Xxx स्टाइल सेक्स कहानी में स्वयम् को आधुनिक मानने वाले 2 परिवारों की 2 पीढ़ियों की है. अपने को अन्य लोगों से बेहतर और मॉडर्न दिखाने में चक्कर में चरित्रपतन कर लेते हैं.
दोस्तो, आज की कहानी आधुनिकता के पीछे अंधाधुंध भागने वाले उन परिवारों की कहानी है जिन्होंने आधुनिकता के नाम पर पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागते-भागते पारिवारिक मूल्यों को बिलकुल समाप्त कर लिया है.एक अंधे कुंएं में गिर कर जो हो रहा है उसे वे स्वीकार करते जाते हैं और अंत में हाथ आता है एक टूटा और बिखरा हुआ परिवार जहां आपसी सामंजस्य और विश्वास तो कहीं है ही नहीं.
Xxx स्टाइल सेक्स कहानी है शालीमार बाग़ में रहने वाले ब्रिगेडियर हरीश कपूर के परिवार की.
ब्रिगेडियर साहब के बड़े भाई जमाने पहले इंग्लॅण्ड पढने गए तो वहीं बस गए.एक गोरी से शादी कर ली और पूरे विदेशी हो गये.
उनकी एक लड़की थी जो 18 साल की उम्र से पहले ही किसी गोरे के साथ रहने लगी और आज तक बिना शादी किये रहती है.उन्हें घूमने का बहुत शौक है.
ऐसा सुनते हैं कि वो न्यूडिस्ट हैं. यानी घर पर या बाहर बीच वगेरा पर बिना कपड़ों के रहना पसंद करते हैं.और मजे की बात यह है कि कपूर साहब की गोरी घरवाली उन्हें बहुत पसंद करती है और कई बार उनके साथ बाहर भी घूम आई है.अब ये तो पता नहीं कि उनके साथ बाहर घूमने पर उसने कपड़े पहने या नहीं.
पर हाँ हरीश कपूर और उनकी पत्नी कामिनी कपूर उसकी गोरी चमड़ी और खुलेपन से बहुत प्रभावित रहते हैं.
ब्रिगेडियर साहब ने नौकरी से जल्दी ही वीआरऐस ले लिया था और वो साल में 15 दिन के लिए इंग्लॅण्ड जरूर जाते थे.वहां वो बिलकुल वहीं के होकर रहते.
कपूर ब्रो और देवरानी जेठानी उन 15 दिनों में आपसी रिश्ते भूल जाते और जम कर शराब और शवाब का मजा लूटते.
कामिनी जो शालीमार बाग में सलवार सूट या ज्यादा से ज्यादा जींस टॉप में दिखतीं, इंग्लॅण्ड में तो शॉर्ट्स और फ्रॉक से ज्यादा कुछ पहनती ही नहीं थी.स्विमिंग पूल या बीच पर बड़ी बेशर्मी से टू पीस बिकनी पहनतीं.
हाँ, कामिनी ने सिगरेट और व्हिस्की पीनी अपनी गोरी जेठानी से सीखी.अब कामिनी भी दिल्ली में अकेले होने पर बिना कपड़ों के रहने की कोशिश करतीं पर हमारे हिन्दुस्तान में तो कभी बाई, कभी कपड़े प्रेस वाला, कभी सब्जी वाला आता ही रहता है तो कामिनी कपूर को बार बार कपड़े पहनने पड़ते.
हरीश और कामिनी को सेक्स का बेहद शौक था.एक तो फौज की जिन्दादिली, फिर इंग्लॅण्ड की यादें, उन्हें हर रात जवान रखतीं.
उनके एक ही बेटी थी अंजली.जब तक वो नासमझ थी, तब तक कपूर साहब और कामिनी उसके सामने ही सब कुछ कर लिया करते, साथ ही नहाते.
पर जब से अंजली ने अपनी मॅाम से पूछना शुरू कर प्रिया कि पापा के ये जो सूसू वाला है वो आपके और मेरे क्यों नहीं है, तब से कामिनी ने उसे साथ नहलाना बंद कर प्रिया.पर खुद वो हमेश कपूर साहब से लिपटकर ही नहाती.
अंजली के लिए एक फुल टाइम आया रज्जो रखी हुई थी, जिसे कोठी के बाहर की हिस्से में एक कमरा प्रिया हुआ था, जिसमें वो और उसका पति रहते थे.पति दिन में बाहर काम करता और रात को आकर सोता था.
जब कपूर साहब और कामिनी एक दूजे में लगे होते तो उस समय आया अंजली बेबी को संभालती.
कामिनी के बेडरूम का डोर बंद होने की स्थिति में रज्जो को सख्त आदेश था कि वो उन्हें डिस्टर्ब न करे.अब तो रज्जो को भी आदत पड़ गयी थी कामिनी को बहुत कम कपड़ों में देखने की.कितनी बार तो कामिनी के बेडरूम से उसकी आहें और सीत्कारें बाहर तक आतीं.पर इन सबके एवज में रज्जो को अच्छी नौकरी और कपड़े, साथ में खाना पीना मिलता था.
और एक चीज़ जो बोनस में मिलती थी, वो थी कपूर साहब द्वारा उसकी चुदाई.
हाँ, रात को अपने क्वार्टर में जब रज्जो अपने पति के ऊपर चढ़ कर उसकी चुदाई करने की कोशिश करती तो उसके पति का तो ढंग से खड़ा भी नहीं हो पाता था.वो कमजोर और नपुंसक था.उसके बस का नहीं था बच्चे पैदा करना.इसलिए रज्जो उससे नाराज रहती.
कामिनी के किटी या बाज़ार जाने पर जब भी मौक़ा मिलता कपूर साहब रज्जो को चोदते.अक्सर कामिनी तो उससे अपनी तेल मालिश करवाती ही थी.
कामिनी तेल मालिश करते समय बीच पर मसाज के वो ख्वाब देखती जो उनकी गोरी जिठानी ने उन्हें दिखाए होते.कहना न होगा कि वो आया से अपने हर अंग की मसाज कराती होंगी.वरना कौन मेम अपनी आया को हर महीने नया कपड़ा और मेकअप का सामान देगी.
कामिनी की देखा देखी रज्जो भी अपनी चूत और जिस्म चिकना रखती.
अंजली अब बड़ी हो गयी थी.उसकी गिनती कॉलोनी की सबसे ज्यादा बिगड़ी लड़कियों में होती.अब बिगड़ती भी भला क्यों नहीं. शराब पीना उसे कपूर साहब ने ही सिखाया और जिस्म की नुमाइश कामिनी ने.
अंजली कभी कपड़े पहन कर नहीं सोयी.ब.चपन से ही उसने ये देखा कि कपूर साहब और कामिनी हमेशा नंगे ही सोये, वो ही उसकी बालक बुद्धि पर बस गया.
इसलिए सुबह कामिनी ही सबसे पहले अंजली के रूम में जातीं और पंजाबी इंग्लिश की मिलीजुली गालियों में उसे चादर उढ़ाती.
अंजली डेली शाम को क्लब जाती.उसे रात को छोड़ने हर रात नयी गाड़ी आती.गाड़ी जब गेट पर रूकती तो अंजली उसमें से दो मिनट बाद ही उतरती, टिश्यू से अपने बिखरी हुई लिपस्टिक को संभालते, डगमगाते क़दमों से.
कामिनी या हरीश कपूर ने उससे कभी नहीं पूछा कि रोज वो कहाँ जाती है और क्या करती है.हरीश कपूर कुछ कहते भी तो कामिनी उन्हें रोक देतीं की बच्चे हैं, मजे तो करेंगे ही. फिर शादी के बाद थोड़े ही न मौक़ा मिलेगा.
एक रात अंजली घर नहीं आई.मोबाइल उसका बंद था.
कामिनी तो अपनी चुदाई के बाद एक पेग लगा कर सो गयी.पर कपूर साहब रात भर चहलकदमी करते रहे.वे बार बार गेट पर हो आते.
सुबह चार बजे एक गाड़ी रुकी.उसमें से अंजली उतरी, नशे में धुत्त, कपड़े अधखुले.
वो जब तक बाहर आते, गाड़ी जा चुकी थी.गेट खोल कर कपूर साहब अंजली को अंदर लाये.
सिगरेट और शराब की बदबू भरी हुई थी उसके जिस्म में.सुबह कपूर साहब ने कामिनी से बात की कि अब इसकी शादी करनी है.कामिनी ने अंजली से पूछा तो वो हंस कर बोली कि उसने तो शादी कर भी ली. एक पंजाबी बिज्नेसमैन है आलोक धींगरा. वो दोनों पिछले दो महीने से सेक्सुअल रिलेशनशिप में हैं.
अब हरीश कपूर और कामिनी को तो मानो सांप सूंघ गया.अंजली पर तो मानो कोई फर्क ही नहीं था.
अगला धक्का उन्हें तब लगा जब कामिनी ने उन्हें बताया कि कल रात वो आलोक और उसके दोस्त के साथ थी. आलोक को ज्यादा चढ़ गई थी. आलोक के दोस्त और उसने रात को सेक्स किया वो भी अनप्रोटेक्टेड.कामिनी ने एक झन्नाटेदार चांटा मारा अंजली के.
अंजली चुप थी.
कामिनी ने अंजली से कहा कि उन्हें आलोक के घर वालों से मिलना है.वो तो किस्मत अच्छी थी कि आलोक के मां बाप बहुत सुलझे हुए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए वो शादी को तैयार हो गये और फटाफट शादी की तारीख भी तय कर दी गयी.शादी से पहले कामिनी ने अंजली की सफाई करवाई ताकि गर्भ वाला कोई झगड़ा न हो.
आलोक दबंग था और मजबूत कद काठी का था.उसने अंजली को स्पष्ट बोल प्रिया कि अब वो किसी और लड़के से मतलब न रखे. आगे ऐसा हुआ तो वो उसे गोली मार देगा.अंजली जानती थी कि आलोक जो कह रहा है, ऐसा वो कर भी सकता है.
आलोक ने उससे कह प्रिया कि जिन्दगी जैसे पहले जीते थे, वैसे ही अब भी जियेंगे. मस्ती में कोई कमी नहीं. पब पार्टी डिस्को डांस में कोई कमी नहीं.पर आलोक को ये बर्दाश्त नहीं की अंजली किसी और के साथ सेक्स करे.बाकी किसी चीज़ में उसे कोई आपत्ति नहीं थी.हाँ, वो दोनों जब साथ हों तो आपसी सहमति से कुछ भी कर सकते हैं.
शादी ठेठ पंजाबी तरीके से खूब मस्ती के साथ हुई.रोज रात को शराब का दौर, जिसे आधुनिक शादियों में कॉकटेल पार्टी कहते हैं, फिर उन्मुक्त नाच गाने.सब कुछ गोवा में था.मौक़ा भी था और माहौल भी.
शादी के अगले दिन सुबह सारे घर वाले और रिश्तेदार वापिस चले गये.रिसोर्ट में रह गये आलोक और अंजली अपनी सुहागरात मनाने के लिए.
सुहागरात पर कुछ नया तो नहीं होना था.अंजली और आलोक दोनों ही कितनी ही बार सेक्स कर चुके थे.पर सुहाग सेज की बात कुछ और होती है.
आज अंजली के पूरे जिस्म पर मेहँदी लगी हुई थी.ये आलोक की डिमांड थी कि जिस्म का कोई भी कौना मेहंदी से अछूता न रहे.
इसके लिए स्पेशल ग्रुप हायर किया गया था.हाथ-पैर-पीठ-पेट की मेहंदी तो बॉयज आर्टिस्ट ने लगाई दो दिन पहले और एक दिन पहले अंजली के मांसल मम्मों और चूत और पिछवाड़े को मेहंदी से रचा गर्ल्स आर्टिस्ट ने.
शीशे में देखने पर चेहरे के अलावा खुद अंजली को कहीं भी अपनी गोरी चमड़ी नजर नहीं आई.मम्मों पर एक पर s और एक पर v बना था डिजाईन में.
उस रात अंजली को बिना कपड़ों के ही सोना पड़ा. हालांकि रात 2 बजे तक मेहँदी सूख गयी थी तो अंजली ने पिछवाड़ा तो रगड़ लिया.
तो आते हैं उनकी सुहागसेज पर.
बेड पर अंजली पंजाबी सलवार सूट में गहनों से लड़ी बैठी थी.आलोक शेम्पेन लिए अंदर आया.
उसने अंजली को नेग प्रिया और गोदी में उठा लिया.दोनों के होठ मिल गये.
आज के चुम्बन में आग थी.दो दहकते जिस्म एक दूसरे में समाने को बेताब थे.
अंजली के जिस्म से आती मेहंदी की खुशबू ने पूरा रूम महका रखा था.आलोक के हाथों में भी गहरी मेहंदी रची थी.बीच में दिल की डिजाईन में अंजली का नाम लिखा था.
आलोक ने अंजली को नीचे खड़ा किया और कहा- ड्रेस चेंज कर लो, फिर शेम्पेन खोलेंगे.अंजली बोली- अभी खोलते हैं.
आलोक मुस्कुराया- अभी नहीं. इस शेम्पेन में तुम्हें नहलाना है. अब बताओ अभी करें या कपड़े …अंजली हंसती हुई अपनी झीनी सी नाईटी लेकर वाशरूम में चाली गयी.
पीछे पीछे आलोक भी आया तो अंजली ने डोर लॉक कर लिया.थोड़ी देर में पुराना मेकअप उतार कर और नया भारी मेकअप करके अंजली बाहर आई.
झिलमिल रोशनी में वो बिल्कुल परी लग रही थी. नाईटी से उसका एक एक अंग झलक रहा था पर मेहंदी ने उसके जिस्म पर एक चादर सी डाल दी थी.खनकती पाजेब और कलाइ भरी चूड़ीयाँ खनकाती अंजली बेड के पास आई.
अब तक आलोक ने भी चेज कर लिया था.वो एक लुंगी और स्लीवलेस कुरते में था.
आलोक ने अंजली को जकड़ लिया.उसके ख्वाबों की रानी उसकी ख्वाबो में देखी ड्रेस में उसकी बाहों में थी.
दोनों ने शेम्पेन को हिलाया और खोल प्रिया.दोनों ने एक दूसरे को शेंपेन से नहला प्रिया और दोनों ने खूब घूँट भरे.
अब दोबारा वाशरूम जाना पड़ा.दो बेकरार जिस्म एक दूसरे से लिपटे शावर के नीचे खड़े थे.
आलोक का लंड बेचैन था अंजली की चूत में घुसने के लिए.अंजली तो बेसुध थी आलोक की बाहों में.
दोनों फटाफट टॉवेल लपेट कर बेड पर आ गये.
अंजली हाथ पैर फैला कर आँखें बंद कर के लेट गयी.उसके पैर के अंगूठे से उसके जिस्म के हर कोने को चूमता हुआ ऊपर आया.आज उसकी एक हसरत पूरी हुई थी कि उसकी बीवी का हर अंग मेहंदी से सजा हो.
अंजली की चूत और मम्मों पर जो चित्रकारी हुई थी, आलोक तो झूम उठा.
आलोक अंजली के मम्मों को चूसकर आगे बढ़ ही नहीं पाया.अंजली के मम्मों ने उसे आगे बढ़ने ही नहीं प्रिया.वो तो अंजली ने उसके बाल पकड़कर उसे ऊपर खींचा और होंठ से होंठ मिलाये.
अब अंजली ने हाथ नीचे किया तो उसके हाथ में आलोक का लंड आ गया.अंजली ने आँखें मूंदे मूंदे उसे मसलना शुरू किया.
आलोक उसके कान में फुसफुसाया- क्या तुम नहीं चूसोगी इसे?अंजली बैठी और उसने आलोक को लिटाकर जैसे ही उसका लंड अपने मुह में लेने को किया, वो चौंक गयी.
आलोक के लंड, गोटियों पर मेहंदी से चित्रकारी हुई हुई थी.
अंजली ने उसे चूमते हुए मुख में ले लिया.आलोक ने उसे 69 कर प्रिया.
अब दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे.दोनों के नथुनों में मेहंदी की खुशबू थी.
आलोक चोदने को बेताब था.उसने अंजली को नीचे किया और उसकी टांगों को ऊपर करके फैलाते हुए अपना लंड पेल प्रिया.
अंजली कितनी ही बार उसका लंड ले चुकी थी.पर आज के लंड की बात कुछ और थी.अंजली की चीख निकली.
आलोक ने धकापेल एकदम से शुरू कर दी.अंजली भी उसका साथ दे रही थी और चुदाई की संगत कर रही थीं अंजली की चूड़ियां और पाजेब.
थोड़ी देर की धमाचौकड़ी के बाद हमेशा की तरह अंजली ऊपर आ गयी.उसने अपनी चूत को लंड के ऊपर सेट किया और लगी उछलने.उसके मम्मे और बाल हवा में लहरा रहे थे.
अंजली के मम्मों को दबोचने की आलोक की कोशिश लगातार नाकाम हो रही थी.अंजली ने भरपूर चुदाई की आलोक की और दोनों का स्खलन लगभग एक साथ ही हुआ.
तब अंजली आलोक की बगल में लुढ़क गयी.
दोनों ने बेड सुबह 10 बजे छोड़ा.इस बीच उनकी चुदाई के तीन सेशन हुए.सुबह उठने पर भी बदन टूटा हुआ था.
उन दोनों की शाम की फ्लाइट थी दिल्ली की.
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Xxx स्टाइल सेक्स कहानी का अगला भाग:चुदाई का फैशन- 2