इंडियन बीवी की चुदाई

ठोकुरधाम की कुंवारी चुत कुंवारे लंड की सुहागरात- 1

लेखक: जोधपुर गाय दिनांक: 04-01-2014 पठन समय: 18 मिनट

TMKOC हनीमून स्टोरी में सोसाइटी वालों ने सामूहिक चुदाई का मेला लगाया तो उसमें बाघा और बावरी भी आए थे. लेकिन दोनों को सबके सामने पहली चुदाई करने के शर्म आ रही थी.

फ्रेंड्स, मैं आपका पुराना साथी जोधपुरी गाई एक बार पुनः अपनी रसभरी सेक्स कहानी के एक नए रस में आपको गोता लगवाने हाजिर हुआ हूँ.

आप सबको याद होगा कि मैंने पिछली बार आपको आनन्द देने के लिए एक बहुचर्चित धारावाहिक को आधार बना कर काल्पनिक सेक्स कहानी लिखी थी.

उसठोकुरधाम चुदाई महोत्सवमें आपने ठोकुरधाम के सभी ठरकी पात्रों की बीवियों की अदला बदली वाली चुदाई की कहानी को पढ़ा था.

उस कहानी में एक ऐसा कपल भी था जिसने अदला बदली न करके पहली बार चुदाई का आनन्द लिया था.

जी हां, वे दोनों बाघा और बावरी थे जिनका प्यार और कुंवारा जिस्म एक दूसरे के साथ सेक्स में किस तरह से डूबे, उसी को इसमें लिखा गया है.

तो आइए TMKOC हनीमून स्टोरी में बाघा और बावरी की चुदाई का मजा लेते हैं.

बाघा और बावरी एक दूसरे से प्यार करते हैं और ये उनका पहला मिलन है.इसमें सिर्फ हवस ही नहीं, एक दूसरे के लिए प्यार भी है … तो कहानी का कथानक भी थोड़ा रूमानी है.

पूरा क्लब हाउस बीवियों की अदला-बदली वाली चुदाई की आवाजों से गूंज रहा था.ऊपर से मादक संगीत और एक मदहोश करने वाली खुश्बू फिजा में घुली हुई थी.

कुल मिला कर क्लब हाउस अभी खजुराहो के मंदिरों में से एक मंदिर पर उकेरी गई कामुक प्रतिमाओं के समान लग रहा था.

कभी किसी की कामुक सिसकारी की आवाज आती, तो कभी किसी की चीख सुनाई दे जाती, तो कभी लयबद्ध तरीके से आती हुई चप चप की आवाज मीनूर संगीत सा बजने लगता.

लगभग सभी जोड़े एक एक राउंड चुदाई कर चुके थे या अपने चरम पर ‘हूँ हूँ’ करने में लगे हुए थे.

पर बाघा बावरी क्लब हाउस के सबसे आखिरी कोने में एक दूसरे के बाहुपाश में एक दूसरे के आलिंगन में अपने जीवन के सबसे मीनूर पलों को जी रहे थे.

बाघा शराब के नशे में सीधा हो गया था.अमूमन तो वह पीठ पीछे झुका कर चलता है पर आज वह एकदम सामान्य मर्द बना हुआ था.

दूसरी तरफ बावरी भी इस मीनूर मिलन के लिए न जाने कब से तड़प रही थी.डॉक्टर हाथी की दवाई ने इस तड़प में और तड़का लगा प्रिया था.

बावरी बाघा को अपना प्रेमी मानती है और आज वह बाघा के सामने अपने यौवन, जो कि अपने शिखर पर उफन रहा था, अपना कौमार्य, अपना सर्वस्व बाघा को सौंप देना चाहती थी.

बावरी आज अपने स्त्रीत्व को पाना चाह रही थी जो एक पुरुष से संसर्ग के बिना अधूरा होता है.बाघा भी आज उस दैहिक आनन्द को पाना चाह रहा था, जो उसने आज तक नहीं लिया था.

दोनों बहुत देर तक एक दूसरे के आलिंगन में खोए रहे, इस बात से बिल्कुल अनजान और बेखबर की आस पास चुदाई ही चुदाई हो रही है.रीता का कौमार्य भंग होने पर उसकी जो मीनूर चीख निकली, उससे जरूर कुछ पलों के लिए दोनों यथार्थ में वापस आए थे.

बावरी- बाघा जी, रीता की तरह मेरा भी कौमार्य अछूता है … आज वह मैं आपको देना चाहती हूँ. मन से तो मैं आपकी हूँ ही, आज से मेरा ये तन भी आपका हुआ!

इतना कह कर बावरी फिर से बाघा से आगोश में खो गई.ऐसा लगता था मानो उनके लिए समय का ये पल थम सा गया है और इस पल में उन दोनों के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है.

बाघा ने बावरी का चेहरा ऊपर उठाया जो कि स्त्री सुलभ लज्जा के कारण पूरा लाल हो गया था.वह अलग बात है कि आस-पास लाज शर्म सब छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ चुदाई चल रही थी.पर ये दोनों क्लब हाउस में होते हुए भी क्लब हाउस में नहीं थे.

बावरी और बाघा के अधरों एक दूसरे की तरफ बढ़ रहे थे.एक कंपकंपी सी लहर बावरी के होंठों पर उठ रही थी पर पिया-मिलन को आतुर बावरी आज अपने आपे में नहीं थी.

दोनों के होंठों के बीच अब कुछ मिलीमीटर का फासला रह गया था.दोनों एक दूसरे की सांसों को महसूस कर सकते थे जो दोनों की ही तेज चल रही थी.

बाघा ने जैसे ही बावरी को किस करने की कोशिश की, बावरी ने मुँह फेर लिया.बावरी की इस मासूम अदा पर तो बाघा फिदा हो गया था.

वह समझ गया था कि इस चुदाई भरे माहौल में भी बावरी में शर्म बाकी है.उसने खड़े खड़े ही बावरी जी का पल्लू पकड़ा और दोनों के सर के ऊपर से निकाल लिया.

अब उन दोनों के ऊपर बावरी जी की चुन्नी थी, उन दोनों को अब बाहर का कुछ भी नजर नहीं आ रहा था.बावरी जी की चुन्नी में पर्फ्यूम और बावरी के जवान बदन की महक आ रही थी, जिससे बाघा भी अपना आप खो रहा था.

आखिर दोनों के अधरों का मिलन हुआ और दोनों ही इस सुनहरे पल में खो गए.न जाने कितनी देर तक एक दूसरे के होंठों का रस-पान करते रहे. उन्हें तो मानो न दुनिया की फिक्र … न आस पास की परवाह.

दोनों दवाई और दारू के नशे में थे, ऊपर से एक दूसरे का नशा … दुनिया से बेखबर बाघा और बावरी.

बाघा बावरी के होंठों को जैसे खा जाना चाहता था.उसके हाथ धीरे धीरे बावरी की पीठ पर चल रहे थे.

कभी वह उसके बाल पकड़ कर और तेज किस करने लगता, तो कभी कमर के कर्व को महसूस करता … और धीरे धीरे बावरी के नितंबों को कपड़ों के ऊपर से ही दोनों हाथ से जकड़ लेता.बीच बीच में बावरी के होंठों के अलावा गर्दन, गले और सबसे उत्तेजक जगह कान की लौ पर किस करने लगता.

बाघा का एक हाथ धीरे धीरे बावरी की सलवार खोले बिना उसके नितंबों पर पहुंच गया था.पर अब भी बीच में एक कपड़े की परत थी, जो शायद बावरी की पैंटी थी.बाघा ने अपना दूसरा हाथ ऊपर की तरफ ले जाते हुए बावरी की कुर्ती के अन्दर डाल प्रिया और वह बावरी की पीठ के हर एक हिस्से का नापने लगा.वह बार बार ब्रा की पट्टी को छू रहा था.

फिर जैसे ही वह कुर्ती के अन्दर ही बावरी की ब्रा का हुक खोलने की कोशिश करने लगा, बावरी कसमसा गई.

उसने ‘उहह’ की आवाज के साथ बाघा के होंठ पर काट लिया.ऐसा लग रहा था जैसे बावरी अभी इसके लिए तैयार नहीं थी.

बाघा को उसकी ये अदा बहुत पसंद आई और अब वह जानबूझ कर हुक खोलने का असफल प्रयास करता.हर बार बावरी के मुँह से एक आह निकलती.

इस सबमें बाघा को इतना तो समझ आ ही गया था कि भले ही बावरी वासना के नशे में हो, पर यहां सबके सामने वह नहीं चोदने देगी … और वह भी नहीं चाहता था कि बावरी पहली बार में ही इस तरह खुल्लम खुल्ला चुदे.

कुछ पल सोचने के बाद बाघा ने बावरी के कान में कुछ कहा, जिसे सुनकर बावरी बोली तो कुछ नहीं, पर उसकी आंखों में एक चमक आ गई.ऐसा लगता था कि उसे उसके मन की मुराद मिल गई हो!

जब बाकी सभी क्लब हाउस में चुदाई, चुसाई, चटाई में लगे हुए थे, तो बावरी चुपके से क्लब हाउस के बाहर आ गई.बाघा अभी भी क्लब हाउस के अन्दर ही था और कुछ जुगत लगा रहा था. फिर बाघा ने कुछ प्लान बनाया.

बाघा अपने मन में बोला कि अच्छा हुआ जो बावरी जी ने इशारा कर प्रिया, यह सब चुदाई और शराब के नशे में हैं. क्या पता कोई और ही बावरी जी की जवानी लूट लेता … और वह किसी के हाथ नहीं भी लगती तो चक्षु चोदन तो सभी करते. मैं अकेला किस किस को रोकता, खैर … अभी सोसाइटी के सारे घर खाली हैं. टप्पू सेना और बापू जी बाहर हैं. बाकी सब यह चुदाई में लगे हुए हैं.

वह सोच रहा था कि किसी के भी घर में जा सकता हूँ … पर किसके घर में लेकर जाऊं बावरी को लेकर?

तभी बाघा को कुछ सूझ गया.उसकी आंखों में हीरे जैसी चमक आ गई और वह पोपटलाल को देखने लगा, जो अभी भी रंडी के साथ चुदाई में लगा हुआ था.

वह चुपके से उसकी पैंट की तरफ बढ़ा, जो उसने अपने बाजू में ही रख दी थी.बाघा ने उसकी पैंट में से उसके घर की चाबी निकाली और चुपचाप क्लब हाउस से बाहर निकल गया.

बाघा और बावरी दोनों पोपटलाल के घर में आ गए.

सेकंड फ्लोर से पहले ही बावरी सीढ़ियों पर ही बाघा को अपने अंग से चिपकाने लगी.

पर बाघा उसे दूर धकेलता हुआ बोला- बावरी जी थोड़ी देर और … फिर हमारा मिलन बहुत मस्त होने वाला है. मैंने जानबूझ कर सिर्फ पोपटलाल का ही घर चुना है!बावरी- वह क्यों?बाघा- ऊपर चलो बताता हूँ.

पोपटलाल के घर पहुंच कर बाघा कुछ ढूँढने लगा, फिर उसने बावरी को एक पैकेट देकर कहा- आप बाथरूम में जाओ और ये पहन लो!

बावरी ने पैकेट खोला तो उसमें शादी का जोड़ा था जो पोपटलाल ने अपनी होने वाली दुल्हन के लिए रखा हुआ था.पर उसमें सिर्फ साड़ी ही थी, क्योंकि ब्लाउज सिला हुआ नहीं था.

बावरी ने भी अपने प्रेमी का मन रखने के लिए उस साड़ी को पहन ली.बिना ब्लाउज और पेटीकोट के.

बावरी जब वह ड्रेस पहन कर आई, तो पोपटलाल के बेडरूम का नजारा कुछ अलग ही था.

बावरी एकदम दुल्हन की तरह शादी के लाल जोड़े में तैयार होकर आई थी.

जैसे ही वह रूम में आई, तो रूम हल्की कैन्डल लाइट से जगमगा रहा था.उधर की हवा में एक रूहानी महक थी.

दरवाजे से बेड तक फूलों से रास्ता बनाया हुआ था और बेड पर एक प्यारी सी हार्ट की आकृति का चॉकलेट रखा था.

बेड के पास बाघा शेरवानी पहन कर हाथ में सिंदूर की डिबिया लिए हुए अपनी प्रियतमा, अपनी प्रेयसी का इंतेज़ार कर रहा था.

दरअसल बाघा को पता था कि पोपटलाल ने शादी से लेकर सुहागरात की सारी तैयारी कर रखी है.

बावरी ने बिना ब्लाउज पहने चटक लाल साड़ी में कमरे में कदम रखा तो कमरा मानो दीपक लीला भंसाली की मूवी का सैट जान पड़ने लगा.दियों की रोशनी में बावरी का कमरे में आना ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो.

लाल रंग की साड़ी पर सुनहरा वर्क, उन संजयों की रोशनी में जगमग जगमग चमक रहा था.ऐसा लग रहा था मानो बावरी के बदन पर सितारे टंके हुए हों.काजल और चूड़ियों की आवाज एक मीनूर संगीत को जन्म दे रही थी.

चाँद सा रोशन चेहरा, सुर्ख लाल होंठों के बीच में मोतियों से चमकते दांत और बावरी की आदत के अनुसार दांतों के बीच दबाया हुआ उसके आंचल का हिस्सा, आंखों में आने वाले पल की खुशियों भरी चमक, लज्जावश झुकती पलकें भी उन आंखों की खुशी छुपने की नाकाम कोशिश कर रही थी.

जिस्म पर सिर्फ साड़ी होने के कारण बावरी के बदन का प्रत्येक उभार अपने शिखर पर दिख रहा था.सुरमई गर्दन के नीचे दो बड़े बड़े अमृतकलश अपने होने का पूर्ण आभास दे रहे थे.

उन दोनों उरोजों पर छोटी आकृति के कड़क हो चुके निप्पल भी साड़ी में साफ साफ दिखाई दे रहे थे.

नाभि प्रदेश एक बलखाती नदी के समान प्रतीत हो रहा था जिस पर एक मोतियों का कमरबंध किसी सेतु की तरह नदी के दोनों तटों को मिला रहा था.बीच में एक छोटी सी झील जैसी गहरी नाभि … जैसे बाघा को आमंत्रित कर रही थी कि आओ पहले मेरी गहराई नापो, फिर योनि की गहराई में गोते लगाना.

कमर के नीचे का हिस्सा वैसे तो साड़ी में ढका हुआ था पर फिर भी हर एक अंग अपनी उपस्थिति महसूस करवा रहा था.

बावरी अपने हाथों से अपने मम्मों को ढकने की कोशिश करती हुई देख कर … एक स्वप्न जैसा बाघा मंत्रमुग्ध सा अपने जीवन के सबसे अनमोल पलों को जी रहा था.उसे अपनी ही किस्मत से रश्क हो रहा था.

बावरी ऐसी लग रही थी मानो राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी वाला सीन चल रहा है.बावरी इतनी सुन्दर लग रही थी कि यदि अगर अभी जेठालाल भी बावरी को देखता तो वह बबीता जी को भूल जाता और बावरी को अपनी बांहों में भरने को मचल उठता.

इस लाल जोड़े में वह स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी.उसका एक एक अंग तराशा हुआ दिख रहा था.

चेहरे पर प्रथम मिलन की आस … और आने वाले पल के बारे में सोच कर चेहरे पर खुशी, लज्जा और उत्तेजना का मिला-जुला भाव, झुकी हुई पलकें जो बार बार अपने प्रेमी को देख रही थीं और फिर शर्म के मारे झुक जा रही थीं.

बावरी अपने मन में आज अपना सर्वस्व अपने प्रेमी को देने की इच्छा लिए धीरे धीरे बाघा की ओर आगे बढ़ रही थी.

बाघा हाथ में सिंदूर की डिबिया लेकर घुटनों पर बैठ कर बावरी को प्रेम प्रस्ताव प्रिया तो बावरी ने तुरंत हां बोल दी.बाघा बावरी की मांग में सिंदूर भरने लगा और दोनों एक बार फिर से एक दूसरे के आलिंगन में बंध गए.

बाघा ने बावरी का चेहरा ऊपर किया.संजय की रोशनी में बावरी का चेहरा … और लगभग नग्न शरीर पर पहने हुए उसके चमचम करते गहने एक अलग ही आभा बिखेर रहे थे.नाक की नाथ, कान के झुमके, गले का हार सब मानो बाघा को आमंत्रित कर रहे थे.

पर उनसे ज्यादा चमक बावरी की आंखों में थी, जो एक तराशे हुए हीरे की भांति चमक रही थी.ये आलिंगन उन दोनों के प्रेम को और गहरा कर रहा था.

न जाने कितनी देर बाघा और बावरी बिना कुछ बोले, बिना कुछ करे, सिर्फ एक दूसरे की बांहों में बने रहे.

धीरे धीरे प्रेम के साथ साथ कामोत्तेजना भी बढ़ने लगी.कामदेव ने आज मानो अपने सारे तीर बाघा और बावरी की लिए ही बचा कर रखे थे.

बाघा और बावरी के अधर एक दूसरे की प्यास के प्यासे और एक दूसरे की प्यास बुझाने को मिल गए.बाघा आज इन अधरकमल का सारा मीनू एक भंवरे की भांति पी जाना चाहता था.

दोनों की जीभ भी आपस में लड़ रही थीं.

बाघा के हाथ धीरे धीरे बावरी की कमर के उस हिस्से को सहला रहे थे … जहां साड़ी नहीं थी.धीरे धीरे उसका एक हाथ बावरी के नितंबों तक पहुंच गया और दूसरे हाथ से उसने बावरी के बाल पकड़ कर किस करना चालू कर प्रिया था.

बाघा के होंठ अब धीरे धीरे बावरी के होंठों से जुदा होकर उसके गालों की नाजुक त्वचा से होते हुए कानों तक पहुंचने लगे थे.कान के पास का हिस्सा वैसे भी बहुत संवेदनशील होता है.

जैसे ही बाघा वहां चूमने लगा, बावरी के कंठ से एक मीठी से आह्ह निकल कर उसकी कसक को उकेरने लगी.

कामोत्तेजना की तपिश में दोनों जिस्म तपने लगे.

कमरे में एसी चल रहा था पर फिर भी दोनों को पसीना आ रहा था.

पसीने के कुछ बूंदें बावरी की गर्दन पर आने लगी थीं. उनमें से कुछ बूंदें तो बाघा के होंठों ने चाट लीं, पर कुछ बूंदें बावरी की गर्दन से होती हुई उसके वक्ष-स्थल में जाकर ऐसे खो गईं मानो हिमालय से निकली हुई कोई नदी लहराती और बलखाती हुई पर्वतों के मध्य किसी खूबसूरत वादियों में खो गई हो.

बाघा एक गोताखोर की तरह उस मोती की बूंद को पाने के लिए गहराई में डूबना चाहता हो, ऐसे लपक कर वक्षस्थल में सर घुसेड़ने लगा.

कुछ पल बाद बाघा अपने होंठों से बावरी को चूम रहा था और उसके हाथ बावरी के जिस्म के हर एक हिस्से का नाप ले रहे थे.कमर से लेकर चूचे, नितंबों से लेकर योनि-स्थान तक, नाभि की गहराई से लेकर विशाल वक्ष-पर्वतों की ऊंचाई तक.

किस्मत का खेल देखो, एक ही सोसाइटी में एक तरफ हवस का नंगा नाच हो रहा था.जहां सिर्फ लंड और चुत का रिश्ता हिलोरें मार रहा था.उधर सिर्फ हवस में डूबे हुए मर्द और औरत थे, न कोई जाति बंधन, न रिश्तों की परवाह …

जबकि दूसरी ओर सिर्फ और सिर्फ दो प्रेमी, जो एक दूसरे के लिए ही बने हैं.एक तरफ कामाग्नि दूसरी तरफ प्रेमाग्नि.

यहां यह एपिसोड खत्म हुआ.

एपिसोड में अंत में तारक ने अपनी भूमिका निभाई- तो दोस्तो, आज बोलने को कुछ नहीं, सिर्फ इस पल का मजा लीजिए.TMKOC हनीमून स्टोरी में आगे क्या होता है, वह सब जानने के लिए पढ़ते रहिए, हिलाते रहिए!

आप मुझे मेल कर सकते हैं.मेरी मेल आईडी हैsupport@mohakkisse.com

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