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Group Sex Story पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,140 बार

रेलवे स्टेशन के अँधेरे में मेरी चुदाई हुई

रोमन

24 Feb 2021 को प्रकाशित

रेलवे स्टेशन के अँधेरे में मेरी चुदाई हुई
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हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सविता है। मेरी उम्र 30 साल की है और मेरा फिगर 38-28-40 का है. मैं अयोध्या उत्तरप्रदेश की रहने वाली हूँ। मैं थोड़ी सांवली हूँ लेकिन मेरे बूब्स मोटे और टाइट हैं और मेरी गांड भी भारी और मोटी है, बाहर को उठी हुई है।

मैं हर तरह के कपड़े पहनती हूँ जिसमें मेरे पूरे शरीर की गोलाइयां, मेरे जिस्म के उभार साफ दिखाई देते रहें। इस वजह से मैं और भी ज्यादा सेक्सी दिखती हूँ और लोग मुझे ज़्यादातर देखते भी रह जाते हैं।

मैं खुद तो सेक्सी दिखती ही हूँ, मुझे सेक्स करने का भी बहुत शौक है. मुझे हमेशा लंड की जरूरत रहती है. मैं बहुत सारे लोगों से चुद चुकी हूँ और मैं अपनी चूत चुदाई करवाने के लिए नये नये बहाने ढूंढती रहती हूँ।

तो अब मैं आप लोगों का ज्यादा टाइम न लेते हुए सीधा अपनी नोनवेज कहानी पर आती हूँ।

यह घटना आज से करीब दो साल पहले की है जब मुझे कुछ ज़रूरी काम से अयोध्या से कानपुर जाना था। गर्मी का टाइम था तो मैंने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी जो बहुत हल्की थी, झीने कपड़े की थी, जिसमें से मेरा पूरा बदन साफ दिख रहा था.

और मेरे ब्लाउज का पीछे से काफ़ी डीप गला था और आगे से भी गहरा गला होने के कारण मेरी अच्छी ख़ासी क्लीवेज़ यानि स्तनों की घाटी दिख रही थी. और आगे झुकने पर तो लगभग पूरे बूब्स जैसे ब्लाउज के गले से बाहर उमड़ पड़ते थे. स्लीवलेस ब्लाउज था मेरा … और साड़ी मैं नाभि के नीचे बाँधती हूँ जिससे मैं और भी सेक्सी दिखूँ और लोग मुझे देखें। इससे मेरी नाभि और पूरा पेट और पीछे से पूरी नंगी कमर दिखती है।

गर्मी का टाइम था. ट्रेन के सामान्य अनारक्षित डिब्बे में मैं चढ़ गयी. उस डिब्बे में पहले से ही बहुत भीड़ थी. किसी तरह से मैं भी उस डिब्बे में चढ़ी और जा कर मैंने अपना एक बैग सीट के नीचे रख प्रिया।बैठने के लिए सीट तो मिलने से रही … तो मैं उसी भीड़ में खड़ी रही। गरमी बहुत थी. मेरे चारों तरफ़ सभी मर्द थे, उन के बीच में मैं भी खड़ी थी.

जब 10 मिनट के बाद ट्रेन चलने लगी तभी एक झटका लगा. तो मेरे पीछे खड़े आदमी ने मेरी उभरी हुई गांड पर अपना हाथ टच किया. मैं समझ तो गयी कि साले ने जानबूझ कर मेरे चूतड़ों पर हाथ मारा है पर मैं कुछ नहीं बोली.

फिर मेरे सामने जो आदमी खड़ा था, उसकी पीठ मेरी ओर थी, वो थोड़ा पीछे हुआ तो अब उसकी पीठ मेरे बूब्स को टच हो रही थी। मैं अब भी समझ गयी कि इस साले को पता है कि पीछे लड़की खड़ी है, इस लिए पीछे होकर मजा ले रहा है. पर अब भी मैंने उसे कुछ नहीं कहा.

मेरे कुछ ना बोलने पर धीरे धीरे उन दोनों का हौसला बढ़ता गया. अब पीछे वाला मेरे गांड पर जानबूझ कर बार बार अपना हाथ तो कभी अपना लंड टच कर रहा था.और मेरे आगे वाला पीछे दबाव डाल डाल कर मेरे बूब्स को अपनी पीठ से रगड़ रहा था..

थोड़ी ही देर बाद पीछे वाले आदमी ने एक हाथ से मेरी कमर को पकड़ या. जैसे ही उसने मेरी कमर को पकड़ा, मैं एकदम तड़प सी गयी और मेरे पूरे शरीर में एक करेंट सा बह गया.अब मुझे भी मज़ा आने लगा था उन दोनों आदमियों की हरकतों पर! और मैं भी उन दोनों की इन हरकतों को एंजाय करने लगी।

अब सामने वाला मेरे थोड़ा साइड में हुआ और अपनी कोहनी से मेरे बूब्स को दबाने लगा. और पीछे वाला आदमी मेरी कमर को और अब मेरे पेट को सहला रहा था.

फिर उसने मेरी नाभि पे उंगली फेरना शुरू किया. उसकी इस हरकत से मैं और भी उत्तेजित हो गयी, मेरी चूत में सनसनाहट सी होने लगी. मुझे मजा आ रहा था, मेरा जिस्म गर्म होने लगा था कामवासना की अग्नि से!

और सामने वाला अब मेरी तरफ चेहरा कर के खड़ा हो गया और मेरे बूब्स को दबाने लगा. अब नजारा यह था कि मेरा एक बूब आगे वाला दबा रहा था और दूसरा बूब पीछे वाला मसल रहा था.

पीछे वाले आदमी का दूसरा हाथ मेरी नाभि पर था और उसका खड़ा लंड जो 8 इंच से कम नहीं था, वो एकदम मेरी गांड पे सहला रहा था.और मैं तो जैसे सातवें आसमान पे थी।

अब मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने पीछे वाले का लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. अब दोनों मर्दों को पता था कि मैं गर्म हो चुकी हूँ और दोनों से मजा ले रही हूँ.सामने वाले आदमी ने हिम्मत मारी और उसने अपना एक हाथ मेरे ब्लाउज़ के अंदर डाल प्रिया और उसके हाथ में मेरे नंगे बूब्स थे.

वो ज़ोर ज़ोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरे निप्पलों को सहलाने लगा. मैं ब्रा पहनती नहीं हूँ इसलिए मेरे नंगे बूब्स उसके हाथ में थे. और यही काम वो दूसरा वाला भी करने लगा.

मैंने भी दूसरे हाथ से सामने वाले का लंड पकड़ लिया. इसका लंड 7 इंच का होगा.

बहुत देर यही सब हुआ. फिर एक स्टेशन आया बीच में … मुझे वहां उतरना तो नहीं था पर मैं जान बूझ कर वहां उतर गयी. अभी मेरा स्टेशन दूर था लेकिन मेरे दिमाग़ में कुछ और ही खुराफात चल रही थी।

अब मैं ट्रेन में तो सब के सामने चुद नहीं सकती थी तो इसी लिए मैं यहाँ उतर गयी. इस स्टेशन से कुछ दूरी पे ही मेरा स्टेशन था और मुझे मालूम था कि यहाँ से अभी कुछ देर में दूसरी ट्रेन जाएगी तो मैं उससे चली जाऊंगी.

इस स्टेशन पे बहुत सन्नाटा और अंधेरा था तो मुझे उम्मीद थी कि यहाँ पर मेरी चुदाई भी हो सकती है।

अब जैसे ही मैं ट्रेन से नीचे उतरी, वो दोनों आदमी भी मेरे पीछे पीछे उतर गये. अब 2 मिनट बाद वहाँ से ट्रेन चली गयी और मैं स्टेशन से थोड़ा दूर आ गयी सन्नाटे में!

वो दोनों चोदू मर्द अब भी मेरे पीछे आ गए थे। अब उसमें से एक आदमी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे चूमने लगा पीछे से!अब आगे वाला मेरे सामने आया और मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर मेरे दोनों बूब्स को दबाने लगा और बोला- बहुत तड़पाया है रानी तुमने! अब तुम्हारी सारी जवानी चूस डालूँगा.

मेरे ब्लाउज के हुक पीछे थे तो अब पीछे वाले ने पीछे से मेरे ब्लाउज के सारे हुक खोल कर वहीं नीचे डाल प्रिया. अब मेरी दोनों चूचियां आज़ाद थी। मेरे दोनों नंगे बूब्ज़ को देख कर सामने वाला तो जैसे पागल हो गया और उसने मेरा एक निप्पल अपने मुख में ले लिया. वो खूब ज़ोर ज़ोर से उसे चूसने और दबाने लगा. इतना कि मेरी दोनों चूचियां लाल हो गयी.

अब पीछे वाले ने मेरी साड़ी उठाई पीछे से और मुझे स्टेशन पर लगे बेच पर हाथ रखवा कर घोड़ी बनाया और मेरी गांड पर थोड़ा सा थूक लगा कर अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल प्रिया.मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ तो मैं थोड़ा चिल्लाई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’तो सामने वाला बोला- चुप रंडी … आवाज़ मत कर!

अब वो मेरे नीचे बेच पर लेट गया अपनी पैंट उतार कर और अपना 8 इंच का पूरा लंड मेरे मुंह में डाल प्रिया. उसके लंड में काफी बदबू थू पर कामुकता के चलते मैं उस गंदे लंड को भी मज़े से चूस रही थी.

और पीछे वाला मर्द मेरी गांड को ट्रेन की रफ़्तार से चोद रहा था.

मैं जिसका लंड चूस रही थी, 10 मिनट बाद उसने मुझे अपने खड़े लंड के ऊपर बैठा लिया. मेरी गर्म गीली चूत में उसका लंड ऐसे घुस गया जैसे मक्खन में गर्म चाकू!

अब उसने मेरी चूत मारनी शुरू की और दूसरा आदमी मुझे अपना लंड चुसाने लगा।

मैं तो जैसे हवा में उड़ रही थी … मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था अपनी इस तरह दो अनजान मर्दों से खुले आम रेलवे स्टेशन पर अपनी चूत चुदाई करवाने में।

ठोडी देर बाद अब फिर से मुझे दूसरे वाले ने मुझे पहले वाले की छाती पर लिटा प्रिया और मेरी गांड का छेद उसके सामने आ गया. और दूसरे आदमी ने मेरी गांड में अपना लंड डाल प्रिया.अब मेरी चूत और गांड दोनों में दो अनजान मर्दों के लंड थे.

दोनों ने मिल कर मुझे चोदना शुरू किया. अब मुझे और भी मज़ा आने लगा और मैं बस ‘उफ फफ्फ़ एहह अहह फक मी हार्ड …’ बोलने लगी.वो आदमी भी बोला- साली इस रंडी को चोद कर मज़ा आ गया!

मैं फिर से मजा ले ले कर बोलने लगी- उफ्फ़ मेरे राजा … चोदो अपनी रानी को रंडी बना कर … और चोदो मुझे … अहह उफ्फ़ … उमाहह … मेरी चूत और गांड की सारी प्यास बुझा दो.

10 मिनट की डबल चुदाई के बाद वे दोनों खड़े हुए और दोनों ने अपना लंड मेरे मुंह के सामने कर प्रिया और मैं लोलीपोप के तरह दोनों का लंड चूसने लगी बारी बारी!

करीब 2 मिनट के बाद दोनों मेरे मुंह में झड़ गये और मैंने उन दोनों की सारी मलाई चाट ली. जो थोड़ी बहुत मलाई मेरे चेहरे पर गिरी थी, वो भी मैंने उंगली से समेट कर चाट ली.

अब मैंने अपना ब्लाऊज खोजना शुरू किया. एक आदमी ने मेरा ब्लाउज लाकर प्रिया. मैंने जल्दी से उसे पहना, सारे कपड़े ठीक किये, बाल ठीक किये.उसके बाद मैंने उन दोनों की ओर मुस्कुरा कर देखा तो वो दोनों बोले- मैडम आपको चोद कर हमें बहुत मज़ा आया.मैंने भी बोला- मुझे भी बहुत मज़ा आया अपनी चूत और गांड की चुदाई करवा कर।

यह बोल कर मैंने अपने दोनों हाथों से उन दोनों के लंड मसल दिए.इसके जवाब में उन दोनों ने भी मेरे बूब्ज़ और चूतड़ मसल दिए.

अब मैं वहाँ से सीधे स्टेशन की मुख्य इमारत की तरफ आई तो देखा कानपुर जाने वाली दूसरी ट्रेन खड़ी थी. मैं तुरंत एक डिब्बे में चढ़ गयी और सीधे कानपुर आ गयी।

रेलवे स्टेशन पर मेरी चूत और गांड की जोरदार चुदाई की गर्म नोनवेज कहानी आपको कैसी लगी? कमेंट्स करके मुझे बताएं.धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
m

manak_nahar

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

अविनाश 8

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

प्रिया रानी जयपुर

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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