राज वीर मिड्ढा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@raja-vara-madadha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राज वीर मिड्ढा की रचनाएं
एक और अहिल्या-7
“मेरी मंज़िल तो मेरे पास है लेकिन मेरी किस्मत में नहीं.”“क्या मतलब?” मैं चौंका.
एक और अहिल्या-5
कार में वसुन्धरा ने मुझसे कोई बात नहीं की अपितु सारे रास्ते वसुन्धरा अधमुंदी आँखों के साथ मंद-मंद मुस्कुराती रही, शायद उन लम्हों को मन ही मन दोहरा रही थी. वसुन्धरा के रुख पर रह-रह कर शर्म की लाली साफ़-साफ़ झलक रही थी. वसुन्धरा की आँखें बार-बार झुकी ...
एक और अहिल्या-3
“फिर तो एक ही चारा बचा है और मुझे पता नहीं कि यह आप को पसंद आएगा या नहीं.” मैंने झिझकते-झिझकते कहा.“अरे! बोल भी दीजिये …” आवाज़ में सत्ता की गूंज बराबर थी.“नाड़ा काट देते हैं, लहंगा रिपेयर कर के नया नाड़ा डालते हैं और चलते हैं. कुल पांच मिनट का काम ह...
एक और अहिल्या-1
मैं आपका दोस्त, राजवीर मिड्ढा फ़िर से आपकी खिदमत में हाज़िर हूँ जिंदगी की भाग-दौड़ में वाक़या एक नया अफसाना लेकर.मेरी पिछली कहानियां पढ़ कर मुझे बहुत से मेल आये … बहुत से बोले तो कुल 1700 से एक दो ज्यादा ही. जिनमें से बहुत सारी मेल्स का मैंने पूरी ईमान...
आजकल का विवाहित जीवन
दरअसल ‘काम’ के बारे में अपने देश में अधिकतर लोगों की सोच बहुत साफ़ नहीं है, बहुत सारे तो 50-60 की उम्र के दादा-दादी बनने के बाद भी यही सोच रखते हैं कि नर का मादा की योनि में लिंग-प्रवेश करवा के घर्षण कर वीर्यपात करवाना ही ‘काम’ है।