नमस्कार दोस्तो, मैं काफी समय से सोच रहा था कि अपना अनुभव आप सभी के साथ बाँटूं। यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है। जब मैं ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था।
बात 2007 की हैं, ठंड का मौसम था। मैं पतंग उड़ाने का काफी शौकीन हुआ करता था, दिन-भर पतंग-बाजी करता। एक दिन की बात हैं, जब मैं पतंग उड़ा रहा था, तभी मेरी पतंग मेरे घर के सामने वाली छत पर जाकर फँस गई। उस छत एक खूबसूरत सेक्सी लड़की रोज शाम टहला करती थी, उसने मेरी पतंग पर अपना मोबाईल नम्बर लिख प्रिया।
पहले उसके बारे में बता दूँ कि वह दिखने में कैसी लगती थी। उसका नाम रूपा है, जैसा नाम उससे कई गुना सुन्दर उसका जिस्म है।मैं उसे आज भी जानू कहकर बुलाता हूँ। इसी नाम से हम एक-दूसरे को आज भी बुलाते हैं। उसकी उम्र 22 साल… बिल्कुल चुदाई की उम्र। इस उम्र में लड़कियाँ चुदाई के लिए बहुत ज्यादा तड़पती हैं।
उसकी चूची का साईज 34” कमर 32” गांड तो पूछो ही मत गोल-गोल। दिल तो करता था रोज उसकी गांड मारूँ…! चूची में तो इतना रस (दूध) भरा पड़ा था कि पूरी जिदंगी पीऊँ तब भी खत्म न हो।
उसके चूची पर भूरे किसमिस के दो दाने … उसी के पास का वो काला तिल.. हय .. पूछो मत यारों.. दिल तो करता था.. साली का तिल खा जाऊँ। आज शादी के पाँच साल बाद भी वो चूत की रानी और बुर की शहजादी है।
हम रोज घंटों बात करते और रोज रात को मैं उसकी पेलाई करता और वो बहुत चिल्लाती और जब उसके बुर से पानी निकलता… तब कहीं जाकर शांत होती..!
जब तक पूरे रात भर में तीन से चार बार झड़ नहीं जाती तब तक उसके बुर को सन्तुष्टि नहीं मिलती।लेकिन असलियत यह है कि ये सारी चीजें रोज रातों को फोन पर होतीं। जिसे हम फोन सेक्स कहते हैं।
एक रोज की बात है, उसकी दीदी अपने मायके आई थीं, उसकी दीदी की एक, दो साल की बेटी थी जिसे अपने साथ उसने रात को सुलाया था। हमारी बातें रोज रात हुआ करती थीं। उसने मुझे बताया कि आज रात उसकी दीदी की बेटी उसके साथ सोई है, तो हमने प्लानिंग की कि आज की रात कुछ अलग ढंग से सेक्स करेंगे।
रात के करीब 1:00 बजे हमारी बातें शुरु हुईं।मैं- जान, क्या पहना हुआ है…?जैसा कि आप सभी जानते हैं कि लड़कियाँ चुदने से पहले थोड़ा नाटक करती हैं.. खैर छोड़िए इन सभी बातों को..रूपा- लाल रंग की नाईटी पहनी है..!मैं- अपनी नाईटी उतारो।रूपा- उतार दी।
मैं- अब क्या पहना है..!रूपा- सिर्फ ब्रा और पैंटी..मैं- ब्रा और पैंटी किस रंग की है?रूपा- काली..मैं- ब्रा खोलो…रूपा- खोलती हूँ…क्या करोगे?मैं- प्यास बुझाऊँगा…रूपा- किसकी?मैं- तुम्हारी चूची और चूत की.. पैंटी खोलो..रूपा- आकर खुद ही खोल दो..मैं- ब्रा और पैंटी दोनों उतारो…रूपा- नहीं.. डर लगता है !मैं- क्यों?रूपा- कहीं तुम कुछ करोगे तो नहीं..!मैं- प्यार करूँगा।रूपा- और..!
माँ-बेटी को चोदने की इच्छा-28
मैं- बहुत प्यास लगी है !रूपा- क्या पियोगे?मैं- तुम्हारा दूध..रूपा- तो पी लो न…!मैं- पहले कभी किसी को अपना दूध पिलाया है?रूपा- नहीं पर दिल तो बहुत करता है।मैं- अपने दूध को दबाओ।रूपा- दबा रही हूँ।मैं- जरा जोर से दबाकर, मसककर दूध निकालो न ..!रूपा- आ..आ..आ.आ..!मैं- और जोर से..!रूपा- आ..आ..आ.आ..मैं- और जोर से…रूपा- आ..आ… आ… आ ओ… माँ… मर गई.. नीचे से कुछ निकल रहा है..मैं- क्या?रूपा- पता नहीं क्या है… शायद पानी की तरह है… हाँ पानी ही है.. अजीब सा महक रहा है।
मैं- नीचे कुछ करने को दिल कर रहा है?रूपा- हाँ..मैं- अपने- बुर में अंगुली डालो।रूपा- बुर क्या होती है..?मैं- नीचे वाले छेद को बुर कहते हैं।रूपा- अच्छा वो पता है….तुम्हारे वाले को क्या कहते हैं..?मैं- तुम बताओ..!रूपा- लंड… तुम्हारा कितना बड़ा है?मैं- तुम्हें कैसा साईज पसंद है?रूपा- सुना है 9”लम्बा और 3” मोटा हो.. तो ज्यादा मजा आता है… तुम्हारा कितना है?मैं- 9” लम्बा और 3.5” मोटा..।रूपा- मेरी चूत में जाएगा या नहीं…! सुना है बहुत दर्द होता है?मैं- दर्द में ही तो मजा है… क्यों दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकती हो?रूपा- जान तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी सह सकती हूँ।मैं- अपने नीचे वाली में ऊँगली करो न..!रूपा- जब से बात कर रहीं हूँ… तब से कर ही रही हूँ..।मैं- उसे अन्दर-बाहर करो..रूपा- कर रही हूँ..मैं- और करो… और करो… तेज करो.. और तेज करो… और तेज..!रूपा- प्लीज जान मुझे आकर पेल दो.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा हैं..प्लीज..!मैं- कहीं आस-पास कोई चीज है लंड की तरह मोटी..?रूपा- रूको देखती हूँ… हाँ है…मैं- क्या है… कैसा है?रूपा- कायम-चूर्ण की खाली बोतल है… बहुत मोटी है..!मैं- उसे अपने नीचे बुर में लगाओ…रूपा- नहीं बहुत मोटा है… यह नहीं जा पाएगा..मैं- जैसे बोल रहा हूँ… वैसे करो… क्रीम है?रूपा- हाँ.. है.. पर मुझे डर लग रहा है।
मैं- तुम्हें मेरी कसम है.. जैसा बोल रहा हूँ वैसा करती जाओ.. मुझ पर विश्वास करो। ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे तुम्हें परेशानी हो… विश्वास करो सिर्फ एक बार.. मेरी बात तो मानो..रूपा- ठीक है… मगर करना क्या होगा?
मैं- अपनी चूत पर क्रीम लगाओ और साथ-साथ कायम-चूर्ण की बोतल पर भी लगाओ और धीरे-धीरे उसे अन्दर डालो..रूपा- लगा रही हूँ… दर्द हो रहा है… आ..अई..मर गई.. सी.अ..आ.आ… आआआआ..मजा आ रहा हैं.. साथ-साथ दर्द भी हो रहा है।मैं- रूपा और जोर से करो.. बुर के अन्दर पूरा डालो.. थोड़ा सा दर्द और बाद में मजे ही मजे। कितना अन्दर गया…?रूपा- थोड़ा सा बाहर हैं… आ..आ… आ…आ.. अई… पूरा का पूरा अन्दर चला गया.. सिर्फ ढक्कन का मुँह ही बाहर रह गया है.. बहुत दर्द हो रहा है..मैं- अन्दर-बाहर करो जल्दी-जल्दी रूकना नहीं करती जाओ… और तेज.. और तेज… बच्चा कहाँ हैं… सोई है….उसे अपना दूध पिलाओ जल्दी और जोर-जोर से अपने बुर को पेलती रहो.. जल्दी से दूध भी पिलाओ बच्चे को..रूपा- पी रही है.. आ.आ.आ नहीं… आ.आ.आ काट रही है.. बहुत मजा आ रहा है.. जान मेरे चूची का अंगूर एकदम से बाहर फेंक प्रिया है… लगता दूध निकल रहा है… बहुत खींच-खींच कर पी रही है..
मैं- दूसरी वाली चूची में उसका मुँह लगा दो..रूपा- छोड़ नहीं रही है… आ..आ…आ…आ मर गई रे… आ मेरे चूची को काट-काट कर जान ले लिया इसने.. आ..आ..आ.आ लगा प्रिया दूसरे चूची में… लगता है काफी भूखी है..मैं- जान कुछ और भी हैं लंड की तरह लम्बा… कुछ भी..!रूपा- नहीं… हाँ टार्च हैं…प्लास्टिक की है… लम्बी है.. जल्दी बोलो..क्या करना है..!मैं- ज्यादा क्रीम लगाना जल्दी से… टार्च पे और अपने गांड के अन्दर भी..रूपा- लगा प्रिया अब…मैं- उसे अपनी गांड में लगा कर पेलो.. थोड़ा-सा दर्द होगा मगर रूकना मत..रूपा- आ….आ.आ.आ.आअई…ई..ईआआआ….ई जान तुम भी मुठ मारो न..!मैं- सच बोलूँ तो कब से मैं भी मुठ ही मार रहा हूँ… अभी तक तीन बार झड़ भी चुका हूँ।रूपा- मैं तुम्हारे लंड की मुठ मारना चाहती हूँ… और तो और तुम्हारे लंड का रस-पान करना चाहती हूँ।
मैं- एक बात बताओ क्या कभी किसी ने तुम्हारी बुर को छुआ है..?रूपा- पागल हो क्या !मैं- न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा हैं…तुम्हें मेरी कसम है.. प्लीज सच बताओ..न !रूपा- हाँ…काफी दिन पहले की बात है… मैं और मेरा भाई एक ही पलंग पर सोते थे…।मैं- फिर..!रूपा- मैंने स्कर्ट पहना था, गरमी की वजह से मैंने पैंटी नहीं पहनी थी। रात को भईया मेरी बुर में दो घंटे तक अपनी उंगली पेलते रहे…मैं- फिर..!रूपा- चूंकि मेरा यह पहला अहसास था इसलिए मुझे भी काफी मजा आ रहा था… इन बातों को छोड़ो न..!मैं- जान.. लाईट जला कर बुर को देखकर कस-कस कर उसी बोतल से पेलती जाओ।रूपा- जान… ये क्या..! पूरा का पूरा बिस्तर खून ही खून है..!मैं- घबराओ मत… तुम्हारी बुर की सील टूटी है…
इस प्रकार मैंने फोन पर ही रूपा की बुर की सील तोड़ दी…तो दोस्तो, मेरी यह सच्ची घटना पर आधारित यह कहानी। बताना कैसी लगी।
जल्द ही आगे मैं आपको रूपा के साथ होटल में अपनी रूपा की चुदाई के बारे बताऊँगा।मुझे ई-मेल करें, मुझे इंतजार रहेगा।