राजवीर वीरू दादा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rajavara-vanpr-thatha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राजवीर वीरू दादा की रचनाएं
एक ही बाग़ के फूल-5
छाया ने कहा- जब कभी कभी मैं सोई रहती हूँ तब ऐसा लगता है कि मोनू भाई मुझे हाथ लगा रहा है।मैंने पूछा- तो कैसा लगता है?उसने थोड़ा शर्मा के कहा- अच्छा लगता है. पर थोड़ा अजीब भी लगता है क्योंकि भाई है न इसलिए।मैंने कहा- उससे कोई नहीं … बस मौज ले. जैसा मै...
एक ही बाग़ के फूल-3
मैंने भी उसको देख के हाथ हिलाया और फ़ोन में सन्देश के माध्यम से पूछा- कैसा लग रहा है?उसने कहा- पता नहीं … अजीब सा लग रहा है. पर मज़ा बहुत आया।मैंने कहा- ठीक है, अब सो जा।उसने मेरे से पूछा- दोबारा घर आ जाऊं? जो हुआ उसके बारे में बता देते।मैंने कहा- न...
एक ही बाग़ के फूल-2
मेरी नज़र अब आंटी की चूत पे गयी जहाँ उसके हल्के बाल दिखाई दे रहे थे, ऐसा लग रहा था कि कुछ दिन पहले ही उसने बाल साफ़ किये थे. तभी याद आया कुछ समय पहले उनकी शादी की सालगिरह थी. शायद उसी टाइम उन्होंने अपनी चूत साफ़ की होगी।
देखा… मैं बच्ची नहीं हूँ
यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएँ हमन तमन्ना है कि किसी को रुलाएँ हमजिसको जितना याद करते हैंउसे भी उतना याद आयें हम !