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Hindi Chudai Kahani • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 946 बार

अंधेरे हॉल की गर्मी-2(Andhere hall ki garmi-2)

sunitamanish3

17 Oct 2014 को प्रकाशित

अंधेरे हॉल की गर्मी-2(Andhere hall ki garmi-2)
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फिल्म हॉल वाली पहली रात और घर पर किचन-सोफे वाली दोपहर के बाद हमारे बीच की आग अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। दीदी मायके गई हुई थी, और हम दोनों ने उन दो दिनों में घर को सेक्स का अड्डा बना दिया था। सुबह उठते ही चुदाई, दोपहर में किचन में, शाम को शावर में, और रात को बेडरूम में। लेकिन अब सिर्फ घर की चार दीवारों में छुप-छुप कर करना हमें कम लगने लगा था। हम और रिस्क चाहते थे, और ज्यादा गंदगी चाहते थे।

एक शाम जीजू ने मुझे अपनी गोद में बिठाते हुए कहा, “रिया, कल शाम को फिर उसी पुराने सिनेमा हॉल चलते हैं। लेकिन इस बार सिर्फ तू और मैं। दीदी को बता देंगे कि मैं अकेला जा रहा हूं। और हां… इस बार प्लान कुछ खास है।”

मैं शरमा कर उनकी छाती पर सिर रखते हुए बोली, “क्या खास प्लान है जीजू?”

जीजू मेरे कान में फुसफुसाए, “वही अंधेरा हॉल… लेकिन इस बार तेरी चूत को फिल्म के साथ-साथ पूरी तरह चोदेंगे। बस तैयार रहना।”

अगले दिन मैंने जान-बूझ कर बहुत आसानी से उतरने वाली हल्की सलवार-कमीज पहनी। ब्लाउज काफी टाइट था, जिससे मेरी छातियाँ अच्छे से उभर रही थी। नीचे मैंने सिर्फ एक पतली पैंटी पहनी थी। जीजू भी ब्लैक जींस और फिटेड शर्ट में बेहद हॉट लग रहे थे।

शाम को हम उसी पुराने सिनेमा हॉल पहुँचे। इस बार हमने बैक रॉ की सबसे कोने वाली तीन सीटें लीं, ताकि कोई आस-पास ना हो। लाइट्स ऑफ होते ही जीजू ने बिना एक पल गंवाए मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। उनका हाथ सीधे अंदर सरक गया। उंगलियां मेरी पैंटी के ऊपर से चूत को रगड़ने लगी।

“आह्ह… जीजू… इतनी जल्दी…” मैं फुसफुसाई।

“चुप रह रिया… आज तेरी चूत को पहले अच्छे से भिगोना है।”

उनकी दो उंगलियां पैंटी के किनारे से अंदर घुस गई। एक उंगली सीधे क्लिट पर घूमने लगी, दूसरी चूत के मुंह में अंदर-बाहर हो रही थी। मैं सीट पर थोड़ा सरक गई और पैर फैला दिए। जीजू ने मेरी एक जाँघ अपने ऊपर उठा ली ताकि उन्हें और आसानी हो।

कुछ मिनट बाद उन्होंने अपना मोटा, गरम लंड निकाल लिया। अंधेरे में वो बहुत खड़ा और चमकता हुआ लग रहा था। मैंने झुक कर उसे मुंह में ले लिया। जीभ से टिप चाटी, फिर पूरा आधा हिस्सा मुंह में लेकर चूसने लगी। जीजू ने मेरे बाल पकड़ कर धीरे-धीरे मुँह चुदवाया। उनकी सिसकारियां फिल्म की लाउड आवाज़ में छुप रही थी।

“हां रिया… बहुत अच्छी लग रही है तेरी गर्म जीभ… चूस… और गहरा ले…”

फिर जीजू ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मेरी सलवार और पैंटी को घुटनों तक सरका दिया। लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाल दिया।

“उफ्फ्फ… जीजू… कितना मोटा है आज… आह्ह…” मैंने काँपते हुए कहा।

जीजू ने मेरी कमर कस कर पकड़ ली और धीमे-धीमे ऊपर-नीचे करने लगे। मैं उनकी गोद में बैठ कर खुद भी हिल रही थी। हर धक्के पर उनकी गोद में मेरी गांड टकरा रही थी। “पच… पच…” की हल्की आवाज हो रही थी, लेकिन फिल्म की आवाज़ उसे दबा रही थी। मेरी छातियां उन्होंने ब्लाउज के ऊपर से मसलनी शुरू कर दी। फिर ब्लाउज के बटन खोल कर ब्रा नीचे सरकाई और निप्पल चूसने लगे।

मैं अब कंट्रोल खो चुकी थी। “जोर से जीजू… और तेज… आह्ह… चोदो मुझे…”

इंटरवल से ठीक पहले मैं पहली बार झड़ गई। मेरी चूत उनके लंड को कस-कस कर दबा रही थी। जीजू भी रुक नहीं पाए। उन्होंने मुझे और कस कर पकड़ा, तेज झटके मारे और मेरी चूत के अंदर ही गर्म-गर्म वीर्य छोड़ दिया। इतना वीर्य था कि मेरी चूत से बाहर बहने लगा और सलवार में फैल गया।

इंटरवल में लाइट्स जल गई। हम जल्दी से कपड़े ठीक कर लिए। मेरी सलवार भीगी हुई थी, लेकिन अंधेरे में और भीड़ में किसी ने कुछ नहीं देखा। मैं शरमा रही थी, लेकिन जीजू मेरी तरफ देख कर बार-बार आँख मार रहे थे।

फिल्म खत्म होने के बाद हम सीधे कार में बैठे। जीजू ने कार स्टार्ट की और बोले, “अब घर नहीं… आज पूरी रात हम बाहर बिताएंगे।”

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वे मुझे शहर के बाहर एक अच्छे होटल ले गए। रूम नंबर 305 में घुसते ही जीजू ने मुझे दीवार से सटा दिया। जोरदार किस्स किया, जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। कपड़े एक-एक करके फर्श पर गिरने लगे। कुछ ही देर में हम दोनों पूरी तरह नंगे थे।जीजू ने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखी और एक ही तेज झटके में पूरा मोटा लंड मेरी चूत में ठोक दिया।

“आआआह्ह… जीजू… बहुत गहरा… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है…”

“आज तेरी चूत को रात भर चोद कर थका दूँगा रिया…”

वो तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के पर बेड हिल रहा था और मैं चीख रही थी — “हां… जोर से… चोदो मुझे… मेरी चूत फाड़ दो जीजू…”

पहला राउंड काफी लंबा चला। मैं दो बार झड़ गई। फिर जीजू ने मुझे घुमाया और पीछे से डॉगी स्टाइल में डाला। मेरी गांड पकड़ कर जोर-जोर से ठोक रहे थे। हर थप्पड़ पर “पच-पच-पच” की आवाज गूंज रही थी। उन्होंने मेरी पीठ पर चाटा और बाल खींचे।

“तेरी गांड कितनी सुंदर है रिया… एक दिन इसे भी चोदूँगा…”

दूसरे राउंड के बाद हम शावर में गए। वहां उन्होंने मुझे दीवार से सटा कर खड़े-खड़े चोदा। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। मैं उनकी गर्दन में बाहें डाल कर लटक रही थी।

तीसरे राउंड में मैं ऊपर थी। जीजू लेटे हुए थे और मैं उनकी गोद में बैठ कर तेज-तेज हिल रही थी। मेरी छातियां उछल रही थी, वो उन्हें मसल रहे थे और निप्पल काट रहे थे।

रात के 3 बजे तक हम चार राउंड कर चुके थे। मैं पूरी तरह थक गई थी, लेकिन खुश थी। आखिरी राउंड में जीजू ने मुझे घुटनों के बल बैठाया और मुँह में झड़ गए। मैंने उनका पूरा गर्म, गाढ़ा वीर्य निगल लिया और जीभ से लंड पूरी तरह साफ कर दिया।

सुबह जब हम होटल से निकले तो मेरी चाल लड़खड़ा रही थी। शरीर पर उनके किस के निशान, छातियों पर दांत के निशान, गर्दन पर हिक्की और चूत में अभी भी उनकी गर्मी और वीर्य की नमी महसूस हो रही थी।

घर लौट कर हम सोफे पर बैठे। जीजू ने मुझे अपनी गोद में बिठाया, मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोले, “रिया, अब से जब भी दीदी मायके जाएगी, हम ऐसे ही मस्ती करेंगे। कभी सिनेमा हॉल में, कभी होटल में, कभी कार में या छत पर… लेकिन एक शर्त है।”

मैंने शरमाते हुए पूछा, “क्या शर्त जीजू?”

जीजू मेरे कान में फुसफुसा कर शरारती मुस्कान के साथ बोले, “अगली बार… दीदी को भी साथ लेकर आएंगे। तीनों मिल कर और भी ज्यादा मजा करेंगे। तू दीदी को तैयार करेगी, फिर हम दोनों तुझे चोदेंगे… और शायद दीदी को भी। क्या कहती है?”

मैं उनके सीने से चिपक गई। चेहरा लाल हो गया, लेकिन मन में नई उत्तेजना जाग गई। मैं मुस्कुराते हुए बोली, “हां जीजू… लेकिन इस बार मैं दीदी को पहले तैयार करूंगी… फिर आप दोनों मुझे चोदना। और हां… अगली बार सिनेमा हॉल में दीदी के सामने ही शुरू करेंगे।”

जीजू हँस दिए। उन्होंने मेरी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और बोले, “डील पक्की। अब से ये घर, ये शहर… सब हमारा नया खेल का मैदान है।”

उसी शाम दीदी का फोन आया। “कल सुबह आ रही हूं। सब ठीक है ना?”

जीजू ने फोन स्पीकर पर रखा, मेरी तरफ देख कर शरारती आँखों से जवाब दिया —“हां जान… सब बहुत ठीक है। कल आना… हम तुम्हारा बहुत इंतजार कर रहे हैं… बहुत खास और गर्म तरीके से।”

फोन रख कर जीजू ने मुझे फिर से चूम लिया। उनकी उंगलियां मेरी चूत पर फिर से घूमने लगी।

और इस तरह, अंधेरे हॉल की उस पहली गर्मी ने हमारे रिश्ते को एक नई, गंदी, शरारती और बेहद मजेदार दिशा दे दी थी। अब हर मौका, हर रात हमें नई उत्तेजना देने वाला था। और हम तीनों के बीच का खेल अभी शुरू ही हुआ था।

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