स्लट बेब क्रेजी सेक्स कहानी मेरी जवानी की है. मुझे शुरू से ही चुदाई का चस्का लग गया था. मैंने शादी नहीं की ताकि मुझे नए लंड मिलते रहें. मेरी कॉलोनी में नया सिक्योरिटी गार्ड आया.
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दोस्तो, मेरा नाम है क्यारी शर्मा।मैं 28 साल की सुडौल, गोरी, सुंदर लड़की हूँ।जहाँ आती-जाती हूँ, लड़के, बड़े-बूढ़े सब लार टपकाते हुए मुझे देखते हैं।
मैं जॉब करती हूँ, शादी करने की इच्छा नहीं है.
पर 18 की उम्र से सेक्स का चस्का लग गया था, जो समय के साथ बढ़ता गया।
बात यहाँ तक पहुँच गई है कि मुझे बहुत अच्छा लगता है अगर कोई मुझे हवस की नज़र से देखे।मेरी चुदने की इच्छा जाग जाती है।
मुझे छोटे कपड़े पहनना बहुत पसंद है जिसमें से मेरी बड़ी-बड़ी, मलाई जैसी कोमल चूचियाँ दिखें, और मेरी सुडौल गांड एकदम टाइट दिखे।
कई बार लड़कों को मेरे निप्पल के दर्शन हो जाते हैं अनजाने में!मुझे बड़ा मज़ा आता है।
ऑफिस में कितने ही साथ वालों के साथ सेक्स हो चुका है।वहाँ सारे आदमी मुझे देखते ही खुश हो जाते हैं।
आखिर में, जब चलती हूँ, तब मेरा सुडौल बदन हिचकोले खाता है।
लेटेस्ट स्लट बेब क्रेजी सेक्स का मजा लें इस कहानी में!
आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा है।मेरा हुकअप पार्टनर दूसरे शहर में रहता है और मेरे छोटे से शहर में गदर मचाना थोड़ा मुश्किल है।
कुछ दिन पहले की बात है, मैंने नोटिस किया कि कॉलोनी में नया सिक्योरिटी गार्ड आया है।
पहली बार कोई अंकल नहीं, बल्कि जवान लड़का।चौड़े कंधे, लंबा, साँवला, कड़क लड़का, होगा यूं ही कुछ 30 बरस का।
उसके छोटे से क्वार्टर से मेरे कमरे की खिड़की सामने ही दिखती है, जो ज्यादा दूर नहीं।बस बीच में कुछ पेड़ और जाली आती है।
कई महीनों से वहाँ कोई था नहीं, तो मुझे बिना पर्दा लगाए रहने की आदत हो गई थी क्योंकि उधर और कोई घर नहीं, सिर्फ़ खाली प्लॉट है।
एक दिन शाम को मैं बाहर जाते समय कपड़े बदल रही थी अनजाने में खिड़की के सामने।
टॉप निकाला, ब्रा नहीं पहनी थी, सो फिर ब्रा पहनी, पजामा निकालकर जींस डाली।
जब मैं स्कूटी पर बैठकर निकलने लगी, तो देखा कि वह लड़का बिल्कुल जाली से सटकर खिड़की की तरफ देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था पैंट के ऊपर से!
वह मुझे देखते ही शर्माकर पलट गया।
मैं समझ गई कि ये तबसे मुझे देख रहा था, और मुझे अंदाज़ा नहीं था।पर मुझे गुस्सा नहीं, मज़ा आया।
और मुझे आइडिया सूझा!
मैंने स्कूटी थोड़ा आगे की और गिरने का नाटक किया।उसने देखा और भागकर आया मेरी मदद करने।
मैं सड़क पर गिरे होने का नाटक कर रही थी।वह मुझे उठाने आया.
और उसकी नज़र मेरे बड़े गले से आधे से ज़्यादा बाहर निकले मम्मों पर पड़ी।वह देखता रह गया।
मैंने भी उसे देखने दिया कुछ क्षण।
फिर उसने मुझे खींचकर उठाया तो मैं उसके हाथ पर झुक गई।मेरे मम्मे उसके हाथ पर दब रहे थे।
फिर मैं सीधी हुई, उसको थैंक्यू कहा, नाम पूछा.उसने बताया- गगन!
मैं झुककर अपना सामान उठाने लगी ताकि वह मेरी गांड का साइज़ भी देख ले।वह मेरे कूल्हे देखता रह गया।
मैं फिर वहाँ से निकल गई।
वापस आई, तब तक मैं बस उससे चुदने के बारे में सोचती रही।पर ये कैसे होगा? कुछ तरकीब तो लगानी पड़ेगी।
मैंने अब रोज़ खिड़की के सामने कपड़े बदलना चालू कर दिया था, जानबूझकर समय ज़्यादा लगाती थी, ताकि वह देखता रहे मुझे।पर उसको नहीं पता था कि मुझे मालूम है वह देख रहा है।
आखिर मुझे फैंटेसी पूरी करनी थी अपनी।मैं चाहती थी वह किसी दिन मुझे धर दबोचे कहीं कोने में और मुझे पूरा निचोड़ डाले।
मैं बिना ब्रा के टाइट टॉप पहनकर मेरी खिड़की की साइड वाली रोड पर घूमने लगी शाम को!
वह वहाँ पेड़ों में पानी डालने के बहाने मुझे देखता रहता था और मेरे डोलते हुए मम्मों को।
एक दिन मैंने सफेद कॉटन की कुर्ती पहनी, बिना ब्रा के।जब वह पेड़ों में पानी डाल रहा था, मैं वहाँ अचानक पहुँच गई, उसके पाइप के सामने … और भीगने लगी।
उस कमीने ने भी पाइप नहीं हटाया, मुझे भीगने दिया।पूरी कुर्ती भीगने के बाद उसने नल बंद किया।
अब उस झीनी, कसी हुई कुर्ती में से मेरी चूचियाँ साफ दिख रही थीं, निप्पल भी काले-काले, जो खड़े हुए थे।
मैंने ऐसा दिखाया जैसे मुझे कुछ मालूम नहीं।
मैंने उससे पूछा, “क्या मैं कुछ नीम की पत्तियाँ तोड़ लूँ? माँ ने मँगाई हैं।”उसने कहा, “हाँ, तोड़ लीजिए।”
मैं ऊँची-ऊँची डाली से, मुश्किल से पत्तियाँ तोड़ने की कोशिश करने लगी।वह मुझे ऊपर से नीचे तक देखता रहा।
मैं कूदकर पत्ती तक पहुँचने की कोशिश करने लगी और वह मेरे ऊपर-नीचे होते मम्मों को देखता रहा।
वह धीरे-धीरे पास आता गया।
मेरे ऊपर पेड़ से चींटे चढ़ने लगे।उसने कहा, “आपके ऊपर बड़े-बड़े चींटे चढ़ गए हैं, देख लीजिए।”
मैंने कहा, “ओह नहीं! मुझे बहुत डर लगता है चींटों से। प्लीज़ आप हटा दीजिए!”
वह थोड़ा झिझका, पर फिर आगे आया और हल्के-हल्के से मेरे कुर्ते पर से उन्हें हटाने लगा— कंधे, पीठ, कमर से। एक बालों में से, और एक जैसे मेरे लिए ही मेरी छाती पर चढ़ गया था।
बहुत फिल्मी अंदाज़ में उसने मेरे कड़क निप्पल को छूते हुए वह चींटा हटा फेंका।ऐसा लग रहा था पूरी कायनात चाहती थी कि मैं उससे चुद जाऊँ!
उसके क्वार्टर के पीछे पुराना सा एक पार्क था, जहाँ कोई नहीं जाता था।वहां टूटे झूले, कुछ बेंच रखी थीं, और झाड़ियाँ।मेरे अलावा उधर कोई नहीं जाता था।
वहाँ जाकर मैं शाम को कसे हुए कपड़ों में योग करने लगी।वह मुझे देखता रहता था, और अब तो रोज़ मूठ मारता था मुझे देखकर!
एक दिन मैं एक आसन करते समय गिर गई।
वह भागा-भागा आया, मुझे उठाया, और पूछने लगा, “कहीं लगी तो नहीं?”मैंने मौके का फायदा उठाया और कहा, “शायद मोच आ गई है पैर में!”
उसने कहा, “मुझे ठीक करना आता है।”वह मेरे कपड़े झाड़ने लगा, कहता, “मिट्टी लग गई है।”
ऐसा करते-करते उसने मेरी गांड पर भी हाथ मारा और सीने पर भी!फिर मुझे कमर से पकड़कर बेंच पर बिठाया।
उसने मेरे पजामे को घुटने से ऊपर चढ़ाया, जो ज़रूरी नहीं था।पर उसने कहा, “घुटने से दर्द चालू होता है।”और मालिश करने लगा।
मालिश करते-करते उसने मेरी मोच तो सही कर दी थी, पर फिर भी मालिश करता रहा।करते-करते मेरी जाँघ तक हाथ फेरने लगा।
मेरी साँसें तेज़ हो गईं, छाती ऊपर-नीचे होने लगी।मेरा मन था कि वह वही मेरे कपड़े फाड़कर मुझे चोद डाले!पर मैं नहीं चाहती थी उसे पता चले कि मैं भी वही चाहती जो वह चाहता।
मैं चाहती थी वह और तड़पे!
मैं अचानक उठी और घर की ओर भाग गई उसे थैंक्स बोलकर।घर जाकर नहाने चली गई।
टॉवेल लपेटकर खिड़की के सामने आई और टॉवेल खोल दिया।फिर कपड़े ढूँढने लगी अलमारी में, नग्न अवस्था में ही।
मैं बॉडी लोशन लगाने लगी।मुझे पता था वह देख रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने बाज़ार जाने को स्कूटी निकाली और अपनी खिड़की तक आकर रुक गई।
फोन उठाकर एक दोस्त से बात करने लगी।
बातों-बातों में मैंने उस दोस्त से पूछा, “क्या तुझे याद है मैं कैसे घोड़े बेचकर सोती हूँ? कि कोई मेरे सामने ढोल बजाए या कपड़े ही बदल दे, मुझे पता नहीं चलेगा।”
मैंने आगे कहा, “और ऐसे में कोई मुझे होली पर ऊपर से नीचे तक रंग गया था हॉस्टल में।”ये सब वह सुन रहा था।
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मेरे दिमाग़ में उससे अनजाने में चुदने की इच्छा थी।
2-3 दिन बाद मैं उसी पार्क में योग कर रही थी बनियान-नुमा टॉप बिना ब्रा के, और कसे हुए शॉर्ट्स पहनकर।
बहुत थककर बेंच पर जाकर लेट गई और सोने का नाटक करने लगी।
10 मिनट बाद वह आया और देखने लगा कि मैं उठती हूँ या नहीं, छूने से।मैं बिल्कुल भी न हिली।
वह मेरी टाँगें छूने लगा, नीचे से ऊपर की ओर आहिस्ता।मेरी साँस जैसे चढ़ सी गई।
एक हाथ से वह मेरे सीने को सहलाने लगा, दूसरा हाथ मेरी जाँघ पर मलने लगा।
और मलते-मलते अचानक शॉर्ट्स के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत मलने लगा।मैं सिहर गई।
उसे अभी भी लग रहा था कि मैं गहरी नींद में हूँ।
पर मैं तो इंतज़ार कर रही थी कि कब वह मुझे नंगा कर अपना गरम लंड मेरे बदन में डालेगा, कब मेरी चूचियाँ चूसेगा।
वह अपना हाथ मेरी चड्डी के अंदर से निकालकर मेरे पेट पर फेरने लगा और मेरा शॉर्ट्स थोड़ा नीचे खिसकाकर मेरी नाभि चूमकर चाटने लगा।मैं अंदर ही अंदर पागल हो रही थी!
धीरे से उसने मेरा टॉप ऊपर किया, मेरा पेट चाटने लगा और मेरी चूचियाँ पकड़ लीं।फिर वह हौले-हौले से चूचियाँ दबाने लगा।
फिर उसे समझ आया कि मेरे टॉप के बगल बहुत बड़े हैं।उसने बगल से अंदर हाथ डालकर मेरी एक चूची पकड़कर बगल से बाहर निकाल ली।ऐसा ही उसने दूसरी तरफ भी किया।
फिर उसने देखा कि मेरे निप्पल खड़े हैं।वह उनसे खेलने लगा, दबाने लगा।
फिर वह मेरे और पास आया उन्हें चूसने।जैसे ही उसने मेरे मम्मे को मुँह में लिया, मेरी साँस भारी हो गई।
वह डरकर सीधा हो गया।
अब मेरी वासना मुझपर हावी हो चुकी थी।मेरा शरीर बल खा रहा था, तड़प रहा था।
वह समझ रहा था।
उसने चूची को चूसना चालू किया और मैं आनंद से भर गई।ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग का रास्ता दिख रहा हो।
वह भूखे राक्षस की तरह चूचियाँ चूस और मसल रहा था।
फिर उसने अचानक से मेरे निप्पल को काट लिया।मेरी आह निकल गई और आँखें खुल गईं।
मैंने थोड़ा आश्चर्यचकित दिखने का नाटक किया।
उसने मेरे मुँह पर हाथ रखकर बोला, “मुझे मालूम है तुझे ये अच्छा लगेगा! ये होना ही था एक दिन, आज ही सही! तुझे छुए बिना मुझे चैन नहीं आता, और तू छूने के लिए ही बनी है!”
मैंने कुछ नहीं कहा, उसे एकटक देखती रही जोर से साँस लेते हुए।
उसने मुझे चूम लिया।ऐसा चूमा कि मेरी साँस ही निकल गई हो जैसे!
ये लड़का तो जितना सोचा था, उससे कई ज़्यादा हॉट है!
हम फिर एक-दूसरे को देखते रहे।उसने मुझे चुपचाप गोद में उठाया और अपने क्वार्टर में ले गया।
वहाँ उसने मुझे पलंग पर लिटाकर सबसे पहले मेरे शॉर्ट्स मेरी चड्डी सहित उतार दिए।
तब वह मेरी टाँगें फैलाकर मेरी चूत चाटने लगा।
आय हाय! इतना जोर से, इतना अंदर तक, इतना बढ़िया मुझे किसी ने नहीं चाटा था!ये तो कुल्फी की तरह मेरा टपकता रस पिए जा रहा था।
वह मुझसे कहता, “मुझे मालूम था तेरी चूत का स्वाद बड़ा मीठा होगा!”
आधे घंटे तक वह मेरी चूत चाटता रहा और आखिरकार मैं काँपकर झड़ गई।
फिर उसने अपने कपड़े उतारे, सिर्फ़ बॉक्सर्स में था।और मेरी चूचियों पर धावा बोला।ऐसे चूसा, काटा, मसला कि मेरी जान ही निकल गई।इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया था।
मेरी चूचियाँ लाल चट हो गई थीं उसके चूसने से।
मैंने इस बीच एक शब्द नहीं कहा, बस उसकी आँखों में देखती रही।
उसने फिर मुझे चूमा, और दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं।मैं कराह गई।
उसने मेरा चिल्लाना रोकने के लिए मुझे चूमना जारी रखा।
इस लड़के को इतना अच्छा फोरप्ले कैसे आता है?कामसूत्र का प्रिंस है ये तो!ऐसे खयाल मेरे मन में चल रहे थे।
वह मेरे पूरे बदन को चूमता रहा … मेरी कमर, मेरा गला, मेरे कान काटने लगा।
फिर उसने बहुत देर में उंगली बाहर निकाली।
मुझे पलटकर मेरी गांड दबाने लगा, उनके बीच में अपना मुँह घुसाने लगा।फिर दोनों चूतड़ों पर काटने लगा।
फिर उसने अपनी चड्डी खोली।मैंने देखा … अच्छे साइज़ का भूरा, मोटा, खड़ा लंड।मुझे इतने अच्छे लंड की उम्मीद नहीं थी।मैं उसे देखती रह गई।
वह फिर मुझ पर चढ़ा, मुझे और चूमा।
उसका लंड मेरे बदन पर रगड़ने लगा।
मेरी चूचियाँ काटकर, चूसकर उसने मेरे पैर पकड़कर चौड़े किए।उसने मेरे पैर अपने कंधों पर रख लिए।फिर अपने लंड पर मेरा थूक लगाकर, उसने मेरे अंदर एक झटके से डाल दिया।
मेरी चीख निकलती, उससे पहले उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया।
मुझे धीरे-धीरे चोदते हुए वह कहने लगा, “क्या माल लगी है मेरे हाथ! तुझे बनाया किसने है? इतनी बड़ी चूची, इतना चिकना बदन, दूध-मलाई से बनी हो जैसे! अगर तेरी चूची में दूध होता, तो मैं पीकर खत्म कर देता अभी तक!”
ये सब बोलते हुए उसने स्पीड तेज़ कर दी।जोर-जोर से, तेज़ी से मुझे चोदने लगा।
मेरी आह निकलने लगी थी। मैंने कहा, “और ज़ोर से!”
मेरी आवाज़ सुन उसकी जैसे हवस बढ़ गई।वह जानवरों की तरह मुझे चोदने लगा, मेरी चूचियों को दबाता रहा!
स्लट बेब क्रेजी सेक्स करके 10 मिनट बाद वह झड़ गया।पर वह रुका नहीं।
फिर और देर तक मेरी चूचियों से खेलता रहा, खाता रहा।मेरी चूत का पानी चाटता रहा और मुझे फिर से झड़ा दिया।
फिर उसने मुझे उल्टा किया, और डॉगी स्टाइल में मुझे चोदने लगा।
मेरे बाल खींचते हुए, जैसे मैं लड़की नहीं, सचमुच कुतिया हो!
मेरा मन ही नहीं था कि वह रुके! वह एक और बार झड़ गया।
इस बार मैंने उसे कहा, “बस, अब मुझे जाना होगा।”
उसने मुझे पकड़ा, और अपने पास खींचकर बैठे-बैठे मेरी चूचियाँ चूसी कुछ देर तक।
मेरे निप्पल सूज गए थे।
मैंने उसे दूर किया और कपड़े पहने।
जब मैं जाने लगी, तो उसने मुझसे पूछा, “दोबारा आओगी न? एक चुदाई काफ़ी नहीं है, और चोदना है तुझे!”
मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कुराई और निकल गई वहाँ से।
आपको क्या लगता है, मैं वापस गई होऊंगी?
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