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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,016 बार

अब्बू के दोस्त और मेरी अम्मी की बेवफाई -2

मेघा मुक्ता

28 Sep 2015 को प्रकाशित

अब्बू के दोस्त और मेरी अम्मी की बेवफाई -2
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अंकल अम्मी को अपनी बाँहों में लेकर.. उनके होंठों को चूसने लगे, अब वो भी अंकल का साथ दे रही थीं।

मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। असलम अंकल ने उठकर अम्मी के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। अम्मी अपना पाँव हटाने लगीं।वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे।

अब आगे..

असलम अंकल उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। असलम अंकल धीरे से अम्मी की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी।

उनका लण्ड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था। अंकल पूरे नंगे हुए और अम्मी की टांगें ऊपर करके अपना सात इंच का लण्ड अम्मी की फूली हुई चूत में डाल दिया।अम्मी सिसकार उठीं- अअह आआ.. आआह.. अहह..हाहा आआहह्ह..हा असलम धीरे-धीरे.. ज़ीनत उठ जाएगी.. अहह्ह..सिइइइ..

अम्मी ने मेरे जाग जाने के डर से अपनी आवाजें बंद कर लीं। असलम अंकल धीरे-धीरे चुदाई की गति तेज करने लगे। अम्मी की चूड़ियाँ खन-खन कर रहीं थीं।अंकल उनको तेज-तेज चोदने लगे।

अम्मी भी अंकल के कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं.. वैसे ही असलम अंकल भी तेज स्पीड में उनकी चूत में धक्के लगा रहे थे। उनका सात इंच का लण्ड अम्मी की चूत में पूरा पेवस्त हो रहा था। अम्मी अपनी टांगें ऊपर किए हुए बिस्तर पर पड़ी लम्बी-लम्बी साँसें भर रहीं थीं।

तकरीबन आधे घंटे तक असलम अंकल अम्मी को लण्ड डालकर चोदते रहे.. उसके बाद वे दोनों शांत हो गए। इसी के साथ उनकी पायलों की ‘छुन-छुन’ भी बंद हो गई थी। शायद असलम अंकल झड़ चुके थे।

वह दोनों काफ़ी देर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे.. उसके बाद फिर वो दूसरी बार के लिए तैयार हुए।

कुछ देर बाद उन्होंने अम्मी को फिर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया। अम्मी ने भी असलम अंकल के लण्ड को मुँह में लेकर उनके लौड़े को चूसना शुरू किया। पहली ठोकर के सारे वीर्य साफ़ को किया।

असलम अंकल अम्मी को फिर से प्यार करने लगे। उनके दूध दबाने शुरू कर दिए। अब असलम अंकल का लौड़ा फिर से हाहाकारी हो गया था। इस बार उन्होंने अम्मी को उल्टा किया.. मतलब अंकल ने अम्मी को कुतिया बना दिया।

‘ऐसे पीछे नहीं असलम…’‘तुम जानती हो मुझे कुतिया बना कर तुम्हारी गाण्ड मारना बहुत अच्छा लगता है.. शहनाज़..’असलम अंकल ने अपना मूसल अम्मी की गाण्ड के छेद में लगाया और उनके चूतड़ों पर एक थपकी दी।

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी अम्मी आज पूरी रंडी बनी हुई थीं।अम्मी समझ गईं कि अब ये थपकी देने का मतलब है कि उनकी गाण्ड में लौड़े की शंटिंग शुरू होने वाली है। उन्होंने खुद को गाण्ड मराने के लिए तैयार कर लिया था।

असलम अंकल ने अम्मी की गाण्ड में शॉट मारा.. ‘आआह्ह्ह.. धीरे-धीरे असलम..’‘बस बस शहनाज़.. हो गया..’अम्मी के हलक से एक घुटी सी चीख निकली.. असलम अंकल का हाहाकारी लण्ड अम्मी की मुनिया की सहेली उनकी गाण्ड में पूरा घुस चुका था।

शहनाज़- प्लीज असलम.. धीरे-धीरे दर्द हो रहा है..अम्मी के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था।‘क्यों.. क्या अल्ताफ तुम्हारी गाण्ड नहीं मारता था?’‘नहीं.. वह गाण्ड मारने के शौक़ीन नहीं हैं.. मुझे इन्हीं धक्कों का और तुम्हारे लण्ड का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था। मुझे नहीं मालूम था असलम कि तुम्हारा लौड़ा इतना बड़ा है.. आह्ह.. चोदो मुझे और जोर से चोदो..’

असलम अंकल अम्मी के ऊपर कुत्ते जैसे चढ़े थे.. अम्मी की गाण्ड पर जैसे ही चोट पड़ती.. उनके दोनों चूचे बड़ी तेजी से हिलते। असलम अंकल ने उनके हिलते हुए दुद्धुओं को अपने हाथों से पकड़ लिया.. जैसे असलम अंकल ने अम्मी की चूचियों का भुरता बनाने की ठान ली हो।

उनकी गाण्ड को करीब दस मिनट तक ठोकने के बाद वे अम्मी की पीठ से उतरे और फिर उन्होंने अम्मी को चित्त लेटा दिया। अब उन्होंने अम्मी की कमर के नीचे तकिया लगाया और उनके पैर फैला कर उनकी चूत में अपने मूसल जैसे लौड़े को घुसेड़ दिया।

अम्मी भी नीचे से अपनी कमर उठा कर थाप दे रही थीं, अम्मी के मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं थीं- चो..द.. असलम.. और..ज्जोर.. स्से..धक्के.. मारर.. मेरेरेरे.. राज्ज्ज्ज..जा !और फिर वो अचानक शिथिल पड़ गईं.. अम्मी झड़ चुकी थीं।

असलम अंकल ने भी तूफानी गति से धक्के मारते हुए उनकी चूत में अपने लण्ड का लावा छोड़ दिया।

उन दोनों की चुदाई देखकर मेरी भी चूत गीली हो गई थी.. मैंने अपनी उंगली से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया था।मुझे मालूम था कि आज असलम अंकल अम्मी को देर तक चोदेंगे.. मैंने महसूस किया था कि जब चुदाई होती है.. तो फिर उन दोनों को.. मेरी तो जैसे सुध ही नहीं रहती है।

असलम अंकल का इंजन अभी अम्मी की चूत में शंटिंग कर रहा था। मेरी आँखें मुंदने लगी थीं.. कुछ देर बाद मैं सो गई।

अब तो अंकल और अम्मी के बीच के सभी परदे मेरे सामने खुल चुके थे.. अम्मी भी अपनी पूरी मस्ती से अपनी चूत कि चीथड़े उड़वाने में लग चुकी थीं।असलम अंकल अम्मी को जब चाहते तब चोदते थे। धीरे-धीरे वह दोनों मेरे सामने ही एक कमरे में चले जाते और कई-कई घंटे बाद निकलते थे। मैं भी हमेशा अम्मी और अंकल की चुदास लीला देखती थी रात को जाग जाग कर…

एक दिन मैं जब सुबह उठी.. तो देखा कि असलम अंकल मेरे साथ ही लेटे थे। वह मुझे पूरी तरह से चिपटाए हुए थे।मैंने अंकल से पूछा- अम्मी कहाँ हैं?अंकल- वह तो अपने कॉलेज चली गईं।‘ठीक है.. मैं आपके लिए चाय बना दूँ?’

अंकल ने सिगरेट सुलगाते हुए ‘हाँ’ में सिर हिला दिया था। थोड़ी देर बाद मैं चाय लेकर आ गई थी। अंकल में मुझे पास में बैठने के लिए इशारा किया।मैं वहीं उनके पास बैठ गई।

‘कल रात को तुम सो रहीं थी या जाग रही थीं?’ अंकल ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए सवाल किया।

अचानक इस तरह के सवाल से मैं सकपका गई थी। अंकल को शायद ये मालूम पड़ गया था कि अम्मी और उनकी चुदाई का मैंने पूरा नजारा देखा है।

‘देखो ज़ीनत.. मैं तुम्हारा अंकल हूँ.. तुम्हारी अम्मी का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है.. तुम बड़ी हो गई हो.. समझदार हो.. इस बात को समझ सकती हो।’मैंने बिना कोई जवाब दिए अपना सिर शर्म से नीचे झुका लिया था।

‘वैसे कितने साल की हो गई हो तुम?’‘पिछले महीने में 18 साल की..’ मैंने धीरे से शरमाते हुए जवाब दिया था।अंकल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया- बड़ी हो गई है मेरी बच्ची.. तू फ़िक्र मत कर.. तेरे लिए मैं तेरी अम्मी से बात करता हूँ..

अंकल ने मुझे गले लगाये हुए ही मेरी पीठ पर सहलाते हुए कहा था। मैं किसी मासूम बच्चे की तरह उनसे चिपकी हुई थी।अंकल ने मुझे अपनी ओर खींचा और अपनी गोद में झटके से खींच लिया.. हम दोनों बिस्तर पर गिर गए।मैं बुरी तरह घबरा गई.. मैं हल्की सी आवाज में बोली- अंकल प्लीज मुझे जाने दो..‘कुछ नहीं होगा तुझे मेरी गुड़िया रानी..’

अंकल मेरे कंधों पर किस करने लगे.. मुझे अच्छा लग रहा था.. परन्तु शर्म भी आ रही थी.. क्यूंकि वे मेरे अंकल थे।मैं छूटने की कोशिश करने लगी.. परन्तु अंकल ने मुझे पीछे से जकड़ रखा था।

अंकल ने मुझे मुँह के बल बिस्तर पर लिटा लिया और मेरे ऊपर लेट कर मेरी पीली जालीदार कुर्ती की ज़िप खोल कर मेरी पीठ पर चुम्बन करने लगे। मैं चुपचाप सिसकारियाँ भर रही थी।

अंकल ने मेरे अधखिले उभार मसलने शुरू कर दिए.. मेरे पीछे उभारों पर मुझे उनके लौड़ा का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था। नीचे मेरी योनि में कुलबुलाहट सी होने लगी थी। योनि को और साथ में भगांकुर को मसलवाने को मन कर रहा था।

फिर अंकल ने मेरी काली चूड़ीदार पजामी नीचे खिसका दी और मेरी गुलाबी रंग की चड्डी की एक झटके में नीचे खिसका लिया। मुझे शर्म सी महसूस हो रही थी परन्तु आनन्द भरी सनसनाहट में लिपटी.. मैं चुपचाप लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी। मुझे लग रहा था कि मेरी योनि कुछ रीतापन है.. उसे भरने के लिए मैं कुछ अन्दर लेने को मचल रही थी।

मुझे सीधा करके अंकल की अब उंगली आसानी से मेरी गुलाबी चूत में जा रही थी। मैं बहुत जोर से सिसकारियाँ ले रही थी ‘उन्नन्नह्हह.. आअह्हह.. ऊऊह्ह. आहन्न.. आहऊर चूसो..’

फिर असलम अंकल ने मेरे छोटे-छोटे चूचों को चूसना छोड़ कर होंठों का किस लेना शुरू कर दिया- तू तो मेरी गुड़िया रही है ज़ीनत.. मैं तो कब से तेरे पकने का इंतज़ार कर रहा था.. मूआआह्ह्ह..अंकल ने मुझे चूमते हुए ख़ुशी ज़ाहिर की।

कुछ देर के बाद मैं पूरी तरह से गर्म हो गई। फिर अंकल ने अपना लोअर खोला और अपना लण्ड मेरे हाथ में थमा दिया। उनका लण्ड अब तन कर पूरा 90 डिग्री का हो गया था।मैं पहले तो शरमाई.. लेकिन कुछ देर के बाद जब उन्होंने फिर से लण्ड पकड़ाया.. तो मैं थोड़ा खुल गई।अंकल ने बोला- इसे सहलाओ और आगे-पीछे करो।

मैं वैसा ही करने लगी।

अंकल ने फिर मेरी नन्हीं सी मासूम चूत में एक उंगली डाल दी। मैं जोर से ‘आह्ह्ह..’ करके सिस्कार उठी। कुछ देर के बाद मैंने अपनी चूड़ीदार पजामी खुद उतार दी।

साथियो, यह घटना मेरी परिचिता जीनत के साथ हुई है जो उसने मुझे बताई और मैंने इस घटना को सिलसिलेवार ढंग से आपके सामने ज़ीनत की जुबानी रखने का प्रयास किया है। यदि आप इस घटना पर कुछ कहना चाहते हैं तो आपका मेरी ईमेल पर स्वागत है बस एक निवेदन है कि अभद्रता असहनीय होगी।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

राज फरीदाबादी

4 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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