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पड़ोसी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 509 बार

भाभी को खेत में मूतते देखा

हीरल पटेल

29 Sep 2009 को प्रकाशित

भाभी को खेत में मूतते देखा
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मेरा नाम रवि है कद 5’3″ है लण्ड 6″ का है, मैं बहुत ही सेक्सी लड़का हूँ, किसी भी लड़की को देखता हूँ तो सबसे पहले उसकी फिगर,और उसके बाद में उसके चूतड़ों को देखता हूँ और फिर उसकी चुदाई के बारे में सोचता रहता हूँ।

मैं अपनी कहानी बताना चाहता हूँ। हमारे मोहल्ले की एक भाभी है, जो बहुत ही खूबसूरत है, मुझे तो वो बहुत सेक्सी लगती है, मैं उसे चोदना चाहता था। उस भाभी का पति दुबई गया है तो घर पर उसके सास-ससुर होते हैं, भाभी के दो बच्चे भी हैं।

एक बार उसने मुझे अपनी किसी रिश्तेदार के घर ले जाने के लिए कहा तो मैं उन्हें अपनी बाइक पर ले गया।

रास्ते में ऐसे ही बातें होती रही।

फिर अचानक रास्ते पे सांप आ गया तो मैंने जोर से ब्रेक लगाई तो भाभी के चूचे सीधे मेरे पीठ में गड़ गए।

फिर हम आगे जा रहे थे तो उन्होंने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है?मैंने बोला- नहीं है।तो वो बोली- होगी तो पर तुम बताना नहीं चाहते!तो मैंने ऐसे ही कह दिया- हाँ है।

फिर से भाभी ने पूछा- उसे भी ऐसे ही घुमाने ले जाता है या नहीं?मैं क्या बोलता, सोचा ना बोलूँ तो बात ख़त्म हो जायेगी इसीलिए मैंने हाँ कहा।इस पर भाभी बोली- कहाँ लेकर गया था?मैंने बोला- मूवी देखने के लिए!तो फ़िर से पूछने लगी- कुछ किया या ऐसे ही हो?और फिर वो थोड़ा चिपक कर बैठ गई।

अब मुझे उनके स्तन अपनी पीठ पर महसूस हो रहे थे। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था, मैं भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था।तभी भाभी पीछे से ही मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ने लगी, वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी, मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

रास्ते में एक खेत आया तो भाभी ने मुझे रोकने को बोला।मैंने पूछा- क्या हुआ?तो बोली- कुछ नहीं, मैं अभी आई!और वो झाड़ी के पीछे चली गई।

और मुझे देख कर बोली- नटखट, यहाँ क्यों आये? मैं आने वाली तो थी ना! तो यहाँ क्यों आया?तो मैं बोला- ऐसे ही! आप क्या कर रही हो, वो देखने आया था।वो बोली- देख तो रहा है कि मैं पेशाब कर रही हूँ।

जब वो उठी तो मुझे उनकी नंगी चिकनी जांघों और कूल्हों के दर्शन हो गए। मेरा लण्ड खड़ा हो गया, मैंने उन्हें पकड़ लिया और किस करने लगा। वो भी मुझे जोर जोर से किस कर रही थी, फिर मैं उनके उरोज दबाने लगा और उनकी ब्लाऊज को उतारने लगा।

तभी भाभी ने मुझे रोक दिया और कहा- अभी नहीं, बाद में घर चल के करेंगे! यहाँ लेटने की भी जगह नहीं है।

फिर हम घर आ गए, घर आकर देखा तो भाभी के सास और ससुर दोनों घर पे थे तो भाभी ने मुझे जाने के लिए कहा।मैं वहाँ से चला आया।

एक महीने के बाद मुझे फिर भाभी का फोन आया, बोली- कुछ काम है, मेरे घर पर आ जाओ!

मैं भाभी के घर पर पहुँचा, तो घर पे कोई नहीं था और भाभी रसोई घर में काम कर रही थी। मैं चुपचाप उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों पर अपने हाथ रख दिए और चुपचाप खड़ा रहा।

वो जैसे घबरा गई और मेरे हाथों को दूर किया, फिर देखा कि यह तो मैं हूँ।तो वो मुझसे लिपट गई और बोली- डरा ही दिया तूने तो!

फिर वो फिर से अपने काम में लग गई और मुझे ऊपर के कमरे से चारपाई नीचे लाने के लिये कहा।

तभी मेरा फ़ोन आया तो मैं बात करते बाहर निकल गया। बात ख़त्म होते ही जब में वापस आया और भाभी के पीछे जाकर चिपक गया तो भाभी बोली- अभी नहीं!

पर मैं थोड़े ही मानने वाला था, मैंने उनके चूचों को दबा दिया और गाउन को नीचे से ऊपर उठाते हुए उनकी पेंटी में हाथ डाल दिया।अब वो भी उत्तेजित हो गई थी।

फिर हम दोनों उनके कमरे में चले गए, मैंने उनका गाउन उतार दिया तो वो अब केवल ब्रा और पेंटी में थी। फिर मैं उनके ऊपर चढ़ गया और जोर जोर से चूमने और चूचियों को चूसने लगा।

भाभी ने भी मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे लण्ड को सहलाने लगी। उसके बाद उसने मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।मैं तो जैसे जन्नत में था। मेरे लण्ड को चूसने की वजह से मेरा पानी निकल गया।

तभी भाभी बोली- बस? इतने में ही निकल गया? तुम तो बड़े कच्चे खिलाड़ी हो।मैंने कहा- अभी कहाँ ख़त्म हुआ, अभी तो खेल शुरू हुआ है।

फिर मैंने उनकी पेंटी उतारी और उनकी फ़ुद्दी को चाटने लगा। ठोड़ी देर में मेरा लण्ड दोबारा खड़ा हो गया और मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और भाभी की गांड को दबाते हुए मैंने भाभी की चूत पर अपने लण्ड को रखा और झटके देने लगा। मुझे तो मजा आ ही रहा था पर अब तो भाभी भी मजे से चुदवा रही थी, वो मेरे ऊपर ही घुड़सवारी करने लगी।

फिर मुझसे चिपक कर मुझे जैसे चोदने लगी जोर जोर से झटके लगा कर!

हम दोनों झड़ने वाले थे कि मैंने भाभी से कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।तो भाभी ने बोला- अपना पानी मेरी बुर में ही छोड़ दे!मैंने कहा- कुछ हुआ तो?वो बोली- पागल, मैंने ओपरेशन करवाया है।

तो मैंने अपना पानी छोड़ दिया। फिर हम ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

थोड़ी देर बाद भाभी नीचे से चाय ले आई और हम दोनों ने एक ही प्लेट में चाय साथ में पी।

फिर मैं अपने कपड़े पहन कर आने लगा, तभी भाभी बोली- नालायक, मेरे कपड़े तूने उतारे हैं, तो अब पहनाने में शर्म आ रही है क्या?तो मैंने ‘नहीं’ कहते हुए भाभी की ब्रा उठाई और पहनाने लगा, भाभी मुझसे चिपक गई और कहा- मैं जब भी तुझे बुलाऊँगी, तुम आओगे ना?

तो मैंने हाँ कहा और उनकी पेंटी को उठाया और पहना दिया फ़िर वहाँ से मैं चला आया।

फिर कुछ दिन बाद मुझे भाभी का फिर फ़ोन आया पर अबकी बार क्या हुआ वो मैं अपनी अगली कहानी में बताऊँगा।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी यह कहानी?सच बात बताऊँ तो यह एक कहानी नहीं, यह सच है।मुझे मेल करो।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

एंड्रू बीन

1 week ago

क्या भाभी सच में मान गई थी? अगला भाग जल्दी लाओ!

मोहित कुमार सिंह

2 weeks ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

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