हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
कमरे का मुख्य दरवाज़ा ज़ोरदार धक्के से खुला। दहलीज पर अमर खड़ा था, उसकी आँखें गुस्से और नशे से लाल थी। उसने अपनी नवविवाहिता पत्नी को एक और मर्द की बाहों में, उसके शरीर पर सवार, नंगा और तन्मय देखा।
“ये क्या…! सुनीता! ये कौन है? तुम क्या कर रही हो?” अमर चीखा। उसकी आवाज़ में गुस्सा था, धोखा था, और एक टूटन थी।
सुनीता और अनुज एक-दम से जम गए। सुनीता की आँखें फटी की फटी रह गई, भय और शर्म से। उसने खुद को अनुज से अलग करने की कोशिश की। अनुज पलंग से उठ कर खड़ा हो गया, अपनी नग्नता छिपाने का कोई रास्ता ढूँढता हुआ।
“ये कौन है? बता!” अमर चीखता हुआ अंदर आया, मानो अनुज पर टूट पड़ेगा।
मैं: “भैया जाने दो भूल जाओ ना इसे, (मैं काफी डरी हुई आवाज़ में बोल रहा था)”
सरिता भी उसके पैर पकड़ कर रोने लगी और गिड़गिड़ाते हुए बोली: “माफ़ करो ना मुझे जो हो गया जाने दो।”
तभी, एक और साया दरवाज़े में आकर खड़ा हो गया। आरूना चाची। उसने पूरा मंजर एक नज़र में देख लिया। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक गहरी, शातिर चमक थी।
“शांत हो जाओ, अमर,” आरूना ने अपनी मधुर, लेकिन अब आज्ञा देने वाली आवाज़ में कहा। वह अमर के पास गई, उसकी बाँह पर एक कोमल लेकिन दृढ़ पकड़ बनाई। “चिल्लाने से क्या होगा? सब समझौते से सुलझा लेंगे।”
“समझौता? इसमें कौन सा समझौता?” अमर गुर्राया, लेकिन आरूना की पकड़ और उसके नज़दीक आने से उसका गुस्सा थोड़ा बिखर सा गया।
आरूना ने उससे सीधे आँखें मिलाईं। उसने अपना हाथ उसकी बाँह से होते हुए उसके सीने तक सरकाया। “तुम्हारी दुल्हन तो मस्त है। अब तुम क्यों पीछे रह जाओ?”उसने फुसफुसाया, उसकी ओर झुकते हुए, अपने होंठ उसके कान के पास ले गई। “इतनी खूबसूरत रात है… चार लोग हैं… चारों का मन लगाने का एक ही तरीका है।”
अमर की नज़रें आरूना के चेहरे पर थी, फिर उसकी गर्दन पर, और फिर उसके भरे हुए सीने पर, जो अपनी साड़ी के ब्लाउज में मुश्किल से समाया हुआ था। उसका क्रोध धीरे-धीरे एक भिन्न, तीव्र इच्छा में बदलने लगा। आरूना ने महसूस किया कि उसकी बात का असर हो रहा था। उसने अपनी उंगली से अमर की ठुड्डी को छुआ।“तुम्हारी बीवी को एक और मर्द चाहिए? तो लेने दो,” उसने धीरे से कहा, “और तुम… तुम एक औरत को लेलो।”
यह कहते हुए, आरूना ने अमर का हाथ पकड़ा और उसे अपने भरे हुए स्तन पर रख दिया। अमर की सांस फूल गई। उसकी उंगलियाँ अपने आप ही बंद हो गईं, उस नरम, कोमल गद्दी को महसूस करते हुए जो उसकी अपनी पत्नी के स्तनों से कहीं ज़्यादा परिपक्व और अनुभवी लग रही थी।
कमरे के दूसरी ओर, सुनीता और मैं हैरानी से यह नज़ारा देख रहे थे। सुनीता का भय धीरे-धीरे एक उत्सुक, उत्तेजित जिज्ञासा में बदल रहा था। मैं अब तक शर्म से सिकुड़ा हुआ था, उसे देखकर फिर से उत्तेजित होने लगा।
आरूना ने अमर के होंठों को अपने होंठों से जोड़ दिया। यह कोई कोमल चुंबन नहीं था। यह एक दावे का चुंबन था, एक बंदोबस्त का चुंबन। अमर ने विरोध नहीं किया। उसने आरूना को अपनी बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ को रगड़ते हुए, उसकी साड़ी के पल्लू को खोलने की कोशिश करने लगा।
आरूना ने होंठ हटाए और एक गहरी, संतुष्ट सांस ली। फिर वह मुड़ी और उसने सुनीता और अनुज की ओर देखा, जो अभी भौचक्के हुए थे।
“क्या देख रहे हो?” आरूना ने एक मामूली मुस्कान के साथ कहा, जबकि अमर का हाथ अब उसकी चोली के अंदर था। “रुके क्यों हो? जारी रखो। हम सब देखना चाहते हैं।”
चाची ने अमर का हाथ पकड़ा और उसे पलंग की ओर ले चली, जहाँ सुनीता और अनुज अब भी नग्न और अधूरे ही थे।मैं चाची को अमर के साथ चिपक कर लेटे देख गुस्सा बढ़ रहा था। सरिता उनको ही देखे जा रही थी, मैंने गुस्से में तेज़ी से उसकी कमर पर हाथ रखा और अपनी ओर घुमाया। उधर चाची खुद अपना ब्लाउज खोल कर अपने नंगे स्तनों के बीच अमर का मुँह दबा रही थी।
मैंने सरिता को फिर गोद में लिया और दोनों किस्स करने लगे। मैं पास वाली कुर्सी पर जाके बैठा और सरिता ने अपने पैर मोड़ कर कुर्सी पर फंसा लिए। उधर अमर भी चाची को पूरा नंगा कर चुका था। दो जोड़े आपस में एक ही कमरे में लिपटे हुए थे। मैंने सरिता की चूत में एक बार फिर लंड सेट किया और इतनी बार लंड घुसने से उसकी चूत अब काफीखुल गयी थी, और मेरा लंड अब आराम से जा रहा था। फिर सरिता ने मेरी पकड़ ढीली की और मेरे लंड पर खुद उछलने लगी।
मैं उसके नंगे लटकते हुए मम्मे झूलते हुए ऊपर-नीचे होते देख रहा था। एक स्तन को मैंने एक हाथ से दबाया और सरिता की चीख ज़ोर-ज़ोर से बढ़ती रही।“आह आह ज़ोर से दबा ना और ज़ोर से, बस होने ही वाला है मेरा अब।”
उधर मैं सरिता पे कम ध्यान देते हुए चाची को देख रहा था। अमर चाची के जिस्म का ज़बरदस्त मज़ा ले रहा था। पहले चाची के स्तनों को चूसते हुए, उसने चूत में उंगली करना शुरू किया, फिर जब उसने ज़ोर से तीन उंगली घुसेड़ी तब भी चाची की चूत में कोई हलचल नहीं थी।
चाची बोली: “क्या रे कभी औरत नहीं मिली है क्या? तेरे अंदर तो इतनी जान नहीं लग रही है। तू क्या मुझे तोड़ेगा।”
अमर: “अच्छा साली, इतनी मोटी चूत है, लगता है रंडी की तरह चुदी तो कई लोगों से है। रुक तुझे बताता हूँ।”
Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 7
फिर वो रुका उसने चाची को उल्टा लिटाया और कुतिया बना कर पीछे से मारना चालू किया। वो बिस्तर पर ऐसे लेटे हुए थे कि, वो मुझे और मैं उनको साफ़ देख पा रहा था।
इधर चाची मुझे देख, सरिता को मेरी जाँघों पर नाचता हुआ देख रही थी। उधर चाची की चूत में कुछ दस बीस झटके लगे ही थे कि तभी चाची बोली-
चाची: “क्या रे, सिर्फ दिखने में तेरा लंड बड़ा है। बाकी ज़ोर की ताकत तो तेरे में अनुज से कम ही लग रही है। देख उसको क्या ठोक रहा है तेरी बीवी को।”
ऐसा बोलते ही मानो वो और गुस्से से चाची को देखने लगा। उसने चाची की गांड पर एक ज़ोरदार हाथ मारा और चाची दर्द से पीठ मोड़ ली। इधर मैं भी नहीं रुका और सरिता की गांड में एक हाथ से मारा कि उसकी गांड लाल हो गयी।
अब अमर और मैं एक दूसरे की तरफ गुस्से से देख रहे थे। उधर वो चाची में ज़ोर से धक्का मार कर डाल रहा था और इधर मैं सरिता की मार रहा था।
कि तभी सरिता अपनी चरम सीमा पर आ गयी। मैंने फिर अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबोचे और अपनी ओर खींच लिया।मुझे ऐसा करते देख वो भी चाची के मम्मों को पीछे से पकड़ कर घुटनों पर खड़ा किया। अब अमर ने चाची के मम्मे कस के दबोचे हुए थे। मैं फिर से गुस्से में आया और सरिता की गांड पर ज़ोरदार मार दी और गांड दबा कर फैलाने लगा। वो मुझे देख गुस्से में चाची की चूत जम के मार रहा था।
मैं इधर सरिता को तड़पता देख उसकी मारने में लगा हुआ था। फिर अचानक उधर अमर मेरे को गुस्से में देखता रहा और शायद उसे नशे की हालत में कुछ होश नहीं रहा और चाची की चूत में ऐसे ही पोज़ीशन में पूरा माल डाल दिया। चाची उसको गाली देते हुए अलग हुई, इधर सरिता मुझसे चिपकी हुई थी और उसकी चूत से भी पानी निकलने ही वाला था।
अमर झड़ने के बाद पूरा बिस्तर पर ही ढेर हो गया। चाची उठ कर मेरे पास आयी: “क्या रे ऐसा आदमी है वो, ढंग से आग भी नहीं बुझा सकता है साला भड़वा।”
मैंने सरिता को अलग किया और फिर चूत से लंड बाहर निकाल कर सरिता को खड़ा किया और चाची के करीब मैं जाने लगा। खड़े-खड़े ही मैंने चाची को चूमना शुरू किया। हम दोनों फिर लीन होकर चूम रहे थे। मैंने चाची की चूत पर हाथ रखा और हल्का सा मलने लगा, कि तभी चाची के शरीर में अलग ही कंपन होने लगी। मैं समझ गया कि चाची भी सरिता जितनी ही चरम सीमा पर है। चाची को घुमा कर तुरंत उनके पीछे से अपना लंड अंदर डाल करझटके से पूरा अंदर तक डाल दिया।
सरिता भी हमें देख कर दोनों टांगें कुर्सी पर फैला दीं और चूत मलने लगी। इधर चाची चीखते हुए आगे कुर्सी पर झुकी और सरिता की चूत चाटने लगी। मैं देख कर हैरान था कि चाची कितनी कामुक औरत है, हर किसी से चुदने को आतुर रहती है।
चाची के झुकते ही उसके मम्मे लटकने लगे, और उधर सरिता अपनी दोनों चूचियां दबा कर सिसकियां ले रही थी। फिर लगभग दो मिनट तक हम तीनों एक ही पोज़ीशन में थे और फिर पहले सरिता कुर्सी पर झड़ गयी और फिर कुछ देर बाद मेरे ज़ोरदार झटके सह कर चाची भी ढेर हो गयी।
फिर सरिता इतनी ठुकाई से उठ नहीं पा रही थी, मैंने उसे गोद में लेकर बिस्तर पर लेटा दिया। और चाची और मैं कपड़े पहन कर वापस रूम से बाहर आकर वापस हमारे रूम में सो गये। अब चाची ने गेट पूरा बंद किया और मेरे साथ नीचे बिस्तर पर लेट गयी। चाची मेरे सीने पर हाथ रख चिपक कर लेट गयी।
मैं भी चाची की तरफ मुँह कर उसके ऊपर पैर रखा। फिर मैंने चाची की कमर को कस के अपने से जकड़ लिया, और चाची के गद्दीदार मम्मे मेरे सीने में दबने लगे।उधर मम्मे दबते ही चाची सिसकियाँ लेने लगी।
मैं: “क्या रे अरुना, बहुत चुद कर मज़ा ले रही थी साली।”
चाची: “हाँ मैं देख रही थी, तेरी आँखों से कि तू कितना गुस्से में था।”
मैं: “पर तूने उसका माल अंदर क्यों नहीं डलवाया, जबकि वो तो अंदर ज़बरदस्ती अपना माल छोड़ रहा था।”
चाची और कस के मेरे से चिपक कर बोलीचाची: “आज तक इतने लोगों से मरवाई हूँ पर किसी का माल मेरे अंदर नहीं गया है। मैं सिर्फ तेरे चाचा का माल अंदर डलवाऊँगी, और तेरा भी बस। बाकी वहाँ कोई हक नहीं है किसी का भी।”
फिर ऐसा बोलते ही चाची और मैंने जम कर एक दूसरे को चूमा और फिर सो गये।अगले दिन को, जल्दी सुबह ही दूल्हे की बारात रवाना हुई और फिर मैं और चाची, छोटू, तीनों बस से गाँव के लिये रवाना हो गये।
फिर गाँव पहुँचते ही चाची और मैं चौंक गये। वहाँ मेरे मम्मी और पापा आये हुए थे।
तो दोस्तों ये थी चाची की कहानी जहाँ मैंने उनको किसी और से चुदते हुए देखा और मैं खुद चाची के सामने अपनी पुरानी दोस्त सरिता को उसकी ही शादी की सुहागरात में चोद रहा था।
अब आगे के पार्ट में पढ़िये कि कैसे चाची और चाचा पूरे परिवार के साथ रहने शहर में आते हैं। अब आगे का अगले पार्ट में पढ़ियेगा दोस्तों।
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