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Teacher Student Chudai • पठन समय: 12 मिनट • पढ़ा गया: 1,014 बार

ठरकी ट्यूशन टीचर ने सील तोड़ी(Tharki tuition teacher ne seal todi)

अंतर्वासना गुरु

09 Jan 2009 को प्रकाशित

ठरकी ट्यूशन टीचर ने सील तोड़ी(Tharki tuition teacher ne seal todi)
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यह कहानी तब की है, जब मैं कॉलेज में पढ़ रही थी। मैं उत्तर प्रदेश के एक गर्ल्स कॉलेज से हूं। जो की बरेली में स्थित है। मेरा नाम नेहा है, और मैं एक बहुत शरारती लड़की हूं। अभी मैं कॉलेज के पहले साल में पढ़ रही थी। और मेरी उम्र अभी 19 साल ही थी।

मुझ पर अभी नयी-नयी जवानी चढ़नी शुरू हुई थी। और मेरी चूचियों मेरे कपडों से साफ झलकती थी। मेरी फैमिली में मेरे पापा, मम्मी, और मेरी एक बड़ी बहन है। जो कि दादी के पास लखनऊ में रह कर कॉलेज में पढ़ रही है। मेरे पापा की बरेली में पोस्टिंग है। इसलिए हम सब बरेली में रहते है।

घर में सिर्फ मैं अपने मम्मी-पापा के साथ रहती हूं। मैं दिखने में तो ठीक-ठाक हूं, पर मैं बहुत ज़्यादा हॉट हूं। इसी वजह से मेरे पास काफी लड़कों के ऑफर भी आते है। जब मैं कॉलेज में पहुंची, तब मेरी मां ने मेरे लिए एक ट्यूशन टीचर तलाश किया। उन्होंने एक युवा लड़के अर्जुन को नियुक्त किया।

जो मुझसे सात साल बड़ा था। अर्जुन एक बहुत ही सुंदर और आकर्षक व्यक्ति था, और उसकी शिक्षा में भी काफी अच्छी पकड़ थी। मगर वो बहुत ठरकी आदमी था। और जब से उसने मुझे देखा, तब से वो मुझे चोदने के ख्वाब देखने लगा।

मुझको भी अर्जुन पहली नज़र में पसंद आ गया था। अर्जुन मुझे मेरे घर में आ कर पढ़ाता था। मेरे पापा ऑफिस चले जाते थे, तो घर में बस मैं और मम्मी रहती थी। अर्जुन मुझे मेरे कमरे में पढ़ाता था। जो कि पहली मंजिल पर था।

मम्मी ग्राउंड फ्लोर पर रहती थी, और उनके जोड़ों में प्रॉब्लम थी, इसलिए वो ऊपर ज्यादा आती नही थी। यहां मेरी जवानी अभी चरम पर थी। घर में मैं सिर्फ कॉटन का टॉप और शॉर्ट्स पहनती थी। क्योंकि उस वक्त गर्मी बहुत थी। जिसमें से मेरी चूचियां साफ दिखती थी। जब मैंने देखा कि जब मैं इन कपड़ों में रहती थी, तो अर्जुन का पूरा ध्यान मेरी चूचियों पर रहता था। तब से मैं रोज उनके सामने टॉप और शॉर्ट्स ही पहनने लगी।

अब अर्जुन भी बहुत मुश्किल से अपने आप को रोक पा रहा था।अभी चार-पांच दिन ही हुए थे। मैं स्कूल से आ रही थी, और रास्ते में बारिश शुरू हो गई। मैं भीग गई। फिर जब मैं घर पहुंची। तो मैंने अपनी स्कर्ट और शर्ट उतार दी,‌ और अब में सिर्फ छोटी सी निक्कर और ब्रा में थी। फिर मैं बरिश में नहाने छत पर चली गई। क्योंकि मेरा घर ऐसी जगह था, जहां से किसी को हमारी छत दिखती नहीं थी।

मुझे लग रहा था कि अर्जुन इतनी बारिश में नहीं आएगा। पर वो उस दिन भी आ गया। फिर मम्मी ने उसे मेरे कमरे में भेज दिया। जब उसे मैं वहा नहीं मिली, तो वो छत पर आ गया। मैंने लगभग कुछ पहन ही नहीं रखा था, और भीगने के कारण मेरी चूचियां मेरी ब्रा से साफ दिख रही थी, और नीचे भी मैंने एक छोटी सी कॉटन का निक्कर पहनी था। मैं उसे देख कर शॉक हो गई, और अपने कमरे में जाने लगी। उसने मुझे पकड़ा लिया, और बहुत गंदी तरह से छूने लगा।

वो कहने लगा: पढ़ाई तो रोज होती है। पर बारिश तो कभी कभार ही होती है। आज अच्छे से नहा लो तुम।

इसलिए मैं दोबारा से उसके सामने नहाने लगी। मैंने उसकी पेंट में ध्यान दिया, और उसका लंड पूरा तन चुका था। मैं बहुत शरारती लड़की हूं। इसलिए मैं उसको बार-बार अपनी गांड दिखाने लगी।

फिर जब बारिश हल्की हो गई,‌ तो नीचे से मम्मी ने मुझे आवाज़ लगाई। मैं इन कपड़ो में उनके सामने नहीं जा सकती थी। और अर्जुन नीचे चला गया।

मम्मी को आज एक रिश्तेदार के यहां जाना था। वो 6-7 घंटे के लिए वहां चली गई। अब मैं अर्जुन के साथ घर में अकेली थी। जब तक वो ऊपर आया, तब तक मैं भी अपने कमरे में आ गई थी, और टी-शर्ट पहनने लगी। तभी उसने मुझे रोक लिया और बोलने लगा-

अर्जुन: तुम इन कपड़ों में बहुत अच्छी लग रही हो।

और मुझे शर्म आने लगी। ये देख कर उसने अपनी शर्ट उतर दी और मुझे किस करने लगा। अब मैंने भी उसका साथ दिया। उसने मेरा ब्रा उतार दी। अब मेरी चूचियां बिल्कुल आजाद थी। वो उन्हें दबाने लगा। और फिर मेरी निक्कर उतार कर अपनी पेंट भी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ अंडरवियर में था।

फिर उसने मुझे अपने लंड पर बिठा लिया, और पीछे से मेरी गर्दन पर किस करने लगा, और मेरी चूचियों को भी जोर से दबाने लगा। मुझे अब बहुत मजा आ रहा था, और अपनी गांड पर उसका लंड साफ महसूस हो रहा है। मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया, और अब वो मुझे ऐसे ही अपनी बाहों में उठा कर मुझे मेरी मम्मी पापा वाले बेडरूम में ले आया।

फिर मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरे ऊपर आ गया, और मेरी चूचियों को चूसने लगा। उसने 15-20 मिनट तक मेरी चूचियों को बहुत बुरी तरह से चूसा। उसके बाद मेरी चूत को अपनी उंगलियो से चोदने लगा।

उसके बाद उसने अपना अंडरवीयर उतार दिया,‌ और उसका लंड बाहर आते ही मेरी चूत को सलामी देने लगा। फिर उसने मुझसे अपना लंड चूसने को कहा।

पहले तो मैंने मना किया, पर उसके ज्यादा जोर देने पर मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया। और 2-3 मिनट तक ही चूसा। उसके बाद उसका लंड अब पूरा तन चुका था। वो सरसो का तेल लेकर आया, और अपने लंड पर अच्छे से मला। उसके बाद थोड़ा सा तेल मेरी चूत पर भी लगा दिया।

आज मेरी टाइट चूत पहली बार किसी आदमी का लंड खाने वाली थी। मुझे बहुत डर लग रहा था। क्यूंकी में अभी 19 साल की ही थी। और अर्जुन के लंड का आकार बहुत बड़ा था। उसने फिर मुझे डॉगी पोजीशन में आने को कहा। और मैं उसके लिए कुतिया बन गई। फिर वो मेरे पीछे आया और अपने लंड को मेरी चूत पर सेट किया, और अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

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मेरी चूत बहुत ज्यादा टाइट थी, और उसका लंड स्लिप हो गया। फिर उसने दोबारा से मेरी छूत पर अपने लंड को सेट किया, और एक बहुत ज़ोरदार धक्का मारा। उसका लंड मेरी चूत में 30 प्रतिशत तक घुस गया, और मेरी जान निकल गई। मैं रोने लगी। वो कुछ देर तक ऐसे ही रहा।

उसके बाद उसने एक और जोरदार झटका मारा। अब उसका लंड मेरी छूत के 50 प्रतिशत तक घुस गया था, और मैं चिल्लाने और रोने लगी कि वो छोड़ दे मुझे, माफ़ कर दे। उसको ये बहुत अच्छा लगा, और अब उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

उसका लंड अभी मेरी चूत में आधा ही घुसा था। पर उसके लिए इतना भी बहुत था। वो बहुत धीरे-धीरे डाल रहा था। उसके बाद मेरा भी दर्द कम हो गया, तो मैंने भी नीचे से साथ देना शुरू किया उसका। और अब वो समझ गया था कि मैं उसका पूरा लंड चूत में लेने के लिए तैयार थी।

इस बार उसने बहुत जोर से धक्का मारा, और उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया था। अब में चिल्लाने लगी, रोने लगी। और उसको बार-बार कहने लगी कि वो मुझे छोड़ दे।

मगर अब उस पर भूत सवार था। और अब वो बहुत जोर से कर रहा था। फिर मेरा भी दर्द कम हो गया था,‌ और मैं उससे चुप-चाप चुदवा रही थी। फिर 15-20 मिनट चोदने के बाद उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में झाड़ दिया। मैं सोच रही थी कि अब वो मेरे साथ और नहीं करेगा।

पर वो बहुत सालों का भूखा था, और वो अच्छे से जनता था‌ कि ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते। अर्जुन ने उस दिन मुझे 3-4 घंटे तक लगातार चोदा। उसके बाद वो मुझसे लिपट कर सोया।

फिर जब हमारी आंख खुली,‌ तो वो मार्केट चला गया। और वहां से दवाई लाया, तांकि मैं प्रेग्नेंट ना हो जाऊं। साथ में वो मैगी भी‌ लाया। उसके बाद मैं नहाने जाने लगी तो मैंने देखा चादर पर थोड़ा सा खून पड़ा था, और मुझसे अब सही से चला नहीं जा रहा था। फिर मैंने जल्दी से चादर हटाई और उसे धोया, और नहाने चली गई। फिर अर्जुन भी अपने कपड़े उतार कर मेरे साथ नहाने आ गया।

उसने मुझे बाथरूम में भी चोदा।

फिर उसने मुझसे बोला कि मैं हम दोनों के लिए मैगी बना लूं। फिर मैं मैगी बना कर लाई। और हम दोनों ने जब वो खत्म करी,‌ उसके बाद फिर अर्जुन अपने घर चला गया।

तब तक मम्मी भी आ गई।

उसके बाद मैंने 2 दिन का ट्यूशन का ऑफ किया। फिर पापा को एक हफ्ते की छुट्टी मिल गई थी, तो हम दादी के पास लखनऊ चले गए। फिर मैंने सोचा जब मैं अर्जुन से चुदवा ही चुकी थी,‌ तो क्यूं ना मैं पूरी तरह से उसकी हो जाऊ।

मम्मी 5 बजे से 2-3 घंटे के लिए मार्केट जाती थी। और उस वक्त मैं घर में अकेली होती थी। मैंने मम्मी से बोल दिया कि जब सर आते थे, वो मेरा सोने का टाइम होता था। इसलिए वो उनकी टाइमिंग 5 बजे की कर दे।

मम्मी पहले तो मना कर रही थी। पर मेरे ज्यादा जोर देने पर मान गई, और उससे सोमवार से 5 बजे आने को बोल दिया। फिर हम घर आ गए। सोमवार वाले दिन मैं स्कूल से आ कर बहुत थक गई थी। इसलिए मैं खाना खा कर नहाने चली गई, और आज मुझे तौलिये में ही नींद आ गई। और नींद मैं मेरी तौलिया खुल गई।

फिर जब 5 बजे मम्मी के जाने के टाइम हुआ, तभी अर्जुन आ गया।मम्मी ने मुझे बहुत आवाज़ लगाई। पर मैं गहरी नींद में थी। तो वो अर्जुन से मुझे उठाने का बोल कर मार्केट चली गई।‌ अर्जुन जब मेन गेट को बंद करके मेरे कमरे में आया, तब मुझे बिना कपड़ों में देख कर मुझ पर टूट पड़ा।

जब मेरी आंख खुली तो मैंने उसको अपने ऊपर पाया। वो मेरी चूचियों को चूस रहा था,‌और मैंने उसे मुस्कान दे दी। ये देख कर उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया। उस दिन मम्मी 2 घंटे बाद घर आई। तब तक उसने मेरी चुदाई करी।

अब वो हर रोज इसी वक्त आता था, और मैं घर में अकेली होती थी इसलिए वो मुझे चोद कर भी जाता था। वो मेरे साथ बिना कंडोम के करता था। और ये सिलसिला अगले 2 साल तक चला जब तक उसने मुझे पढ़ाया।

फिर मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन में प्रवेश ले लिया, और अर्जुन की अलीगढ में जॉब लग गई थी इसलिए वो वहां चला गया। अपनी आगे वाली चुदाई के किससे मैं आप सब‌ को अगले पार्ट में बताउंगी।

अगला भाग पढ़े:-ठरकी ट्यूशन टीचर ने सील तोड़ी-2

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