जवान लड़की

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-9

लेखक: पिंकी सेन दिनांक: 03-10-2025 पठन समय: 11 मिनट

दोस्तो, आपने मेरी इस सेक्सी कहानी में अब तक जाना कि दीपक नेहा के बारे में बताने से पहले उसी के सन्दर्भ में अपनी दीदी के बारे में बता रहा था और उसकी चुदक्कड़ फ्रेंड टीना सुन रही थी।अब आगे..

टीना- इट्स गुड यार.. ये तो बहुत ख़ुशी की बात है.. मुझे भी दीदी से मिलवाना, आज तक उनके बारे में बस सुना है.. उन्हें देखा नहीं है।दीपक- हाँ ज़रूर मिलवा दूँगा तुझे..टीना- यार बुरा मत मानना.. कहानी का हैप्पी एंड हो गया मगर नेहा नहीं आई, ये कन्फ्यूजन दूर करो.. मेरा इस कहानी का नेहा से क्या सम्बन्ध है?दीपक- अबे साली तेरी समझ में नहीं आया क्या नेहा मेरी दीदी की बेटी है और आर्यन उसका छोटा भाई है?

टीना- ओ माय गॉड… मगर कन्फ्यूजन फिर भी वैसा का वैसा है.. नेहा तो बच्ची है और तेरी हालत तो ऐसी थी जैसे कोई गजब का माल देखा हो।दीपक- यार टीना तू समझ नहीं रही है वो लोग जब बंगलोर गए थे नेहा बच्ची ही थी.. आज जब उसको देखा तब भी मेरी नजर में बच्ची ही लगी, लेकिन वो अब बड़ी हो चुकी है, पूरे 18 की! और दोपहर से शाम तक जो हुआ, पूछ मत यार मेरी क्या हालत हुई है!टीना- ओह गॉड अब समझी कुछ ना कुछ गड़बड़ तो हुई है.. यार बता जल्दी नहीं तो मेरा दिमाग़ सोच-सोच कर फट जाएगा।दीपक- यार तेरा क्या मेरा खुद का दिमाग़ घूमा हुआ है।टीना- प्लीज़ यार बता ना?दीपक- अच्छा सुन.. वैसे तो वो लोग रात को शिफ्ट हो गए थे, मगर मेरी मुलाकात उनसे सुबह हुई।

टीना को अभी भी दीपक की बात समझ नहीं आ रही थी मगर उसने सोचा दोबारा पूछेगी तो दीपक गुस्सा होगा इसलिए वो चुपचाप बैठी थी।

दीपक- सुबह हमने साथ नाश्ता किया फिर गप्पें लड़ाईं और दोपहर लंच तक सब कुछ ठीक था। उसके बाद मैं अपने कमरे में आराम करने चला गया बाकी सब नीचे बैठे बातें कर रहे थे।टीना- अच्छा फिर क्या हुआ?दीपक- फिर क्या होना था.. रोज की तरह मैंने अपने सारे कपड़े निकाले सिर्फ़ एक पतला सा बरमूडा पहना और लेट गया।टीना- सारे कपड़े मतलब.. अंडरवियर भी छी कितने गंदे हो तुम.. सिर्फ़ बरमूडा में सोते हो हा हा हा हा हा..दीपक- अबे साली, लड़के ऐसे ही सोते हैं.. अंडरवियर सारा दिन पहने रहेंगे, तो लंड को आराम कैसे मिलेगा?टीना- पता है मेरे जानू.. मैं तो बस ऐसे ही मजाक कर रही थी।

दीपक- तुझे मजाक सूझ रहा है मेरी टेंशन से हालत खराब है।टीना- यार तू बुरा मत मानना मगर तेरी कहानी मेरे समझ के बाहर है। नेहा से तू मिला, बातें की, फिर सो गया तो शाम को ऐसा क्या हुआ जो तू इतना पागल हो गया?दीपक- ऐसे तेरी समझ में कुछ नहीं आएगा.. मैं तुझे पूरी बात बताता हूँ, जिसकी वजह से ये सब हुआ ओके!

ओ हैलो आप लोग भी कन्फ्यूज हो ना.. तो भाई ऐसे ना तो आपको समझ आएगा ना मज़ा आएगा। इससे अच्छा आपको सीधा दीपक के घर लेकर चलती हूँ। वहाँ का नजारा देख के शायद मज़ा आ जाए।

दीपक अपने बिस्तर पर आराम से लेटा हुआ था तभी नेहा कमरे में आती है और सीधा दीपक के पेट पर आकर बैठ जाती है।

नेहा देखने में एकदम स्वीट सी है, उसने पिंक टी-शर्ट और ब्लैक स्कर्ट पहना हुआ था।

आपको बता दूँ नेहा बहुत खूबसूरत लड़की है.. छोटे-छोटे गहरे काले बाल, एकदम बड़ी-बड़ी आँखें और आँखों का कलर नीला.. जैसे कोई लेंस लगाया हुआ हो, चाँदी जैसा चमकता रंग, सीना तो ज़्यादा नहीं मगर संतरे एकदम ठोस हैं और हाँ इसकी जांघें मोटी-मोटी और गांड बाहर को निकली हुई है, वो बहुत मस्त लग रही थी। चलो अब आगे का सीन देखते हैं।

दीपक- अरे ये क्या है नेहा ऐसे कोई करता है क्या.. चलो नीचे उतरो।नेहा- क्यों उठूँ मैं.. हाँ पहले भी ऐसे ही बैठती थी ना.. अब भी ऐसे ही बैठूंगी। आप मेरे प्यारे मामू हो ना।दीपक- अरे उस टाइम तू छोटी थी अब मोटी हो गई है हा हा हा हा..नेहा- अच्छा मुझे मोटी कहा हाँ.. अभी रूको आपको बताती हूँ।

इतना कहकर नेहा ने दीपक के हाथ पकड़ लिए और उसके ऊपर लेट गई और अपने दांतों से उसकी गर्दन पर काटने लगी।

दोस्तो, गड़बड़ यहीं से शुरू हुई। इसी खेल-खेल में नेहा की चुत दीपक के लंड पर सैट हो गई थी और मस्ती की वजह से चुत धीरे-धीरे लंड पर घिस रही थी। उसके छोटे-छोटे संतरे दीपक के सीने से सटे हुए थे। अब ऐसी पोज़िशन में आदमी का ध्यान भले ना जाए मगर ये कम्बखत लंड जो है ना.. ये खड़ा होकर अच्छे ख़ासे इंसान को सोचने पे मजबूर कर देता है।

वही हाल दीपक का हुआ.. उसका लंड एकदम तन गया। अब उसको नेहा कच्ची कली नज़र आने लगी।दीपक- ओफ क्या कर रही हो नेहा आह.. हटो ना अफ..नेहा- क्यों मज़ा आया ना.. अब बोलो मोटी हा हा हा हा..

दीपक ने अपने हाथ छुड़ाए और नेहा को नीचे पटक कर उसके ऊपर आ गया और उसको गुदगुदी करने लगा।गुदगुदी करते हुए दीपक के हाथ उसके संतरों से भी टकरा गए.. क्या कड़क चूचे थे और एक बार उसकी स्कर्ट भी पूरी ऊपर को हो गई तो उसकी सफ़ेद पेंटी में छुपी उसकी फूली हुई चुत भी उसको दिखी। बस दोस्तों शैतान दिमाग़ में आने के लिए ये बहुत था।

अब दीपक गुदगुदी के बहाने उसके जिस्म से खेलने लगा.. उसकी चुत पे लंड सैट करके आगे-पीछे झटके देने लगा।

नेहा- आह.. मामू छोड़ो ना.. उफ़ क्या कर रहे हो आह.. प्लीज़ आह.. नीचे कुछ चुभ रहा है।दीपक- बदमाश मुझे काटा था, तब मुझे भी दर्द हुआ था.. अब बोल दोबारा ऐसा करेगी?नेहा- नहीं मामू सॉरी.. अब ऐसा नहीं करूँगी प्लीज़ छोड़ दो।

दोस्तों दीपक का लंड एकदम लोहे जैसा सख़्त हो गया था.. इस वक्त उसने अंडरवियर भी नहीं पहना था तो बरमूडा तन के तंबू बन गया।

दीपक को पता था उसका लंड बेकाबू हो गया है.. वो इस तरह उठा कि नेहा को तंबू ना दिखे, वो करवट लेकर अलग हो गया।

नेहा- मामू आप कितने अच्छे हो।

ये कहकर नेहा ने दीपक के गाल पर एक किस कर दी। अब ये तो आग में घी डालने वाली बात थी। बेचारा दीपक सोच में पड़ गया कि क्या करे.. एक बार सोचा कि नहीं ये ग़लत है, तो दूसरी आवाज़ आई कि कुछ ग़लत नहीं ये तो नादान है.. मगर तू तो पक्का खिलाड़ी है, थोड़े मज़े लेने में क्या जाता है।

दीपक- अच्छा एक बात बता.. तू ऊपर कैसे आई बाकी सब कहाँ हैं?नेहा- मॉम और डैड घर चले गए.. वो उनको सामान वगैरह सैट करना बाकी है ना.. तो यहाँ से भी अंकल आंटी और काम वाली बाई सब साथ गए हैं। मैंने कहा मुझे मामू के साथ खेलना है तो मैं यहीं रुक गई।दीपक- और आर्यन नहीं रुका ऐसे तो वो मुझसे बहुत चिपकता है?नेहा- उसने तो बहुत ज़िद की मगर उसको बुखार है ना.. तो मॉम ने उसको मना किया और अपने साथ ले गईं।

नेहा की बात सुनकर दीपक के दिमाग़ में शैतानी प्लान आ गया.. वो जान गया था कि घर में कोई नहीं है, अब वो खुलकर नेहा के मज़े ले सकता था।

दीपक- अच्छा ये बात है चल तुझे झुला देता हूँ.. जैसे पहले झुला देता था।नेहा- वाउ मामू.. बहुत मज़ा आएगा।

दीपक बेड से उठा और पहले उसने दरवाजे को लॉक किया.. फिर खिड़की भी बंद कर दी और कमरे की लाइट भी बुझा दी। उसके बाद सामने आराम कुर्सी पर जाकर बैठ गया।

दीपक- आ जाओ नेहा मेरी गोदी में बैठ जाओ.. फिर मैं हिलूँगा तो मज़ा आएगा।

दोस्तो, पहले भी दीपक ऐसे ही नेहा को आराम कुर्सी पर बैठा झूला झुला देता था मगर आज तो उसका इरादा कुछ और ही था।

नेहा- मामू ये क्या.. आपने तो अंधेरा कर प्रिया, कुछ दिख नहीं रहा।दीपक- अरे पगली दोपहर का टाइम है लाइट की क्या ज़रूरत है और अंधेरे में ज़्यादा मज़ा आएगा.. तू आ तो सही।

नेहा ख़ुशी से कुर्सी के पास आई और जब वो बैठने लगी तो दीपक ने चालाकी से उसका स्कर्ट ऊपर को कर प्रिया।

अब नेहा दीपक के खड़े लंड पर बैठी थी बीच में बस पतला सा बरमूडा और पेंटी आ रही थी।

नेहा- ऑउच मामू मुझे नीचे कुछ चुभ रहा है।दीपक- अच्छा ऐसी बात है.. तू खड़ी हो एक बार फिर नहीं चुभेगा।

नेहा खड़ी हुई तो उसकी पीठ दीपक की तरफ थी उसने जल्दी से बरमूडा नीचे किया और अपना लंड बाहर निकाल लिया और नेहा को धीरे से बैठने को कहा।

जैसे ही नेहा बैठी दीपक ने दोबारा उसका स्कर्ट ऊपर कर प्रिया। अब लंड नेहा की जाँघों से होता हुआ सीधा उसकी चुत से जा सटा था और कमरे में अंधेरा होने से नेहा ये सब देख भी नहीं पाई।

दीपक अब कुर्सी को हिला रहा था और धीरे-धीरे लंड चुत पर घिस रहा था।

दीपक- क्यों नेहा मज़ा आ रहा है ना।नेहा- आह.. हाँ मामू बहुत मज़ा आ रहा है उफ़ लेकिन नीचे कुछ गीला-गीला अजीब सा लग रहा है।दीपक- अरे मेरी भोली नेहा, तुम ज़्यादा ध्यान मत दो बस मज़ा लो।

दीपक बातों में उलझा कर उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब नेहा के संतरे भी सहला रहा था।

नेहा को समझ आ रहा था या नहीं ये तो पता नहीं मगर मज़े से उसकी आँखें बंद हो गई थीं.. और उसके मुँह से मादक सिसकारियां निकलनी शुरू हो गई थीं।

नेहा- आह.. ससस्स मामू ऐसा झूला आह.. अपने पहले कभी नहीं प्रिया आह.. कितना मज़ा आ रहा है।दीपक- तू पहले छोटी थी ना.. तो तुझे पता नहीं था। अब तू बड़ी हो गई है तब मज़ा आ रहा है और जोर से करूँ तो और मज़ा आएगा तुझे।नेहा- आह.. हाँ मामू मैं भी इसस्स.. यही कहने वाली थी.. उफ़फ्फ़ जोर से करो ना.. आह..

दीपक को अब अहसास हो गया था कि नेहा की चुत रिसने लगी है और उसका पानी वो अपने लंड पर महसूस कर रहा था। उसको भी कच्ची चुत पर लंड रगड़ने का अलग ही मज़ा मिल रहा था।

तो मेरे दिलजले साथियो… जवानी की दहलीज पर आई हुई एक नई और कच्ची चुत का मजा मिल रहा है न.. अब जल्दी से मेरी इस सेक्सी कहानी पर मेल लिखो।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com