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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,072 बार

सविता दीदी की जवानी के दीवाने-1(Savita didi ki jawani ke deewane-1)

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24 May 2021 को प्रकाशित

सविता दीदी की जवानी के दीवाने-1(Savita didi ki jawani ke deewane-1)
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मैं बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला तब तक एक सीधा-सादा लड़का था। जब तक कि मेरी मौसी की लड़की ने मेरे अंदर की ज्वाला नहीं भड़काई थी। मेरे घर का नाम नाम राजू है। इस वक्त मेरी उम्र 23 वर्ष है। मेरी हाईट 5 फीट 9 इंच है। दिखने में हल्का गेहुंआ रंग का चेहरा, बलिष्ठ शरीर, चौड़ी छाती हैं, जिसे देख किसी भी लड़की का मन डोल जाए।

सविता दीदी की उम्र इस वक्त 24 वर्ष है, 5 फीट 6 इंच कद वाली, रसीली, छरहरी जवान गदराई जिस्म वाली लड़की, जिसके चेहरे पर गांव के लड़के तो फिदा ही थे, पर अंकल लोग भी सविता दीदी को देख कर अपने लंड को मसल कर मजा ले लेते थे। अगर दीदी की इस वक्त फिगर की बात करूं तो उनका फिगर 34-30-34 होगा।

दीदी की चौड़ी छातियां किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है। पर अगर कोई चूचियों की गोलाई को ध्यान से देखे, तो जैसे कोई दो खरबूज़े दीदी की छाती पर रखे हुए है, और दोनों खरबूज़े आपस में चिपके हुए है।

अगर कुछ शब्दों में कहूं, तो दीदी की सुडौल चूचियों का आकार और उस पर उभरे हल्के भूरे रंग के निप्पल को अगर कोई कपड़े के अन्दर ही देख ले, तो लंड की हालत खराब हो जाती है। तो सोचिए अगर कोई नंगी चूचियों को देख लेगा, तो देख कर हर किसी का मन तो डोल ही जाएगा, और हर कोई चूचियों में भरी मलाई का रस-पान करना चाहेगा।

अगर बात करूं दीदी की गांड की, तो उनके चूतड़ कद्दू के जैसे बड़े-बड़े हैं, और जब दीदी जींस या फिर साड़ी पहनती हैं, तो दीदी के चूतड़ जींस और साड़ी पर चार चांद लगा देते हैं। सविता दीदी को स्टेशन पर पहली ही नज़र में देखने के बाद मेरे ही दोस्त रोहन और विजय भी दीदी को चोदने की चाहत रखने लगते हैं, और उनके बारे में गन्दी-गन्दी बातें करते हैं।

ये बात मुझे तब पता चली जब एक दफा मैंने रोहन का मोबाईल लिया था। तो गलती से मैंने रोहन और विजय की चैट को पढ़ लिया था। तो मुझे पता चला कि ये दोनों सविता दीदी के बारे में क्या सोचते थे, और उन्हें कितनी बेरहमी से चोदना चाहते थे। वो दोनों चैट में क्या बात किए थे, ये सब बाते मैं उसी स्टोरी में कवर करूंगा। क्या उनकी मन की मुराद पूरी होगी, जानने के लिए हमसे जुड़े रहें।

दीदी की कसी हुई गांड को घर के पास के एक चाचा मारना चाहते थे, जो मैंने अपने कानों से सुना था। जब वो एक दिन अपने ही किसी दोस्त से बातें कर रहे थे, कि सविता की गांड कितनी कसी है। किसी दिन इसकी गांड जरूर मारूंगा मौका मिलने पर।

मैं आपको उन चाचा के बारे में थोड़ा बता दूं। उन चाचा का नाम वीर सिंह है, जो मौसी के गांव के प्रधान हैं, और बहुत अमीर हैं, और वो कर्ज पर पैसे भी सब को देते हैं। उनकी उम्र 40 के आस-पास है। उनकी हाईट 5 फिट 6 इंच है, और देखने में हट्टे-कट्टे नौजवान जैसे लगते हैं।

क्या वीर चाचा सविता दीदी की गांड चोद पाएंगे, और अपने लंड से दीदी की गांड फाड़ पाएंगे? जानने के लिए साथ बने रहे। ये स्टोरी मेरी अलग स्टोरी में जारी रहेगी।

अब ज्यादा वक्त ना गंवाते हुए मैं अपनी इस स्टोरी में बताता हूं कि ये बात तब की है जब दीदी जवानी में अपना पहला कदम रख रही थी। मतलब जब वो 19 वर्ष की अवस्था में थी तब से ही लड़कों ने उनके नाम का मुट्ठ मारना शुरू कर दिया था। दीदी थी ही ऐसी माल कि हर कोई उनके बारे में सोच कर उनके चूत में अपने लंड को गोते खिलाता था।

दरअसल हम दोनों के बीच रामांटिक वक्त शुरू तब हुआ जब मैं 18 साल का था, तो मैं मौसी के यहां गर्मी की छुट्टियों में घूमने गया था। तो एक दिन मैं और मौसी का छोटा लड़का करन जो मुझसे भी उम्र में छोटा था, दोनो छत पर पकड़म-पकड़ाई ( मतलब एक भागता है और दूसरा उसे पकड़ने का काम करता है ) खेल रहे थे।

तो जब करन मुझे पकड़ने के लिए मेरे पीछे दौड़ा तो मैं नीचे की तरफ भागा, और दोनों भागते-भागते बाथरूम के पास पहुंच गए, जो कि टेम्प्रोरी ही बना था, जैसे कि गांव में पहले सब बनाते थे। तीन तरफ से ईंट की दीवार बना कर, एक तरफ लकड़ी का दरवाजा लगा देते थे, और ऊपर खुला आसमान दिखता था। कुछ ऐसा ही बाथरूम मौसी के घर भी था, जहां पर सविता दीदी अपने यौवन को पानी से भिगोए हुए थी।

जब तक सविता दीदी मुझे मना करती कि राजू मत आना मैं नहा रही हूं, तब तक दरवाजा खोल कर उनको बिना कपड़ों के नहाते हुए मैंने देख लिया। मैं इतनी तेजी से भागते हुए आ रहा था कि उनकी आवाज़ जब तक सुन पाता, मैं दौड़ते हुए उनके पास पहुंच चुका था।

अब दृश्य ऐसा था कि उनकी चढ़ती जवानी और उम्र के पड़ाव की वजह से सविता दीदी की उभरती हुई चूचियां, मुझे सामने देख सांसों के तेज़ होने की वजह से ऊपर-नीचे हो रही थी।

और उसी वक्त दीदी मुझे बोल रही थी, प्लीज उधर देखो, उधर देखो, और अपने हाथों से अपनी चूचियों को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, जिसे मैं अच्छे से निहार चुका था, और उनकी चूचियों की गोलाई और साईज को मैं भाप चुका था। पानी की बूंदे उनके यौवन भरे बदन पर बिखरी‌‌ हुई थी।

कुछ बूंदे उनके होठों पर, तो कुछ बूंदे उनकी गर्दन से होते हुए उनकी चूचियों के बीच की क्लीवेज से होती हुई, उनकी नाभि तक जाकर फिर वहीं से वो गायब हो जा रही थी। क्यूंकि दीदी ने कच्छी पहन रखी थी, तो पानी की बूंदें कच्छी में गायब हो जा रही थी।

उस दिन जाने कितना मजा आया था, पर सच बोलूं तो मैंने पहली दफा किसी कमसिन कली और जवानी की ओर बढ़ती हुई 19 साल की अप्सरा को देखा था, और जिसे देख मेरे आंखो में चमक सी आ गयी थी। फिर दीदी कपड़े पहन कर छत पर आई तो उस वक्त मैं चुप-चाप सा बैठा उन्हीं के बारे में सोच रहा था। तभी दीदी आई और बोली-

सविता दीदी: राजू आज के बारे में किसी को कुछ मत बताना।

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मैं (अनजान बनते हुए): क्या दीदी?

सविता दीदी: यही कि मैं बिना कपड़ों के ही नहाती हूं, और तुमने मुझे नहाते हुए बिना कपड़ों के देखा है।

मैं: अरे नहीं दीदी मैं किसी को नहीं बताऊंगा।

सविता दीदी: मेरा भाई कितना अच्छा है (और खुश होकर मुझे अपने गले से लगा लिया)।

उस वक्त मैं उनसे हाईट में छोटा था, तो मैं उनकी गर्दन तक ही था। तो जब मुझे वो गले लगाई तो मेरा सिर उनकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों तक ही पहुंचा, जिस वजह से मैं दीदी के क्लीवेज को साफ-साफ देख सकता था।

फिर ऐसे ही दिन बीतते गए, और फिर मैं अपने घर आ गया। फिर एक दिन मेरे घर पर एक फंक्शन था, तो रिश्तेदार लोग आए थे। चूंकि मेहमान ज्यादा थे, और गर्मी का महीना चल रहा था, तो मेहमान लोगों की सोने की व्यवस्था छत पर खुले आसमान के नीचे की गयी थी, और कुछ चारपाई भी बिछाया गया था।

जब सब खाना खा लिए और रात में 8 बजे का वक्त हुआ, तो मैं एक चारपाई पर लेट गया। पर किसी ने एक छोटी बच्ची को मेरे पास सुला दिया था, जो कुछ ही देर में अपनी करामात दिखा दी और मेरे ऊपर सुसु कर दी। तो मैं जाग गया, और उस बच्ची को उसकी मां के पास दे आया, और फिर छत पर आकर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए, और अब केवल अंडरवियर और बनियान में मैं सो गया।

रात के 10 बजे तक सारे मेहमान जहां-तहां अपना ठिकाना ढूंढ लिए, और मेरे पास सविता दीदी आकर लेट गई। ये बात मुझे बाद में पता चली। जब मैंने करवट ली तो मैंने पाया कि कोई लड़की मेरे पास सोयी थी, पर रात के अंधेरे में मुझे पता नहीं चला कि वो कौन थी।

फिर जैसे-जैसे रात बीतती गई, उस लड़की की हरकत बढ़ती गई, और रात के अंधेरे में ही मुझे चारपाई पर अकेला पाकर अपनी तरफ बार-बार खींच रही थी।

मैं उस वक्त तक ज्यादा कुछ नहीं जानता था, और बहुत सीधा-सादा होने की वजह से मैं बस उनसे दूर होने का प्रयास कर रहा था। जैसे मैं उनसे दूर होता, तो वो फिर से करवट बदल कर, दूसरी तरफ मुंह करके, मेरी तरफ गांड करके सो जाती। पर कुछ देर बाद फिर वो करवट बदल लेती, और मुझे कस कर पकड़ कर अपनी ओर खींच लेती।

वो कभी मेरे पैरों के बीच में अपने पैरों को डाल देती, तो कभी अपने पैरों को मेरी कमर के ऊपर रख कर सो जाती। सच बोलूं तो मुझे बाद में पता चला कि ये जो दीदी उस रात मेरे साथ कर रही थी, इसका सीधा सा मतलब ये था कि उनकी बुर में लंड लेने की खुजली हो रही थी।‌ वो उस वक्त किसी का भी लंड लेने के लिए तैयार थी। अगर कोई भी लंड उन्हे मिल जाता तो वो तुरन्त ले लेती अपनी कुंवारी बुर में।

आखिर वो 19 साल की उम्र की कच्ची कली जो थी उस वक्त। और आपको तो पता ही है कि उम्र 19 में क्या होता है। ये उम्र सबसे ज्यादा खतरनाक होती है लड़कियों के लिए, और अक्सर इस उम्र से जब कोई लड़की गुज़रती है, तो उसे लंड लेने की चाहत सबसे ज्यादा होती है। अगर 19 की उम्र में कोई लड़की हो, और अगर आप थोड़ा सा भी भाव देदें उसे, तो वो लड़की लपक कर आपका लंड लेगी, और तब तक चुदेगी जब तक उसे आप सन्तुष्ट ना कर ले जाएं।

तो उस वक्त दीदी भी 19 की उम्र से गुज़र रही थी, तो जवानी भी उबाल पर थी। नयी-नयी चूचियां उभर रही थी, और बुर के उपर हल्की भूरी-भूरी झांटे आनी शुरू हुई थी। जिस वजह से वो मेरे साथ वो हर प्रयास की, तांकि मैं उन्हे अपने लंड से चोद सकूं। ऐसा मुझे लगने लगा कि वो मुझसे चुदना चाहती थी, क्योंकि वो चुदने के लिए तड़प रही थी।

क्या उनकी चूत की आग बुझ गयी, जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ।

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अगला भाग पढ़े:-सविता दीदी की जवानी के दीवाने-2

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