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माँ की चुदाई पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 611 बार

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-1(Sanskari vidhwa maa ka randipana-1)

moodchangerboy

01 Dec 2014 को प्रकाशित

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-1(Sanskari vidhwa maa ka randipana-1)
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हेलो दोस्तों मेरा नाम अमित है। मैं एक बार फिर से हाजिर हूं आप सभी के लिए एक नई मजेदार कहानी लेकर। यह कहानी मेरे एक पाठक की सच्ची घटना पर आधारित है। अपने पाठक के बताए अनुसार मैं उसकी निजी जानकारी को ना देकर यह कहानी आप सभी को बता रहा हूं। उम्मीद करता हूं इसे पढ़ कर आप सभी को बहुत मजा आयेगा। आप लोगों को ज़्यादा बोर ना करते हुए मैं कहानी को अपने पाठक की जुबानी आप लोगों को बताता हूं।

हेलो दोस्तों, आप सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम राहुल है। मेरी उम्र 23 वर्ष है, लंबाई 5’4”, देखने में गोरा और स्मार्ट हूं। यह कहानी मेरी विधवा मां की चुदाई की है। कैसे वो एक संस्कारी औरत से एक चुदक्कड़ औरत में बदल जाती हैं। वो सब मैं आपको अपनी इस कहानी में बताने जा रहा हूं। दोस्तों अगर लिखने में कुछ गलती हो जाए तो माफ करना। क्यूंकि मुझे लिखने का इतना तजुर्बा नहीं है।

मेरी यह कहानी कुछ 3 साल पहले की है। मेरे पापा राजवीर वर्मा, एक बड़े ही बिजनेसमैन थे। उनका अपना सुनार का काम था। उनकी मौत उसके 2 महीने पहले अचानक हार्ट अटैक से हो गई थी। पापा के जाने के बाद फैमिली और घर का बटवारा हो गया। हमारे हिस्से में दिल्ली का एक बड़ा आलीशान घर आया, जो पापा ने कभी अपने खुद के दम पर बनाया था। जहां हम घरेलू झगड़ों की वजह से कभी रह नहीं पाए थे। घर को पाने के बाद हमें अब किसी चीज की कमी नहीं थी। बस एक बड़ी कमी थी पापा की, जो मेरी मम्मी अच्छे से महसूस कर रही थी।

मेरी मम्मी का नाम सविता वर्मा है। उम्र 39 वर्ष, लंबाई 5’4” है, उनका रंग दूध सा गोरा है। मम्मी ना ज़्यादा मोटी ना ही पतली है। 34-30-38 इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं। मम्मी की तनी हुई टाइट गोल चूचियां है और बाहर को निकली हुई गोल उभरी हुई बड़ी और चोड़ी गांड। जिसे देखते ही लोग दीवाने हो जाते है। एक मर्द को काबू में करने के लिये मम्मी के पास वो सभी खूबियां हैं। मम्मी शुरू से ही हाउसवाइफ रही थी, जिससे वो अपना धार्मिक और संस्कारी विचार रखती हैं। अब आगे-

2 महीने गुज़र जाने के बाद भी, मेरी मम्मी पापा के सदमे से बाहर नहीं आई थी। उन्हें अकेले रहना बहुत ही चुभ रहा था। ऊपर से हम एक अंजान शहर में अकेले रहते थे। जहां हमारा कोई जान-पहचान वाला नहीं था। मम्मी सुबह-शाम बस अकेले में उदास गुमसुम बैठी रहती। एक दिन मेरे से मम्मी का उदास रहना देखा नहीं गया, और मैंने उनसे इस बारे में बात करनी सोची। मैं उनके पास गया जब मम्मी अपने कमरे में लेटी हुई थी।

मैं बोला: मम्मी आपने अभी तक खाना नहीं खाया?

मम्मी बोली: बेटा अभी मेरा मन नहीं है, तुम खा लो।

मैं: मम्मी आप हर दिन ऐसे ही बोलती हो। मुझे पाता है आप पापा के जाने के बाद उदास रहती हो।

मम्मी उठ कर बैठ गई और रोने लगी। मैंने उनकी आंखों से निकलते आंसुओं को पोंछा और उन्हें शांत किया। फिर मम्मी को अपने गले से लगा लिया।

मैं: मम्मी आप चिंता मत करो। मैं पापा का बिजनेस और घर की जिम्मेदारी संभाल लूंगा।

मम्मी‌ (मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए): बेटा तुम इतनी उम्र में घर की जिम्मेदारी कैसे संभालोगे?

मैं: मम्मी वो सब आप मेरे पर छोड़ दो। मैं आपकी खुशी के लिए कुछ भी करूंगा।

फिर मैंने मम्मी से वादा करवाया कि आप कभी उदास नहीं रहेगी। मम्मी हां बोल कर मेरे गले लग गई, और मेरे माथे पर एक प्यार से किस्स कर देती है। फिर कुछ दिनों के बाद मैंने एक बड़ी शॉप ली और लग गया पापा के बिजनेस की तरफ ध्यान देने। रोज सुबह शॉप पर जाने से पहले मम्मी मेरे माथे पर एक किस्स कर देती थी। अब मेरी मेहनत को देख कर दिन प्रतिदिन मम्मी की उदासी कम हो रही थी। मैं हर दिन शॉप से आने के बाद मम्मी के साथ बैठ जाता, और कुछ देर उनसे बाते करता।

मम्मी: बेटा अब तेरा काम कैसा चल रहा है?

मैं बोला: मम्मी अभी तो बस शुरुआत हैं। बस कुछ दिन बाद अपना कारोबार अच्छा चलने लगेगा। फिर मैं आपकी हर ज़रुरत पूरा कर सकूंगा।

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मम्मी (खुशी से मुझे गले लगा ली): बेटा मुझे तो बस तेरे पापा की कमी है। पर मुझे तेरे जैसे बेटा मिल गया अब और किसी की जरूरत नहीं रही।

मैं: थैंक्स मम्मी। (और मैं उनके होठों पर हल्का चूम लेता हूं। यह मेरी लाइफ की पहली किस्स थी जो मैं अपनी मम्मी से कर रहा था।)

मम्मी: बेटा किस्स गाल पर किया जाती है, यहां नहीं करते।

मैं बोला: मम्मी अब मॉर्डन जमाना है। मैं तो आपको ऐसे ही प्यार करूंगा, और अब आपको भी मॉर्डन बनना होगा।

मम्मी: धत बेटा! ऐसे तो विदेशी लोग करते हैं। हमारी संस्कृति में ये सब चीज़ अच्छी नहीं लगती (मैं थोड़ा डर गया कहीं मम्मी मेरी बात का बुरा ना माने)।

अगले दिन, सुबह मेरी नींद जल्दी खुल जाती है। मैं अपनी आंखों को मसलता हुआ फ्रेश होने जा रहा था। बॉथरूम का खुला दरवाज़ा देख कर मेरी बंद आंखें एक दम खुली रह जाती हैं। क्यूंकि मेरी मम्मी पूरी नंगी नहा रही थी। मुझे लगा मैं कोई सपना देख रहा था।

मम्मी का सुनहरा बदन उफ क़यामत ढा रहा था। उनकी पहाड़ जैसी चूची एक-दम कसी हुए थी। उनके ब्राउन-निप्पल जो पानी से भीगने से खड़े हुए थे, जिसे मैं बचपन चूसता होगा। मम्मी का फिगर किसी जवान लड़की से कम नहीं लग रहा था। उनकी पतली कमर और गोल और गहरी नाभि। फिर मेरी नज़र मम्मी की चूत पर गई, जो पाव रोटी की तरह फूली हुई थी। उसके मोटे-मोटे होठ आपस में चिपके हुए थे।

उफ ये काली झांटे ना होती तो चूत की दरार देख कर मजा ही आ जाता। आज पहली बार मैंने अपनी मम्मी को इस तरह पूरी नंगी देख रहा था। मम्मी अपनी चूचियों पर मसल-मसल के साबुन लगा रही थी। तभी उनके हाथ से साबुन फिसल कर ज़मीन पर गिर जाता है।

मम्मी उसे उठाने के लिए आगे झुक जाती है। उफ उनकी उभरी हुई बड़ी और चौड़ी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी। दोस्तों माँ की बड़ी गांड देख कर आज मेरे खुद का लंड खड़ा हो जाता हैं। आज पहली बार मेरी नियत मम्मी पर खराब हो रही थी। मम्मी के झुके होने से उनकी गांड की गहरी दरार खुल सी गई थी।

मां की गांड पीछे से देखने में ऐसा लग रहा था, जैसे में किसी पोर्न मूवी की हीरोइन देख रहा हूं। फिर मम्मी साबुन उठा कर अपनी गांड बीच दरार में अपने हाथों से रगड़ कर अच्छे से साफ करती हैं। फिर मम्मी शावर के नीचे खड़ी होकर नहाती हैं। उनका पानी से भीगा बदन संगमरमर की तरह चमक रहा था।

फिर मम्मी ने लास्ट में जब अपनी चूत की दरार के बीच उंगली डाल कर सफाई करी, तब चूत की गुलाबी कलियां देख कर मज़ा ही आ गया। थोड़ी देर में मम्मी का नहाना हो जाता है। फिर मैं जल्दी से अपने कमरे में आकर मम्मी के बारे में सोचता हूं। फिर थोड़ी देर बाद में नाश्ता करके अपनी शॉप पर निकल जाता हूं। आज शॉप पर मेरा मन नहीं लग रहा था। बार-बार मम्मी का नंगा बदन मेरे सामने आ रहा था। फिर जैसे-तैसे शाम होई, और मैं अपने घर के लिए निकल गया।

इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। फीडबैक support@mohakkisse.com पर दें।

अगला भाग पढ़े:-संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-2

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