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भाभी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,150 बार

गया था छोड़ने, आ गया चोदकर-1

कजंकया चपड़गंजू

18 Feb 2024 को प्रकाशित

गया था छोड़ने, आ गया चोदकर-1
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नमस्ते दोस्तो,आपने मेरी पहली कहानीमेरी बीवी पोर्न स्टार जैसे चुदीपढ़ी, सबको बहुत पसंद आई, मुझे खूब मेल मिले प्रशंसा भरे!धन्यवाद.

चलो तो अब कहानी पर आते हैं।एक बार की बात है मेरे दोस्त विकास का फ़ोन आया, बोला- यार रोहित, मुझे एक दिन के लिए कोलकाता जाना है। तू मेरी बीवी को ऑफिस से लेकर घर ड्रॉप कर देना। अगले दिन मैं आ जाऊंगा।मैं बोला- तू निश्चिन्त होकर जा यार… मैं भाभी को छोड़ दूंगा।

विकास की बीवी यानि मीनल… एक नंबर माल… 26 साल की दुबली पतली, कसा बदन, रंग लगभग गोरा, बोबे लगभग 32-33, लंबी टाँगें, गांड भी 32 के आसपास। अधिकतर सलवार कुर्ती या जीन्स टॉप पहनती है।मेरा तो लण्ड सोच कर ही खड़ा हो गया कि मीनल बाइक पर मेरे पीछे बैठेगी।

खैर मैंने शाम में मीनल को फोन किया तो उसने बोला कि वो 1/2 घंटे में फ्री हो जाएगी।लगभग 7:30 बजे मैं ‘मीनल – द माल’ के आफिस के नीचे पहुंच गया।

वो पहले से ही खड़ी थी, मेरा इंतज़ार कर रही थी। मैंने देख लिया और उसके पास जाकर बाइक रोक दी। वो बिना संकोच मेरे पीछे एक तरफ पाँव करके बैठ गयी। इस समय भी उसने एक टाइट कुर्ता और लेग्गिंग पहन रखी थी।क्या बताऊँ मेरे लण्ड का हाल… मन कर रहा था कि पकड़ के साली के बोबे मसल दूँ… मगर…खैर मैंने लण्ड पर काबू किया और गाड़ी बढ़ा दी।

उसका घर यहाँ से लगभग 7 किलोमीटर दूर था, मैं बड़ी शालीनता से गाड़ी चला रहा था यानि ब्रेक कम ही लगा रहा था। उसका हाथ उसके और मेरे बीच में सीट पर था। कभी कभी मोड़ पर हाथ कंधे पर भी आ जा रहा था। करंट… झटका…

उसका घर आने को ही था पर एकदम अचानक बहुत जोर की बारिश आ गयी। बारिश इतनी तेज थी कि गाड़ी रोक कर खड़े होने का भी टाइम नहीं मिला, हम दोनों पूरी तरह से गीले हो चुके थे। मतलब मीनल की ब्रा पैंटी और मेरी चड्डी भी गीली हो गयी।लण्ड जी तो पहले से ही पानी छोड़ रहे थे, अब तो बारिश से भी गीले हो गए, अब रुकने का तो कोई मतलब था नहीं इसलिए गाड़ी मैं चलाता रहा।

कुछ ही देर में हम विकास की बिल्डिंग के नीचे पहुंच गए। मीनल गाड़ी से उतरी और भागने लगी। भीगे होने से कपड़े उसके पुट्ठे से चिपक गए। अब लण्ड को कैसे संभालूं…इतना झटका काफी नहीं था कि वो छज्जे के नीचे जा कर मेरी तरफ पलट गई।अब तो काबू नामुमकिन… लग रहा था जैसे खड़ा लंड अंडरवियर में ही वीर्य उगल देगा। पर इतनी जल्दी वीर्य छोड़ने की मेरी आदत नहीं क्योंकि कम से कम रोज एक बार तो अपनी बीवी पूजा को चोदता ही हूँ। और जब तक पूजा की चूत की चटनी ना बना दूँ, ठोकता ही रहता हूँ।

फिर आज तो सुबह ही पूजा को घोड़ी बना के चोदा था। खैर मेरी बीवी की चूत को अभी रहने देते हैं, बात करते हैं नई चूत की…मीनल पलटी तो मेरी नज़र उसकी गांड से सीधे बूब्स पर आ गयी। कुर्ती एकदम बदन से चिपकी हुई, ब्रा की बनावट पूरी दिख रही थी।मेरी आँखें हट ही नहीं रही थी उसके बोबों पर से… हटी तब जब उसकी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी- रोहित भैया अंदर आ जाओ, पानी बहुत तेज़ है, रुक जाए फिर चले जाना।

मेरे तो मुंह में पानी…वैसे भी मेरा घर यहाँ से 16 किलोमीटर दूर था। तो इतनी तूफानी बारिश में तो मैं जा भी नहीं सकता था। तो मैं मीनल के पास बिल्डिंग के पार्किंग एरिया में जाकर खड़ा ही गया और बोला ‘पूरा भीग गया’

मीनल बोली- भैया ऊपर चलो, कपड़े बदल लेना।यहां ध्यान देने वाली बात है कि भैया शब्द का इस्तेमाल देवर भाभी रिश्ते जैसा था ना कि भाई जैसा।

मैंने कहा- भाभी, आप चलो, मैं पूजा को फ़ोन करके आता हूं। परेशान हो रही होगी।मीनल- ओके।मीनल चली गयी.

मैं पूजा को फ़ोन लगाने लगा, पूजा से बोला- पूजा बहुत तेज़ बारिश हो रही है। मैं विकास के घर उसकी बीवी मीनल को ड्राप करने आया था, पूरा गीला हो चुका हूं। पानी रुकने तक यहीं हूँ।

पूजा मुझे अच्छे से जानती है कि चूत के लिए मैं पागल हूँ, मौका लगा तो चोदे बिना नहीं रहूँगा तो मुझे छेड़ कर बोली- हूं… तो जनाब दोस्त की बीवी पर नीयत खराब कर रहे हैं। ध्यान रखना तुम्हारे अच्छे दोस्त की बीवी है रिश्ते खराब नहीं हो जायें।

मैं बोला- क्या पूजा, तुझे तो मालूम ही है, बिना मर्ज़ी के तो मैंने तुझे भी नहीं चोदा।

पूजा- हूं… ठीक है बाबा, पटा के चोद देना मगर प्यार से, जरा नाज़ुक है, तुम्हारी बीवी की तरह मजबूत नहीं है।

मैं- मेरी बीवी जैसी तो कोई हो भी नहीं सकती! फिर भी ध्यान रखूंगा। और हाँ रात को नहीं आ सका तो मैसेज कर दूंगा। तू सो जाना सुबह तेरी भी खैर ले लूंगा।“बाय…”फ़ोन काट कर में ऊपर आ गया।

गेट खुला था तो मैं सीधे अन्दर आ गया, हॉल में मीनल दिखाई नहीं दी तो मैं रूम की ओर बढ़ गया, वहां भी दरवाज़ा खुला था, मैं अंदर गया ही था कि अंदर का नज़ारा देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया।मीनल भाभी पूरी तरह से नंगी मेरी तरफ मुँह करके टॉवल से पीठ पौंछ रही थी। बोबे एकदम कड़क बिल्कुल तने हुए, छोटे उभरे हुए निप्पल… चूत की तो केवल दरार ही दिख रही थी जिस पर छोटे छोटे बाल।

मेरा तो गाला ही सूख गया.

उसकी नज़र मुझ पर पड़ी तो सकपका गई, हड़बड़ाहट में टॉवल गिर गया। वो मुड़ कर टॉवल उठाने झुकी तो पीछे से भीचूत के दर्शनभी हो गए। चूत काफी टाइट थी केवल ऊपरी हिस्सा दिख रहा था गुलाबी जगह के दर्शन अभी नहीं हुए थे।

कंट्रोल अब हो ही नहीं रहा था, इच्छा तो हो रही थी कि लण्ड निकल कर पीछे से दिख रही चूत में डाल कर चोद दूँ साली को!मगर मैं सभ्यता दिखाते हुए मुड़ा और हॉल में आ कर खड़ा हो गया और मीनल का इंतज़ार करने लगा।

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थोड़ी देर बाद वो आई, एक ट्रांसपेरेंट नाइटी मगर ऊपर एक बाथिंग गाउन बांध रखा था। इसलिए अंदर का माल दिख नहीं रहा था।

मैं अभी भी गीला ही खड़ा था, मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था।वो बोली- भैया, आप ये टॉवल से बाथरूम में जाकर बदन पौंछ लो, मैं कपड़े लाती हूँ।

सब कुछ ऐसा चल रहा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो।

मैं बाथरूम में सारे कपड़े खोल कर नंगा हो कर अपने लण्ड को सहलाने लगा मगर मुठ नहीं मारी क्योंकि मुझे नई चूत की खुशबू आ रही थी जिसमें आज ये मेरा लण्ड घुस सकता था. ऐसी उम्मीद जग रही थी।

मैं बदन को पौंछ कर टॉवल लपेट कर बाहर आ गया। लण्ड पर थोड़ा कंट्रोल कर के हॉल में खड़ा था, मीनल बाहर आई और बोली- सॉरी भैया, एक प्रॉब्लम है। बैडरूम की चाबी आज गलती से विकास के ही साथ चली गयी है, सारे कपड़े अंदर ही हैं। बस ये टॉवल और मेरे ये कपड़े ही हैं जो कि मैं बाथरूम में रख गयी थी। मैं आपके कपड़े ड्रायर कर देती हूं जो थोड़ी देर में सूख जाएंगे। फिर आप वही पहन लेना।

मैं बोला- ठीक है, पर जब तक ऊपर पहनने के लिए कुछ दे दो। तुमने दो गाउन पहन रखी है, ये ऊपर वाली बाथ गाउन मुझे दे दो। थोड़ी ठंड लग रही है।

वो सोच में पड़ गयी कि मेरे सामने नाइटी में कैसे रहेगी।पर कोई चारा उसके पास नहीं था, वो अंदर चली गयी, मुझे लगा नाराज़ हो गयी।

पर…थोड़ी देर बाद आई हाथ में गाउन जो उसने पहले ऊपर डाला हुआ था। अब ट्रांसपेरेंट नाइटी पहने हुए अंदर सफेद ब्रा और नीचे भी सफेद पेंटी। शायद रूम में जाकर अंदर ब्रा पेंटी पहनकर आयी थी.

गाउन मुझे प्रिया और वो बाथरूम में जा कर कपड़े वाशिंग मशीन में डालने चली गयी। कपड़े ड्राई करके लायी जब तक मैं टॉवल खोल कर गाउन पहन चुका था और सोफे के नीचे ज़मीन पर बैठ कर मोबाइल चला रहा था।

मीनल ने देखा तो बोली- आप नीचे क्यों बैठे हो?मैं- रिलैक्स लगता है।मीनल- ठीक है, मैं चाय बना कर लेती हूं।

कुछ ही देर में वो चाय बना लाई, एक कप मुझे दे कर दूसरा कप लेकर एल शेप के सोफे के नीचे मेरी दूसरी तरफ बैठ गयी। हम इधर उधर की बातें करते हुए चाय पीने लगे। मेरी चाय खत्म हो गयी।

अब थोड़ा सिचुएशन समझा देता हूँ आप सभी को। मेरे सामने एक अप्सरा सी लड़की जिसे मैं थोड़ी देर पहले पूरी नंगी देख चुका हूं, बैठी हुई है, जिसने अपने खूबसूरत अंग ब्रा पैंटी में बंद कर रखे हैं. लण्ड मेरा पूरा खड़ा है जिसे मैंने दबा के रखा हुआ है। मीनल के सोफे के पीछे एक टेबल रखी हुई है। मैं उस टेबल पर कप रखने के लिए उठा। जिसके लिए मुझे मीनल के ऊपर से होकर जाना था।

जैसे ही मैं खड़ा हुआ, मेरा खड़ा लण्ड गाउन की दरार से बाहर आ गया। मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड खड़ा हुआ है। अब लण्ड महाराज मीनल के चेहरे के ठीक सामने था जिसे देख कर मीनल का मुँह खुला का खुला रह गया।मैं अभी इस बात से अनजान था और मेरा हाथ अभी टेबल तक नहीं पहुंचा था तो मैं थोड़ा और आगे बढ़ा तो अचानक मेरा लण्ड मीनल के खुले मुंह में पूरा का पूरा घुस गया।

इस अचानक हुई स्थिति से मीनल का मुँह बंद हो गया और लण्ड उसके मुंह में दब गया। मुझे भी जोर का झटका लगा कि ये क्या हो गया।मन तो कर रहा था कि मुंह में धक्के मार लूं…मगर…

ऐसा के ऐसा मैं वापस अपनी जगह पर बैठने के लिए पीछे आने लगा, मेरा लण्ड भी मीनल के मुंह से बाहर को खिंचने लगा, जब पूरा लण्ड बाहर आया तो उसके मुंह से पच की आवाज़ आई जो कि लण्ड के बाहर आने से मुंह के बंद होने की आवाज़ थी।

उसकी आँखें अभी बड़ी थी आश्चर्य से… मैं भी हड़बड़ाहट में लण्ड को अंदर करना भूल गया। मैं नीचे बैठा था लण्ड आसमान को सलामी दे रहा था। मीनल का चहेरा अभी भी अचंभित सा था, उसकी आँखें फैली हुई, मुँह बंद, साँसें तेज़ तेज़ चल रही थी जिससे उसके ब्रा में कैद मस्त स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे।

मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। मैंने एकदम से आगे बढ़ कर दोनों हाथों से उसका चेहरा थाम लिया और बोला- सॉरी मीनल भाभी, अनजाने में ये सब हो गया। प्लीज माफ कर दो।

कहानी जारी रहेगी.आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है?आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुमूल्य है।धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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गया था छोड़ने, आ गया चोदकर

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