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पकड़म पकड़ाई.. फिर चूत चुदाई

अज्ञात

30 Dec 2013 को प्रकाशित

पकड़म पकड़ाई.. फिर चूत चुदाई
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हैलो मेरा नाम ऋतेश है। मैं भोपाल का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 21 साल है मैं MBA कर रहा हूँ। मेरा जिस्म सामान्य है.. मेरा लंड 6.5 इंच लम्बाई का है और 2 इंच मोटा है।

यह मेरा पहला अनुभव है.. तब मुझे सेक्स की अधिक जानकारी भी नहीं थी यह मेरी पहली स्टोरी है.. आशा है आपको पसंद आएगी। कोई गलती या कोई सलाह देने के लिए आप लोग मुझे मेल जरूर करें।

यह कहानी मेरी और अंजलि की है। अंजलि गोरी.. सुंदर.. नशीली अदाओं वाली लड़की है.. जिसको देख कर कोई भी अपने पर काबू नहीं रख सकता है। उसका बदन संगमरमर के जैसा 34-26-30 का है।

बात आज से 4 साल पहले की है.. जब मैं अपनी बुआ जी के घर इंदौर गया था।बुआ जी के लड़के का बर्थडे था। वहाँ काफ़ी लोग थे.. बुआ जी की लड़की थी.. सोनम. जो मेरी अच्छी दोस्त भी है.. मैं उसके साथ बहुत देर तक बातें करता रहा। उसके बाद वहाँ उसकी एक सहेली आ गई.. सोनम ने उससे मेरा परिचय कराया, मुझे बताया कि उसका नाम अंजलि है..मैं उसे देख कर पागल सा हो गया और उसी पल उसके साथ सेक्स करने का मन करने लगा।मैं सोच रहा था कि कैसे उसे चोदूँ..

तभी वहाँ सोनम का चचेरा भाई पारस आ गया और मुझसे बोला- भैया चलो पकड़ा-पकड़ाई खेलते हैं।पहले तो मैंने उसको ‘न’ बोल दिया.. पर जब सोनम और अंजलि खेलने के लिए मान गए और जाने लगे.. तो अंजलि बोली- आप भी चलो.. अकेले यहाँ क्या करेंगे..

कुछ देर बाद और भी लोग हमारे साथ खेलने लगे। हम लोगों को मज़ा आने लगा.. सालों बाद खेल रहे थे।कुछ देर बाद मेरी बारी थी.. सबको पकड़ने की.. इत्तफाक कहो या नसीब कहो.. पर बार-बार अंजलि ही मेरे हाथ आ रही थी और हर बार एक ही बात बोलती- हम आप के हैं कौन..

पहले तो मैं सुनता रहा.. कुछ नहीं बोलता और छोड़ देता.. मेरे बाद पारस की बारी थी.. मगर मेरे दिमाग से अंजलि जाने का नाम ही नहीं ले रही थी।तो मैंने फिर से मौका देख कर अकेले में अंजलि का हाथ पकड़ लिया और वो फिर बोली- हम आपके हैं कौन?मैंने इस बार हाथ नहीं छोड़ा और एक झटके से उस अपनी ओर खींचा.. तो वो हाथ छुड़ाने लगी। मैंने उसको कस कर अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसके कान के पास होकर बोला- जानना नहीं है क्या.. कि हम हैं कौन?तो वो जाने लगी।

मैंने उसको कस कर पकड़ा हुआ था.. वो बोली- कोई आ जाएगा.. रात में मिलना.. जब सब सो जाएंगे..तो मैंने अपना मोबाईल नम्बर उसको दिया और उसका नम्बर ले लिया।

रात में जब सो गए.. लगभग 1.30 बजे मेरे पास उसका मैसेज आया- गार्डन में पूल के पास आ जाओ।मैं जल्दी से उठा और गार्डन में गया। वहाँ अंजलि स्लीवलैस टॉप में मेरा इंतजार कर रही थी।

मैंने उसे थोड़ा सताने की सोची.. मैं जानबूझ कर उसके सामने नहीं गया.. बार-बार उसके मैसेज आने लगे।कुछ देर बाद तो उसके कॉल भी आने लगे।वो बहुत ग़ुस्से में थी.. मानो मैं सामने आ जाऊँ तो मार ही डालेगी।जब मैंने कॉल भी अटेंड नहीं किया तो वो जाने लगी.. तभी अचानक मैंने उसे पीछे से कस कर जकड़ लिया..

वो डर गई और पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ी रह गई। मैंने उसकी गर्दन पर चुम्बन किया तो उसके मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली और वो झटके से सीधी हो कर मुझे देखने लगी और अगले ही पल वो शरमा गई।

लाज से उसकी नजरें नीचे हो गईं.. क्या नजारा था.. चांदनी रात.. स्वीमिंग पूल के पास.. एक हसीना खड़ी थी.. चाँद की रोशनी पानी की लहरों से रिफ्लेक्ट होकर उसके चेहरे पर आ रही थी.. ये उसे और भी ज्यादा सुन्दर बना रही थी।

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसे चुम्बन किया.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।मैंने उस 10 मिनट तक चुम्बन किया बाद में उसके मम्मों को टॉप के ऊपर से सहलाने लगा.. तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

तो बोली- सब कुछ.. आह.. तड़पाओ नहीं..मैंने भी जल्दी से उसे गोद में उठाया और पेड़ों के पीछे ले गया और उधर उसके कपड़े उतारे। उसके मस्त रसीले मम्मों को देख कर तो उन्हें चूसने को मैं मचल उठा..

मैंने एक-एक करके उसके दोनों संतरों को चूसा और एक हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया.. उसकी चूत गीली थी।वो बोली- तीन बार पानी निकल चुका है।मैंने उसकी पैन्टी हटाई उसकी चूत कुंवारी चूत थी.. बिल्कुल गुलाबी सी.. उसके ऊपर छोटे-छोटे से रेशमी बाल.. मैंने उसकी चूत को चूसना शुरू किया.. तो वो छटपटाने लगी।

कुछ समय बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।फिर मैंने अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में थमा दिया। वो मेरे लंड को देखती ही रह गई।मैंने ही हल्के से लौड़े को हिला कर आगे पीछे किया.. तो वो समझ गई और जो मैं चाहता था.. वो करने लगी।

फिर मैंने उसे मुँह में लेने को कहा.. तो वो मना करने लगी और बोली- मुझे चोद दो.. अब इंतजार नहीं हो रहा।तो मैंने उसे टाँगें चौड़ी करने को बोला और अपना लंड उसकी गीली चूत पर रख कर हल्के से अन्दर किया.. तो वो चीखने लगी।

मैंने उसको चुम्बन किया और जोर से झटका मार मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया। उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे और चूत से खून..

मैंने थोड़ा इंतज़ार किया और फिर से झटका मार दिया, इस बार पूरा लंड अन्दर था।

फिर मैंने झटकों की झड़ी लगा दी.. कुछ समय बाद मैंने अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया.. इस दौरान उसने कितनी बार पानी छोड़ा.. मैंने नहीं गिना.. पर वो खुश थी।फिर हम अपने कमरों में चले गए।

सुबह जब मैं उठा.. तो सोनम और अंजलि पास में ही थीं और दोनों खुश थीं। मैंने सोचा कहीं अंजलि ने सोनम को सब बता तो नहीं दिया।तभी अंजलि ने मुझको ‘गुडमॉर्निंग’ कहा और सोनम वहाँ से मेरे लिए चाय लेने गई।मैंने अंजलि से पूछा.. तो वो शरमा गई.. और बोली- कुछ नहीं बताया।

मैं खुश था और वो भी..फिर मैं अपने घर जाने लगा तो बुआ जी ने कहा- तू रास्ते में अंजलि को भी ड्राप कर देना।

मैं और खुश हो गया और अंजलि को लेकर वहाँ से निकल गया। मैंने अंजलि को उसके घर ड्राप किया.. एक और चुम्बन किया और निकल गया।

फिर हम अभी तक नहीं मिले.. बस फ़ोन पर बात करते हैं।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो कमेंट जरूर दीजिएगा।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

नूर 2

1 week ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

यश पाल सिंह

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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