जवान लड़की

जवान लड़की ने सहेली की चूत गांड चुदवाई

लेखक: जावेद पिरखा दिनांक: 06-11-2024 पठन समय: 15 मिनट

सेक्स सेक्स सेक्स हिंदी कहानी में एक लड़की ने अपनी कामुक सहेली से बदला लेने के लिए उसे मेरे बड़े लंड के हवाले कर दिया. मैंने 2 दिन रात में उसकी दसियों बार आगे पीछे से चोदा.

नमस्कार दोस्तो!

मेरी पिछली कहानीमालकिन की जवान बेटी ने ड्राइवर से चूत चुदवाईमें आपने पढ़ा था कि मैं एक अमीर घर में ड्राईवर था और मालिक की जवान बेटी नेहा मैम की चूत चोद–चोद कर सूजा दिया था और अपने कमरे में जाकर सो गया था.

अब आगे सेक्स सेक्स सेक्स हिंदी कहानी:

उस दिन रात की चुदाई के बाद सोमवार से शनिवार तक मुझे चुदाई का कोई मौका नहीं मिला।नेहा मैम ने इस हफ्ते मुझे सिर्फ चूमा चाटी और सेक्सी बातों से तड़पा के रखा था।

मेरी हालत इस दौरान ऐसी थी कि जैसे कोई मछली पानी के बगैर तड़पती हो।

मैंने कई बार मैम को सेक्स के लिए कहा।परंतु वे हर बार यही कहती– पहले मेरा बदला लो! मुझे रेखा को चीखती, चिल्लाती हुई देखना है। तब तुम मेरे साथ जो मर्जी हो, वह करना।

आगे उन्होंने कहा– एक खास बात! तुम्हारे लिए ही मैंने सोमवार को छुट्टी ली है। अगर रेखा की चीख नहीं निकली तो तुम मुझे भूल जाना।मैं– अगर उसने मुझसे बड़ा लंड ले रखा होगा तो कहां से चीख निकलेगी। अब मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?

मैम– जब मैं दर्द से कराह उठी! तो उसको तो मैंने ही चस्का लगाया है, वह मुझसे बड़ी चुदक्कड़ नहीं है।मैं– अपनी तरफ से मैं पूरी कोशिश करूंगा!मैम– हाँ!

मैंने मैम को बैंक से वापस लाते हुए पूछा– क्या आपने रेखा से बात की है?मैम– हाँ, वह तैयार है! कल हाफ डे के बाद सीधा फार्म हाउस चलना है!

मैं– अगर घर पर किसी को कहीं जाना हुआ तो?मैम– मैंने घर में बता दिया है मुझे बाहर जाना है कल! बाकी परेशान मत हो!

मैं खुश होते हुए कहा– जी मैम!

वो दिन जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था वो दिन शनिवार को आ ही गया.

मेरी जो रोज की जो दिनचर्या थी, उसी प्रकार तैयार हुआ।

मैम भी रोज की तरह आज भी नॉर्मल सी सादे कपड़ों में बाहर आई, वही ऑफिस वाला थैला और टिफिन गाड़ी में ले के बैठ गई।

हम बैंक की तरफ निकल पड़े।बैंक मालवीय नगर में था, हम 30 मिनट बाद उनके ऑफिस पहुँच गए।

मैम– ठीक है, तुम अब वापस जाओ, 2 बजे आना!मैं– ओके!

मैं एक बजे उठा और लंच कर के नेहा मैम को पिकअप करने के लिए निकल गया।

2:30 पर नेहा मैम आई– सीधा फॉर्म हाउस चलो! रेखा भी पहुंचने वाली होगी। सारा माल वही लाएगी।

सीधे फॉर्म हाउस पहुँच कर गाड़ी रोकी और फिर अंदर पार्क की।रेखा अभी तक नहीं आई थी।

मैं– मैम आप सिर्फ सॉर्ट डेर्स में ही अच्छी लगती हो!

मैम– मैं बैंक में मैंनेजर हूँ तो मुझे सादे कपड़ों मे ही जाना पड़ता है!

तभी हॉर्न बजा।रेखा आ गई।मैंने दरवाज़ा खोला, उसने कार अंदर पार्क की।

मैम ने तब तक तीन पैग बनाये।रेखा अंदर आई तो मैं उसे देख कर दंग रह गया।क्या लग रही थी वह!

रेखा का साइज बस्ट-34, वेस्ट-30, हिप- 36.

सेक्सी रेखा को इस तरह देख कर मेरा लंड फुंफकारे मारने लगा।

मैम– सब्र रख सन्नी! हम दोनों आज तेरी ही हैं, आज कल परसों!

मुझे रेखा ने अपने गले से लगाया और बोली– जानेमन तू अकेला है, इतना उत्तेजित मत हो! तीन दिन में सब खत्म कर देंगी हम दोनों!

नेहा मैम और रेखा हंसने लगीं, फिर पैग उठाया और तीनों मिल कर पीने लगे।मैम और रेखा इधर उधर की बाते करने लगीं।बातों–बातों में 4 बज गए।

रेखा ने मेरी ओर देखा और बोली– पहले किसके साथ करना है?मैं– दोनों एक साथ आ जाओ!

मैम– हम दोनों तेरे बस की नहीं! एक से निपट, रेखा दिखा इसे अपनी जवानी!रेखा– देख ही तो रहा है साला, जब से आई हूँ कुत्तों की तरह घूर रहा है!

मैं उठा और रेखा को चूमने लगा।वह भी मेरा साथ देने लगी।

अब मुझे सेक्स पॉवर और दारू दोनों का नशा चढ़ चुका था।

मैंने रेखा को गोद में उठा लिया और रेखा मेरे होंठों को लगातार चूसे जा रही थी।रेखा के दोनों चूतड़ मेरी पकड़ में थे।

अब मैंने रेखा को पलंग पर पटक दिया और उसके कपड़े उतार फेंके।मैं उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलने, चूसने और काटने लगा।

रेखा की आह… निकल पड़ी।10 मिनट में चूचियों को लाल और उसके ऊपर अपने दांतो के निशान छाप दिया।चूचियों को मसल–मसल कर टमाटर की तरह सुर्ख लाल कर दिया.

अब बारी थी उसकी चूत की!उसकी चूत को सहलाते हुए उसमें मैंने अपने 2 उंगली एक साथ डाल दी।

फिर मैंने उसके चूत को चाटना शुरू किया और साथ ही जांघों को सहलाने लगा।कभी–कभी उसके चूत को चाटते हुए उस पर अपने दांत भी गड़ा देता।रेखा अब लंड लेने के लिए बेताब हो उठी!

जब तक रेखा की जवानी का रस नहीं पी लिया तब तक चाटता रहा।5 मिनट में उसे परम आनंद मिल गया।

अब बारी थी रेखा की लंड चूसने की।रेखा ने मुझे नंगा किया और लंड पकड़ कर बोली– आज मिला है हथियार!उसकी पकड़ में भी नहीं आ रहा था मेरा लंड।

वह मेरा आधा लंड मुंह में ले के चूसने लगी।5 मिनट में मैंने रेखा के मुंह में पानी छोड़ दिया।

रेखा मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चूमने लगी।मैं लगातार रेखा की चिकनी गांड सहला रहा था।

अब मेरा लंड खड़ा हो गया।रेखा को बिस्तर पर लिटा कर उसकी टांगे फैला दी।

चूत के पानी की वजह से उसमें चिकनाहट काफी हो गई थी।अब मैंने लंड को उसके चूत पर घिसना शुरू किया।

2 मिनट तक लगातार ऐसा करने पर रेखा ने कहा– डाल दे अब कुत्ते, तड़पा मत!मैं– कुतिया पकड़ कर अपनी चूत पर सेट कर!

रेखा ने लंड पकड़ कर अपने चूत पर सेट किया।मैंने एक जोर से झटका मारा और आधा लंड उसकी चूत में घुसा दी।

रेखा– आई मम्मी … आई मर गई … आह!दो मिनट रुक कर रेखा को चूमने लगा।

जब दर्द कम हुआ तो रेखा ने इशारा किया।

मैंने जब दूसरा झटका मारा तो मानो रेखा मर ही जायेगी।उसकी आंखों से आँसू की धारा निकल गई।दर्द की वजह से रेखा जोर–जोर से ‘अअह्ह, मर गईई …’ कर रही थी।‘आह … ओह माई गॉड’ इस तरह की आवाजों से कमरा गूंज उठा था।

मैं फिर से उसे चूमने लगा।कुछ ही पलों में मुझे नीचे से इशारा मिल गया।

मैंने छोटे–छोटे धक्के मारने शुरू किया।रेखा ने मेरी गांड पर अपना हाथ रख कर मुझे अपनी खींचना शुरु कर दी।

अब मैंने रफ़्तार बढ़ा दी, पूरा लंड अन्दर बाहर हो रहा था।रेखा तेज आवाज में आह.. ओह माई गॉड, ओह माई गॉड लगातार चिल्ला रही थी।वह कह रही थी– तेज आह… और तेज मजा आ रहा है!

मैं लगातार अपनी गति बढ़ा रहा था, रेख भी नीचे मेरा पूरा साथ दे रही थी।10 मिनट बाद पोजीशन बदल ली हमने!

मैं नीचे लेटा था और रेखा को लंड पर बिठा रखा था।रेखा मुझसे चिपक गई और धीरे–धीरे आगे पीछे करने लगी।मैंने उसकी गांड को पीटना शुरू किया तो रेखा तेज–तेज बैठ कर उछलने लगी साथ ही साथ वह आहें भी भर रही थी।

5 मिनट में उछलते–उछलते रेखा की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया।

अब रेखा को कुतिया बना दिया और मैं उसकी कमर को पकड़ कर एक ही झटके में पूरा लंड रेखा की चूत में घुसा दिया।रेखा– आई मम्मी आह … मार दिया … आह … ओह माई गॉड!

रेखा के चीखने चिल्लाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, मैं लगातार तेज तर्रार झटके मारे जा रहा था।वह आहें भरे जा रही थी- आह आह…!

10 मिनट तक ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद मैं उसके चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया।कुछ देर बाद मेरा लंड उठा के रेखा ने अपने होंठों पर रख लिया और चूसने लगी।

रात 10 बजे तक रेखा की 3 बार चूत और 2 बार गांड मारी।रेखा की चूत सूज चुकी थी और गांड भी फट गई थी।

रखा को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई नहीं होगी।लेकिन आज की पूरी रात सुबह 4 बजे तक उसको पेला, रेखा को चलने लायक तक नहीं छोड़ा।

मैं जब चार बजे जब झड़ा था तो रेखा की चूत में ही लंड डाल कर सो गया।जब आँखें खुली तो दोपहर के 2 बज रहे थे और रेखा मुझसे चिपक कर सो रही थी।मैं फिर सो गया, एक घंटे बाद रेखा ने मुझे जगाया।

नेहा मैम ने ऑनलाइन खाना मंगा लिया था।खाने के बाद हम गार्डेन में बैठ कर 8 बजे तक बातें करते रहे।

रेखा– आज तो मार ही दिया सन्नी तुमने!मैम– अब मेरी बारी है चुदने की!

मैं– नहीं, अभी मेरा रेखा से मन नहीं भरा है!यह कहते हुए रेखा को गोद में उठा लिया और पलंग पर जाकर पटक दिया।

रेखा– अब तो छोड़ दे कुत्ते, मुझे!मैं– नहीं मेरी जान, अभी तुमको मैं और मजा देना चाहता हूँ!

रेखा– दर्द की वजह से चूत मे सुजन आ गई है! दर्द हो रहा है मुझे!

मैंने उसकी एक ना सुनी और रेखा की टांग खोल कर चूत चाटना शुरू कर दिया।

10 मिनट में रेखा गर्म हो गई!मैंने देर ना करते हुए उसके चूत पर लंड सेट किया और एक ही झटके में पूरा लंड उसके चूत के अन्दर घुसेड़ दिया।

रेखा एक बार फिर से तेज आवाज में चिल्ला पड़ी– मार दिया … आई मम्मी, आह–आह … ओह माई गॉड!उसे अब दर्द हो रहा था लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा, मैं ताबड़ तोड़ चुदाई करता रहा।

10 मिनट बाद रेखा को दीवार के सहारे खड़ा किया, उसकी कमर पकड़ी और चुदाई शुरू कर दी।हर झटके में रेखा के मुख ‘आह … ओह माई गॉड’ निकल रहा था।

रात 11 बजे तक रेखा की चुदाई की, इस दौरान मैंने 4 बार उसकी चूत मारी और गांड 1 बार!3 बजे तक मैं नशे में आराम कर–कर के रेखा को चोदता रहा।

रेखा– अब मुझ पर रहम कर दो!फिर हम सो गए।

सुबह 11 बजे मुझे नेहा मैम ने जगा दिया।मैम ने मेरा लंड चूस और सहला कर खड़ा की और रेखा की ओर इशारा की।

तब रेखा ने कहा– मुझे अब ज्यादा चुदाई की वजह से तकलीफ हो रही है!फिर मैंने भी मना कर दिया।

रेखा का अब चलना तो दूर टांग भी नहीं हिला पा रही थी।मैम ने नाश्ता ऑडर किया।नाश्ता कर के हम सो गए।

सेक्स सेक्स सेक्स के कारण मेरा लंड बहुत दर्द कर रहा था!मैंने दोनों को बताया तो नेहा मैम ने मेरे लंड पर कोई क्रीम लगा दी।

लंच करके मैं और रेखा चिपक कर सो गए।फिर हमने ना तो दिन में और ना ही रात में कोई सेक्स किया।

मंगलवार को मैम खुद कार चला के ऑफिस चली गई।रेखा ठीक से चल भी नहीं पा रही थी और उसके शरीर पर मेरे दांती काटने की वजह से जगह जगह नीला पड़ गया था।

रेखा 2 दिन तक फार्म हाउस में ही रुकी।नेहा मैम भी यहीं से अप–डाउन कर रही थी।

गुरूवार को रेखा नॉर्मल हुई तो वह अपने घर जाने लगी।उसने मुझे गले लगाया, चूमा और बोली– मजा भी आया लेकिन इस तरह किसी और के साथ मत करना! मेरी जान पे बन आई थी, मालूम है तुमको!मैं– तभी तो मैंने और सेक्स नहीं किया!

रेखा तैयार होकर– फिर मिलेंगे!मेरा नंबर लिया और चली गई.

शाम को नेहा मैम आई, पूछा– रेखा चली गई क्या?मैम– जी हाँ!

मैंने पूछा– मैम कैसा बदला लिया मैंने आपका?मैम– सुकून का नाम सुना है! मुझे उसको तड़पती, चीखती और रोती हुई देख कर बहुत खुश हुई।

इस बीच मैम ने अपने कपड़े उतार दिए।फिर मैम ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किया और लंड को सहलाते हुए चूसने लगी।2 से 3 मिनट चूसने के बाद, मैंने मैम को डॉगी स्टाईल में आने को बोला!

मैम बिना देर किए हुए कुतिया बन गई।फिर मैं मैम की चिकनी गांड पर चांटे जड़ने लगा।

तब मैंने उनकी चिकनी कमर पकड़ कर लंड उनके चूत पर सेट किया और एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया।

मैम की ‘आह आह …’ वाली कामुक आवाजें निकलने लगी थी।इधर मैंने रफ़्तार बढ़ा दी।

मैम भी मस्ती में आगे पीछे करने लगी।पूरे कमरे में सिर्फ चूत की आवाज़ फ़च–फ़च कर रही थी और पूरा लंड अन्दर बाहर हो रहा था।

मैम– आह आह … और तेज … आह!15 मिनट बाद मेरा रस मैम की चूत में समा गया।

मैम उठी और पैग बनाया उसमें एक गोली मिलाई और मुझे गिलास थमा दिया।

पर मैम नहीं पीना चाहती थी क्योंकि चुदाई करने के बाद हमें घर भी जाना था।मैम को उस रात मैंने बस 2 बार पेला.फिर हम दोनों घर के लिए निकल गए।

मैंने सीधा बेसमेंट में कार पार्क की, बाहर निकल कर उनसे गले मिला, उनको चूमा।फिर मैम ऊपर चली गई।मैं अपने रूम में चला आया.

नशे की वजह से मुझे नींद जल्दी आ गई।

सुबह 8 बजे उठा तो देखा मैम आज ऑफिस नहीं जाने वाली थी।मैंने उनसे मिल कर अपने कपड़े धोने चला गया।

खाना खा ही रहा था कि मैम ने फोन किया– सन्नी, आ जाओ! मॉम घर में नहीं है।मेरी तो लॉटरी लगी थी, मैं तुरंत ही ऊपर आ गया!

केवल ब्रा पेंटी में मैम आज बेहद खूबसूरत अप्सरा लग रही थी।

समय बर्बाद ना करते हुए मैंने मैम की ब्रा उतार फेंकी और निप्पल चूसने लगा।

चूमते–चूसते मैंने मैम को पलंग पर पटक दिया और चड्डी उतार कर उनकी चुदाई शुरू कर दी।

15 मिनट चुदाई के बाद मैंने मैम के मुंह में लंड डाल कर अपना वीर्य खाली कर दिया।

फिर मैम घुटनों के बल बैठ कर लंड चूसने लगी।

दूसरी बार चुदाई लंबी चली और 30 मिनट कब बीत गए पता ही नहीं चला।

मैं अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया था, धक्कों की गति बढ़ चुकी थी।मैम लगातार ‘आह आह …’ करे जा रही थीचूत की फच–फच की आवाज गूंज रही थी।

आखिर में मेरे लंड ने उनकी चूत को मेरे वीर्य से लबा लब भर दिया।

इसके बाद हम दोनों हर सप्ताह सेक्स करते।

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