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भाभी की चुदाई पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 693 बार

सुहागरात का हसीन धोखा

बेस्ट किंग

14 Jun 2024 को प्रकाशित

सुहागरात का हसीन धोखा
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मेरे दोस्तो, आज मैं आपको अपनी सुहागरात की आप बीती बताने जा रही हूँ।

यह उन दिनों की बात है जब मैं 24 साल की थी और मेरे माँ बाप ने मेरी शादी करके मुझे विदा ही किया था।

वह वक़्त बहुत खुशनुमा था क्यूंकि उस वक़्त मैं एक महकती कली थी और मैं बहुत से अरमान लेकर अपने पिया के घर गई थी।

मेरे घर पहुँचने के कुछ ही देर बाद वह रात आई, मेरी सुहागरात, जिसका मैंने बड़ी ही बेसब्री से इंतज़ार किया था और जिसके लिए मैंने अपना यौवन बचाकर रखा था।

मैं घूंघट ओढ़े पलंग पर बैठी थी कि अचानक दरवाज़ा खुला।

और मैं डर के मारे सहम गई, मेरी तो साँसें तेज़ होने लगी थी।

उन्होंने दरवाज़ा बंद कर प्रिया, मेरी तो इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं एक तक नज़र उठकर उन्हें निहार लूँ!

इतने में ही उन्होंने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और मैं उन्हें देख भी नहीं पाई थी कि उन्होंने बत्ती बुझा दी और मेरे पास पलंग पर आकर बैठ गए।

मेरी साँसें और तेज़ होने लगी और उन्होंने अपना हाथ मेरे लहंगे में घुसा प्रिया और धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ते गए।

अचानक ही उनका हाथ मेरी मुनिया पर लगा और मैं सिहर उठी।

और वह उनके पहले शब्द थे जो वे मुझसे बोले- क्या बात है? तुम तो पहले ही अपनी मुनिया को तैयार करके बैठी हो?

मैंने जवाब मैं सिर्फ अपना सर हिला प्रिया।

फिर उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और मेरा घूँघट निकाल प्रिया, उसके बाद उन्होंने एक एक करके मेरे सारे आभूषण उतार दिए।

फिर उन्होंने मेरे पीछे आकर मेरी डोरी खोल दी और मेरे दोनों सेब बाहर निकल गए।

फिर क्या था, वे मेरे ऊपर टूट पड़े।

मुझे लिटा प्रिया और मेरे एक चूचे को अपने मुख में ले लिया और एक को अपने दूसरे हाथ से मसलते रहे।

मैंने भी उनका पूरा साथ प्रिया।

फिर उन्होंने मुझे होंठों पर चूम लिया।

वह चुम्बन कुछ ऐसा था जिसे मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकती।

मेरा बदन बिखरने लगा।

फिर उन्होंने मेरा लहंगा उतार प्रिया और वह पल आया जब उन्होंने पहली बार मेरी मुनिया के दर्शन किये।

उन्होंने मेरी मुनिया के अंदर अपनी जीभ डाल दी।

मैं तब तक तड़पी जब तलक मैं झड़ ना गई।

उन्होंने मुझसे कहा- मैं चाहता हूँ कि मेरे कपड़े तुम उतारो!

मैंने बिलकुल वैसा ही किया।

उनका लण्ड देखकर मेरी तो आँखें फट गई।

मैं उनसे बोली- आपका तो बहुत बड़ा है? मेरी तो मुनिया छोटी सी है… इसका क्या होगा?

और वे बोले- तू बस वैसा ही करती जा, जैसा मैं बोल रहा हूँ। फिर देख तुझे जन्नत की सैर ना कराई तो बोलना!

उनके कहने पर मैंने उनका लण्ड मुँह लेकर खूब चूसा।

फिर जब वे झड़े तो उनका सारा वीर्य मेरे मुँह में आ गया।

और फिर दोबारा मैंने उनका लण्ड चूस चूसकर खड़ा किया।

इस बार मेरी मुनिया की बारी थी।

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उन्होंने मुझे कुतिया बना प्रिया और मेरे चूतड़ों को कसके पकड़ा ताकि मैं हिल ना सकूँ।

उन्होंने मेरी मुनिया के अंदर कम से कम आधा घंटा उंगली की और मेरा बांध टूट गया, मैं बह गई।

मेरा सारा रस उन्होंने एक ही बार में पी लिया।

उन्होंने बहुत सारा थूक मेरी मुनिया में डाला और उसे अपनी उंगली से अंदर तक पहुँचा प्रिया।

फिर क्या था, एक ही झटके में उन्होंने अपना आधा लण्ड मेरी मुनिया में घुसा प्रिया और मैं जोर से चीखी- हय मैं मर गयी माँ री… फाड़ डाली मेरी चूत… साले चूतिये… और तेज़ कर… और तेज़ कर… बहन के लौड़े…

मेरे मुख से गालियाँ सुनकर उन्होंने अपनी गति को और बढ़ा प्रिया और काला बड़ा लण्ड पूरा का पूरा मेरे चूत में पेल प्रिया और फिर 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों बिस्तर पर चित हो गए।और हम दोनों की आँख लग गई।

सुहागरात के बाद मेरी आँख सुबह लगभग साढ़े छः बजे खुली।

मैंने देखा कि वे मेरे साथ बिस्तर पर नहीं थे।

तभी किसी के गेट खड़खड़ाने की आवाज़ आई और मैंने फटाफट साड़ी पहनी और दरवाजे पर पहुँची, दरवाजा खोला।

और मैं क्या देखती हूँ कि ये आये हैं।

मैंने उनसे पूछा- आप सुबह सुबह कहाँ चले गए थे? मैं तो डर ही गई थी।

उन्होंने कहा- अरे क्या बताऊँ, कल रात को जैसे ही घर पहुँचा तो अचानक ही एक दोस्त का फोन आया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है और मुझे जाना पड़ा। मैंने हमारी सुहागरात ख़राब कर दी पर मुझे लगता है कि तुम समझ सकती हो।

यह बात सुनकर मेरे तो होश ही हवा हो गए।

मैंने मन में सोचा कि अगर यह कल रात को बाहर थे तो मेरे साथ कमरे में कौन था कल सुहागरात को?

कुछ देर तक तो मैं कुछ बोल ही ना पाई फिर मैंने सोचा कि इन्हें बता देती हूँ।

फिर सोचा अगर इन्होंने मुझे छोड़ प्रिया तो मैं तो किसी को मुँह दिखाने के काबिल ही नहीं रह जाऊँगी और पूरा गाँव मुझे हिकारत की नज़र से देखेगा।

यह सब सोचकर मैं चुप ही रही।

फिर रात हुई और आज मैंने अपने असली पति के साथ सुहागरात मनाई मगर आज की रात में वह बात नहीं थी जो पहली रात में थी।

और मैं अपने पति से चुदी तो जरूर पर मेरा दिल और कहीं और ही था, ऐसा लग रहा था कि मैं बस अपना पत्नी धर्म निभा रही हूँ पर मैं इनसे प्यार नहीं कर पा रही हूँ।

इसी तरह 4 साल बीत गए और एक रात यह घर पर आये और बोले- मेरा चचेरा भाई मोनू अपनी पढ़ाई के सिलसिले में यहाँ आ रहा है और वह यहीं रहेगा जब तक उसकी पढ़ाई खत्म नहीं हो जाती।

शुरुआत में तो सब ठीक था पर एक दिन हुआ यह कि मैं छत पर कपड़े सुखा रही थी और मेरे पीरियड भी चल रहे थे कि अचानक मोनू छत पर आ गया और मेरे पीरियड चलने की वजह से मेरी मुनिया में से पानी बह रहा था और वह रिस रही थी।

यह बात मोनू की नज़र में आ गई और उसने मुझसे कहा- क्या बात है, तुम तो पहले ही अपनी मुनिया को तैयार करके बैठी हो?

जैसे ही मैंने ये शब्द सुने, मुझे वह रात, सुहागरात याद आ गई जो मेरे जीवन के सबसे यादगार रात थी और मैं उसकी ओर बढ़ी।

मोनू मेरी तरफ हंसते हुए देख रहा था और मैंने उसकी ओर इशारा करते हुए पूछा- क्या उस रात तुम थे? मेरी सुहागरात को?

और जवाब में उसने अपना सर हिला प्रिया।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं खुश होऊँ या फिर उसकी शिकायत इनसे कर दूँ?

फिर मन में उस रात के ख्याल आने लगे और मैं उसकी ओर बढ़ी और उससे पूछा- तुम कहाँ चले गए मुझे छोड़ कर?

मोनू- भाभी, मैं तो बस उस रात ही रुक सकता था। उसके बाद वक़्त ने आज मौका प्रिया है उस मुनिया के दर्शन फिर से करने का!

मैंने आगे बढ़कर उससे अपने गले से लगा लिया और हम दोनों ने पूरा दिन खूब चुदाई की।

यह सिलसिला आज भी चल रहा है और अब मैं मोनू के बच्चे की माँ बनने वाली हूँ।

मेरे पति समझते हैं कि यह बच्चा उनका है।

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