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गे सेक्स स्टोरी • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 534 बार

मारी भाई की गांड

mayankjwr

11 Oct 2012 को प्रकाशित

मारी भाई की गांड
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प्रेषक : मयंक वर्मा

मैं बारहवीं क्लास का लड़का हूँ मेरी उम्र बीस साल हैं मेरा लंड आठ इंच का है। मेरा शुरू से ही आकर्षण लड़कियों से ज्यादा लड़कों में रहा हैं क्योंकि मुझे उनकी टाइट गांड मारने में मुझे मज़ा आता है। मैं 3-4 बार अपने दोस्त अभिषेक (झारखण्ड) की भी मार चुका हूँ लेकिन उसके बारे में मेरी अगली कहानी बताऊंगा। अभी मैं अपनी और मेरे भाई अविचल के कांड की कहानी बताता हूँ।

हम फरीदाबाद के रहने वाले हैं। मैं छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए अपने चाचा से मिलने जयपुर गया हुआ था।वहाँ मैं मेरे चाचा और उनका बेटा अविचल से मिला। अविचल 19 साल का हो गया था और काफी वासना भरा भी लग रहा था। वो आई आई टी की तयारी कर रहा था।पहली नजर में ही उसकी सेक्सी गांड देख कर मुझे उसकी गांड मारने की इच्छा हुई और मैंने मन ही मन ठान लिया था कि मैं उसकी गांड मार कर ही रहूँगा। मैं वहाँ पर दस दिनों के लिए गया था और उसी वक्त में मुझे कुछ करना था। हम पहले भी कभी मिलते थे तो एक दूसरे का मुठ मारते थे इसलिए मुझे मंजिल ज्यादा मुश्किल नहीं लग रही थी।

एक दिन मेरे चाचा काम से गए हुए थे, हम दोनों घर पर अकेले थे। मुझे वो वक्त बात बढ़ाने के लिए सही लगा। मैंने उसे पहले पुरानी बातों को याद दिलाने की कोशिश की।

मैं उससे बोलने लगा- और अविचल, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या ?

उसने थोड़ा शरमाते हुए कहा- नहीं, लेकिन मैं गर्लफ्रेंड बनाना चाहता हूँ !

तो मैंने उससे कहा- मैं तुम्हारे लिए गर्लफ्रेंड पटवा सकता हूँ लेकिन तुम्हें मेरा एक काम करना पड़ेगा।

उसने खुश होते हुए मुझसे कहा- आप जो बोलेंगे मैं वो करूँगा, अगर करने लायक हुआ तो !

मेरी बात बनने ही वाली थी कि इतने में किसी ने घंटी बजाई। अविचल ने जाकर देखा तो मेरे चाचा आ चुके थे। मुझे उस वक्त अपनी किस्मत पर बहुत गुस्सा आया। उस दिन तो मैं मन मार कर रह गया और मुठ से ही संभाला मैंने अपने आप को !

लेकिन अगले दिन जब मेरे चाचा गए तो अविचल मेरे पास आया और उसने मुझसे बोला- भैया, कल आप मुझसे कुछ कह रहे थे ?

मैंने जब उसे यह कहते हुए सुना तो मुझे लगा कि शायद यह भी वासना का शिकार है। मैंने उससे कहा- हाँ, मुझे तुमसे कुछ काम है, याद हैं जब अपन पहले मिलते थे तो एक दूसरे का मुठ मारते थे और एक बार मैंने तुम्हारे मुँह में देने की कोशिश की थी और तुम छटपटाने लग गए थे।

वो थोड़ा शरमा गया और मुझसे बोला- आप क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ रहे हो?

फिर मैं धीरे धीरे उसकी उत्तेजना बढ़ाने के लिए उससे सेक्सी सेक्सी बातें करने लग गया। फिर हम दोनों मेरे मोबाइल पर साथ साथ ब्लू फिल्म देखने लग गए। मेरा लंड नब्बे डिग्री पर खड़ा हो गया लेकिन उसके लंड पर कोई असर ही नहीं था। लेकिन वो मचलने लग गया। तब मुझे पता चल गया कि साला अविचल तो नपुंसक है। उसके मचलने से मुझे लगा कि उसकी गांड मराने की प्रबल इच्छा हो रही है। तब शाम होने वाली थी, मैंने उससे पूछा- क्या तुम पहले की तरह मेरा मुँह में लेना चाहोगे?

उसने मुझे देखा और बोला- मैं तो कब से मौके की तलाश में था !

और उसने आगे से मेरे पैंट की चैन खोली और मेरे लंड को चड्डी के ऊपर ही मसलने लग गया। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। उसने मेरा अंडरवीयर खोल प्रिया और मेरा लंड तुंरत उसने मुँह में ले लिया और कुत्ते की तरह चाटने लग गया। मेरी उत्तेजना चरम रीमा पर थी और थोड़ी देर में मैंने अपना रस उसके मुँह पर छोड़ प्रिया और वो उसे गटक गया और गाल पर टपकी बूंदे हाथ में लेकर चाट गया।

अब शाम हो गई थी और चाचाजी भी आ गए थे। अगले दो दिनों तक चाचाजी छुट्टी पर थे तो हम दोनों को मौका नहीं मिला। मगर जब दो दिन बाद चाचा ऑफिस गए तो हम दोनों उसके कमरे में चले गए। अब हम दोनों ने टीवी पर ब्लू फिल्म देखना चालू कर प्रिया। थोड़ी देर बाद हम दोनों की उत्तेजना बढ़ गई, हम दोनों ने एक दूसरे के साथ मस्ती शुरू कर दी। फिर हम एक दूसरे को 15 मिनट फ्रेंच किस करने लग गए।

अब हम दोनों की उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और वह मेरा मुँह में लेने लग गया। मुझे उसके मुँह में देने में अत्यंत आनंद मिल रहा था।

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थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा- तुम भी अपने कपड़े खोल दो !

तो उसने थोड़ा शरमा कर कहा- मुझे शर्म आती है, मैं नपुंसक हूँ !

तो मैंने कहा- वो तो मुझे पहले ही पता चल गया था ! तुम्हें शर्माने की कोई जरुरत नहीं है, मैं तुम्हें दूसरा ही मजा दूंगा !

उसने थोड़ी नाटकबाजी के बाद कपड़े खोलने शुरू कर दिए। फिर वो पापी मेरा मुँह में लेने लग गया। थोड़ी देर बाद जब मेरी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ने लग गई तो मैंने कहा- अविचल, अब मुझसे नहीं रहा जाता ! अब मुझे तुम्हारी गांड मारनी है !

तो उसने कहा- अब मैं भी चरम रीमा पर हूँ, पर तुम्हारा इतना मोटा लंड है, मेरी तो गांड फट जायेगी !

तो मैंने उसे समझाया- शुरू में थोड़ा दर्द होगा लेकिन बाद में मज़ा बहुत आयेगा।

तब उसने बोला- अब तुम मेरी गांड में अपना यह औजार घुसा ही दो !

और वो घोड़ी बन गया। जब वो घोड़ी बना तो मैंने देखा कि उसकी गांड का छेद तो पहले से ही खुला हुआ था। मेरे पूछने पर उसने बताया कि एक बार उसके तीन करीबी दोस्त राहुल, धरमवीर और रजत ने उसकी जबरदस्ती गांड मार दी थी लेकिन उसे मज़ा बहुत आया था।

फिर मैंने बात वहीं पर ख़त्म कर के उसकी गांड में एक झटका मारा, मेरा सिर्फ सुपारा ही घुसा था कि उसकी चीख निकल गई, वो चिल्लाने लग गया लेकिन मैंने बिना कोई दया दिखाए उसकी गांड में एक और झटका प्रिया और मेरा लंड पूरी तरह उसकी गांड में घुस गया।

उससे सहन नहीं हो रहा था, वो चिल्लाया- आआआआ उइउइ उउइउइउइउइउइ मादरचोद ! मेरी तो तूने गांड ही फाड़ डाली ! साले मैं तेरी माँ चोद दूंगा !

लेकिन उसने मेरे लंड को हटाने की कोशिश भी नहीं की। शायद उसे पता था कि बाद में उसे अत्यंत मज़ा आने वाला है।

मैंने अब उसकी गांड मारनी शुरू कर दी। शुरू में तो वह बहुत चिल्लाया लेकिन फिर वो मेरा साथ देने लग गया और उसकी उत्तेजना भी बढ़ने लग गई। अब वह बोल रहा था- मादरचोद, चोद मुझे ! आज फाड़ दे मेरी गांड ! आआआआ उईउइउइउइउ मादरचोद और जोर से मार मेरी गांड ! साले तेरी माँ को भी ऐसे ही चोदता है क्या? भेन के लौड़े, फाड़ दे आज मेरी ! ऐसे कि बेसबाल का डंडा भी आराम से घुस जाये !

उसकी ऐसी उत्तेजना भरी बातें मुझमें और जोश भर रही थी। थोड़ी देर तक डट कर गांड की चुदाई करने के बाद मैंने लंड बाहर निकाल के उसके मुँह में छोड़ प्रिया और वो उसे पी गया।

उस दिन मैंने उसकी तीन बार गांड मार दी और बाकी दिन तक उसकी हर दिन गांड मारी।

यह थी मेरी कहानी।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
र

रॉकी कुमार

3 months ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

स

सैंडी 1990

4 months ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

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