समीर चौधरी
सत्यापित कहानीकार (Verified)@samara-cathhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
समीर चौधरी की रचनाएं
जिस्म की जरूरत -27
मेरे मन में कई ख्याल उमड़े, फिर कुछ समझ आया कि वंदना मुझे कितना भी प्यार करती है… कितनी भी समर्पित है… लेकिन है तो यह एक नारी ही ना!!और नारी सुलभ लज्जा का प्रदर्शन तो स्वाभाविक ही था!
जिस्म की जरूरत -26
कुछ देर हम एक दूसरे के शरीर को सहलाते हुये अपनी गर्म साँसों से कमरे को महकाते रहे. फिर जो हुआ उसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की थी… अचानक वंदना ने अपने लब मेरे लबों से छुड़ाए और…बिना कोई देरी किये झट से अपने घुटनों पर बैठ गई!
जिस्म की जरूरत -23
मेरा मुँह अब भी उसकी चूत पे टिका हुआ था और मेरी जुबान की नोक अब भी चूत की दरार में फंसी हुई थी।मैं जानता था कि अगर मैंने ढील छोड़ दी तो दुबारा गरम होने में रेणुका थोड़ा वक़्त लगाएगी, इसलिए उसे कोई मौका न देते हुए मैंने अपने हाथ बढाकर उसके गाउन को जो ...
जिस्म की जरूरत-22
उनके होठों की नर्मी और साँसों की गर्मी ने मुझे पिघलने पर मजबूर कर दिया और अनायास ही मैंने भी अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने आप में समेटते हुए उसके चुम्बन का जवाब चुम्बन से देने लगा।
जिस्म की जरूरत-21
अरविन्द भैया ने हम दोनों से पार्टी की बातें पूछीं और इसी तरह बातों का सिलसिला शुरू हो गया।थोड़ी ही देर के बाद रेणुका जी हाथों में ट्रे लेकर आईं और सबने अपने अपने हिस्से की कॉफ़ी ले ली।लगभग 10 मिनट तक इधर उधर की बातें हुईं और फिर मैंने सबको गुड नाईट ...
जिस्म की जरूरत -20
नमस्ते दोस्तो, उम्मीद है कि मेरी पिछली कहानियों ने आपका मनोरंजन किया होगा। आपके ढेरों खतों ने मुझे बहुत ख़ुशी दी और मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि मेरी लम्बी-लम्बी कहानियाँ आपको बोर नहीं कर रही हैं।अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह मेरे और वंदना के बीच उस बरसा...
जिस्म की जरूरत-18
मैंने अब उसकी आखिरी झिझक को दूर करना ही उचित समझा और उसका एक हाथ पकड़ कर उसे सीधे अपने ‘नवाब साब’ पर रख दिया।
जिस्म की जरूरत-17
एक तो पहले ही उसकी चूचियाँ चिकनी थीं, ऊपर से मेरे मुँह से निकले रस से सराबोर होकर और भी चिकनी हो गई थीं… मेरी हथेली में भरते ही उसकी चूचियों की चिकनाहट ने वो आनन्द दिया कि मैंने एक बार अपनी हथेली को जोर से भींच कर चूचियों को लगभग कुचल सा दिया।
जिस्म की जरूरत-16
अपनी असफलता से दुखी होकर मैंने वंदना की आँखों में देखा और उसने मेरी मुश्किल को भांप लिया… अब हम दोनों ने एक दूसरे के होठों को आजाद कर दिया था और मैं इस उधेड़बुन में था कि वो खुद अपने कुरते को निकलेगी या फिर मुझे कोई इशारा देगी…लेकिन वो बस शरारत भरे...
जिस्म की जरूरत-15
मैं मुस्कुराने लगा और धीरे से सड़क के किनारे एक बड़े से पेड़ के नीचे कार रोक दी।
जिस्म की जरूरत-14
थोड़ी देर हम सब यूँ ही एक दूसरे के साथ हंसी मजाक करते रहे और इस पूरे समय के दरम्यान वंदना मुझसे चिपक कर रही और अपने हाथों से मेरा हाथ पकड़े रखा, उसके हाथों में मेरा हाथ यूँ देख कर लड़कियाँ तिरछी निगाहों से देख देख कर मुस्कुराती रहीं तो वहीं लड़कों की ...