संदीप मिश्रा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@sathapa-mashara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
संदीप मिश्रा की रचनाएं
चाची की बुर है या आग का गोला-2
अब तक आपने पढ़ा..उन्होंने मेरे हाथ के ऊपर से अपने हाथ से रखा और अपने चूचों को मसलवाने लगीं।थोड़ी देर मसलवाने के बाद मेरे हाथ से वो अपनी चूत को मसलवाने लगीं। मैं बता नहीं सकता भाई लोगों कि उनकी बुर कितनी गरम थी।मैंने पहली बार किसी औरत की बुर को छुआ थ...
चाची की बुर है या आग का गोला -1
यह बात तब की है जब मैं पढ़ने के लिए शहर आया.. यहाँ मेरे एक चाचा जी रहते थे.. जिनकी शादी हाल ही में हुई थी।मेरी चाची शहर में ही पली और बड़ी हुई थीं.. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी शहर में ही की थी।मेरे कहने का मतलब है कि मेरे चाचा जी एक साधारण.. गंभीर और पुर...