक तौलिया लेकर आता हूं, “भाभी, सावधान… बीमार हो जाओगी।”

हमारे हाथ हल्के से टकराते हैं। एक पल के लिए सब कुछ थम जाता है। सीमा की सांस जैसे अटक जाती है। वो धीमे से कहती है, “तुम्हारी फिक्र अच्छी लगती है…” और नजरें झुका लेती है।

दिन बीतते जाते हैं और अब हमारी बातें व्हाट्सएप पर भी होने लगती हैं। रात को, जब रमेश दुकान पर होता है, बुजुर्ग सो चुके होते हैं और बच्चे पढ़ रहे होते हैं, तब वो मैसेज करती है—

“आज बहुत थक गई हूं…”

मैं जवाब देता हूं, “थोड़ा आराम करो… तुम्हारी मुस्कान ही मेरी एनर्जी है।”

वो स्क्रीन देखते हुए हल्का सा मुस्कुराती है,‌“ऐसी बातें मत करो… शरम आती है।”

लेकिन उसके दिल में कुछ नया सा महसूस होने लगता है। अब मेरी बातें बदलने लगती हैं— “तुम्हारी आंखें बहुत खूबसूरत हैं…”

वो पढ़ कर रुक जाती है, फिर टाइप करती है,‌ “तुम भी तो हैंडसम हो… रमेश जैसे नहीं…”

मैसेज भेजने के बाद वो खुद ही चुप हो जाती है। लेकिन उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान बनी रहती है। ऐसे ही हमारे बातें अब धीरे-धीरे और ज्यादा इंटेंस और सेक्सी होते जाती है। क्योंकि मुझे पता चल गया था कि भाभी को रमेश खुश नहीं कर पाता था तो यहां पर मेरा मौका बन सकता था। और मुझे धीरे-धीरे यह भी पता चल गया था कि भाभी को वाइल्ड सेक्स पसंद था।

मुझे भी बहुत ज्यादा वाइल्ड सेक्स पसंद है। धीरे-धीरे मैं भी उसे वाइल्ड सेक्स वाली बातें पर शुरू कर दी। मैंने उन्हें बताया कि, “मुझे सेक्स करते टाइम गाली देने में बहुत मजा आता है और मुझे थोड़ा रफ सेक्स पसंद है।” तो उसने कहा, “मुझे भी रफ सेक्स पसंद है, और कब कर रहे हो तुम मेरे साथ रफ सेक्स?”

मैंने कहा, “सीमा रंडी जब तू कहे तब मैं तेरे साथ सेक्स करने को तैयार हूं।” वह मेरे मुंह से ऐसे शब्द सुन कर एक-दम चौंक गई लेकिन थोड़ी सी खुश हो गई, क्योंकि यह सब उसको बहुत ज्यादा पसंद था। तो उसने कहा, “कल रमेश घर पर नहीं है और सुबह बच्चे और सास-ससुर दोनों सोए रहेंगे। तब हम कर सकते हैं।” मेरी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा, क्योंकि इतने दिन बीत गए और मुझे सीमा के साथ जो करना था वह दिन आ ही गया।

अगले दिन सुबह-सुबह मैं 6:00 बजे उठ गया था। मुझे पता था 6:30 सीमा भाभी आएगी झाड़ू लगाने। मैं अपना ब्रश करके रेडी हो गया था। 6:30 मैंने अपने घर का दरवाजा खोला। और देखा सीमा भाभी झाड़ू लगाते लगाते मेरे दरवाजे के सामने आने लगी थी। जैसे ही सीमा भाभी मेरे घर के दरवाजे के सामने आई, मैंने सीमा का हाथ पकड़ कर उसको अंदर खींच लिया।

अंदर खींच के मैंने उसको घुटनों के बल बिठा दिया। मैंने अपनी पेंट खोल के, अपने अंडरवियर नीचे करके। फिर सीमा भाभी के सामने अपना 8 इंच का लंड कर दिया। मैंने उसके बाल पकड़े और सीधा लंड उसकी मुंह के अंदर घुस दिया। उसकी आंखों में हैरानी थी, लेकिन चेहरे पर थोड़ी खुशी थी, क्योंकि उसे रफ सेक्स पसंद था।

मैंने बिना रुके सीमा का मुंह चोदना चालू किया और पूरे 15 मिनट तक उसका मुंह चोदता रहा, चोदता रहा, चोदता रहा। सीमा को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। 15 मिनट बाद मैंने सीमा को ऊपर उठाया और उसकी साड़ी खींच कर निकाल दी। अब सीमा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी।

फिर वापस से मैंने उसके बाल पकड़े और उसको दीवार से चिपक के एक हाथ से उसको पकड़ कर रखा और दूसरे हाथ से उसका ब्लाउज खींच कर फाड़ दिया। फिर नीचे से उसका पेटीकोट भी खींच कर निकाल दिया जो कि थोड़ा फट गया था और थोड़ा अपने आप जमीन पर गिर गया।

मैंने देखा सीमा ने ना तो अंदर से ब्रा पहनी थी और ना ही अंदर से पेंटी पहनी थी। मैंने कहा, “सीमा रंडी तू तो एक-दम तैयार होकर आई है। ना ब्रा है ना चड्डी है।” सीमा ने बड़ी कामुक आवाज में मुझसे कहा, “मेरे राजा तेरे लिए एक-दम तैयार हो क्या आई हूं। तेरा टाइम वेस्ट ना हो कपड़े उतारने में इसीलिए इसीलिए ना चड्डी पहनी है और ना ब्रा। मैं तो नंगी ही तेरे घर आ जाती, लेकिन आते-जाते मुझे लोग देख लेते इसलिए मैंने ऊपर से साड़ी डाल ली।” मैंने कहा, “वह मेरी सीमा रानी।”

मैं फिर सीमा के बाल पकड़े और उसको सोफे पर घोड़ी बना दिया। अब मैंने अपना 8 इंच का लंड अपने हाथ में ले लिया। फिर सीमा से कहा, “रेडी हो जा रंडी, अब तेरी चूत फाड़ दूंगा मैं।” उसने मुझसे कहा, “प्लीज जल्दी से मेरी चूत फाड़ दो। बहुत दिनों से मैं लंड नहीं लिया है।” मैंने उससे कहा, “और गिड़गिड़ा रंडी।”

फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और लंड को उसकी चूत के दरवाजे पर रखा। पहला झटका मारा तो लंड अंदर नहीं गया, क्योंकि उसकी चूत अभी भी थोड़ी सी छोटी थी और मेरा लंड थोड़ा बड़ा था। फिर जब दूसरा झटका मारा तो मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया और वह छटपटाना लगी चिल्लाने लाने लगी, “प्लीज लंड निकालो, बहुत दर्द हो रहा है।”

वो रोने लगी, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। लेकिन मैं नहीं रुका। मैं लगातार तीसरा झटका मारा, जिससे मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और वह और जोर-जोर से रोने लगी।‌ वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी लेकिन मैं नहीं रुका। ऐसे ही मैं चौथा-पांचवा झटका मारता गया और पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।

मैंने उसके गांड पर चपेट मार-मार के मैंने उसकी गांड लाल कर दी। फिर मैं वैसे ही घोड़ी बना कर सीमा को किचन में लेकर गया। सीमा का एक पैर मैंने किचन की स्लैब पर रखा और दूसरा जमीन पर रखा। फिर वैसे ही मैंने उसकी चूत में लंड घुसाया और उसको लगातार 10 मिनट तक चोदता गया।

उसके बाद मैं सीमा को बेडरूम में लेकर गया और बेडरूम में मिशनरी पोजीशन में उसकी चूत चोदी करीब 15 मिनट तक। ऐसे ही सीमा को मैंने रंडी की तरह घर के हर कोने में ले जाकर चोदा। आखिर में मैंने उसको घुटनों के बाल बिठा कर लंड उसके मुंह में डाल कर उसके मुंह में ही सारा पानी निकाल दिया। फिर उसने सारा पानी खुशी-खुशी पी लिया। उसके चेहरे पर अलग ही खुशी थी। जैसे किसी को कई सालों बाद शारीरिक सुख की खुशी मिली हो, वैसी ही खुशी मैंने सीमा के चेहरे पर देखी।

मैंने सीमा से कहा, “अब से तू मेरी पर्सनल रंडी बन गई है। मैं जब चाहूं, जैसे चाहूं, जहां बुलाऊं, वैसे तू आएगी और मुझे चुदवाएगी। फिर उसने जवाब में कहा, “जी मेरे मालिक। आप जैसे चाहे जहां चाहे मुझे चोद सकते हैं, और मैं आपसे कुछ नहीं कहूंगी। मैं आपकी गुलाम बन गई हूं।”

फिर सीमा अपने घर चली गई क्योंकि उसके सास-ससुर और बच्चों के उठने का टाइम हो गया था।

यह स्टोरी यहां पर खत्म नहीं हुई है। यह स्टोरी तो यहां से शुरू होती है। क्योंकि इसके बाद सीमा को मैंने बहुत बार चोदा, जिसमें कि उसकी गांड की चूत उसका गैंगबैंग तक किया। उसकी स्टोरी भी मैं आगे के भाग में लेकर आऊंगा। तो मेरे साथ जुड़े रहे और मुझे आप इस कहानी का फीडबैक भी दे सकते हैं। मैं अपनी ईमेल आईडी यहां पर दे दूंगा? मुझे आप सब के फीडबैक का इंतजार रहेगा।email: support@mohakkisse.com

अगला भाग पढ़े:-पड़ोस वाली भाभी को खींचा घर के अंदर-2

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