मेरा नाम रिया शर्मा है। उम्र 29 साल। मैं पटना में रहती हूं। शादी को पाँच साल हो चुके हैं। पति सरकारी नौकरी में हैं, ज्यादातर समय टूर पर रहते हैं। घर में अकेलापन मुझे अंदर से खा रहा था। शारीरिक तौर पर मैं पूरी तरह भूखी थी, लेकिन बहुत शर्मीली हूं। किसी अजनबी से नजर मिलाना भी मुश्किल लगता है। मैं हमेशा साड़ी पहनती हूं, माथे पर बिंदिया, मंगलसूत्र चमकता रहता है। लोग कहते हैं मैं गोरी, नाजुक और भरी-पूरी हूं – 5 फीट 4 इंच, 36-30-38 फिगर।
गर्मी का मौसम शुरू हुआ था। घर का स्प्लिट ऐ.सी. अचानक खराब हो गया। पंखा भी ठीक से नहीं चल रहा था। मैंने लोकल इलेक्ट्रिशियन को फोन किया। दो घंटे बाद दरवाजे पर एक युवक खड़ा था।“सलाम बीबी जी, ऐ.सी. खराब है?”
उसकी आवाज़ गहरी और मर्दाना थी। नाम था आरिफ। उम्र करीब 26 साल। लंबा कद (6 फीट से ज्यादा), गोरा रंग, घनी काली दाढ़ी, चौड़ी छाती और मजबूत बाहें। सफेद शर्ट के ऊपर पसीना चमक रहा था। उसने सलाम किया और आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
मैं शर्मा गई। नजरें झुका कर बोली, “हां… बेडरूम में है, आइए।”
वो टूल्स लेकर अंदर आया। मैंने उसे ऐ.सी. दिखाया और किचन में चाय बनाने चली गई। जब चाय लेकर आई तो उसकी शर्ट के दो बटन खुले हुए थे। पसीने से उसकी छाती चमक रही थी। मजबूत मसल्स दिख रहे थे। मैंने चाय देते वक्त उसकी उंगलियों को छू लिया। एक बिजली सी दौड़ गई। मैं जल्दी से हाथ खींच लिया और शर्म से लाल हो गई।
“बीबी जी, आप अकेली रहती हैं क्या?” उसने पूछा।
“जी… पति जी बाहर हैं।” मैंने धीरे से जवाब दिया।
वो मुस्कुराया, “ऐसी गर्मी में अकेले रहना मुश्किल होता होगा। खास कर रात में।”
उसके शब्दों में कुछ और मतलब छिपा था। मैं कुछ नहीं बोली, बस सिर हिला दिया।
उसने ऐ.सी. ठीक किया, लेकिन कहा कि पार्ट्स बदलने पड़ेंगे। “कल फिर आऊंगा बीबी जी।” पैसे लेते वक्त उसने मेरी हथेली को थोड़ा लंबे समय तक पकड़ रखा। उसकी उंगलियां गर्म थी। मैंने हाथ खींच लिया, लेकिन रात भर उसकी दाढ़ी और मजबूत शरीर याद आता रहा। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रही थी।
अगले दिन मैंने खुद उसे फोन किया। “आरिफ… ऐ.सी. अभी भी ठीक से नहीं चल रहा।”
वो तुरंत आ गया। इस बार वो और भी अच्छे से तैयार था। साफ कपड़े, हल्की सी खुशबू। काम शुरू करते ही वो बातें करने लगा।
“बीबी जी, आप बहुत सुंदर हैं। शादी के बाद भी इतनी शर्मीली कैसे?”
मैं शर्मा कर मुस्कुराई, “ऐसा कुछ नहीं…”
धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगी। वो मुझे “रिया जी” कहने लगा। मैंने चाय दी। इस बार वो मेरे पास सोफे पर बैठ गया। उसकी जांघ मेरी साड़ी से छू रही थी। मैं हिली नहीं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।उसने धीरे से मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा। “रिया जी… अगर कोई तकलीफ हो तो मुझे बता देना। मैं सब ठीक कर दूंगा।”
उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ गई। मैंने नजरें नहीं हटाई। उसने मेरे गाल पर हल्का सा हाथ फेरा। मैं काँप उठी, लेकिन रुकी नहीं।
“आरिफ… ये गलत है…” मैंने फुसफुसाया।
“क्या गलत है बीबी जी? बस एक प्यासी औरत की मदद करना…”
उसने मुझे धीरे से खींचा और होंठों पर हल्का किस्स किया। फिर गहरा किस्स। उसकी दाढ़ी मेरे नाजुक गालों और ठुड्डी में चुभ रही थी। स्वाद अलग था – मर्दाना, गर्म। मैंने पहली बार किसी और मर्द के होंठ चखे। मेरे स्तन उसके सीने से दब रहे थे।
Drishyam, ek chudai ki kahani-15
उसने मुझे उठा कर बेडरूम ले गया। ऐ.सी. अब चल रहा था, ठंडी हवा कमरे में फैल रही थी, लेकिन मेरा शरीर आग की तरह जल रहा था।
आरिफ ने मेरी साड़ी की पल्लू धीरे से खींची। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्रा उतारते ही मेरे 36D के भरे-पूरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। उसने दोनों हाथों से उन्हें सहलाया, “कितने नरम और भरे हुए… शादी-शुदा होने के बाद भी इतने टाइट।”
वो पहले धीरे-धीरे चूसने लगा, जीभ से घुमाता, फिर जोर से चूसने लगा। मैं कराह उठी, “आह्ह्ह… आरिफ… धीरे…” मेरे हाथ उसके बालों में थे।
उसने मेरी पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। मैं पूरी नंगी उसके सामने लेटी थी। उसने मेरी जाँघों को चूमा, फिर चूत पर हल्की सी चुम्बन दी। मैं भीग चुकी थी। उसकी उंगलियां अंदर-बाहर करने लगीं। “बहुत टाइट हो रिया… पति जी ठीक से नहीं करते क्या?”
मैं शर्म से कुछ नहीं बोली, बस आहें भरती रही। फिर उसने अपनी शर्ट और पैंट उतारी। उसका शरीर देख कर मेरी साँस रुक गई – चौड़ी छाती, सिक्स पैक एब्स, और नीचे मोटा, लंबा, नसों वाला लंड जो पूरी तरह खड़ा था। करीब 7-8 इंच लंबा, मोटा।
उसने मेरी टाँगें फैलाई। लंड का सिरा मेरी चूत पर रगड़ने लगा। “बोलो रिया… चाहती हो ना?”
“हां… आरिफ… लेकिन धीरे…” मैंने शर्माते हुए कहा।
एक झटके में उसने आधा लंड अंदर कर दिया। मैं चीख उठी, “उफ्फ्फ… बड़ा है… आह्ह्ह!”
वो रुका, फिर पूरा लंड धीरे-धीरे अंदर डाल दिया। अब वो पूरी तरह मेरे अंदर था। शुरू में वो धीमे-धीमे झटके दे रहा था। हर झटके में मैं कराह रही थी। फिर स्पीड बढ़ी। “पच… पच… पच…” की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी। वो मेरे स्तनों को मसल रहा था, कभी चूस रहा था। मैंने अपनी टाँगें उसके कमर पर लपेट ली।
“चोदो मुझे आरिफ… जोर से… आह्ह्ह… मैं तुम्हारी हूं आज…” शर्म छूट चुकी थी।
उसने मुझे डॉगी स्टाइल में किया। मेरी कमर पकड़ कर पीछे से इतनी तेज ठोक रहा था कि बेड हिल रहा था। उसके अंडकोष मेरी चूत से टकरा रहे थे। “ले… ले मेरी रानी… पूरी तरह भर देता हूं तुझे…”
फिर मुझे अपनी गोद में उठा कर खड़े-खड़े चोदा। मैं उसके गले से लिपटी हुई थी। वो मुझे ऊपर-नीचे कर रहा था। लंड बार-बार गहराई तक जा रहा था।
आखिर में उसने मुझे मिशनरी में लिटाया, मेरी टांगें कंधों पर रखी और जोर-जोर से चोदने लगा। “रिया… मैं झड़ने वाला हूं… अंदर ही ले ले…”
“हां… अंदर छोड़ दो… आह्ह्ह… मैं भी आने वाली हूं…”
हम दोनों साथ ही झड़ गए। उसका गर्म-गर्म वीर्य मेरे अंदर भर गया। मैं थक कर उसके सीने से लिपट गई। ऐ.सी. की ठंडी हवा हमारे पसीने से भीगे शरीर को सहला रही थी।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया, “अब जब भी मन करे… ऐ.सी. खराब बताना। मैं आ जाऊंगा… तुम्हें ठंडक देने।”
उस दिन के बाद हम कई बार मिले। मेरी शादीशुदा, शर्मीली ज़िंदगी में आरिफ ने एक नया रंग भर दिया। वो मुस्लिम ऐ.सी. मिस्त्री नहीं, मेरी गुप्त भूख का मालिक बन गया था।