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चाची की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 581 बार

अबकी बार सुमन चाची की गाण्ड फाड़ी -2

राजवीर सिंह

20 Jan 2016 को प्रकाशित

अबकी बार सुमन चाची की गाण्ड फाड़ी -2
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अब तक आपने जाना था कि मैं सुमन चाची की मालिश कर रहा था। चूंकि मैंने अब तक उनकी गाण्ड नहीं मारी थी तो मेरा मन था कि आज सुमन चाची की गाण्ड बजा ली जाए और ये सोच कर मैंने पूछा- चाची क्या मैं तुम्हारी आज गांड मार लूँ?

चाची एकदम से पलटीं और मुझे घूरने लगीं।

अब आगे..

फिर कुछ सोच कर बोलीं- चलो ठीक है.. पर आराम से मारना।वे फिर से उल्टी लेट गईं।

उनके मुँह से ये सुनते ही दोस्तों मैंने बिना देर किए जल्दी से अपना लोवर उतारा और अपने खड़े लंड को आज़ाद किया।

मैंने कहा- सुमन चाची तुम घुटनों के बल हो जाओ.. ताकि मैं आसनी से तुम्हारी गाण्ड मार सकूँ।अब सुमन चाची घुटनों के बल घोड़ी बन कर पोजीशन में हो गई।

मैंने भी ज़्यादा देर ना करते हुए अपने लंड पर बहुत सा तेल लगाया और चाची की गाण्ड पर दोबारा से तेल लगाया और फिर लंड को उनकी गाण्ड पर सैट करके धक्का मारा.. तो चिकनाई ज़्यादा होने से लंड फिसल गया व चाची भी धक्का लगने से आगे की तरफ़ लुढ़क गईं।

वो बोलीं- राजवीर दर्द होगा रहने दो।

मैं हाथ आया मौका गंवाना नहीं चाहता था.. मैं उनके चूतड़ों पर किस करने लगा, बोला- नहीं सुमन चाची.. मैं बहुत प्यार से तुम्हारी गाण्ड में लंड डालूँगा और तुम्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा।वो बोली- ठीक है।

मैंने एक रज़ाई ली और उसको फोल्ड करके चाची के नीचे लगा दी जिससे चाची की गाण्ड ऊपर को उठ गई।अब में चाची के दोनों पैरों के बीच आया.. और दोबारा थोड़ा तेल उनकी गाण्ड पर लगाया और मैंने अपना लंड उनकी गाण्ड पर सैट किया।

दोनों हाथों से उनकी कमर को अच्छे से पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मारा। अबकी बार निशाना सही लगा व मेरे लंड का टोपा उनकी गाण्ड में ‘फक..’ की आवाज़ से घुस गया।

चाची को दर्द हुआ तो छूटने के लिए आगे की तरफ़ ज़ोर लगाया.. पर एक तो रज़ाई और दूसरा मैंने उन्हें कस कर पकड़ा था.. तो कोई फायदा नहीं हुआ.. और वो वहीं छटपटाती रहीं.. कि तभी मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा और इस बार मेरा आधा लंड उनकी गाण्ड में चला गया।

उनकी चीख निकल गई और साथ में मेरी भी.. मुझे लगा की शायद मेरे लंड का भी टांका टूटा गया है.. क्योंकि मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरे लंड को बहुत ज़ोर से भींच लिया हो।

चाची अब मुझे छोड़ने के लिए बार-बार विनती कर रही थीं.. मैं ऐसे ही बिना हिले रुका रहा। जब हम दोनों कुछ नॉर्मल हुए तो मैंने दोबारा थोड़ा तेल लंड पर डाला व थोड़ा सा लंड बाहर खींच कर फिर ज़ोर से धक्का मारा और अपना पूरा लण्ड चाची की गाण्ड में पेल दिया।

चाची दर्द से अकड़ गया व मुझे गालियाँ बकने लगीं।मैं रुक गया व चाची को कमर पर चूमने लगा।

करीब पाँच मिनट बाद चाची का दर्द कुछ कम हुआ तो उन्होंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया।अब मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को हिलाना शुरू किया और फिर थोड़ी देर में आधा लंड अन्दर-बाहर करने लगा।

मैंने थोड़ा तेल लंड पर लगाया।लंड अब फँस कर चाची की गाण्ड में जा रहा था.. पर उतना दर्द नहीं हो रहा था।

मुझे तो जन्नत का मज़ा आ रहा था.. क्या कसी हुई गाण्ड थी।

चाची को भी अब मज़ा आने लगा था, वो भी अब अपनी गाण्ड आगे-पीछे करने लगी थीं। हम दोनों ही अब जन्नत का मज़ा लूट रहे थे।थोड़ी देर बाद मैंने अपने एक हाथ से चाची की चूत को मसलना शुरू कर दिया। इससे चाची को दोहरा मज़ा आने लगा।

मुझे चुदाई करते हुए करीब 15 मिनट होने को हो गए थे.. और अब चाची ज़ोर-ज़ोर से बड़बड़ाने लगी थीं। लगता था कि उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था और फिर कुछ ही देर के बाद चाची की चूत से दोबारा पानी की पिचकारी फूट पड़ी व चाची हल्के-हल्के झटके खाने लगीं।

चाची की गाण्ड भी तेज़ी से खुलने व सिकुड़ने लगी.. और मेरे लंड को कस कर जकड़ने लगी।

अब मैं तेज़ी से धक्के लगा रहा था, मेरे हर धक्के से चाची के चूतड़ों से आवाज़ आ रही थी और उनकी चूचियाँ ज़ोर-ज़ोर से हिल रही थीं।

फिर मैंने चाची की कमर के नीचे से अपने दोनों हाथ ले जाकर उनकी दोनों चूचों को पकड़ा और जोरदार धक्के मारने लगा।

करीब 15-20 जोरदार धक्कों के साथ ही मैंने अपने लण्ड का पानी उनकी गाण्ड में छोड़ दिया।चाची भी अब पस्त हो चुकी थीं और मैं उनके ऊपर ही लेट गया।कुछ देर बाद लण्ड सिकुड़ कर उनकी गाण्ड से बाहर आ गया।

मैं चाची के बगल में लेट गया पर चाची अभी भी उल्टी ही लेटी हुई थीं। कुछ देर बाद मैं उठा तो देखा कि मेरे लंड पर खून लगा है.. ध्यान से देखा तो मेरे लण्ड का टांका एक तरफ़ से टूट गया था व उसी से खून आ रहा था।

सुमन चाची की गाण्ड देखी तो वो लाल हो चुकी थी व कुछ खुली हुई थी।खुलती क्यों नहीं.. इतना मोटा लंड जो लिया था।

चाची को देखा तो बेसुध सी लेटी हुई थीं।मैंने उनकी गाण्ड साफ की.. जिसमें से मेरा वीर्य बह रहा था।

फिर मैंने उनकी गाण्ड पर दोबारा थोड़ा तेल लगाया और उन्हें हल्के से सीधा किया।बिस्तर गीला हो रहा था.. इसलिए एक एक्सट्रा चादर बिस्तर पर उनके नीचे बिछाई और उनके साथ ही उन्हें अपनी बाँहों में ले कर सो गया।

सुबह जब आँख खुली तो देखा कि चाची अभी भी सो रही थीं। नींद में उनका चेहरा बहुत प्यारा लग रहा था.. मैंने हल्के से उनके होंठों को चूम लिया।

फिर मैं बिस्तर से उठा और नंगा ही बाथरूम में गया और जब पेशाब किया तो लंड में बहुत जलन हुई।मैंने देखा कि मेरे लंड के आगे के हिस्से में थोड़ी सूजन आ गई थी या शायद चाची की कसी हुई गाण्ड का कमाल था।

मैं पेशाब करके वापस आया और सुमन चाची को देखने लगा.. वो अभी भी नंगी ही लेटी हुई थीं।मैंने देखा उनकी गाण्ड बहुत सूज गई थी और बहुत लाल हो गई थी।

मैं रसोई में गया और थोड़ा गर्म पानी करके उसमें थोड़ी लाल दवाई डाली.. थोड़ी रुई ली और कमरे में वापिस आया.. तो देखा चाची बाथरूम में मूत रही हैं।

उनके मूतने से उनकी चूत से ‘सस्सर्र..’ की आवाज़ आ रही थी और यह आवाज़ सुन कर मेरे लंड में फिर हलचल होनी शुरू हो गई। चाची ने मुँह धोया और धीरे-धीरे लंगड़ाते हुए कमरे में आईं।मैंने देखा उनसे ठीक से चला नहीं जा रहा था।

मैंने बोला- सुमन चाची तुम लेट जाओ.. मैं तुम्हारी गाण्ड की गर्म पानी से सिकाई कर देता हूँ।

यह सुनकर वो धीरे से हँसी और आगे बढ़ मेरे होंठों को चूम लिया।चाची अब फिर उल्टी लेट गईं और मैंने गर्म पानी से उनकी गाण्ड को रूई के साथ हल्के हाथों से सेकने लगा।

करीब दस मिनट के बाद मैंने सिकाई बंद कर दी और पूछा- अब कैसा लग रहा है?वो बोलीं- हाँ.. अब ठीक लग रहा है।

उन्होंने सीधी होकर मुझे अपनी बाँहों में लेने के लिए अपनी बाँहें फैला दीं।मैं भी उनकी नंगी चूचियों के साथ लिपट गया और उन्हें होंठों पर किस करने लगा।

थोड़ी ही देर में हम दोनों फिर गरम हो गए और फिर दोबारा एक जोरदार चुदाई शुरू कर दी।

हालांकि मुझे लंड में और चाची को गाण्ड में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था.. पर दोस्तों इस दर्द में भी मज़ा आ रहा था। फिर मैंने चाची को जम कर चोदा और चाची ने भी मेरा पूरा साथ दिया।

तो इस तरह मैंने अपनी सुमन चाची की चूत और गाण्ड दोनों मारी।कसम से बहुत मज़ा आया।मैं जब तक वहाँ रहा.. उनके साथ खूब मज़े किए।

आशा करता हूँ आप सबको मेरी ये कहानी पसंद आई होगी। जल्दी ही आपसे एक नई कहानी के साथ फिर मुलाकात होगी।

दोस्तो.. मुझे आप सबके ईमेल का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा.. अपने विचार support@mohakkisse.com पर ईमेल करें।

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अबकी बार सुमन चाची की गाण्ड फाड़ी

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

शहनाज़ खान

3 days ago

गजब की आंटी है भाई, पढ़ते हुए मजा आ गया।

सत्यानन्द बरनवाल

2 weeks ago

पड़ोसन आंटी की तो बात ही अलग है। बहुत ही गरमा-गरम कहानी!

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