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मकान मालिक की प्यासी बेटी

jamsebond0009

06 Sep 2013 को प्रकाशित

मकान मालिक की प्यासी बेटी
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प्रेषक : किरन मल्होत्रा

मेरा नाम किरन मल्होत्रा है। मैं भोपाल के एक प्राईवेट कालेज से एमबीए कर रहा हूँ।

यह कहानी बिल्कुल सत्य घटनाओं पर आधारित है। मैं इस कहानी को कुछ संक्षेप में लिख रहा हूँ।

मेरे मकान मालिक की बेटी 20 साल की है, और उसका नाम पूजा है। पूजा का फ़िगर 34-28-36 के लगभग है, और उसका कद 5’6” है। उसका भरा हुआ बदन देख कर मेरे लण्ड में आग सी लग जाती है, वो बिल्कुल चिकनी चमेली जैसी है।

मकान मालिक का अपना खुद का बिजनेस है और वो अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि अपनी बीवी को भी समय नहीं दे पाता है। वो कुछ अधेड़ उम्र का लगता है जैसे कि वो बिल्कुल ही झड़ गया हो।

मेरी नौकरी कुछ ऐसी थी कि मुझको सवेरे-सवेरे जाना पड़ता था और शाम को ही आता था। इसलिए मैं उन लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं हो पाती थी, कभी कभी बस ‘हाय-हैलो’ ही हो जाती थी।

पूजा हमेशा मुझसे बातचीत करने के बहाने खोजती रहती थी, क्योंकि मैं भी कुछ कम नहीं दिखता हूँ। मेरा कद 6 फ़ीट है, शरीर भी काफ़ी अच्छा है, जिस कारण वो मुझ पर फ़िदा हो गई है।

एक दिन मैं घर पर जल्दी आ गया था और शायद पूजा उस दिन कालेज नहीं गई थी। पूजा ने मुझको चाय पर बुलाया। पूजा की माँ कुछ दिनों के लिये अपनी माँ के घर गई हुई थीं।

उस दिन पूजा ने एक पतली सी नाईटी पहन रखी थी, जिसके अन्दर पूजा ने एक लाल रंग की ब्रा और पैन्टी पहन रखी थी, जिसमें वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी। पूजा को इस तरह के कपड़े में देख कर मेरा लण्ड अपने आकार में आने लगा था।

शायद पूजा ने इस बात को भांप लिया था। वो मुस्कराते हुए चाय बनाने चली गई। कुछ देर में पूजा ने चाय के साथ कुछ नमकीन भी लेकर आई। मेरी नज़र पूजा के उभारों से हट ही नहीं रही थी। पूजा मेरी इस हरकत को देख कर मन्द-मन्द मुस्करा रही थी।

फ़िर हम दोनों में बातचीत शुरु हो गई, पूजा ने पूछा- आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की।

तो मैंने कहा- पहले मैं अपनी लाइफ़ में कुछ बन जाऊँ फ़िर शादी करूँगा। फ़िलहाल तो मैं अपने कैरियर पर ध्यान दे रहा हूँ।

पूजा ने कहा- ऐसे में तो आपकी उम्र ही निकाल जाएगी तो फ़िर कोई भी अच्छी लड़की नहीं मिलेगी।

मैंने कहा- यदि मेरी लाईफ़ में कोई भी अच्छी लड़की होगी तो वो मुझको जरूर मिलेगी।

पूजा बोली- अपने शरीर का भी ख्याल तो आपको ही रखना है।

यह सुन कर मैं खुश हो गया और बोला- अपने शरीर की जरूरत को तो मैं खुद ही पूरी कर लेता हूँ।

पर पूजा की बात सुन कर मैं एकदम से चौंक गया था और सोचने लगा कि लगता है कि आज काम बन ही जाएगा।

फ़िर पूजा ने पूछा- आपकी कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है क्या?

तो मैंने कहा- इतना समय नहीं है कि कोई गर्लफ़्रेन्ड बनाई जाए। तुम बताओ, तुम्हारा कोई बॉयफ़्रेन्ड है या नहीं?

पूजा ने कहा- मैं भी बस आपकी तरह ही हूँ, मैं बॉयफ़्रेन्ड बनाने पर विश्वास नहीं करती हूँ।

फ़िर मैंने थोडी सी हिम्मत कर के कहा- क्यों न हम दोनों ही एक दूसरे का ही ख्याल रखा करें !

तो पूजा राजी हो गई।

मैंने कहा- पूजा, तुम बहुत ही सुन्दर हो और मैं बस तुम्हारी ही वजह से इस घर में रह रहा हूँ। इतने दिनों से मैं अपने दिल की बात बस अपने दिल में ही रख कर ही घूम रहा था कि कभी न कभी तो मैं अपने दिल की बात तुमसे जरूर कहूँगा।

पूजा मेरी इस बात को सुन कर खुश हो गई और कहा- अब पापा के आने का समय हो गया है। तुम अब जाओ हम कल बात करते हैं।

मैंने अपनी चाय खत्म की और पूजा को थैंक्स बोल कर अपने कमरे में आ गया।

अगली सुबह पांच बजे ही पूजा ने मेरे दरवाजे की घन्टी बजाई और मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि पूजा खड़ी है। वो मुझको देख कर हँसने लगी और गुड मॉर्निंग बोल कर छत पर चली गई। मुझको कुछ समझ में नहीं आया कि वो हँसने क्यों लगी थी? फ़िर मैंने देखा तो मेरा लन्ड तम्बू ताने हुए खड़ा था।

फ़िर पूजा जब नीचे जाने लगी, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने कमरे मे खींच लिया और पूजा से लिपट गया और उसके दोनों स्तनों को पकड़ कर दबाने लगा।

पूजा ने कहा- अभी मुझको छोड़ो, मैं आज तुमको फोन करूँगी तो तुम आ जाना।

मैं आज अपने आफ़िस का सारा काम निपटा कर पूजा के फ़ोन का इन्तजार करने लगा।

फ़िर कुछ देर के बाद पूजा का फ़ोन आया, “आज मैं घर में अकेली हूँ, तुम जल्दी से आ जाओ क्योंकि पापा आज शादी में जाने वाले हैं।”

मैंने अपने बॉस से छुट्टी ली और घर निकाल आया। घर आते ही मैं सीधे पूजा से मिला।

पूजा ने कहा- पहले तुम फ़्रेश हो जाओ, तब तक मैं तुम्हारे कमरे में आती हूँ।

फ़िर पूजा ने अपने घर के मेन गेट में लॉक लगा कर अन्दर वाले गेट से मेरे कमरे मे आ गई। मैं जिस कमरे में रहता हूँ। उसमें एक और गेट था, जो पूजा के घर के अन्दर ही खुलता था। फ़िर हम दोनों ने कुछ देर बातचीत की और हम दोनों ही एक-दूसरे के करीब आकर बैठ गए।

मैंने धीरे से पूजा का हाथ पकड़ लिया और उसको दबाने लगा, तो पूजा को कुछ-कुछ होने लगा। पूजा उस दिन साड़ी पहन कर मेरे पास आई थी। पूजा बहुत ही कम साड़ी पहनती थी।

इसी बीच मेरे हाथ पूजा के स्तन और उसके चूतड़ों पर चले गए। अब मैं पूजा के कान को चूमने लगा, जिससे पूजा बहुत ही गर्म होने लगी थी। मैंने देर ना करते हुए उसकी साड़ी निकाल दी।

पूजा मना कर रही थी, पर प्यार से। लेकिन अब मैं कहाँ मानने वाला था। फ़िर जैसे ही मैंने अपना हाथ पूजा के ब्लाउज में डाला तो पूजा ने शर्म के कारण अपने हाथ अपने चेहरे पर रख लिए।

फ़िर मैंने पूजा के दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर उसका दूध पीने लगा, तो पूजा उत्तेजित होने लगी और उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर प्रिया।

फ़िर मैंने पूजा के कान को चुभलाने लगा क्योंकि यदि किसी लड़की को अपने वश में करना हो तो उसके कानों को चूमना जरुर चाहिये। पूजा तड़प उठी थी और मैंने धीरे से उसके ब्लाउज को भी निकाल प्रिया।

अब वो लाल रंग की ब्रा में बहुत ही कयामत ढा रही थी। ऐसा लगा की अभी मेरा लन्ड पैन्ट को फ़ाड़ कर बाहर आ जाएगा।

अब मैंने देर ना करते हुए पूजा से कहा कि अब वो भी मेरे कपड़े निकाल दे, क्योंकि यदि चुदाई का असली मज़ा लेना हो तो दोनों को एक-दूसरे का साथ जरूर देना चहिए। इससे दोनों के बीच प्यार बढ़ता है।

अब मैंने पूजा की चूत पर जब अपना एक हाथ लगाया, तो पूजा के मुँह से ‘सीईईईई’ की आवाज निकाल गई।

पूजा बहुत ही प्यासी लड़की थी और आज तक वो कभी किसी से चुदी भी नहीं थी। पूजा का यह पहला चुदाई अनुभव था।

मैं तो पहले भी कई लड़कियों के साथ चुदाई कर चुका था। यह बात पूजा को नहीं मालूम थी। अब, मैंने पूजा के बदन पर से सारे कपड़े निकाल कर फेंक दिये।

पूजा बिना कपड़ों के मेरे सामने थी। पूजा के चूचे बहुत ही मस्त लग रहे थे। उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी, जो मुझको एकदम मदहोश कर रही थी। अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उसकी चूत का रसपान करने लग गया और वो मेरा लण्ड का।

जब मैं उसकी चूत का रसपान कर रहा था, वो दो बार झड़ चुकी थी।

पूजा को अभी तक शान्ति नहीं मिली थी। मेरा लण्ड तो अभी भी शेषनाग की तरह फ़न फैलाए बैठा हुआ था। हम दोनों एक-दूसरे से एकदम लिपट कर चूमा-चाटी करने लगे। चुम्मी करते हुए मैं अपने एक हाथ से पूजा की चूत को भी सहलाता रहा था।

फ़िर पूजा को मैंने अपने लण्ड चूसने को कहा, तो पहले ना-नुकर करने के बाद वो मान गई। अब हम दोनों एक-दूसरे का पानी निकालने लगे। अब हम दोनों को देर करना बर्दास्त नहीं हो रहा था।

मैं एक क्रीम की डिब्बी ले आया और उसमें से खूब सारी क्रीम निकाल कर पूजा की चूत पर लगा दी ताकि पूजा को कुछ कम दर्द हो। और पूजा मेरा लन्ड आसानी से अपने अन्दर ले सके।

फ़िर मैंने अपने लन्ड का सुपाड़ा पूजा की चूत पर लगाया और एक जोर का धक्का लगाया। तो पूजा इतनी जोर से चिल्लाई कि जैसे किसी ने गर्म लोहे की सलाख उसके चूत में डाल दी हो।

अब मैं कुछ देर के लिये रुक गया ताकि पूजा को कुछ आराम मिल सके। जब पूजा का दर्द कुछ कम हुआ, तो पूजा ने कहा- अब शुरू करो।

तो मैं धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा और उसके रस भरे संतरे भी दबाते रहा। इसी बीच पूजा दो-तीन बार झड़ गई।

कुछ देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने पूजा से कहा- पूजा, अब मैं भी झड़ने वाला हूँ।

तो पूजा ने कहा- मेरे अन्दर ही झड़ना।

फ़िर मैंने अपना ढेर सारा माल पूजा की चूत में भर प्रिया और पूजा के ऊपर ही कुछ देर तक पड़ा रहा। फ़िर कुछ देर के बाद हम दोनों एक साथ नहाए।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे आपके जबाब का इन्तजार रहेगा।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राहुल कदम

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

नेहा शर्मा 1

4 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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