राज वीर मिड्ढा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@raja-vara-madadha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राज वीर मिड्ढा की रचनाएं
हसीन गुनाह की लज़्ज़त-4
अगले दिन शनिवार था और शनिवार के बाद इतवार की छुट्टी थी।शाम को लगभग 4 बज़े A.C वाले का फ़ोन आया कि A.C ठीक हो गया था और वो पूछ रहा था कि कब अपने आदमी मेरे घर भेजे ताकि A.C वापिस फ़िट किया जा सके।मैंने उसे इतवार शाम को आकर A.C फिट करने को बोला।
हसीन गुनाह की लज़्ज़त-3
अगला सारा दिन मैंने मन ही मन चिढ़ते कुढ़ते हुए गुज़ारा। जो कुछ और जितना कुछ दिया के साथ रातों को हो रहा था, उस से ज़्यादाहोने की गुंजाईश बहुत कम थी और ऐसा होना भी बहुत दिनों तक ऐसा होना मुमकिन नहीं था।
हसीन गुनाह की लज़्ज़त-2
साली की बेटी की कच्ची उम्र की लज़्ज़त मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी, मैंने सोच लिया था कि आज से मैं दिया वाली साइड सोऊंगा ही
हसीन गुनाह की लज़्ज़त-1
आप इस राज़ को समझें कि सेक्स दिमाग में होता है, अर्चना में होता है, फोरप्ले में होता है। मैं अपने ही जीवन में घटी एक घटना का अपने अंदाज़ में जिक्र कर रहा हूँ, लीजिये पेश है मेरी कहानी और पाठक खुद फैसला करें कि यह अच्छी है या बुरी!
एक थी वसुंधरा-7
नीचे मेरे हाथों की उंगलियां वसुंधरा की नाभि के नीचे, योनि के आसपास सितार बजाने में व्यस्त थी.“राज..! … आह … ! … आप को सब पता है … उफ़..उफ़..!.” वसुंधरा मेरा हाथ उस की योनि पर से उठाने की बराबर जद्दोजहद कर रही थी लेकिन मैं ऐसा न होने देने के लिए दृढ़प...
एक थी वसुंधरा-6
एकाएक मैंने वसुंधरा को अपनी पकड़ से आज़ाद कर प्रिया और उससे ज़रा सा ऊपर उठ कर अपना सर उठ कर वसुंधरा को सर से पैर तक एक नज़र देखा.क्या कमाल का नज़ारा था. साक्षात् रति मेरी बांहों में थी.
एक थी वसुंधरा-5
ख़ैर! मैंने वाशरूम जाकर दांतों को ब्रश किया और लिस्टरीन से कुल्ले किये.
एक थी वसुंधरा-4
“वसुंधरा! यह यह … मैं! कैसे … क्यों …??” सेंटर-टेबल पर कॉफ़ी का करीब-करीब खाली कप रखते हुए मैं हकलाया.“राज प्लीज़! मना मत करना.” वसुंधरा की आँखें नम थी.“वो सब तो ठीक है वसु! लेकिन यह सब … मतलब मैं … मैं कैसे … मेरा मतलब … मैं ही क्यों??” मुझे समझ ही...
एक थी वसुंधरा-3
बैडरूम से अटैच वाशरूम में जाकर मैंने सब से पहले तो अपना ब्लैडर खाली किया और गीज़र ऑन कर प्रिया. फिर इधर-उधर देखा. गीज़र में पानी नहाने लायक़ गर्म होने में दस-पंद्रह मिनट तो लगने थे. टाइम पास करने के इरादे से मैंने ऐसे ही वाल-कैबिनेट को खोल लिया.कैबिनेट...
एक थी वसुंधरा-2
ड्राइंगरूम के आतिशदान में आग जल रही थी इसलिए कॉटेज़ अंदर से खूब गर्म एवम् आरामदायक था लेकिन बाहर बारिश का ज़ोर अब कुछ बढ़ गया था और चीड़ के पेड़ तेज़ हवा के साथ तेज़-तेज़ झूम रहे थे.
एक थी वसुंधरा-1
बहुत दिनों बाद मैं आप का अपना राजवीर एक बार फिर से हाज़िर हुआ हूँ, अपनी क़लम से निकली एक और दास्तान लेकर!लेकिन पहले अपनी बात!मेरी पिछली कहानीएक और अहिल्याकी ऐसी चौतरफ़ा वाहवाही की तो मैंने अर्चना भी नहीं की थी.
स्त्री-मन… एक पहेली-6
मेरी साली की जवान बेटी की कामुकता से भरपूर इस सेक्स स्टोरी के पिछले भागकहानी का प्रथम भाग:स्त्री-मन… एक पहेली-1स्त्री-मन… एक पहेली-5