मेरा नाम विकास है, मैं एक सच्ची चुदाई की कहानी लिख रहा हूँ.. जो मेरे साथ हुई थी।मेरा एक गर्ल फ्रेण्ड है.. जिसका नाम नेहा है.. हम दोनों एक ही शहर में रहते हैं.. पर हमने कभी भी एक-दूसरे को छुआ तक नहीं था। नेहा के बारे में मैं क्या बताऊँ.. जब भी मैं उसे देखता था मेरा 6″ लम्बा लन्ड खड़ा हो जाता है। उसकी चूचियाँ 34.. कमर 28.. गाण्ड 34 की.. एकदम दूध सी गोरे जिस्म वाली मानो कयामत लगती है।
हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर दु:ख की बात यह थी कि मैं कभी भी उसे चोद नहीं पाया था.. पर ऊपर वाले ने मेरी सुन ली।
मेरे घर में मैं और पापा ही रहते हैं। एक दिन काम से पापा शहर के बाहर गए.. उन्हें तीन दिन बाद आना था।एक दिन बीत गया.. दूसरे दिन मैंने 10 बजे उसे मेरे घर बुला लिया।
वो नीली जीन्स और काला टॉप पहन क आई.. उसे उस समय देख कर कोई भी उसे चोदने के लिए पागल हो जाता।
घर के अन्दर आते ही मैंने दरबाजा बन्द कर प्रिया और उसे बाँहों में भर लिया। चूमा और 4-5 मिनट बाद वो बोली- जानू अभी तो आई हूँ.. बैठने भी नहीं दोगे क्या..
फ़िर मैं उसे कमरे में ले गया और हमने रोमांटिक बातें शुरू कीं।मैंने उससे बोला- तुम क्या पहने हो?वो बोली- दिख नहीं रहा है क्या?मैंने बोला- ऊपर तो दिख रहा है.. अन्दर का नहीं दिख रहे हैं।वो बोली- अन्दर झाँक कर देख लो..
इतना सुनते ही मैं उठा और उसके पीछे जा कर उसे बाँहों में भर लिया और टॉप के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
वो बोली- मुझे भी तुम्हें बाँहों में भरना है.. सामने आओ न.. अभी से पीछे मत जाओ.. सामने जो आग लगी है.. पहले उसे बुझाना है.. उसके बाद पीछे जो मन हो सो कर लेना।
उसकी ये बात सुनकर मैं उसके सामने आया और हम एक-दूसरे को कस के जकड़ लिया और एक-दूसरे के होंठ को चूसने लगे।
कुछ देर बाद हम दोनों अलग हो गए और एक पल देखने के बाद ही नेहा फ़िर से मुझ पर टूट पड़ी, उसने मुझे बिस्तर में गिरा प्रिया और मेरे ऊपर चढ़कर मेरा टी-शर्ट उतारने लगी..मैंने भी उसे उठाया और उसका टॉप निकाल प्रिया..
म्मम्मम.. अब वो सिर्फ़ नीली जीन्स और लाल ब्रा में थी.. बहुत सेक्सी लग रही थी। नेहा अपनी चूचियां मेरे सीने में बार-बार सटा रही थी.. इससे मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।उसने मेरा पैन्ट भी उतार प्रिया, मैं सिर्फ़ चड्डी में रह गया था, अब मैंने उसे नीचे गिराया और उसकी ब्रा को दोनों हाथों से दबाने लगा। अब नेहा के मुँह से ‘आआआआह्ह्ह.. ब्रा को फ़ाड़ डालोगे क्या.. निकाल कर मसलो न..
फ़िर मैंने उसकी जींस और ब्रा दोनों निकाल दीं। अब नेहा मेरे सामने लाल रंग की पैन्टी में थी। उसकी पैन्टी के सामने का हिस्सा पूरा गीला हो चुका था, मैंने उसकी पैन्टी उतार दी।अब नेहा पूरी नंगी मेरे सामने थी और वो मेरी चड्डी उतारने लगी।
हम दोनों नंगे एक-दूसरे को कुछ देर देखते रहे।नेहा मेरे लन्ड को पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी।
मैं- मुँह में ले लो जानू!वो- अपने जानू का लन्ड चुसवाओगे.. चोदोगे नहीं..मैं- पहले चाटो तो.. फ़िर चुदाई करूँगा।
नेहा मेरा लन्ड चाटने लगी। लगभग 5 मिनट बाद मैंने अपना पानी नेहा के मुँह में ही निकाल प्रिया।
मैं 10 मिनट तक उसकी चूचियाँ दबाने लगा।नेहा- आआआह्ह.. ऊऊउआ आआआह्ह्ह ह्ह्ह.. अब तो चोदो.. आ जाओ.. आआआ!!
कुछ ही देर में मेरा फ़िर से खड़ा हो गया।अब मैंने नेहा की चूत.. जो पहले से गीली थी.. उसमें अपना लन्ड डाल प्रिया।
‘आआ आआआह्ह्ह्हह.. ऊऊऊह्ह्ह ह्ह्ह.. मर गई रे.. उम्हाआआ आआआ.. धीरे डालो न..’मैंने जोर-जोर 2-3 झटके और लगा दिए मेरा पूरा लन्ड नेहा की बुर में जड़ तक चला गया।
नेहा की आँखें लाल हो गईं.. फ़िर थोड़ी देर बाद वो भी अपनी गाण्ड उठा-उठा कर चुदवाने लगी।उसकी चूत इतनी गीली थी कि धक्कों से ‘फ़क.. फ़क..’ की आवाज आने लगी।कुछ ही पलों में नेहा के मुँह से भी आवाजें तेज होने लगीं ‘आअह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह्ह..’ और वो उत्तेजना से कांपने लगी।
चूंकि मैं चोदने से पहले नेहा के मुँह में एक बार झड़ चुका था.. इसलिए मेरा इस बार लम्बे समय तक चलने वाला था.. पर नेहा झड़ने को होने लगी थी, उसने मुझे कस कर पकड़ लिया, वो कांपते हुए मुझे धीमे स्वर में गालियाँ दे रही थी- चोद दे मुझे साले.. फ़ाड़ डाल मेरी बुर..अचानक उसकी पकड़ ढीली हुई.. मैं समझ गया कि वो झड़ गई।
अब मेरी बारी थी, मैंने अपने लन्ड के प्रहार और तेज कर दिए।नेहा समझ रही थी कि मैं भी झड़ने वाला हूँ, उसने मुझे कस कर पकड़ लिया.. मैंने भी उसे दोनों हाथों से मजबूती से जकड़ लिया।हम दोनों की साँसें तेज-तेज चलने लगीं। वो कितनी गरम थी उसकी साँसों से महसूस हो रहा था।
मैंने नेहा की चूचियाँ दोनों हाथों से पकड़ कर रखी थीं और उसकी निरंतर आवाज आ रही थी- आआआह्ह ह्ह्ह्ह.. फ़क मी.. फ़क मी.. ऊऊऊ ऊउह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह..‘पेल तो रहा हूँ जान.. चिल्ला क्यों रही हो..’‘आअह्ह्ह्ह्ह.. तो पेलो ना जान.. ऊह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह..’
फिर 4-5 तेज झटकों के साथ मैं झड़ गया, हम दोनों एकदम ही निढाल हो गए.. चिपक कर लेटे रहे।
अब दोपहर के 2 बज रहे थे, नेहा 5 बजे तक मेरे घर रहने वाली थी, करीब 30 मिनट बाद हमने फ़िर से चुम्मा-चाटी शुरू कर दी।
मेरा लन्ड और नेहा की चूत दोनों सफ़ेद पानी से तर थे।
अब दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। नेहा मेरा लन्ड और मैंने उसकी बुर चाट कर साफ़ किया।
मेरा लन्ड एक बार फ़िर खड़ा हो गया- नेहा तुम्हारी गाण्ड मारने को दिल कर रहा है..नेहा- हाँ जान.. आज तुम्हारे लिए सब माफ़.. पर जल्दी करो.. मुझे घर भी जाना है।
मैंने नेहा को घोड़ी बना कर मैं उसके पीछे गया और उसकी गाण्ड में लन्ड का सुपारा रख कर पूछा- डाल दूँ जानू..?‘हाँ डाल दो जान..’
मैंने एक जोर का झटका प्रिया।‘आआह्ह्ह्ह्ह.. मार डालोगे क्या.. अह्ह्ह्ह्ह.. छोड़ मुझे.. मुझे नहीं मरवानी है..।’
मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फ़िर से एक झटका मारा।‘ऊऊह्ह माँ मर गई रे.. ईईईईई..’वो धीरे-धीरे से रोने लगी- छोड़ दो यार.. बाद में कभी ले लेना..
मैं नहीं माना.. मैं अब तक आधा लन्ड डाल चुका था और फिर से मैंने एक झटका लगाया, इस बार मेरा पूरा लन्ड घुस गया।‘आआ आआह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह.. फाड़ दी..’ नेहा रो-रो कर बोल रही थी- ओह्ह.. मार प्रिया.. मैं तुम्हारे पास दुबारा नहीं आऊँगी..छोड़ दे’मैं उसकी बातों को अनसुना करते हुए अपना काम करता रहा।नेहा बेहोश सी पड़ी रही।
करीब 15 मिनट बाद मैंने नेहा की गाण्ड में अपना सारा पानी छोड़ प्रिया।फ़िर जब लौड़ा बहार खींचा तो देखा कि नेहा की गाण्ड से खून निकलने लगा था। नेहा बहुत रो रही थी।यह था अब तक का चुदाई का मंजर..
आगे क्या हुआ.. आपके कमेंट्स के बाद बताऊँगाsupport@mohakkisse.com