मैं रजनी शेखावत मुम्बई से!आपने मेरी पिछली डर्टी सेक्स कहानीकॉलेज में चुदती हुई पकड़ी गईपढ़ी होगी.
मुझे उस हॉट कहानी पर बहुत सारे लोगों ने मेल किया. उनमें से हो सकता है कि मैं कुछ लोगों के मेल का जवाब ना दे पायी हूं, तो उसके लिये माफी चाहती हूं.
बहुत सारे लोगों ने मुझे चोदने की इच्छा जाहिर की. मैं तो खुद चाहती हूं कि सारी दुनिया के बड़े बड़े लौड़े मेरी गांड और चूत में भर लूं. मगर ऐसा सम्भव नहीं है.
बहुत लोगों ने अगली कहानी जल्दी लिखने को कहा था. तो उनसे माफी चाहती हूं. थोड़ा समय के अभाव के कारण कहानी लिखने में देरी हो गई.
पिछली सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि मैं अपने चार यारों से चुद रही थी तो कॉलेज के दो टीचर ने मुझे अपनी चूत चुदाई करवाती पकड़ लिया था. उसके बाद उन दोनों टीचर ने भी मेरी चूत की चुदाई की थी.
फिर तो यह सिलसिला लगभग रोज ही चलने लगा. मतलब अब मुझे सुधीर और राकेश्वर सर और मेरे चारों बॉयफ्रेंड यानि मेरे छह चोदनकर्ता मुझे रोज चोदते और बहुत ज्यादा मजा देते!मुझे भी उनसे रोज चुद कर बहुत मजा आता.
अब तो मेरी चूत उनके बड़े बड़े लन्ड लेने के लिये मचल जाती.
मेरी इस शानदार और जानदार चुदाई का दौर लगभग 6 महीने चलता रहा. फिर मेरे कॉलेज की छुट्टियाँ हो गई.
फिर छुट्टियों में किसी रिश्तेदार के जन्मदिन पार्टी थी एक बड़े होटल में … तो वहां मुझे भी बुलाया गया था.मैं वहां सज सँवर कर एकदम पटाका बन कर गयी थी.पार्टी में काफी लोग आये हुये थे.
अचानक लाइट चली गई फिर मुझे किसी ने पीछे से पकड़ लिया. मैं स्तब्ध रह गयी. उसने मेरे मुंह पर भी हाथ रख प्रिया और धीरे से मेरे कान में कहा- डरो मत, मैं सुधीर हूँ.और फिर उन्होंने मुँह पर से हटा लिया.
मैंने कहा- सर आप यहां?तो सुधीर सर बोले- ये मेरे किसी रिश्तेदारी में है और मेरे बचपन के मित्र भी!
फिर सर ने कहा- रजनी, बहुत दिन हो गये तेरी चूत और गांड में अपना लन्ड दिये हुए! आज तुझे पूरी रात जमकर चोदूँगा.मैंने कहा- सर, मेरी चूत भी मचल रही है आपका लोहे की तरह सख्त लन्ड लेने के लिये!फिर लाइट आ गयी और हमारा ये वार्तालाप खत्म हो गया.
पार्टी खत्म होते होते रात के 12:30 बज गये थे, लगभग सभी लोग जा चुके थे.सुधीर सर ने मेरी चुदाई के लिये ऊपर के रूम में व्यवस्था कर रखी थी.
सर मेरे पास आये और बोले- आ जाओ डार्लिंग, आज की रात रंगीन करते हैं.
हम दोनों अंदर रूम में चले गये, अंदर जाते ही सर मुझ पर टूट पड़े और मेरी जीन्स का बटन खोल प्रिया.मैंने कहा- सर आराम से करो, थोड़ा नीरज रखो. आज पूरी रात आपके पास हूँ मैं … जी भरकर चोदना!तो सर बोले- क्या बताऊँ रजनी, तुझे देख कर कंट्रोल ही नहीं होता है.मैंने कहा- सर … मगर मैं तो आपसे बहुत बार चुद चुकी हूं.सर ने कहा- रजनी, तू मुझे हर बार नई लगती है.
फिर सर ने मेरी जीन्स उतार दी और मेरी नंगी जांघें सहलाने लगे. लगभग 10 मिनट तक जांघें सहलाने के बाद सर ने मेरी पैंटी उतारी और अपनी 2 उंगली मेरी चूत में चलाने लगे.मुझे बहुत मजा आ रहा था.
फिर सर ने मुझे पूरी तरह से नँगी कर प्रिया और खुद भी नंगे हो गये. उन्होंने मुझे जमीन पर बिठाकर अपना लौड़ा मेरे मुंह में दे प्रिया. मैं मजे से सर का लन्ड चूसने लगी और बहुत ज्यादा गर्म हो गयी.सर ने ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… हहह ओह्ह रजनी! हां ऐसे ही चूस!’ ऐसा कहते हुये अपना सारा वीर्य मेरे मुँह में भर प्रिया.
मैं वो सारा वीर्य पी गयी. अब मेरी चूत में चुदाई की आग लगी हुई थी.
सर 10-15 मिनट ऐसे ही लेटे रहे, फिर उठ कर पेशाब कर के आये. आते ही मैंने उनका लन्ड फिर अपने मुँह में ले लिया. उनके लंड में से कुछ बूंद पेशाब की मेरे मुंह में आ गयी. मैं मजे में टीचर का लंड चूसने लगी. जितना थूक में मुंह में इकट्ठा होता, मैं गटक लेती.
टीचर का लन्ड फिर से खड़ा होने लगा था. उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी चूत चाटने लगे.मैं आहह उम्म्ह हहह ओहह उह की आवाजें निकालने लगी और मैंने कहा- सर, अब मेरी चूत में अपना लन्ड डाल दो. मुझे और मत तड़पाओ.उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर प्रिया.
मैंने फिर कहा- सर, अब मुझे चोद दो, अब मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं.फिर भी सर अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में डाल कर चाटने में लगे रहे.
मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरी चूत ने पानी छोड़ प्रिया. जिसे सर ने पूरा चाट कर मेरी चूत को बिल्कुल साफ कर प्रिया.और सर मेरी चूत को फिर से चाटने लगे.
अब हम दोनों फिर से गर्म हो गये थे तो सर मेरे ऊपर आये और मेरी दोनों टाँगें उठा कर अपने लन्ड का सुपारा मेरी चूत पर लगा कर रगड़ने लगे.
फिर एक जोर का धक्का लगा कर अपना 8 इंच लम्बा और 3 इंच लम्बा लन्ड एक ही झटके में मेरी चूत में उतार प्रिया.
मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने ऊपर खिसकना चाहा मगर मेरे दोनों पैर सर ने मजबूती से पकड़ रखे थे तो मैं नाकामयाब रही मगर मेरे मुँह से ‘उईई माँ मरर गयी, मार डाला …’ आवाज बहुत जोर से निकली थी, पूरा कमरा गूंज उठा था.तो सर ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये जिससे मेरी कामुक आवाज दब गई.
थोड़ी देर बाद मुझे बहुत मजा आने लगा तो सर पूरे जोर से अपना लन्ड मेरी चूत में डालने लगे. मैं एकदम मस्त हो गयी थी, ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गई हूं.
सर अपने लन्ड को पूरा बाहर निकाल लेते और फिर पूरा लन्ड एक झटके में ही मेरी चूत में डाल देते.
ऐसे ही 20-25 मिनट मेरी चूत को चोदने के बाद सर ने कहा- रजनी अब तू कुतिया बन जा!मैं झट से कुतिया बन गई.
तो सर ने अपने लन्ड के टोपे को मेरी चूत पर लगा कर अपनी पोजीशन ली और फिर एक ही झटके में सर ने अपना पूरा लन्ड मेरी चूत में उतार प्रिया.मुझे बहुत मजा आ रहा था मेरे मुँह से सिर्फ आहह हह उहह ओहह हहह की आवाजें निकल रही थी.
सर मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे जिससे मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था.
15 मिनट मेरी इस पोजीशन में चूत चुदाई करने के बाद सर ने कहा- रजनी, मेरा वीर्य गिरने वाला है, कहां निकालूं?मैंने कहा- सर, मेरी चूत में ही निकाल दो.सर ने मेरी चूत को अपने गर्म गर्म वीर्य से भर प्रिया.
फिर सर ने पूछा- रजनी, तुझे कैसा लगा?मैंने कहा- सर बहुत अच्छा!तो सर बोले- क्या तुम और ज्यादा मजा लेना चाहती हो?
मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं सर?तो सर ने कहा- यहां मेरे 2 कॉलेज के दोस्त आये हुये हैं और एक भानुप्रताप (मेरे भी रिश्तेदार वो अंकल जिनका जन्मदिन था) वो तीनों तुझे चोदना चाहते हैं. क्या तुम उन तीनों से चुदोगी?
मेरी चूत पूरी तरह से गर्म थी तो मैंने कहा- सर, मैं तैयार हूं बुला लो अपने दोस्तों को! मैं भी तो देखू कितना दम है उनके लोड़ों में!तो सर ने उनको फोन किया और कहा- आ जाओ!
थोड़ी देर बाद दरवाजा खटखटाया गया, सर ने दरवाजा खोला तो सामने 3 लोग खड़े थे, जिनमें से एक भानुप्रताप अंकल और दो उनके दोस्त जिनका नाम राज और असलम थे.
सर ने कहा- अंदर आ जाओ.वो अंदर आये तो देखा कि, मैं बेड पर बिल्कुल नँगी बैठी हुई थी, मेरी चूत से सर का वीर्य टपक रहा था.
उन तीनों ने कहा- कैसी हो?मैंने कहा- अच्छी हूँ.
फिर उन तीनों ने अपने कपड़े उतार दिये और नंगे हो गये. अब हम पांचों लोग कमरे में नंगे थे.मैं उनके लन्ड देख कर एक बार तो डर सी गयी उनके बहुत बड़े बड़े लन्ड थे. भानुप्रताप अंकल का लन्ड 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था
राज अंकल का लन्ड 8 इंच लम्बा था और सबसे बड़ा असलम अंकल का लन्ड था जो लगभग 9 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा थामुझे असलम अंकल का लन्ड बहुत पसंद आया.
फिर असलम अंकल मेरी चूत को चाटने लगे भानुप्रताप अंकल मेरे दोनों बूब्स को दबाने लगे.और राज अंकल ने अपना लन्ड मेरे मुँह में दे प्रिया. सुधीर सर पास में बैठे बैठे मेरी चुदाई देख रहे थे.
राज अंकल ने कहा- सुधीर तू भी आजा!तो सर बोले- कहां आऊ यार, इसके सभी छेद तो तुम लोगों ने भर दिये हैं.राज अंकल बोले- आ जा यार, इसकी गांड का छेद खाली पड़ा है.
फिर उन चारों ने मिल कर मुझे आड़ी लिटा दी और सर मेरी गांड का छेद चाटने लगे.मेरे मुँह से सिर्फ ‘सीईई सीईई’ की आवाजें आ रही थी.
उन चारों के लन्ड एकदम तन कर लोहे की रोड की तरह हो गये थे.तो असलम अंकल ने कहा- अब इसको चोद देते हैं, अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा है.भानुप्रताप अंकल ने कहा- हां यार, अब इसको चोद लेते हैं.
फिर असलम सर छत की तरफ मुँह कर के लेट गये और मुझे अपने ऊपर आने के लिये कहा.मैं अंकल के ऊपर गयी तो अंकल ने अपना 9 इंच लम्बा विशाल लन्ड मेरी चूत में एक ही झटके में डाल प्रिया.
फिर भानुप्रताप अंकल मेरे पीछे आये और अपने लन्ड को मेरी गांड के छेद पर लगाया और धक्का प्रिया तो अंकल के लन्ड का टोपा मेरी गांड में चला गया. मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मेरे मुंह से एक चीख निकल गई.
तभी राज अंकल मेरे सामने आये और अपना लन्ड मेरे मुँह में डाल प्रिया.
और फिर तीनों लगे झटके मारने!मेरे शरीर की एक एक रग हिल चुकी थी.मगर मुझे मजा भी बहुत आ रहा था.
15-20 मिनट मेरी इस तरह चुदाई करने के बाद राज अंकल ने अपना लन्ड मेरी चूत में, असलम अंकल ने मेरी गांड में और भानुप्रताप अंकल मेरे मुँह को चोदने लगे.सर मेरे बूब्स को मसल रहे थे.
मेरे मुँह में भानुप्रताप अंकल का लन्ड था तो मेरे मुँह से सिर्फ गों गों की आवाज आ रही थी.पर मुझे बहुत मजा आ रहा था.
लगभग एक घण्टे तक अलग अलग पोजिशन में मेरी चुदाई चलती रही. साले ये सारे अंकल मेरे बाप की उम्र के थे, पता नहीं क्या खाकर आये थे, सब के सब देर तक चोद रहे थे.
फिर असलम अंकल ने मेरी चूत को और राज अंकल ने मेरी गांड को अपने वीर्य से भर प्रिया और दोनों साइड में हो गये.
फिर भानुप्रताप अंकल ने मेरे मुंह से लन्ड निकाल कर मेरी चूत में डाल प्रिया और सुधीर सर ने मेरे मुँह में!
सर ने 2-4 धक्के मेरे मुंह में लगाये और अपना सारा वीर्य मेरे गले में उतार प्रिया जिसे मैं बहुत मजे से पी गयी.
भानुप्रताप अंकल ने अपना लन्ड मेरी चूत से निकाल कर मेरी गांड में डाल प्रिया. मेरी गांड में राज अंकल का वीर्य पहले से ही था तो मेरी गांड से फच्च फच्च की आवाजें आने लगी जो पूरे रूम में गूंज रही थी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैंने कहा- आहह अंकल … हां ऐसे ही डालो अपना लन्ड मेरी गांड में! और जोर से अंकल … मुझे बहुत मजा आ रहा है.तो अंकल ने अपने धक्के तेज कर दिये जो मुझे बहुत मजा दे रहे थे.
फिर दो चार धक्कों के बाद अंकल ने अपना लंड मेरी गांड से निकाल कर चूत में डाल कर सारा वीर्य मेरी चूत में भर प्रिया.
मेरे शरीर के हर छेद में से उन चारों का वीर्य टपक रहा था.
फिर हम सबने नंगे ही एक साथ स्नान किया.तो भानुप्रताप अंकल ने कहा- रजनी बेटी, मजा आ गया. मेरे जन्मदिन पर इतना अच्छा उपहार देने के लिये धन्यवाद!
असलम और राज अंकल ने भी मेरी और मेरी चूत की बहुत तारीफ की और कहा- फिर कभी आओ तो हमें चूत देकर जरूर जाना.मैंने भी कहा- मुझे आपके लन्ड बहुत पसंद आये.मैंने वादा किया कि फिर कभी आऊंगी तो जरूर आपसे चुद कर जाऊंगी.
मुझे भी उस रात चुदने का बहुत मजा आया, मेरी चूत, गांड मुँह सब चुद गये थे. मेरी सारी कामवासना, प्यास कुछ दिन के लिए खत्म हो गयी थी.
जब घड़ी में समय देखा तो सुबह के 5 बज चुके थे.सर और अंकल चले गये और मैं सो गई.
जब सुबह मेरी नींद खुली तब 10 बज रहे थे तो मैं बाथरूम में फ्रेश हुई और तैयार होकर उन अंकल से विदा ली.अंकल ने कहा- बेटी आती जाती रहा करना!मैं जवाब में सिर्फ मुस्कुरा दी और वहां से चल दी.
आगे क्या क्या हुआ मेरी जिंदगी में … वो आगे की कहानियों में बताऊँगी.
तो दोस्तो, मेरे जवान जिस्म की चारों ओर से हुई जोरदार चुदाई की डर्टी कहानी आपको कैसी लगी?मुझे जरूर बताना!मेरी मेल आई डी तो आपके पास है ही!आपकी चुदासी रजनीsupport@mohakkisse.com