वाइफ शेयरिंग विद बिजनेस पार्टनर कहानी में बिजनेस में लाभ के लिए पति ने किसी गैर औरत को चोदा तो उसे लगा कि उसकी बीवी भी चूत देकर फायदा ले सकती है.
कहानी के चौथे भागबिजनेस में फायदे के लिए दूसरे की बीवी को चोदामें आपने पढ़ा कि बिजनेस में फायदे के लिए संजय ने सुलोचना को चोद प्रिया.सुलोचना से विदा लेकर संजय सीधा घर आया.
अब आगे वाइफ शेयरिंग विद बिजनेस पार्टनर:
उसे मन में बहुत ग्लानि हुई कि आज उसने चिंकी को धोखा प्रिया है.
वो समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे.घर पर चिंकी नहीं थी, वो बाज़ार गयी हुई थी.
संजय फ्रेश हुआ और चुपचाप सो गया.
चिंकी ने आकर उसे उठाया तो संजय ने बहाना कर प्रिया कि सर दर्द है.चिंकी ने उसे चूमते हुए कहा- चलो उठो, अदरक की चाय बनाती हूँ.
चिंकी असल में अमन से मिल कर आ रही थी.अमन उसे मार्किट में मिल गया था और उसे जबरदस्ती कॉफ़ी पिला कर ही भेजा.
चिंकी अब अमन के नजदीक जाने लगी थी.इसीलिए उसने संजय से अमन से मिलने की बात छिपा ली.असल में ऐसा उससे अमन ने ही कहा था.
अगले दिन सुबह संजय ने बैंक में फोन किया।पहले तो रमन बड़ी बेरुखी से बात करता था पर जब से अमन ने उसे फोन किया, रमन बहुत अच्छे ढंग से बात करने लगा था।
संजय ने उससे बैंक लिमिट की बात की तो रमन ने कुछ कागजात मांगे और कहा, “जब अमन इन्वॉल्व है, तो लिमिट तो बन ही जाएगी!”अमन के जुड़ने से सब काम धीरे-धीरे सध रहा था।
संजय ने सारी बात चिंकी को बताई।
चिंकी ने कहा, “अमन की बीवी मायके गई है। अगर तुम ठीक समझो, तो आज रात उसे डिनर पर बुला लें।”
संजय ने हंसकर कहा, “कहीं डिनर की जगह वो तुम्हें खा गया तो!”चिंकी भी हंस पड़ी, “जब काम निकलवा रहा है तुम्हारा, तो खा भी जाए तो क्या हुआ!”दोनों ठहाका मारकर हंस पड़े।
शाम को संजय ने घर आने और ड्रिंक्स-डिनर की बात की तो अमन खिल गया।
उसने हंसकर कहा, “चल, अच्छा हुआ! तेरी भाभी भी मायके गई है!”
दिन में चिंकी को क्या सूझा, वो फिर पार्लर गई और फुल बॉडी वैक्सिंग करवाई।
पार्लर में ही अमन का गुड डे का मैसेज आया।चिंकी ने गुलाब के फूल का मैसेज भेजा, “थैंक्स!” लिखकर!
घर आकर उसने दोपहर को ही डिनर और ड्रिंक्स के नाश्ते की तैयारी कर ली।फिर एक घंटा जमकर सोई ताकि शाम को फ्रेश रहे।
उठकर चिंकी ने घर सेट किया, फिर खुद को सजाया।नेल पेंट से लेकर ड्रेस, सब छांटकर रखा।
संजय छह बजे तक आ गया।वह बहुत उत्साहित था।
उसने चिंकी को बाहों में लेते हुए कहा, “एक बार तुमने कहा था कि मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो। उस दिन मैं गुस्सा हो गया था। पर आज मुझे अमन की सख्त जरूरत है। अगर तुम अमन को हद भी पार करने दो, तो मुझे कोई ऐतराज नहीं!”
चिंकी ने उसे चूमा और कहा, “टेंशन मत लो! बस तुम नॉर्मल रहो। ऐसा कुछ होने नहीं जा रहा। चलो, साथ नहाते हैं, फिर मुझे तैयार होने में समय लगेगा।”
संजय को सुलोचना के साथ हुए सेक्स को लेकर टेंशन थीइसलिए वो चिंकी को भी खुला छोड़ना चाहता था।
जब उसने रीमा तोड़ दी, तो चिंकी भी मजे क्यों न ले!
नहाकर संजय ने अमन से बात की।वो आठ बजे तक आने को कह रहा था।
चिंकी अच्छे से तैयार हुई।
उसने एक बैकलेस मिडी पहनी जिसमें उसका हर उभार तूफान मचा रहा था।मैचिंग नेल पेंट और हाई हील।कुल मिलाकर, तंबू में बांस खड़ा करने का पूरा इंतजाम था!
ठीक आठ बजे घंटी बजी।
चिंकी ने संजय से कहा, “डोर मैं खोलती हूँ। तुम वॉशरूम का बहाना बनाकर दो मिनट बाद आना।”
चिंकी ने गेट खोला, तो अमन था।उसके हाथ में गुलाब के फूलों का बुके था, जाहिर है, चिंकी के लिए।
चिंकी ने मुस्कुराकर उसे विश किया।उसे देख अमन के होश उड़ गए।
उसने इतनी खूबसूरत और मुस्कुराती चिंकी पहली बार देखी थी।वो हकला सा गया।
उसने बुके चिंकी को प्रिया और घबराहट में बोला, “हाय, गॉर्जियस!” और हाथ आगे बढ़ा दिए।
चिंकी ने बिना पल गंवाए मुस्कुराकर उसके गले लग गई और चूमते हुए “थैंक्स!” कहकर उसे अंदर ले आई।
वो बोली, “संजय एक मिनट में आ रहा है।”अमन तो उसे घूरता ही रहा।उसने हल्के से कहा, “आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो!”
तभी पीछे से संजय आ गया।दोनों ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाए।
चिंकी बोली, “आज कोई बिजनेस की बात मत कीजिएगा! शाम रंगीन है, उसे एंजॉय करें!”कहकर वो खिलखिला पड़ी।
अब वो दोनों भी हंस पड़े।
चिंकी ने ड्रिंक्स का इंतजाम टेरेस पर किया था।हल्की ठंडी हवा बह रही थी।
बाहर हल्की रोशनी में मेज सजी थी।
अंदर से म्यूजिक की हल्की आवाज आ रही थी।बैठने के लिए बेंत का सोफा था एक डबल सीटर और दो सिंगल सीट।
अमन डबल सीट पर बैठा, संजय सिंगल सीट पर।चिंकी ने दो ड्रिंक्स बनाए और सर्व किए।
अमन बोला, “तुम नहीं लोगी?”चिंकी बोली, “आज नहीं। मुझे डिनर भी तैयार करना है। आप लोग एंजॉय करें!”अमन बोला, “बिना तुम्हारे कैसा एंजॉय? क्यों, भाई संजय?”
संजय ने हाँ में हाँ मिलाई और चिंकी के लिए छोटा पेग बना प्रिया।
अब हंसी-मजाक का दौर शुरू हुआ जो धीरे-धीरे नॉन-वेज जोक्स पर आ गया।
अमन तो चिंकी पर मर ही रहा था।एक बार चिंकी किचन से कुछ लेने उठी.और जब आई तो अमन ने संजय से पूछकर उसे अपने पास बिठा लिया।
तभी संजय का फोन बजा।चिंकी बोली, “तुम अंदर जाकर बात कर लो।”संजय उसका इशारा समझ गया और अंदर चला गया।
अमन चिंकी को कनखियों से देख रहा था।चिंकी मुस्कुराते हुए बोली, “लीजिए, अच्छे से देखिए! अब तो हम दोस्त हैं!”
अमन ने चिंकी के कंधों पर हाथ रखा, जैसे अनजाने में।चिंकी ने कुछ नहीं कहा।
अमन ने अचानक उसे चूम लिया।
चिंकी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कुछ लाने को उठी, तो अमन ने उसका हाथ पकड़कर बिठा लिया।चिंकी ने हाथ छुड़ाते हुए कहा, “संजय आ जाएगा!”
इतने में संजय आ गया।संजय बोला, “चलो, थोड़ा डांस करते हैं!”
चिंकी ने म्यूजिक लगाया और संजय को लेकर थिरकने लगी।
अमन उन्हें मुस्कुराते हुए देखता रहा, अपनी ड्रिंक खत्म करते हुए।
ड्रिंक्स आज ज्यादा ही हो गई थीं।संजय ने वॉशरूम जाने की इजाजत मांगी और चिंकी का हाथ अमन को थमा प्रिया।
संजय के जाते ही अमन ने चिंकी को कसकर भींच लिया।दोनों लिपटकर थिरकने लगे।
अमन के हाथ चिंकी की कमर पर मचल रहे थे।दोनों के हालात बेकाबू थे।नजदीकी ने उनके जिस्म में आग लगा दी थी।
अमन ने चिंकी के होंठों से होंठ मिलाए तो चिंकी ने उसे हटाते हुए कहा, “संजय पीछे ही है! उसे दिख जाएगा, तो बवाल कर देगा!”
पर अमन चिंकी की खूबसूरती के पुल बांधता रहा।चिंकी के मम्मे उसकी छाती में धंस रहे थे।
चिंकी ने प्यार से कहा, “मुझे दोस्ती से ऐतराज नहीं, पर संजय को शिकायत नहीं होनी चाहिए!”
संजय ने सब देख लिया था। वो तो चाहता था कि चिंकी और आगे बढ़े।पर चिंकी अमन से अलग होकर डिनर लगाने चली गई।
संजय ने उसे फर्म में पार्टनर बनाने की बात कर ली थी।
वो तैयार हो गया।अब नई फर्म में चिंकी और अमन पार्टनर थे।
डिनर के बाद अमन दोनों से गले लगकर जाने लगा।जाते-जाते अमन ने चिंकी की चिकनी कमर पर एक बार फिर हाथ फेरा।
चिंकी चिहुंकी, तो उसने नीचे चिकोटी भी काट ली।अमन आज कुछ ज्यादा ही मस्ती के मूड में था।
चिंकी ने पूछा, “मिताषा कब आएगी?”अमन ने बताया, “कुछ दिन बाद!”
रात को चिंकी चुदास में थी।
उसने संजय को छेड़ते हुए कहा, “अमन तो आज मुझे छोड़ता नहीं! वो तो बार-बार बेकाबू होने को तैयार था। उसकी पैंट में तंबू देखा तुमने?”संजय उसके मम्मे चूसते हुए बोला, “हाँ, आज वो तुम्हारी चूत के ख्याल में मुठ मारेगा!”
चिंकी ने उसे खींच लिया, “वो कुछ भी मारे, तुम तो मेरी बिल्ली मारो, पूरे दम लगाकर! मेरी चूत में तो चीटियां चल रही हैं, ये सोचकर कि आज तो दो-दो लंड मिलने जा रहे थे!”
संजय ने अपना मूसल पेलते हुए कहा, “ऐसे कह रही है, जैसे तू ले ही लेती उसका लंड!”
चिंकी बोली, “अब बात मत करो! बस चुदाई पर दम लगाओ, वरना मैं अभी अमन को बुलाती हूँ!”संजय ने वाइफ शेयरिंग विद बिजनेस पार्टनर की बात सुनकर उसकी टांगें चौड़ाईं और अपना लंड पूरे दम से घुसेड़ प्रिया।आज चिंकी की आग भड़की हुई थी।
संजय ने पूरे जोर लगा दिए, पर वो चिंकी का स्खलन कर नहीं पाया।अब चिंकी उसके ऊपर चढ़ी और घुड़सवारी शुरू कर दी।
संजय ने उसके मम्मे मसल-मसलकर लाल कर दिए।अब संजय बोला, “सच बताना, तेरे दिमाग में इस वक्त अमन चल रहा है न? तू उसी से चुद रही है न!”
चिंकी हांफते हुए बोली, “हाँ, मेरी चूत में अमन का ही लंड है! देखो, वो कितने मजे दे रहा है मुझे! पर तुम्हें मिताषा की चूत नहीं लेने दूँगी। तुम सिर्फ मेरे हो!”कहते-कहते चिंकी संजय के ऊपर लुढ़क गई।उसका हो गया था।
संजय मन ही मन सोच रहा था कि जो सेक्स का सुकून अपनी बीवी से मिलता है, वो पराई औरत में कहाँ!
इसमें कोई शक नहीं कि सुलोचना बहुत सेक्सी थी, पर उसके साथ सेक्स संजय की मजबूरी थी, खुशी नहीं।
अगली सुबह दोनों बहुत खुश होकर उठे।साथ-साथ नहाए।
संजय ने एक बार फिर चिंकी को शावर के नीचे घोड़ी बनाकर चोदा।चोदते वक्त उसने पूछा, “तुम अमन का लेने को तैयार हो और मुझे मिताषा की नहीं लेने दोगी। ऐसा क्यों?”
चिंकी मुस्कुराते हुए बोली, “न तो मैं अमन का ले रही हूँ, न तुम्हें मिताषा के नजदीक जाने दूँगी! मिताषा अच्छी लड़की नहीं है। और सबसे बड़ी बात, मैं तुम्हें नहीं बांट सकती!”
संजय के दिमाग में सुलोचना घूम गई।उसे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि वो क्यों कमजोर पड़ गया।
चिंकी ने पूछा, “तुम एकाएक क्या सोचने लगे?”संजय ने बात टाल दी।
तभी राजेश का फोन आया।उसने बधाई दी कि संजय का टेंडर पास हो गया है और एग्रीमेंट आज ही साइन होना है।
संजय ने कहा, “आज तो मुझे अपने घर जाना है।”राजेश बोला, “कंपनी पर प्रेशर था टेंडर किसी और को देने का, पर सुलोचना ने बीच में पड़कर ये टेंडर तुम्हें दिलवाया। इसलिए जितना जल्दी एग्रीमेंट साइन हो, अच्छा है।”संजय ने खुश होकर चिंकी को चिपटा लिया।
संजय ने अमन को भी फोन पर बधाई दी और कहा कि दोपहर को उसे कंपनी के ऑफिस पहुंचना है।
तभी संजय के पिताजी का फोन आया।उन्हें किसी जरूरी कागज पर संजय के साइन चाहिए थे।संजय ने बहुत कहा कि कल आ जाएगा, पर उनकी भी कोई मजबूरी थी।
तब संजय ने अमन को कहा कि वो चिंकी को लेकर कंपनी के ऑफिस चला जाए और एग्रीमेंट साइन कर ले।संजय का मन था कि रात तक वापस आ जाएगा।
चिंकी घबरा रही थी, उसे लग रहा था कि अमन उसे अकेला ले जाएगा और कुछ गड़बड़ न हो जाए।वो अमन की कल की हरकतों से डर रही थी।
उसने संजय से ये डर बताया तो संजय ने उसे चूमते हुए कहा, “अमन हमारे लिए इतना कुछ कर रहा है, तो थोड़ा-बहुत हंसी-मजाक तो बनता है!”
अब चिंकी क्या कहती।वो अच्छे से तैयार होने लगी।
उसे अंदर ही अंदर लग रहा था कि आज अमन और उसके बीच कुछ हो ही जाएगा।पता नहीं कितनी आगे की सोचकर उसने अपनी चूत भी पूरी चिकनी कर ली।उसे मालूम था कि अगर अमन से बच भी गई, तो संजय रात को उसे सोने नहीं देगा।
संजय तुरंत घर के लिए निकल गया।वो बाहर था कि राजेश का फोन आया कि एग्रीमेंट उसके घर पर है।
संजय ने कहा कि वो अमन को कह देता है, वो उसे राजेश के घर से ले लेगा।राजेश ने बताया कि चूंकि सुलोचना सीईओ है, तो एग्रीमेंट पर साइन उसके ही होंगे।
सुलोचना ने ही ये फोन करवाया था कि संजय उससे साइन करवाकर एग्रीमेंट ले जाए।
अब संजय परेशान हो गया।सुलोचना को मना करने का रिस्क वो लेना नहीं चाहता था।मजबूरी में उसने गाड़ी सुलोचना की कोठी की ओर मोड़ ली।
वाइफ शेयरिंग विद बिजनेस पार्टनर कहानी के हर भाग पर अपनी राय बताते रहें.धन्यवादsupport@mohakkisse.com
वाइफ शेयरिंग विद बिजनेस पार्टनर कहानी का अगला भाग:बिजनेस के बहाने चुदाई का मजा- 6