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सुनसान जगह पर चूत चटवाई और लंड चूसा

आरती विवी

17 Nov 2020 को प्रकाशित

सुनसान जगह पर चूत चटवाई और लंड चूसा
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Xxx ओरल फक स्टोरी में एक अकेली भाभी ने एक बेघर लड़के को कहीं पड़े देखा. उसके कपडे फटे हुए थे और उसका बड़ा लंड दिख रहा था. बड़ा लंड देख उसकी चूत गीली हो गयी.

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मित्रो, मेरा नाम आरती है.मैं 39 साल की एक शादीशुदा महिला हूँ.मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं और मेरी अभी कोई संतान नहीं हुई है.

मेरे पति कुणाल दुबई में जॉब करते हैं.शादी के कुछ महीनों के बाद ही मेरे पति दुबई चले गए थे.

वे अपने काम की मजबूरी के चलते कभी कभार ही स्वदेश आते हैं.मैं घर में अकेली रहती हूँ.

यह Xxx ओरल फक स्टोरी एक सच्ची घटना पर आधारित है और हर उस औरत की ज़रूरत की कहानी है, जिसका पति उसके साथ नहीं रहता है.

मैं दिखने में ठीक-ठाक हूँ. मेरा रंग गोरा है, जिस्म भी एकदम सुडौल है.मेरे स्तन 36 इंच के हैं.

मैं अपनी गांड को ढकने के लिए एक्स्ट्रा लार्ज साइज़ की पैंटी पहनती हूँ.मैंने हेयर रिमूवल ट्रीटमेंट करवा रखा है इसलिए मेरी बॉडी पर बाल ना के बराबर हैं.और मेरी चूत भी एकदम साफ रहती है. मेरी चूत चॉकलेट की तरह लाइट डार्क है.

मेरी चूचियों का रंग मक्खन जैसा है और निप्पल भूरे रंग के हैं.

मेरी सौतेली मां के साथ मेरे भाई का अफेयर भी चल रहा है, वे दोनों सेक्स करते हैं, यह मैं जानती हूँ.

पर यह बात फिलहाल नहीं लिख रही हूँ, वह कहानी मैं आपको फिर कभी बताऊंगी.इसका जिक्र सिर्फ इसलिए किया है कि औरत की भूख किस हद तक जा सकती है.

चूंकि मैं अपने घर में अकेली रहती हूँ तो मुझे मेरी गली के लड़के भी लाइन मारते हैं.पर मैं उनको भाव नहीं देती हूँ.

मेरा एक फ्रेंड ग्रुप भी है. उस ग्रुप में हम सभी सहेलियां खुल कर मजाक मस्ती करती हैं, अपनी मस्ती भरी बातें साझा करती हैं.जैसे आज मेरे पति ने मेरे साथ ये किया, वह किया … आदि बातों को बड़े ही बिंदास तरीके से लिख कर हम सब मजाक मस्ती करती रहती हैं.उस ग्रुप की एडमिन भी मैं ही हूँ.

मुझे टाइट साड़ी पहनना पसंद है और उसके अन्दर टाइट पैंटी ब्रा. टाइट पैंटी पहनने से पैड्स आदि एकदम फिक्स रहता है और काफी आत्मविश्वास रहता है.मैं ज्यादा फ़ैन्सी पैंटी और ब्रा नहीं पहनती, बस जो सामान्यतया लड़कियां पहनना पसंद करती हैं, वही मैं भी पहनती हूँ.

मेरे पति के लंड का साइज़ 4 इंच है, जो मेरे लिए काफ़ी है. पर आजकल उनका लंड भी मुझे नहीं मिल रहा है.

जैसा कि मैंने लिखा है कि मेरे पति कभी कभार ही घर आ पाते हैं. मतलब साल में एक बार … और वह भी केवल 5-6 दिन के लिए.जब वे आते हैं, तब पलंग तोड़ प्यार करते हैं.

पर जब वे नहीं होते, तो मैं प्यासी आत्मा सी भटकती रहती हूँ.

हुआ यूं कि एक दिन मैं मार्केट जा रही थी मुझे बैंक में भी अपने काम से जाना था.उस टाइम दोपहर के 2 बज रहे थे, बैंक में लंच चल रहा था.

तब मैंने सोचा कि यहां तो बहुत टाइम लगने वाला है तो क्यों ना मैं जब तक बाहर से अपने लिए कुछ खाने के लिए ले लूँ.

मैं बैंक से बाहर आ गई और यूं ही मार्केट में घूमते हुए मुझे पेशाब लग आई.

तब मैं एक मल्टिप्लेक्स बिल्डिंग के पीछे वाली गली में एक अधबनी बिल्डिंग में मैं पेशाब करने की सोच कर चली गई.उधर एकांत था तो मैं खुद को हल्की करने की सोच कर गई थी.

उधर पेशाब करके उठी ही थी कि मुझे एक लड़का दिखा जो शायद होश में नहीं था.

मैं उसके पास गई और मैंने देखा कि वह एक प्यारा सा और गोरे रंग का युवा लड़का था.सामने से देखने पर वह 19-20 साल का लग रहा था.

फिर मेरी नज़र उसके फटे हुए कपड़ों पर गई.उसके फटे हुए कपड़ों से उसके अंग प्रत्यंग दिखाई दे रहे थे.

पैंट फटी होने से मेरी उत्सुकता उसके अन्दर झांकने की हुई.झांक कर मैंने जो देखा उसे देख कर मेरा गला सूख गया.

उसका लंड उस समय लुंज-पुंज हालत में भी काफी बड़ा दिख रहा था.इसका अर्थ यह था कि कड़क होने पर उस लड़के का लंड किसी पॉर्न स्टार की तरह 7-89 इंच का हो जाना पक्का था.

मैं उसके लंड को एकटक देखने लगी और एक ही मिनट में मुझे उसके लौड़े को देख कर झुरझुरी सी आ गई कि यह तो मेरी चूत को फाड़ ही देगा.

उस लड़के का लंड एकदम गोरा था और मोटा भी काफी था.

मैं उसके लंड को अपने हाथों में लेने से खुद को रोक नहीं पाई.मेरा शरीर कंपने लगा था और मेरा गला सूख रहा था.

मैं बस यही सोच रही थी कि किसी भी युवा लड़के का लंड इतना बड़ा कैसे हो सकता है.

फिर मैंने उस लड़के को उठाने की कोशिश की.वह अपनी आंख खोल कर मुझे देखने लगा और अपने सूखे होंठों पर जीभ फिराने लगा.

मैंने उससे उसका नाम पूछा.वह सिर्फ़ एक ही बात कह रहा था कि भूख लगी है, कुछ खाने को दे दो.

शायद वह भूख से बेहाल होकर बेहोश पड़ा था.मैंने उसको अपनी चॉकलेट दे दी जो मार्केट से अभी कुछ देर पहले ही खरीदी थी.

चॉकलेट खाने के बाद वह थोड़ा चेतन हुआ और बात करने की स्थिति में आया.मैंने उससे पूछा- खाने को कुछ और चाहिए?वह थोड़ी बेबसी की हालत में बोला- हां.

लेकिन मेरे पास उसको खाने देने के लिए कुछ नहीं था … और आस पास भी कोई खाने पीने की दुकान नहीं थी.

उसका लंड देख कर मेरी पैंटी गीली सी हो गई थी.मेरे दिमाग़ में एक घिनौनी सी बात आई कि क्यों ना मैं इससे अपनी चूत चटवाऊं और चूत की मलाई इसको पिला दूँ.

ये सोचते हुए मुझे बहुत लज्जा भी महसूस हो रही थी क्योंकि मैं एक बहुत बड़े घराने की बहू हूँ, लेकिन पति के ना होने के कारण मेरी चूत की प्यास और भी बढ़ गई थी.मैं खड़ी हो गई और उस लड़के को पास ही के एक कोने में ले जाकर बिठा दिया.

अब मैं आस-पास देखने लगी.उस सुनसान इलाके में कोई नहीं था.

मैंने नीचे से अपनी साड़ी के अन्दर हाथ डाला और पैंटी उतार कर अपने पर्स में रख ली, फिर अपनी साड़ी को घुटनों तक उठाकर दीवार से टिक कर लेट गई.

वह मेरे बाजू में ही पड़ा था.मैंने उसका चेहरा अपनी चूत पर रख दिया और उससे चूत चाटने का कहा.

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शायद उसके साथ पहले भी ऐसा कुछ हो चुका होगा इसलिए वह तुरंत ही मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा.

जैसे ही उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रखा, मैं बिना पानी की मछली की तरह तड़प उठी.कुछ ही पलों में मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी और मेरा पानी निकलने लगा था.

वह लड़का मेरी चूत से निकली मलाई को पूरा चाट गया.Xxx ओरल फक के मजे से मेरी सांसें तो अभी से ही तेज होने लगी थीं.

मैंने उसका मुँह अपनी चूत पर दबाते हुए कहा- आह … चाट ले और खा ले … जितना खाना है खा ले.वह चूत से निकले रस को खाने के बाद भी चाटता रहा.उसे शायद चूत से और रस निकलने की उम्मीद थी.

मैं भी उसकी जीभ से अपनी चूत को लड़ाती रही और यूं ही मछली की तरह तड़पती रही.

कुछ ही देर में मैं पुन: कामुक हो उठी थी और मेरी चूत दोबारा से बेहद उत्तेजित हो गई थी.

कुछ ही देर बाद जब मैं वापस स्खलित होने को हुई तो मैंने उसके कंधे को ज़ोर से पकड़ लिया और उसमें अपने नाख़ून गड़ा दिए.

वह आह कहते हुए मेरी चूत को काटने लगा.मैंने उसे धक्का देकर अलग किया और गाली देते हुए कहा- साले चाटना है तो सही से चाट, वरना मैं चली!

वह दुबारा से किसी पालतू कुत्ते की तरह मेरी चूत पर अपना मुँह लगा कर चाटने लगा.इस बार वह मेरी चूत को बड़े प्यार से अन्दर तक चाट रहा था जिससे मेरी सनसनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर जैसे ही मेरा पानी निकलना शुरू हुआ तो मैंने उस लड़के का सिर अपनी जांघों के बीच में ज़ोर से दबा लिया.

ना जाने कितने दिनों से वह लड़का भूखा था; मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था.

वह चूत का रस चाटने के बाद भी लगा रहा, तब मुझे लग रहा था कि ना जाने कहां फंस गई.मेरे पूरे शरीर में एक प्रकार का करेंट दौड़ रहा था और मेरी आंखों से तृप्ति भरे आंसू भी आ रहे थे.

मेरे मुँह से सिसकारियां भी निकल रही थीं- ऊओ प्लीज बस कर दो … आआ ऊऊओ नहीं यार आह आह नहीं … ओह गॉड!

फिर मैंने किसी तरह से अपने आपको रोक लिया और उसको उसकी मनमानी को करने दिया.वह कभी मेरी चूत को चूसता तो कभी चाटता और अपने दांतों से काटता.

मैं हैरान थी कि उसकी भूख अभी तक ख़त्म नहीं हुई थी.

मैंने अपने साइड में लगे एक पिलर को ज़ोर से पकड़ा हुआ था और मेरी कामुक सिसकारियां और चीखें निकल रही थीं.मेरी सांसें भी तेज हो रही थीं, जबकि उसकी भूख और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी.

करीब आधा घंटा तक वह मेरी चूत को चूसता रहा.फिर मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने उसे एक लात मार कर दूर कर दिया.

लेकिन वह थोड़ी देर बाद फिर से अपनी हरकत करने लगा.

मैं भी बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी.तभी वह लड़का मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे चूमने लगा.

कुछ मिनट तक मैं यूं ही लेटी रही.मेरी सांसें धीरे धीरे सामान्य हो रही थीं.

फिर मैंने अपने अपनी ताकत समेटी और उस लड़के को अपने ऊपर से हटाया.अब वह लड़का होश में आ गया था.

मैंने पर्स में से अपनी पैंटी निकाली.लेकिन पहनने से पहले मुझे अपनी चूत को रुमाल से पौंछनी पड़ी, फिर मैंने पैंटी पहनी.

उस लड़के ने मुझे थैंक्स कहा और उसने अपना नाम भी मुझे बताया.उसका नाम राज था.अभी उसका लंड भी पूरी तरह से तन गया था और उसका तना हुआ लंड देख कर मुझे भी हैरानी होने लगी कि ये साला अजीब लंड वाला लड़का है.

मैं तीन बार झड़ कर पूरी तरह से ठंडी हो चुकी थी पर ये अभी तक उसके लौड़े पर झांट असर नहीं हुआ था.

उसका खड़ा हुआ लंड देख कर मैंने उसको हिलाना शुरू कर दिया.

अब तक राज भी समझ गया था.उसने मुझे रोका पर मैंने कहा- कोई बात नहीं आज तुम मुझे पूरी तरह से संतुष्ट कर दो. अभी मैंने तुम्हें अपनी चूत की रबड़ी खिलाई थी, अब तुम मुझे अपनेलंड की रबड़ीखिला देना.

यह कहते हुए मैंने उसका लंड ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.

राज मदहोश होने लगा और मादक आवाजें निकालने लगा.उसकी सीत्कार सुन कर मैंने उसका लंड और ज़ोर से हिलाया.

कुछ देर तक लंड हिलाने के बाद उसका माल निकलने लगा.मैंने कभी भी अपने पति के लंड का माल नहीं पिया था पर पता नहीं क्यों … उसका माल देख कर मुझे उसे पीने का मन हो गया.

मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया लेकिन उसका टोपा ही मेरे मुँह के अन्दर फिट हो पा रहा था.

Xxx ओरल फक से तभी उसका माल छूटने लगा.उसका माल एकदम गर्म था.मैं उसका पूरा माल पी गई.

उसका लंड अभी भी शांत नहीं हुआ था.दो बार माल छोड़ने के बाद उसका लंड थोड़ा थोड़ा शांत हुआ.

उसके लंड की मुठ मारते हुए मेरा हाथ दुखने लगा था.मैं यही सोच रही थी कि यह लड़का अगर किसी लड़की से सेक्स करेगा, तो यह उस लड़की की चूत का भोसड़ा बना देगा.

फिर मैंने उसे अपने घर ले जाने की सोची और उसे अपने साथ ही रखने की सोचने लगी कि यह मेरा भी ख्याल रखेगा.कुछ देर तक सोचने के बाद मैंने निश्चय कर लिया कि अब यह मेरे साथ ही जाएगा.

मेरे पति मेरे पास नहीं रहते हैं, तो बंद घर में हम दोनों मां बेटे बन कर कुछ भी कर सकते हैं.मैंने उसे उधर ही रुकने का कहा और अपने फोन से एक ओला बुक की.

कुछ ही देर में कैब आ गई और मैं उसे अपने साथ लेकर अपने घर आ गई.

आगे क्या हुआ … उसने मुझे किस तरह से चोदा, अपने ग्रुप की लेडीज के साथ उस लड़के राज को किस तरह से साझा किया, वह सब मैं आपको अगली सेक्स कहानी में लिखूंगी.

आप मेरी Xxx ओरल फक स्टोरी पर अपने कमेंट्स जरूर करें.धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहण पाटीदार

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

नेहा गुप्ता

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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