स्वप्न कांत शर्मा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@savapana-kata-sharama
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
स्वप्न कांत शर्मा की रचनाएं
लण्ड न माने रीत -11
अब तक आपने पढ़ा..उसने थोड़ा गुस्से से मेरी तरफ देखा और अपनी चूत पर दोनों हाथ रखकर उँगलियों से बुर के दोनों कपाट पूरी चौड़ाई में खोल दिए।सुबह की रोशनी होने लगी थी.. खुली खिड़की से सुबह की सुनहरी धूप की पहली आरती सीधी आकर किरण की खुली चूत पर पड़ी।ऐसा मनम...
लण्ड न माने रीत -9
अब तक आपने पढ़ा..अब मेरा सुपाड़ा उसकी उँगलियों से छिप गया था। फिर उसने एक हाथ की मुट्ठी में लण्ड को पकड़ लिया और मोटाई का अंदाजा लगाने लगी।उसने विस्मय से मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी।‘क्या हुआ.. तू कर क्या रही है..?’ मैंने अधीर होकर पूछा।अब आगे..
लण्ड न माने रीत -8
अब तक आपने पढ़ा..मैंने इत्मीनान से एक सिगरेट सुलगा ली और हल्के-हल्के कश लगाने लगा.. एक तो शराब का सुरूर ऊपर से यह अहसास कि किरण मेरे साथ घर में अकेली है और कुछ ही देर बाद उसका नंगा बदन मेरी बाँहों में होगा और रात अपनी होगी ही।ख़ास अहसास यह.. कि लड़की...
लण्ड न माने रीत -7
अब तक आपने पढ़ा..जब मैं उठ कर आने लगा तो भाभी जी बोलीं- कल मैं और आपके दोस्त मेरे मायके जा रहे हैं.. मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया था। वो होली पर जाना पड़ता है ना.. किरण घर पर अकेली रहेगी। परसों इसकी ननद भी इसके ससुराल से आने वाली है। हो सके तो आप...
लण्ड न माने रीत -6
अब तक आपने पढ़ा..मैंने किरण को उसकी सील तोड़ने तक का पूरा मंजर अपनी यादों में जैसे उतार लिया था.. मैंने कई सालों बाद आज फिर से अपने गाँव उससे मिलने की चाहत में आ गया था।अब आगे..
लण्ड न माने रीत -5
अब तक आपने पढ़ा..मैंने उसके दोनों मम्मों पर अपनी हथेलियाँ जमा दीं और उसकी झांटें चाटने लगा.. जीभ से ही उसकी चूत की दरार खोलकर भीतर तक ‘लपलप..’ करके चाटने लगा। ऐसे करते ही उसने पैर ऊपर की तरफ मोड़ लिए.. जिससे चूत और उभर गई। मेरी जीभ अब उसकी कुंवारी च...
लण्ड न माने रीत -4
अब तक आपने पढ़ा..मैंने किरण को कस कर अपनी बाहों में समेट लिया और आँखें मूँद कर उन पलों का आनन्द लेने लगा।उसके फूल से कोमल स्तन मेरे सीने से दबे हुए थे और मैं धीरे-धीरे उसकी गर्दन को चूम-चाट रहा था। उसके दिल की धक.. धक.. मुझे अपने सीने पर साफ़ सुनाई ...
लण्ड न माने रीत -3
अब तक आपने पढ़ा..‘अब झूठ भी बोलने लगी तू.. मैंने तुझे कल तेरी सहेलियों के साथ बगीचे में वो गन्दा वाला खेल खेलते देखा है..’ मैंने कड़कती आवाज़ में कहा।‘नहीं.. वो..वो..वो..!’ इसके आगे किरण कुछ न बोल पाई और उसकी आँखें झुक गईं..तभी मैंने वो डिल्डो अपनी ज...
लण्ड न माने रीत -2
अब तक आपने पढ़ा..ऐसे ही हंसी-ठिठोली करते हुए वे सब ये गन्दा खेल खेलती रहीं। मैं दम साधे वो सब देखता रहा.. मेरी कनपटियाँ गर्म होने लगी थीं.. लण्ड तो पहले से ही खड़ा था.. अब उसमें हल्का-हल्का दर्द भी होने लगा था।मुझे किरण पर क्रोध भी आ रहा था.. लेकिन ...
लण्ड न माने रीत -1
उस दिन माँ का फोन सुबह सवेरे ही आ गया ‘बेटा.. कैसे हो.. इस बार होली पर आ रहे हो ना.. कितने साल हो गए घर आए हुए?’‘नहीं माँ.. मैं नहीं आ पाऊँगा.. ऑफिस से बहुत छुट्टियाँ ले चुका हूँ.. मार्च आने वाला है.. अब तो एक दिन की छुट्टी लेना भी मुश्किल है..। द...
चूत जवां जब होती है- 10
रात को मेरी नींद पेशाब लगने से खुल गई, कमरे में घुप्प अँधेरा था, समय का कुछ पता ही नहीं चल रहा था। मैंने बेड साइड का लैंप जला दिया, कमरे में मद्धिम सी रोशनी फैल गई।घड़ी देखी तो रात के तीन बजने वाले थे, मैं वत्सला की तरफ करवट लिए सोया था और वो भी मु...