राजीव खन्ना
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rajava-khanana
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राजीव खन्ना की रचनाएं
दिल का क्या कुसूर-8
तभी अचानक मुझे अपने अन्दर झरना सा चलता महसूस हुआ। अरूण का प्रेम दण्ड मेरे अन्दर प्रेमवर्षा करने लगा। अरूण के हाथ खुद ही ढीले हो गये… और उसी पल… आह… उईईईई… मांऽऽऽऽऽ… मैं भी गई… हम दोनों का स्खलन एक साथ हुआ… मैं अब धीरे धीरे उस स्वर्ग से बाहर ...
दिल का क्या कुसूर-7
उन्होंने अपने हाथ से मेरी ठोड़ी को पकड़ कर ऊपर किया और मेरी आँखों में झांकते हुए विनती सी करने लगे जैसे कह रहे हों, “प्लीज, मुझे अपनी प्राकृतिक अवस्था का दर्शन कराओ।”
दिल का क्या कुसूर-6
अरूण मेरे बिल्कुल नजदीक आ गये। मेरी सांस धौंकनी की तरह चलने लगी। अरूण ने चेहरा ऊपर करके अपने होंठ मेरे होठों पर रख प्रिया। आहहहह… कितना मीठा अहसास था। उम्म्म्म्म… बहुत मजा आ रहा था। मेरी आँखें खुद-ब-खुद बन्द हो गई।
दिल का क्या कुसूर-5
आखिर इंतजार की घड़ी समाप्त हुई और बुधवार भी आ ही गया। दीपक के जाते ही मैंने अरूण के मोबाइल पर फोन किया। तो उन्होंने कहा, “बस एक घंटे में गाड़ी दिल्ली स्टेशन पर पहुँच जायेगी… और हाँ, अभी फोन मत करना मेरे साथ और लोग भी हैं हम तुरन्त मीटिंग में ...
दिल का क्या कुसूर-4
मुझे पुरूष देह की आवश्यकता महसूस होने लगी थी। काश: इस समय कोई पुरूष मेरे पास होता जो आकर मुझे निचोड़ देता… मेरा रोम रोम आनन्दित कर देता… मैं तो सच्ची धन्य ही हो जाती।
दिल का क्या कुसूर-3
दोनों लड़कियाँ आपस में एक दूसरे से अपनी योनि रगड़ रही थी।ऊफ़्फ़…!! मेरी उत्तेजना भी लगातार बढ़ने लगी। परन्तु मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ? कैसे खुद को सन्तुष्ट करूँ? मुझे बहुत परेशानी होने लगी। वो दोनों लड़कियाँ लगातार योनि मर्दन...
दिल का क्या कुसूर-2
दीपक मेरे ऊपर आकर लगातार धक्के लगा रहे थे…अब मेरा ध्यान कम्प्यूटर की स्क्रीन से हट चुका था… और मैं अपनी कामक्रीड़ा में मग्न हो गई थी…तभी दीपक के मुँह से ‘आह…’ निेकली और वो मेरे ऊपर ही ढेर हो गये।
दिल का क्या कुसूर-1
वैसे तो दीपक से मेरा रोज ही सोने से पहले एकाकार होता था। परन्तु वो पति-पत्नी वाला सम्भोग ही होता था।
तेरा साथ है कितना प्यारा-9
मुकुल की निगाह भी तभी मेरी योनिप्रदेश पर गई सारा खून-खून दिखाई प्रिया।मुकुल एकदम बोला- नयना… यह क्या है, तुम्हारी शादी तो मुझसे भी पहले हुई थी… क्या अभी तक…?मेरी आँखें बरबस ही छलछला गई ‘हम्म्म्म…’ बस इतना ही निकला मेरे मुख से।
तेरा साथ है कितना प्यारा-8
वो पूरा निपुण खिलाड़ी था, कोई भी जल्द बाजी नहीं दिखा रहा था, उसने फर्श पर बैठकर मेरी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और मेरी दोनों मक्खन जैसी चिकनी जांघों को एक एक करके चाटने लगा।
तेरा साथ है कितना प्यारा-7
‘व्व्वो मैं क््क्कु…छ…नहींईईइ…’ बस इतना ही फूटा मुकुल के मुंह से…मैं हंसने लगी।
तेरा साथ है कितना प्यारा-6
अच्छा खासा फंक्शन चल रहा था, अचानक मेरी सास मेरी मम्मी के पास आई और बोली- बहन जी, आपकी बेटी की शादी को 7 साल हो गये, जरा इससे ये तो पूछो कि हमें पोते-पोती का मुँह भी दिखायेगी या नहींॽ