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चाची की चुदाई पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 528 बार

घर में अकेली चाची की चूत का मजा

विकी जियू

02 Jun 2011 को प्रकाशित

घर में अकेली चाची की चूत का मजा
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Xxx आंटी सेक्स कहानी मेरी चाची की है. मैं पढ़ाई खत्म करके घर लौटा तो चाची की जवानी मुझे परेशान करने लगी। मैंने कैसे सेक्सी चाची की चुदाई की?

दोस्तो, मेरा नाम विकी है, मेरी उम्र 22 साल है।मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है।

यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है।इस Xxx आंटी सेक्स कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी चाची की चुदाई की।

मेरी चाची का नाम ज्योति है जिनकी उम्र 32 साल है। वो अभी भी बहुत ही ज्यादा सेक्सी दिखती हैं।उनकी एक बेटी है जो अभी सिर्फ 2 साल की है।

अब मैं वो कहानी बताता हूं जब मैंने चाची की चुदाई पहली बार की थी।मैं उनको पहले से पसंद करता था।

दोस्तो, जब मेरी पढ़ाई खत्म हुई तब मैं अपने घर आ गया था क्योंकि अगले दिन मेरी बुआ के बेटे यानि मेरे बड़े भाई की शादी थी।इसलिए मुझे एक दिन पहले घर आना ही था।

मेरे चाचा एक दिन पहले ही मेरी बुआ के घर चले गए थे।उस वक्त घर में बस मम्मी-पापा और चाची ही थी।

शाम को जब वो बाथरूम साफ कर रही थी तो अचानक से उनका पैर फिसल गया।इस कारण वो नीचे गिर गई।

मैं भी पास में ही था और मैंने उनके गिरने की आवाज सुनी।तो मैं दौड़कर चाची के पास गया।

मैंने देखा कि उनकी साड़ी ऊपर तक चढ़ गई थी।चाची ने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी थी जिसके कारण उनकी चूत भी मुझे दिख गई।

चाची की चूत एकदम से चिकनी थी। चूत पर एक भी बाल नहीं था।

मैंने उनकी चूत को देखा और फिर चाची को देखा।वो कराहते हुए बोली- देख क्या रहा है … मुझे उठने में मदद कर।फिर मैं होश में आया और चाची को सहारा देकर उठाया।मैं उनको कमरे तक ले गया।

शाम को मम्मी पापा भी आ गए। उनको भी घटना के बारे में पता चला।फिर तय हुआ कि चाची शादी में नहीं जाएगी।

अगले दिन सुबह ही सब लोग बुआ के घर के लिए निकल गए।मैंने बहाना बना दिया कि मैं सीधा शाम को ही आऊंगा।

अब घर में मैं और चाची ही रह गए।

सुबह का नाश्ता मैंने ही बनाया और चाची को भी दिया।वो कहने लगी कि उनके पैर में काफी दर्द है।मैंने उनको मालिश करवाने के लिए कहा तो वो मान गई।

मैं चाची के कमरे में गया और बाम लेकर उनके पैर की मालिश करने लगा।उनके घुटने पर चोट लगी थी।

मैं मालिश के बहाने से चाची की जांघों तक सहलाने लगा।धीरे धीरे चाची को मजा आने लगा।

अब उन्होंने अपनी साड़ी को थोड़ा और ऊपर सरका दिया और बोली- जांघ तक मालिश कर दो।मैं चाची की जांघों के ऊपर तक हाथ ले जाने लगा।

मुझे लग रहा था कि चाची ने आज भी पैंटी नहीं पहनी है।मैं चाची की चूत तक हाथ ले जाने की कोशिश कर रहा था।

जब भी मैं चाची की जांघों पर ऊपर हाथ ले जाता था तो वो हल्की सी कसमसा जाती थी।

मेरा लंड ख़ड़ा होने लगा था।

मैंने हिम्मत की और चाची की चूत को छू लिया।मेरे हाथ कांप रहे थे लेकिन चाची ने कुछ नहीं कहा।

अब मुझमें आत्मविश्वास आ गया और मैं बार बार चाची की चूत तक हाथ ले जाने लगा।

मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था।

इस बार जब मैंने चाची की चूत को छुआ तो उसने मेरे हाथ को अपनी चूत पर ही पकड़ लिया।

मुझे लगा चाची अब मुझे जोर से डांटेगी।लेकिन वो बोली- जब छूना है तो अच्छे छू ले! तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?मैं बोला- नहीं चाची, मेरी तो कोई नहीं है।

वो बोली- हम्म … मैं जानती थी। कोई बात नहीं ,,, वैसे भी तेरे चाचा मेरे साथ अब कुछ नहीं करते हैं; मैं भी मर्द की प्यासी हूं।

ये कहकर चाची ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे।काफी देर तक मैंने चाची के होंठों को चूसा।

मुझसे सब्र नहीं हो रहा था इसलिए मैं जल्दी से नंगा हो गया।मैंने चाची को भी नंगी कर दिया।

पहले मैं चाची के बड़े बड़े बूब्स को दबाने लगा।

चाची के दूध बहुत रसीले थे। मैं दोनों दूधों को बारी बारी से पी रहा था।नीचे से चाची भी मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी।

फिर उसने मुझे पटका और मेरे लंड को चूसने लगी।चाची के मुंह में लंड जाने से मैं तो पागल सा हो गया। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

3-4 मिनट में ही मेरा माल चाची के मुंह में निकल गया।उन्होंने मेरे माल को पी लिया और मेरा लंड सिकुड़ने लगा।

चाची ने लंड को मुंह से नहीं निकाला और चूसती ही रही।मुझे गुदगुदी हो रही थी लेकिन चाची ने लंड को मुंह से नहीं निकाला।

चाची के मुंह में ही मेरा लंड दोबारा से खड़ा हुआ।

अब मैंने उनको नीचे लिटा लिया और उनकी चूत में मुंह लगाकर चाटने लगा।वो एकदम से सिसकारने लगी- आह्ह विकी … ओह्ह … विकी … उम्म … आह्ह … चाट लो … पूरी खा लो मेरी चूत को।

मैं चाची की चूत में पूरी जीभ अंदर बाहर कर रहा था।वो तड़प कर बोली- आह्ह … बस करो … अब अपना लंड इसमें पेल दो। ये बहुत दिनों से प्यासी है।

फिर मैंने भी देर न की और चाची की चूत में लंड को लगा दिया।मैंने धक्का दिया और चाची की चूत में मेरे लंडा का सुपारा उतर गया।

चाची जोर जोर से आह आह्ह करने लगी।वो बोली- आह्ह … आराम से कर विकी … बहुत दर्द हो रहा है … बहुत दिनों से लंड नहीं लिया है मैंने!

मैंने धीरे धीरे चाची की चूत में लंड को धकेलना शुरू किया।चाची ने भी अपनी चूत ढीली की और मेरा पूरा लंड उनकी चूत में उतर गया।

धीरे धीरे करते हुए मैं चाची की चूत में लंड को अंदर बाहर करने लगा।चाची मेरे लंड के धक्कों से अब मस्त होने लगी।वो बार बार मेरे होंठों को चूस रही थी और अपनी गांड को हिला हिलाकर लंड को और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी।

मैं भी चाची की चुदाई में मस्त हो गया था।

फिर मैंने चाची की चूत से लंड को बाहर निकाल दिया।वो बोली- क्या हुआ … मजा तो आ रहा था … निकाला क्यों?

चाची से मैं बोला- आप करो अब!ये बोलकर मैं साइड में ले गया और चाची मेरे ऊपर आ गयी।उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया और चूत पर सेट करने लगी।

लंड को चूत के छेद पर सटाकर वो बैठती चली गई और मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में उतरवा लिया।चूत में लंड घुसने के बाद वो हिलने लगी और ऊपर नीचे होने लगी।चाची मेरे लंड पर मस्ती में उछल रही थी।

मैं चाची की चूचियों को लगातार भींच रहा था जिससे वो सिसकारियां लेते हुए चुद रही थी।

ऐसे ही हमारी चुदाई 20 मिनट तक चली।

चाची ने उछल उछलकर मेरा लंड अपनी चूत में लिया।

अब मेरा झड़ने को हो रहा था तो मैंने चाची से कहा- कहां निकालना है?वो बोली- मेरी चूचियों पर निकालो।

तो मैंने चाची को नीचे लेटने को कहा।लेटाने के बाद मैंने चाची की चूत में फिर से लंड घुसा दिया और उनको चोदने लगा।जब मेरा स्खलन होने को हुआ तो मैंने लंड को एकदम से बाहर खींच लिया।

मैं चाची की चूचियों के पास लंड को ले जाकर मुठ मारने लगा।

मैंने चाची की चूचियों के ऊपर अपने माल की पिचकारी मारी जो उनके मुंह और गर्दन पर भी लगी।चाची के बूब्स पर मेरा वीर्य गिर गया जिसे चाची ने बूब्स पर मसल लिया।

झड़ने के बाद मैं उनके ऊपर ही सो गया।

आधे घंटे के बाद मैं उठा और देखा कि चाची अपनी गांड ऊपर उठाए हुए गहरी नींद में सो रही थी।मेरा मन चाची की गांड मारने का करने लगा।

मैंने पास में रखी वैसलीन की शीशी ले ली और लंड खड़ा करके उस पर क्रीम लगा दी। मैंने चाची की गांड में भी क्रीम लगा दी।

अब मैंने नींद में सो रही चाची की गांड में लंड लगाया और छेद पर टिके लंड का धक्का जोर से दे मारा।

मेरे लंड का सुपारा चाची की गांड में घुस गया और वो एकदम से चिल्लाने लगी।मगर मैंने चाची को पकड़ रखा था और वो मुझसे छुड़ा नहीं सकती थी।वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन मैं लंड को घुसाता रहा।

इस तरह से मैंनेचाची की गांड में लंडको उतार दिया और फिर उनको चोदने लगा।कुछ देर के बाद चाची को मजा आने लगा।

तब मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और चाची भी सिसकारियां लेते हुए चुदने लगी।

दोस्तो, चूत से ज्यादा मजा मुझे चाची की गांड चोदने में आ रहा था।वो भी गांड चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी।

जब उनकी चूत में लंड पूरा रम गया तो मैंने स्पीड और तेज कर दी।

अब चाची की चीखें निकल रही और साथ में ही आह्ह …. ओह्ह … आह्ह … करके वो चुदाई का मजा ले रही थी।

मैं चोदते हुए चाची की गांड में ही झड़ गया।चाची इससे पहले मेरे लंड से 2 बार झड़ चुकी थी।

कुछ देर हम लोगो ऐसे ही पड़े रहे।फिर उठे तो शाम के 4 बज रहे थे।

मैंने अपने कपड़े पहन लिए क्योंकि मुझे देर शाम को शादी के लिए भी निकलना था।

फिर मैं शादी में जाने के लिए तैयारी करने लगा।मैंने जल्दी से शॉवर लिया और फिर अंडरवियर में ही बाहर आ गया।

चाची मुझे देख रही थी।वो मेरे पास आ गई और मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़वाने लगी।अब मैं खुद ही चाची की चूत मसलने लगा।

उसने मुझे बेड पर गिरा लिया और 69 की पोजीशन में कर लिया।

चाची ने मेरे मुंह पर चूत लगा दी और मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया।हम दोनों अब एक दूसरे को लंड-चूत चुसाई का मजा देने लगे।चाची मस्त होकर मेरे लंड को चूस रही थी।

एक बार फिर से मेरा मूड चाची को चोदने का बन गया।मैंने उसे वहीं बेड पर घोड़ी बना लिया और उसकी चूत को पीछे से चोदने लगा।चाची भी जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह विकी … आह्ह … चोदो … मुझे और चोदो … आह्ह … और जोर से … उम्म … आईई … आह्ह बहुत मजा आ रहा है।

मैं भी चाची के जोश को देखकर और जोश में आ गया।मैंने उनकी गांड को थाम लिया और पट-पट की आवाज के साथ चाची की चूत मारने लगा।

अब चाची को दर्द होने लगा और वो आराम से करने के लिए कहने लगी।लेकिन मेरे ऊपर अब चोदने का भूत सवार हो चुका था।मैंने चाची की नहीं सुनी और उनको पेलता रहा।

फिर चोदते हुए मैंने चाची की चूत में ही अपना माल छोड़ दिया।मैं एक बार फिर से पसीने से लथपथ हो गया था।उसके बाद मैंने दोबारा से शॉवर लिया और तैयार होने लगा।

मुझे चाची की चूत मारकर बहुत मजा आया।मैं बहुत खुश था।

शाम को तैयार होकर मैं शादी के लिए निकल गया।वहां शादी में भी चाची की चूत की याद मुझे बार बार आती रही।

उसके बाद जब हम बुआ के बेटे की शादी से लौट आए तो चाची की तबियत भी ठीक हो चुकी थी और उनके पैर का दर्द खत्म हो गया था।

वहां से आने के बाद मैंने फिर से चाची की चुदाई की।

तब से लकर अब तक चाची के साथ मेरा चुदाई का चक्कर चल रहा है।मुझे चाची के साथ सेक्स करने में बहुत मजा आता है।

इस तरह से चाची के साथ मेरी पहली चुदाई हुई।

फ्रेंड्स, Xxx आंटी सेक्स कहानी के बारे में अपना फीडबैक जरूर बताएं कि आपको कैसी लगी।मैं आपको चाची और मेरी चुदाई की और भी कहानियां बताऊंगा।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

एस के इमरान

2 weeks ago

आंटी को पटाने का तरीका बहुत ही मस्त था। मजा आ गया पढ़कर।

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