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चाची की चुदाई पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 549 बार

चाची की बुर है या आग का गोला -1

संदीप मिश्रा

05 May 2010 को प्रकाशित

चाची की बुर है या आग का गोला -1
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यह बात तब की है जब मैं पढ़ने के लिए शहर आया.. यहाँ मेरे एक चाचा जी रहते थे.. जिनकी शादी हाल ही में हुई थी।मेरी चाची शहर में ही पली और बड़ी हुई थीं.. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी शहर में ही की थी।मेरे कहने का मतलब है कि मेरे चाचा जी एक साधारण.. गंभीर और पुराने ख्याल के गाँव के रहने वाले इन्सान हैं.. जबकि मेरी चाची जी शहर की रहने वाली तेज-तर्रार किस्म की महिला हैं।इसलिए शुरू से ही चाचा-चाची की कभी नहीं पटी।

जब मैं उनके पास शहर में पढ़ने के लिए आया.. तो उस वक्त उनकी शादी के कुछ महीने ही हुए थे।

मैंने यहीं पर एक कॉलेज में अपना नाम लिखवा लिया और पढ़ाई करने लगा। जब कुछ दिन बीत गए तो मैंने देखा कि अक्सर दिन में या रात में दोनों लोगों के बीच लड़ाई होती रहती थी।मैंने भी यह सोच कर कभी ध्यान नहीं दिया कि पति-पत्नी के बीच का मामला है.. मुझे इससे क्या..

जब चाचा घर पर नहीं रहते.. तो मैं हमेशा चाची के कमरे में टी.वी. देखने चला जाता और चाची के साथ ही टाइम बिताता।धीरे-धीरे मेरे और चाची में काफी पटने लगी। फिर मैंने भी नोटिस करना स्टार्ट किया कि अक्सर चाचा और चाची में लड़ाई क्यों होती है।

एक बार चाचा जी किसी काम से 10 दिनों के लिए बाहर चले गए.. तो मैं और चाची घर पर अकेले ही बचे।उस रात को मैं चाची के बगल में ही सो गया था।

जब एक-दो दिन हो गए.. तो एक दिन दोपहर में कुरसी पर बैठ कर एक फिल्म देख रहा था। चाची जी घर की सफाई कर रही थीं।थोड़ी देर में वो मेरे पास आईं और मेरे पीछे एक अलमारी थी.. उसको सैट करने लगीं।मैं भी फिल्म देखने में मगन था। जगह इतनी कम थी कि चाची को मेरे सामने से ही अलमारी साफ़ करनी पड़ रही थी।

उन्होंने अपने दोनों टाँगों के बीच मेरे पैर को फंसाया और अलमारी की सफाई करना शुरू कर दिया।

मैं भी अपना ध्यान मूवी देखने में लगा रहा था.. थोड़ी देर में मेरे पैर पर कुछ गरम-गरम सा लगने लगा.. तो मेरा ध्यान उस पर गया।मैंने देखा कि चाची सफाई करने के बहाने अपनी बुर को मेरे पैर में तेजी से रगड़ रही हैं।

जब मैंने ये सब देखा तो डर और लिहाज की वजह से उनसे कुछ कह भी नहीं सकता था। मैं सोचने लगा कि शायद मैं ही गलत हुआ तो.. चाची क्या कहेंगी..? वैसे भी वो तो अलमारी की सफाई कर रही थीं।

फिर 15-20 मिनट तक ऐसे ही करने के बाद वो हट गईं और एकदम शान्त होकर बाथरूम में चली गईं।

उनके जाने के बाद मैंने देखा कि जहाँ पर वो अपनी बुर को रगड़ रही थीं.. उस जगह कुछ गीला-गीला सा हो गया था और उस जगह पर एक अजीब सी महक भी आने लगी थी।

मैं तुरंत उठा और पढ़ने के बहाने अपने कमरे में चला गया।सच में मैं बहुत उत्तेजित हो गया था और डरा हुआ भी था।उस दिन फिर हम लोगों ने शाम तक एक-दूसरे से बात नहीं की।मैं अपने कमरे में था और वो अपने कमरे में सो रही थीं।

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शाम को मैं जब उनके कमरे में आया तो मुझको देखते ही उन्होंने तकिये को लिया और उसके साथ बड़े उत्साह से खेलने लगीं। वे बार-बार तकिये को चुम्मी करने लगीं और कहने लगीं- अरे रे.. मेरा बच्चा.. मेरे ऊपर आ जा.. मेरे ऊपर आ जा.. मैं तुझको बहुत प्यार करूँगी।वे मुझे देखते हुए तकिये के साथ ऐसे ही खेलने लगीं.. मैं भी शान्ति से सब सुन रहा था।

फिर कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा चाची ने खाना बनाया और साथ में हमने खाना खाया। उस दिन खाना जल्दी ही बन गया और जल्दी ही खाना-वाना भी हो गया।रात को करीब 8 बजे ही हम लोगों ने खाना खा लिया और बैठ कर टी.वी. देखने लगे।

रात को करीब 9 बजे चाची ने अपनी रात को पहनने वाले कपड़े लिए और दूसरे कमरे में जा कर बदल लिए।जब वो वापस आईं तो मैंने देखा कि वो एक पजामा टाइप का लोअर और ऊपर पहनने का एक कुरता टाइप का कुछ था।उन्होंने लाइट बंद कर दी और मेरे बगल में आ कर लेट गईं।

उन्होंने रिमोट लिया और चैनल बदलना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में उन्होंने फैशन शो वाला चैनल लगा दिया। थोड़ी देर मैंने देखा.. फिर मैं थोड़ा-थोड़ा एक्साइट होने लगा.. तो मैंने करवट ले ली और सोने का नाटक करने लगा।

शायद चाची भी यह जान गई थीं कि इसके साथ कुछ भी करो.. यह किसी से कुछ नहीं कहने वाला.. या जो भी उन्होंने सोचा हो.. पता नहीं..

फिर वो उठ कर बैठ गईं और अपने कुरता के.. मम्मों के पास के बटन खोले और फिर से लेट गईं।इस बार वो पहले से ही मेरे पास आ गई थीं और अब उन्होंने मेरे लंड को पहले छुआ और तुरंत हाथ हटा लिया।

जब फिर भी मैंने कोई जवाब नहीं दिया.. तो फिर उन्होंने हाथ को मेरे लंड पर रख दिया.. जो पहले से ही थोड़ा-थोड़ा तना हुआ था। अब उन्होंने अपने पैर को मेरे ऊपर रख कर एकदम से मेरे पास आ गईं।थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा.. मैं भी एकदम शान्ति से ऐसे ही लेटा रहा।

थोड़ी देर बाद वो हल्के-हल्के से मेरे लंड को दबाने लगीं और रगड़ने लगीं.. अब मैं भी यार कब तक डरता.. जब कि वो सारी हदें पार किए जा रही थीं।अब मेरा लंड भी धीरे-धीरे पूरा तन गया और 6 इंच का एकदम मोटा हो गया। फिर चाची ने अपने हाथ को मेरी चड्डी में डाल दिया और मेरे लंड को अपने हाथों से रगड़ने लगीं।फिर उन्होंने अपने हाथ को मेरी चड्डी से निकाला और अपनी चड्डी में डाल लिया और अपनी बुर (चूत) को रगड़ना चालू कर दिया और दूसरे हाथ से मेरे लंड को दबाती रहीं..

थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा.. फिर मैंने थोड़ी हिम्मत की और करवट लेने के बहाने अपने हाथ को उनके चूचों पर रख दिए।शायद उनको भी महसूस हो गया था कि मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ। उन्होंने मेरे हाथ के ऊपर से अपने हाथ से रखा और अपने चूचों को मसलवाने लगीं।

थोड़ी देर मसलवाने के बाद मेरे हाथ से वो अपनी चूत को मसलवाने लगीं। मैं बता नहीं सकता भाई लोगों कि उनकी बुर कितनी गरम थी। मैंने पहली बार किसी औरत की बुर को छुआ था.. बहुत ही जलता हुआ अंगारा सी लगी।

काफी देर तक ऐसे ही चलता रहा.. फिर चाची उठीं और अपने कपड़ों को उतारना शुरू किया और सारे कपड़ों को उतार दिया और नंगी होकर फिर से मेरे बगल में लेट गईं। अब उन्होंने अपने हाथों से मेरी चड्डी को निकालने का प्रयास करना शुरू कर दिया।

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

चाची की बुर है या आग का गोला

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

नितिन

1 month ago

यार पड़ोसन आंटी वाला पार्ट 2 कब पोस्ट कर रहे हो? बेताबी से इंतज़ार है।

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