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इंडियन बीवी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 897 बार

पति से चुदाई का पूरा सुख नहीं मिलता

दिव्या विरयानी

17 Aug 2014 को प्रकाशित

पति से चुदाई का पूरा सुख नहीं मिलता
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स्माल डिक स्टोरी में मैं गदराई माल औरत हूँ। लोग आँखें फाड़-फाड़कर घूरते हैं। लेकिन मेरे पति में मुझे चोदने का पूरा दम खम नहीं है. मेरी चूत की तसल्ली नहीं होती उनके लंड से.

यह कहानी सुनें.

मेरे प्यारे मित्रो, कैसे हैं आप सब?मैं आशा करती हूँ आप सब अच्छे होंगे।

मेरी प्यारी बहनें टाइम से चूत चुदवा रही होंगी और मेरे प्यारे भाई टाइम से चूत मार रहे होंगे!

अब थोड़ा अपने बारे में बता दूँ।मेरा नाम रितु वरयानी है।मैं एक 40 साल की शादीशुदा औरत हूँ।मेरा जिस्म 38-34-44 है।

मेरा जिस्म सुनकर आपको अंदाज़ा हो गया होगा कि मैं कितनी गदराई किस्म की औरत हूँ।मेरा जिस्म इतना भरा-पूरा है कि जब मैं चलती हूँ तो मेरे चूतड़ और मेरे चूचे हिलते हैं।

लोग आँखें फाड़-फाड़कर घूरते हैं।और घूरें भी क्यों ना?इतना भरा जिस्म है मेरा!

अब सीधे स्माल डिक स्टोरी पर आते हैं.

दोस्तो, यह बात है 3-4 साल पुरानी।मेरे और मेरे पति देवराज की जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी।

हमारी दो बेटियाँ हैं – बड़ी बेटी जूही मेरी छोटी बेटी खुशी, दोनों टीनएज में.पर बॉडी में दोनों अपनी माँ पर गई हैं।

मेरे ससुराल में मेरे पति, दो बेटियाँ और सास-ससुर हैं।

तो रात का समय था।हम सब खाना खा रहे थे।खाना खाने के बाद सब अपने-अपने कमरे में सोने चले गए।मैंने भी अपना काम खत्म किया और अपने रूम में चली गई।

उस टाइम मैंने एक कसी हुई लेगिंग्स और एक सूट पहना था।

मैंने रूम में आकर दरवाजा जैसे ही बंद किया, राज ने मुझे पीछे से दबोच लिया।

मैं बोली, “अरे! क्या कर रहे हो? ठीक से अंदर तो आने दो मुझे!”राज बोले, “अरे मेरी जान, तुम्हारी ये गांड देखकर रहा ही नहीं जाता मुझसे!”मैं बोली, “अच्छा जी?”

इतने में राज ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे होठों को चूसने लगे।मैं भी उनका साथ देने लगी।चूमते-चूमते राज मुझे बेड तक ले आए।

उन्होंने बेड के करीब पहुँचकर मेरा सूट उतारा और फिर मेरी लेगिंग्स भी उतार दी।मैं रात में अंदर से नंगी ही सोती हूँ, तो मैं पूरी नंगी हो गई।

मैंने भी राज के सारे कपड़े निकाल फेंके।

राज ने मुझे बेड पर धकेल प्रिया और मैं बेड पर जा गिरी।जब तक मैं खुद को संभालती, राज मेरे ऊपर आ गए और मेरे चूचों को दबाते हुए मुझे चूमने लगे।मैं भी उनका साथ देने लगी, “उह्ह… उह्हह्ह… ओह्ह्ह… राज बेबी, आई लव यू माई लव!!”

चूमने की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं.आआउम्म्म… आआउम्म्म… आआ… आउम… पुछ्… पुऊऊछ्छ… हह.

फिर राज ने मेरे होठों को छोड़ा और मेरे चूचों पर टूट पड़े, उन्हें मसलते हुए चूसने लगे।

मैं भी उनके बालों को सहलाने लगी और आहें भरने लगी, “उम्मम्म… सीससीसी… उमम्म… उम्मम्म… ओह गॉड… आह्ह… राज प्लीज बाइट मत करो ना! दर्द कर रहा है!”राज मेरे चूचों को बुरी तरह चूसते गए।

फिर वो मेरी टांगों के बीच आकर मेरी जांघों पर चाटने लगे और धीरे-धीरे चूत के करीब आने लगे।जैसे ही राज का मुँह चूत के करीब आया, मैंने उनका सिर पकड़कर चूत में दबा प्रिया।वो गुस्से से मुझसे अलग हो गए।

मैं बोली, “क्या हुआ? चाटो ना प्लीज!!”तो राज बोले, “तुम्हें पता है मुझे वहाँ चाटना बिल्कुल नहीं पसंद, रितु! पूरा मूड खराब कर प्रिया यार तुमने!”मैं बोली, “अच्छा… सॉरी बेबी!”वो बोले, “नहीं, अब नहीं करना यार मुझे!”

पर मैं तो अब गरम हो चुकी थी।मैंने राज को लेटाया और उनके टांगों के बीच जाकर लंड को चाटने लगी।राज मुझे हटाने लगे.पर मैं नहीं हटी।

मैंने उनका स्माल डिक मुँह में भरा और चूसने लगी।दो मिनट बाद ही राज मेरा सिर पकड़कर अंदर धकेलने लगे।मैं तेज-तेज उनकी आँखों में देखकर लंड चूसती गई।

5 मिनट तक लंड चूसने के बाद राज ने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा प्रिया।वो मेरी टांगों के बीच आए, मेरी चूत पर थूका और अपना लंड चूत पर रगड़ने लगे।मैंने अपनी टांगें फैला दी और आहें भरने लगी, “ओह्ह… राज प्लीज डाल दो अब! जल्दी से अंदर… रहा नहीं जा रहा यार… फक मी बेबी प्लीज!”

राज ने बेड के दोनों तरफ हाथ रखे और एक जोरदार धक्का मारकर अपना पूरा लंड अंदर घुसा प्रिया।मैंने उनकी कमर पर टांगें लपेट लीं और राज मेरे ऊपर लेटकर तेज-तेज मुझे चोदने लगे।

“आह्ह… आआ ह्हह… ह्हह… उह्ह… उह्हह… आआ ह्हह्ह… म्म्मम्म… सीस सीसीसी… आह्हह्… चोदो राज… और तेज चोदो!! राज बोहोत मजा आ रहा है… करते रहो!! आह्हह… बेबी चोदो मुझे!!”

राज तेजी से धक्के देने लगे और आहें भरने लगे, “आआह… मेरी रंडी बीवी, कितनी आग है तेरी चूत में जान!! आआ ह्ह्ह… साली ले मेरा लंड, छिनाल बहन की लोड़ी!”मैं भी राज का साथ देने लगी गांड उठा-उठाकर।

करीब 10 मिनट बाद राज मेरी चूत में झड़ गए और साइड गिरकर लेट गए।

राज मेरी प्यास तो नहीं बुझा पाते.पर मैंने ये चीज कभी उनसे नहीं कही और ना कभी मैंने बाहर कुछ करने का सोचा।बस चूत में उंगली करके खुद को शांत कर लेती और सो जाती।

उस दिन भी यही हुआ।मैंने चूत में उंगली करके खुद को शांत किया और नंगी ही राज के साथ सो गई।

अगली सुबह मेरी आँख खुली तो राज मेरे बगल में नहीं थे।मुझे लगा शायद बाथरूम में होंगे.

पर मैंने बाथरूम चेक किया तो वो वहाँ भी नहीं थे।मैं बाथरूम में नहाने घुस गई।

नहाने के बाद मैं टॉवल लपेटकर बाहर आई और अलमारी से अपने कपड़े निकाले।

मेरी एक फेवरेट ड्रेस है जो मुझे बहुत पसंद है।मैंने अलमारी खोली तो वो सामने ही पड़ी थी।

जैसे ही मैं उसे निकाल रही थी, एक डब्बा नीचे गिरा – जो गिफ्ट की तरह पैक्ड था।और साथ में एक पर्ची।

मैंने वो डब्बा और पेपर उठाया।पेपर खोला तो उसमें एक ग्रीटिंग कार्ड था।उसमें राज ने लिखा था “Happy Birthday Sweetheart”और भी कुछ बातें लिखी थीं।

नीचे लिखा था “ये तुम्हारा पहला गिफ्ट, इसे अकेले में खोलना।मैं खुश हो गई और जल्दी से कार्ड रखकर गिफ्ट खोलने लगी।

जैसे ही गिफ्ट खोला, मैं शॉक्ड रह गई।उसमें एक 12-13 इंच का डिल्डो (प्लास्टिक लंड) और एक वाइब्रेटर था।मैं उसे देखकर बहुत खुश हुई।

तभी राज की कॉल आई।मैंने कॉल उठाई।उसने मुझे विश किया।मैंने उन्हें थैंक यू कहा।

एक्चुअली मुझे खुद को याद नहीं था कि आज मेरा जन्मदिन है।

फिर राज ने मुझसे पूछा, “गिफ्ट कैसा लगा?”मैं बोली, “बोहोत अच्छा बेबी!”

तो राज बोले, “यूज करके देखो!”मैंने बोला, “अभी नहीं, बाद में बेबी!”

राज बोले, “जो ड्रेस चॉइस की है उसे ही पहनना आज बेबी!”और इतना बोलकर उन्होंने कॉल कट कर दी।

मैंने ब्लू ब्रा-पेंटी का सेट पहना और फिर वो ड्रेस पहन ली।मैं वो ड्रेस काफी टाइम बाद पहन रही थी इसलिए वो मुझे कसी हुई आ रही थी पर उसमें मेरी बॉडी काफी अच्छे से दिख रही थी।

मैं रेडी होकर नीचे गई।सब नीचे बैठे थे।

मेरे आते ही सबने मुझे विश किया।मैंने सबको थैंक यू कहा।फिर मैं सबके लिए नाश्ता बनाने चली गई।

हम सबने साथ में नाश्ता किया।

मेरी बड़ी बेटी जूही अपना सुबह का मिल्क लेकर प्रोटीन लेकर जिम निकल गई।छोटी बेटी अपने कमरे में चली गई।

ससुर जी भी रोज की तरह टहलने निकल गए।

मेरी सास हॉल में बैठकर टीवी देखने लगीं और मैं घर का काम करने लगी।

थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी बजी।मैं जाकर दरवाजा खोली तो बाहर हमारा नौकर सुरेश खड़ा था।

उसने मुझे नमस्ते किया।मैं बोली, “अरे सुरेश, इतनी देर क्यों लगा दी तुमने आज तो?”वो बोला, “वो मालकिन, आज बीवी को हॉस्पिटल ले कर गया था।”

मैंने पूछा, “क्यों? सब ठीक तो है ना? तू आया ही क्यों जब बीवी बीमार है तेरी?”वो बोला, “अरे नहीं मालकिन, बस थोड़ा पेट दर्द था उसका, अब ठीक है।”

मैं बोली, “ठीक है, अंदर आ जा सुरेश।”

सुरेश अंदर आ गया और किचन में मेरे साथ काम कराने लगा।जल्दी ही सारा काम खत्म हुआ।तो मैं अपने कमरे में जाने लगी।

सास सुरेश से बोलीं, “अरे सुरेश, काम हो गया तो मेरे कमरे में चल के मेरे पैरों की मालिश कर दे थोड़ी।”वो बोला, “ठीक है बड़ी मालकिन, मैं तेल लाता हूँ। आप चलिए।”

मैं बोली, “माँ जी, मैं कर दूँ क्या मालिश?”वो बोलीं, “अरे नहीं बहू, सुरेश कर देगा। इसको हाथों से आराम मिल जाता है।”

फिर मैं अपने कमरे में आ गई।मैंने कमरे में आकर दरवाजा बंद किया और राज का प्रिया गिफ्ट लिया।

पढ़ते-पढ़ते जल्दी ही मैं गरम हो गई।मैंने अपनी ड्रेस उतारी और ब्रा के ऊपर से कहानी पढ़ते हुए अपनी चूची दबाने लगी।

धीरे-धीरे मैं मदहोश होती गई।

तभी मैंने सोचा, ऑडियो कहानी सुन लेती हूँ।मैंने कान में एयरबड्स लगाए और कहानी चला दी।

मैंने फोन साइड रखा और कहानी सुनती हुई अपने चूचों को प्रेस करने लगी।

10 मिनट बाद मैं वाइब्रेटर उठाने ही थी कि राज की कॉल आ गई।उन्होंने कहा, “क्या कर रही थी बेबी?”मैं बोली, “बस तुमने तो कॉल उठाया नहीं, इसलिए कहानी सुनती हुई चूचे प्रेस कर रही थी!”

तभी राज बोले, “अच्छा… तुमने नाश्ता करा प्रिया सबको?”मैं बोली, “हाँ करा प्रिया।”

फिर वो बोले, “और मम्मी को दवाई दे दी?”तब मुझे होश आया- ओह शिट! दवाई देना तो मैं भूल ही गई।राज बोले, “तुम भी ना… जाओ अभी से आओ!”

मैंने राज का कॉल कट किया और भागकर नीचे गई।मैंने मम्मी जी की दवाई ली और पानी की बॉटल लेकर उनके कमरे में जाने लगी।

मैं दरवाजे पर पहुँची तो वो अंदर से बंद था।तभी सास की अंदर से आवाजें आईं।मुझे उन पर शक हुआ।

मुझसे रहा नहीं गया और मैं दबे पाँव उनके कमरे की खिड़की के पास जाने लगी।जैसे ही मैं खिड़की के पास पहुँची, मैं अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई।

अंदर सास सुरेश के साथ बेड पर थीं।दोनों पूरे नंगे थे और सास को सुरेश ने घोड़ी बनाकर रखा था।वो पीछे से उन्हें चोद रहा था और सास आहें भर रही थीं।

यहाँ से उनकी बातें…सास, “आआह्ह… सुरेश… आआह्हह… मेरे राजा! कितना मोटा लंड है रे तेरा… पूरा जिस्म खोल के रख देता है तू तो यार!! आह्हह्ह… सुरेश चोद मुझे… सुरेश चोद मुझे!! और तेज… और तेज… और तेज… और तेज सुरेश!”सुरेश, “आह्हह… बड़ी मालकिन, इस उम्र में भी कितना गदराया जिस्म है आपका!! मालकिन… ओह्ह् मालकिन आपको चोद के तो मजा ही आ जाता है!! आह्ह…”

सास, “आह्ह… सुरेश मेरी जान… चोद मुझे अपने बड़े लंड से!! सुरेश बुझा दे मेरी सारी प्यास सुरेश!! आह्ह… मेरी गांड मार सुरेश… फाड़ दे मेरी फुड्डी… बना दे इसका बोसड़ा!! हाय आआह्हह… सीससी… म्मम्मम!!”

सुरेश ने मम्मी जी की चूत से लंड निकाला और उनकी गांड में सेट कर प्रिया।मैंने सुरेश का लंड देखा – हाय राम! इतना लंबा, इतना मोटा!!मेरी तो चूत गीली हो गई।

उसके लंड को देखते ही मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर प्रिया।मैंने अपनी ड्रेस उठाकर अंदर हाथ डाला।पेंटी के ऊपर से… फक!!ये सुरेश का लंड देख मेरी चूत क्यों गीली हो रही है?कहीं ऐसा तो नहीं कि मुझे सुरेश का लंड वाकई पसंद आया?क्या मैं इसे अपनी चूत में लेना चाहती हूँ?

मेरा हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा।उफ… म्म्म्मम्म… सीस सीसी ससी… आआह…नहीं!

मैं ऐसा बिल्कुल नहीं सोच सकती!!मैं अपने पति को धोखा कैसे दे सकती हूँ?

मुझे किसी गैर मर्द का लंड क्यों पसंद आएगा भला!आआह्हह…पर मेरी चूत तो कुछ और ही कह रही है.कहीं ये सच तो नहीं?

ओह्ह रितु, तू ऐसा सोच भी कैसे सकती है?मैं अपने ख्वाबों में खोई पड़ी थी।

तभी होश आया जब सास की आवाज सुनी।देखा तो सुरेश सास की गांड के ऊपर चढ़ चुका था।

उफ्फ… कितना प्यारा लग रहा था सुरेश का लंड झड़ते हुए!मैं खुद को संभालकर वहाँ से हट गई।

खुद को नॉर्मल करके सास के दरवाजे पर आकर दरवाजा नॉक किया।सुरेश ने आकर दरवाजा खोला।अंदर सास कपड़े पहनकर नॉर्मल होकर लेटी पड़ी थीं।

मैं बोली, “मम्मी जी, आपकी दवाई…”

वो बोलीं, “अरे हाँ, इसे तो मैं लेना भूल ही गई। सुरेश, बहू से दवाई ले ले।”

सुरेश ने मुझसे दवाई ली।मैं बोली, “अभी खा लेना मम्मी जी।”वो बोलीं, “हाँ बहू, ठीक है।”

मैं वहाँ से चली गई और अपने कमरे में आ गई।मैंने कमरा लॉक किया, बेड पर आकर ड्रेस उतारी, ब्रा-पेंटी में हो गई और अपने चूचे प्रेस करने लगी।

धीरे-धीरे मेरी आँखें बंद हो गईं और मैं मदहोश होने लगी।मेरी आँखों के सामने सुरेश का वो लंबा लंड आने लगा।मेरा दूसरा हाथ मेरी पैंटी में जा घुसा और मैं चूत सहलाने लगी और आहें भरने लगी।

उह्ह… रितु तू पागल हो गई है!किसी गैर मर्द का लंड तुझे कैसे पसंद आ सकता है?वो तेरा नौकर है!!

मेरे दिमाग में लगातार उसका लंड घूमता गया।

और मेरे हाथ तेज-तेज चूत पर चलने लगे।मैं अपना आपा खो बैठी और तेज-तेज आहें भरने लगी।

“आआह्ह… आआह्… ओह्ह… सुरेश मेरी चूत… आआह्हह… सुरेश चाटो मेरी चूत!! सुरेश तुम बहुत अच्छे नौकर हो!! सुरेश… आआ… आह्ह… चाटो अपनी रितु मालकिन की चूत सुरेश!”

मैंने अपने ड्रॉअर से वाइब्रेटर निकाला और पेंटी नीचे करके अपनी चूत पर उसे रगड़ने लगी।जैसे ही वाइब्रेटर ऑन किया, वो काफी तेज से चूत पर वाइब्रेट होने लगा।

मैं पागल-सी होने लगी और जोर-जोर से ऊपर-नीचे उसे पूरी चूत पर घिसने लगी।“आआह… आअह्ह… आह्ह… उफ… आआह्ह… सी सीससी सी… म्म्म्मम… आआह्ह… मेरी चुत… सुरेश चोदो! सुरेश चोदो मुझे!”

मैं एक हाथ से अपनी चूची को कसके दबाने लगी।“आआह्ह… सुरेश मैं बहुत प्यासी हूँ! सुरेश प्लीज चोदो मुझे! जोर से बुझा दो मेरी चूत की सारी प्यास सुरेश! आआअह्ह… बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा सुरेश!”

मुझे और मजा चाहिए था।मैंने ड्रॉअर से डिल्डो भी निकाल लिया।वो चिपकने वाला डिल्डो था।मैंने उसे अपने बेड के पास दीवार पर चिपका प्रिया और जल्दी ही ब्रा उतारी, पेंटी उतारी और पूरी नंगी हो गई।

मैं डिल्डो के पास गई और दीवार से चिपके डिल्डो को चूत पर रगड़ने लगी।वाइब्रेटर को चूचियों पर फिराने लगी।“आआहह्ह…”

मैंने डिल्डो चूत पर सेट किया और धक्का मारकर उसे अंदर ले गई।“आआह्ह ह्ह…” एक अलग-सा सुकून मिला मुझे चूत में।

मैं आगे-पीछे होने लगी और चूचियों पर वाइब्रेटर फिराने लगी।

“आअह्ह… सुरेश चोदो मुझे मेरे राजा!! तुम्हारे साहब का लंड बहुत छोटा है… वो जल्दी झड़ जाते हैं!! तुम्हारी रितु मालकिन बहुत प्यासी है सुरेश!! ओह्ह्… सुरेश प्लीज जोर से चोदो मुझे!! बहुत मजा आ रहा है सुरेश!! आआह्ह… आअह्ह… आह्ह…”

मैं तेज-तेज डिल्डो चूत के अंदर-बाहर करने लगी।

थोड़ी देर बाद मैं घूमकर घोड़ी बन गई और चूत में डिल्डो घुसाकर वाइब्रेटर को चूसने लगी।

“उम्म्म… सीसीसी… आह्ह… आह्हह्… आआह्ह… ऊऊ… ऊई आई आई आई आई… आअह्ह… सुरेश चोदो… चोदो… चोदो… चोदो!! आह्ह… येस्स… येस्स… येस्सस्स्… येस्स… येस्सस… येस्स!! सुरेश बेबी यू फक मी सो हार्डर बेबी!! येस्स बेबी… येस्स बेबी… फक मी लाइक दैट!! फक मी सो हार्ड बेबी!! फक माय वेट पुसी बेबी!! येस्स… येस्सस्स… येस्स सुरेश!!”

तभी मेरी जांघें काँपने लगीं और मेरी चूत से पानी बहने लगा। “ओह्ह गॉड… आआह्हह्ह… येस्स!!”

मैं झड़कर बिस्तर पर गिर गई।मैंने सारा सामान वापस रखा और कब सो गई, पता ही नहीं चला।

तो दोस्तो, ये थी आपकी प्यारी भाभी रितु की कहानी।आपको कैसी लगी स्माल डिक स्टोरी?मेल करके जरूर बताना.आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें.धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

चिलपिल गोपी

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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