होम पर वापस जाएं
Group Sex Story पठन समय: 20 मिनट पढ़ा गया: 620 बार

अधूरी ख्वाहिशें-7

इमरान ओवैश

11 Jan 2022 को प्रकाशित

अधूरी ख्वाहिशें-7
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे राशिद ने हम दोनों को अपने कमरे में बुलाया और कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म दिखाने लगा।अब आगे पढ़ें..

तब नहीं पता था, आज मैं जानती हूँ कि वो टिपिकल ब्लू फिल्म थी.. जिसमें तीन अलग जोड़ों की फिल्म थीं। एक सिंगल जोड़े की थी.. फिर एक मर्द दो औरतों के साथ करता है और तीसरी में एक औरत के साथ दो मर्द करते हैं।यह सब कुछ सिरे से मेरे लिये नया था और काफी हद तक हैरान करने वाला था, लेकिन उसने सवाल करने से मना किया था तो कुछ पूछने या हैरानी जाहिर करने के बजाय होंठ भींचे बैठी रही।मेरे लिये यह देखना बड़ा अजीब था कि जिस लिंग से पेशाब किया जाता था, उसे यूँ लॉलीपाप की तरह चूसा जा रहा था।

मेरे लिये यह देखना भी बड़ा आश्चर्यजनक था कि जिस योनि से सिर्फ पेशाब ही नहीं जारी होती थी, बल्कि माहवारी में गंदा खून भी निकलता था, उसे यूँ चाकलेट की तरह चाटा जा रहा था। और सबसे अजीबोगरीब चीज तो यह थी कि चूतड़ों के बीच जिस छेद से हगा जाता था, उस छेद में भी लिंग घुसा कर अंदर बाहर किया जा रहा था।और तो और उस गंदी जगह से निकले लिंग तक को लड़की चाट रही थी.. जिसे देख कर मुझे उबकाई सी होने लगी थी।

साथ ही यह देख कर भी कि कैसे अपना सफेदा निकालते वक्त लड़के अपना लिंग लड़की की योनि से निकाल कर उसके चेहरे पर ले आते और लड़की उनके वीर्य को ऐसे मुंह में ले लेती जैसे कोई बहुत जायके की चीज हो।छी छी…

मेरी मनःस्थिति दोनों अच्छी तरह समझ रहे थे और इसीलिये दोनों ही मुस्करा रहे थे।फिर फिल्म खत्म होने पर दोनों मेरे सामने हो गये- किन-किन चीजों पर तुम्हें हैरानी हुई, बताओ.. हम तुम्हें कनविंस करते हैं।“दोनों अंग कैसे गंदे होते हैं.. उन्हें कैसे चूसा चाटा जा सकता है।”

“गंदगी दिमाग में होती है, वर्ना पीने वाले तो गौमूत्र भी श्रद्धा से पीते हैं और कभी इंसान फंस जाये तो उसे भी पीना पड़ता है। ऊपर स्पेस में जो एस्ट्रोनाट रहते हैं, वे भी अपना पेशाब ही शुद्ध करके पीते हैं। जरूरत साफ सफाई की है। अगर दोनों के अंग साफ हैं तो चूसने चाटने में क्या बुराई?”“पर लड़की की मुनिया से तो वह वाला खून भी…”

“तो क्या हुआ.. जिस दौरान खून बहता है, उस दौरान न सेक्स करते हैं न ओरल। फारिग होने के बाद लड़की साफ सुथरी हो जाती है.. कोई उसमें खून लगा तो नहीं रह जाता न?”“और पीछे से.. छी!”“अच्छा तुम्हें समलैंगिकों के बारे में पता है, जो एक दूसरे से ही सेक्स करते हैं। बताओ लड़का लड़के से कैसे सेक्स करेगा, दोनों के पास तो एक जैसे मुनिया है।”“उनकी मजबूरी हो सकती है पर लड़की के साथ..”

“लड़की को भी मजा ही आता है, मजबूरी वाली क्या बात है। आखिर इसमें मजा ही आता है तभी एक लड़का, लड़का हो कर भी दूसरे लड़के के साथ इसी सेक्सुअल रिलेशन के लिये पूरी दुनिया का धिक्कार भी झेल लेता है।”“पर फिर भी.. वहां से निकली मुनिया को लड़की कैसे चाट.. आक्क!”“अरे तुम अपने जैसा मत सोचो यार.. यह एक फिल्म के लिये एक्ट कर रहे हैं और एक्ट से पहले छेद की अच्छे से सफाई की जाती है, यह मत सोचो कि वहां गू लगा होगा। उन्हें पहले ही क्लीन कर लिया जाता है।”

“और वह जो मुंह में ले रही थीं सफेदा.. वह ठीक था?”“ठीक गलत लेने वाले जानें.. लेने वाले लेते ही हैं और वह कोई पेशाब नहीं होता, पेशाब से अलग एक सब्सटेंस होता है। तुम्हें हो सकता है कि खराब लगे, लेकिन जो बार-बार इसे मुंह में ले रही हैं, उन्हें यह भी टेस्टी लगने लगता है।”

“खैर.. अब? अब क्या करोगे?”“बिस्तर पे आओ।”

हम तीनों बिस्तर पे आ गये.. राशिद ने कमरे की मेन बत्ती पहले ही बुझा रखी थी, बस कंप्यूटर की स्क्रीन की रोशनी हो रही थी।“अब सब लोग कपड़े उतारो।” राशिद ने कपड़े उतारने की पहल करते हुए कहा।“मम-मैं क्यों?”“क्योंकि तुम्हें भी मजा लेना है। मुझसे शर्माओ मत.. अहाना बता चुकी है मुझे सब, जो तुम लोग करती हो। डरो मत.. तुम्हारा दिल नहीं करेगा तो मुनिया नहीं घुसाऊंगा.. बस ऐसे ही मजे ले लेना।”“तो कपड़े क्यों उतारूं?” मैंने फिर भी जिद की।“तो ठीक है मत उतारो.. ऐसे ही मजे लो।”

मैं एक ब्लू फिल्म देखने के बाद दिमागी रूप से इस हालत में बिलकुल भी नहीं थी कि उसकी मर्जी के खिलाफ जाऊं.. लेकिन फिर भी मेरी शर्म, मेरी अना, मेरा गुरूर मुझे बेपर्दा होने से रोक रहा था।पर मेरी मुश्किल अहाना ने आसान कर दी.. वे दोनों नंगे हो गये तो अहाना ने जबरन मेरा कुर्ता उतार दिया और उसके कहने पे राशिद ने मेरी सलवार उतार दी।

दिखावे के तौर पर मैंने थोड़ी नाराजगी जरूर दिखाई, लेकिन उन पर कोई फर्क न पड़ा।“अब तुम देखो और सूंघो.. इसमें क्या गंदा है?” राशिद ने अपना लिंग मेरे चेहरे के सामने कर दिया।

एकदम साफ सुथरा कुकुरमुत्ते जैसा लिंग, आगे चिकनी चमकीली छतरी सी और उससे उठती अजीब सी महक, जो गंदी तो बिलकुल भी नहीं थी.. उल्टे उत्तेजित कर रही थी।

मैं बहुत ज्यादा गौर से उसे देख या सूंघ पाती कि अहाना ने उसे लपक कर अपने मुंह में ले लिया और मेरे चेहरे के सामने ही चपड़-चपड़ चूसने लगी। वह लप-लप राशिद के लिंग को चूसती चाटती रही और वह लगभग लकड़ी की तरह सख्त हो गया।

“लो.. अब तुम देखो।” फिर उसने अपने मुंह से निकाल कर मेरे होंठों की तरफ बढ़ाया।“नन-नहीं.. मम-मैं नहीं!” मैंने चेहरा पीछे खींचा।

उसने वहीं पड़ा अपना दुपट्टा उठाया, और उससे रगड़ कर राशिद के अपने थूक से गीले लिंग को साफ कर दिया।“ले अब चूस.. देख तो चूस के, मजा आयेगा।” अहाना एक हाथ मेरे सर के पीछे लगा कर दूसरे हाथ से उसका लिंग मेरे होंठों से लगाती हुई बोली।

उसे मेरी मनःस्थिति अच्छी तरह पता थी कि मैं सिर्फ ऊपर से इन्कार कर रही थी… असल में कहीं न कहीं अंदर से मैं वह सब करना चाहती थी, जो किया जा सकता था।

दिखावे के लिये थोड़ी देर मैं होंठ बंद किये रही लेकिन जल्दी ही उसकी महक ने मुझे इतना बेचैन कर दिया कि मैंने होंठ खोल दिये और गोश्त की लकड़ी जैसे लिंग को अंदर आ जाने दिया।गर्म और सख्त गोश्त.. जिसका शिश्नमुंड लिजलिजा सा था जिसे मैं तालू और जीभ से दबा सकती थी। कोई जायका तो नहीं था, लेकिन फिर भी अच्छा लगा।

पहले उन्हें देखती, झिझकती, धीरे-धीरे मुंह चलाती रही उसके लिंग पर, लेकिन फिर आखिर शर्म खत्म हो ही गयी और दोनों को भाड़ में झोंक कर उसे तन्मयता से चूसने लगी।तब अहाना ने उसे मेरे मुंह से निकाल लिया और खुद चूसने लगी।

“अब बस करो.. ऐसा न हो कि मेरा मुंह में ही निकालने का मन होने लगे।” राशिद ने उसके मुंह से लिंग निकालते हुए कहा।“फिर?” मैंने मासूमियत से उन्हें देखा।

उसने अहाना को चित लिटा कर उसकी टांगें फैला लीं और उल्टे हाथ से अहाना की योनि फैला कर सीधे हाथ की बीच वाली उंगली योनि के अंदर धंसा दी।

इतना तो हम दोनों बहनों ने भी पहले किया था लेकिन राशिद ने जो इससे आगे किया, वह यह था कि वह चेहरा अहाना की योनि के एकदम पास ले गया और जीभ से उसकी योनि के ऊपरी सिरे को छेड़ने लगा।मेरे रौंगटे खड़े हो गये.. मैं गौर से उसे देखने लगी।तो वह फिल्म मुझे इसलिये दिखाई गयी थी ताकि मैं यह सब देख कर असहज न महसूस करूँ.. और वह निर्विघ्न अपने मन की कर सकें।

“क्या देख रही है.. मेरे दूध पी न!” अहाना ने कुछ झुंझलाते हुए मुझे अपने ऊपर खींच लिया।उस तरफ से ध्यान हटा कर मैं उसकी घुंडियों को चुसकने चुभलाने लगी।वह बआवाजे बुलंद सिसकारती रही।

करीब दस मिनट बाद वह हट गया और अहाना की सिसकारियां थम गयीं। इससे पहले हम कुछ समझ पाते या मैं संभल पाती.. उसने मेरी जांघों पर पकड़ बना ली।

और उन्हें फैलाते हुए अपना मुंह उनके बीच डाल दिया, फिर उसकी जीभ का गीला स्पर्श मैंने अपने उसी उभरे हुए मांस पर महसूस किया जो योनि के ऊपरी सिरे पर था और दीवारों से ढका रहता था।

मुझे करेंट सा लगा, मैं तड़क कर हट जाना चाहती थी लेकिन अहाना ने स्थिति भांपते हुए मुझे पकड़ लिया और मेरे ऊपरी हिस्से पर लदते हुए अपने दूध से मेरे दूध रगड़ने लगी।“महसूस तो कर के देख.. कितना मजा आता है।” उसने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

और वाकयी महसूस करते मेरे दिमाग में चिंगारियां छूटने लगीं.. नीचे “लप-लप” मेरी योनि में राशिद मुंह चला रहा था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं कहीं उड़ी जा रही होऊं, जहां बस मस्ती है, मजा है, नशा है।वह कभी मेरी योनि की साइड वाल को पकड़ कर चूसता खींचता, कभी नीचे छेद में अपनी जुबान घुसा देता, कभी ऊपर मांस के हुड को चुभलाने लगता।

और मैं महसूस कर सकती थी कि पूरी योनि पानी से भरी जा रही थी और मैं बही जा रही थी।फिर मैं देख ही न पाई कि कब वह उठ बैठा और अपना लिंग मेरी योनि से सटा कर अंदर ठूंस दिया। मेरी हल्की सी चीख निकल गयी, लेकिन अहाना ने दबा रखा था कि छिटकने का मौका ही नहीं सुलभ था।

इतनी ज्यादा गीली होकर बहती हुई, चिकना चुकी योनि कैसे भी उसके बड़े बैंगन जैसे लिंग को रोक पाने में सक्षम नहीं थी.. फिर उसने लिंग को लार से भी चिकना किया ही होगा।

वह योनि की कसी दीवारों पर दबाव डालता अंदर तक धंस गया और दीवारें चरमरा कर रह गयीं। दर्द हो रहा था, यह अपनी जगह सच था लेकिन दिमाग पर चढ़ा नशा इतना गहरा था कि दर्द पर हावी हुआ जा रहा था।

फिर वह खुद भी लद गया मुझपे और उसने अहाना को हटा दिया.. दोनों हाथों से पहले सख्ती से मेरे दोनों दूधों का मर्दन किया और फिर उसके होंठ मेरे होंठों के पास आ गये।मुझे उसके मुंह से सिगरेट की महक आई लेकिन वह भी भली लगी।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Ek Chudai Ka Samjhota

फिर उसने मेरे होंठों से अपने होंठ जोड़ दिये। मैंने चेहरा हटाने की कोशिश की लेकिन उसने दोनों हाथ ऊपर करके चेहरा पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपनी पकड़ बना ली।यह मेरे जीवन का पहला मर्दाना चुंबन था।

कुछ देर मैं बेहिस सी असम्बंधित बनी रही लेकिन नीचे योनि में घुसे उसके लिंग की मादक गुदगुदाहट ने ज्यादा देर बेहिस न रहने दिया और फिर मैंने होंठ खोल दिये। अब वह मेरे होंठों को चूस रहा था तो मैं उसके होंठों को चूस रही थी.. उसने मेरे मुंह में जुबान घुसाई तो मैंने उसके मुंह में जुबान घुसा दी जिसे वह चूसने लगा।

जब मैं वापस अच्छे से गर्म हो गयी तब वह उठ कर उस पोजीशन में आ गया जिसमें सामने बैठ कर योनिभेदन करते हैं.. इसमें उसका लिंग “पक” करके मेरी योनि से निकल गया था।

अब फिर अहाना अधलेटी सी हो कर मेरे एक दूध की घुंडी को होंठों से खींचती सीधे हाथ से मेरी गीली बही हुई योनि को सहलाने लगी।

जबकि राशिद ने फिर अपनी मुनिया की टोपी अंदर धंसा कर मेरी जांघों को ऊपर की तरफ दबाते हुए अंदर ठेलने लगा.. जिसे मैं साफ महसूस कर सकती थी।

कसाव बहुत ज्यादा था तो मैं अभी उतनी सहज नहीं थी, लेकिन यह भी सच था कि अब मुझे बेहद मामूली दर्द हो रहा था।अंदर तक धंसा कर उसने वापस फिर पूरा ही बाहर निकाल लिया जो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा।लेकिन वह शायद इस तरह मेरी योनि को अपने लिंग के लिये सहज कर रहा था। धीरे-धीरे एकदम जड़ तक घुसाते और फिर वापस धीरे-धीरे करते एकदम बाहर निकाल लेता।

इस तरह दस बारह बार करने पर मैंने महसूस किया कि मेरी कसी हुई योनि में इतनी जगह बन गयी थी कि वह आराम से अपना लिंग अंदर बाहर कर सकता।

फिर उसने अहाना को हटा दिया और जैसे वन ऑन वन फाइट के मूड में आ गया। अब मैं उसे देख रही थी और वह धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था और उसकी बैंगन जैसी मुनिया मेरी मुनिया में गहरे तक अंदर बाहर हो रही थी और इस अंदर बाहर होने में मुझे वह मज़ा आ रहा था जिसे बताने के लिये मेरे पास शब्द नहीं!बस यही दिल कर रहा था कि यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे और मैं क़यामत तक यूँ ही धक्के खाती रहूँ।

“अब बोल.. मज़ा आ रहा है या नहीं?” अहाना ने मेरी घुंडी मसलते हुआ पूछा।“हूँ..” मैंने बस हुंकार ही भरी।“खुजली मिट रही है या नहीं तुम्हारी मुनिया की?” आगे रशीद ने पूछा।

मैंने मुस्करा कर चेहरा साइड में कर लिया और वह दोनों धीरे से हंस पड़े। कमरे में भले पंखा चलने की आवाज़ हो रही हो लेकिन मेरी योनि से उभरती वो ‘फच-फच’ की मधुर ध्वनि मेरे कानों में रस घोल रही थी।

फिर शायद उन दोनों में कुछ इशारा हुआ और राशिद ने मेरी योनि से अपना फुन्तडू बाहर निकल लिया और उसी पल में अहाना किसी चौपाये की पोजीशन में हो गयी।उसने अपने अगले हिस्से को दूध समेत बिस्तर से सटा लिया और चूतड़ों को इस हद तक हवा में ऊपर उठा दिया कि वो घुटनों के बल बैठे राशिद के लिंग के ठीक सामने एडजस्ट हो सकें।

और फिर जैसे अभी थोड़ी देर पहले फिल्म में देखा था, ठीक उसी अंदाज़ में वो अपनी मुट्ठी में अहाना के दोनों चूतड़ दबोच कर और अपना लिंग पीछे की तरफ से उसकी योनि में घुसा कर योनिभेदन करने लगा।

अब मैं उस अवस्था में पहुँच चुकी थी कि मुझे कुछ भी ख़राब, बुरा, अतिवाद या अजीब नहीं लग रहा था बल्कि सबकुछ ही अच्छा लग रहा था और मैं चाहती थी कि वो सब मेरे साथ हो।

राशिद के जोर-जोर से धक्के लगते रहे, अहाना की आहें निकलती रहीं और मैं उत्तेजित सी अपने हाथ से अपनी योनि सहलाते उन्हें देखती रही।

थोड़ी देर बाद राशिद ने मुझे इशारा किया कि मैं भी उसी पोजीशन में हो जाऊं.. अँधा क्या चाहे, दो आँखें ही न। उस वक़्त मेरी हालत वैसी ही हो रही थी।मैंने बिल्ली बनने में देर नहीं लगायी।और जब पीछे से उसका लिंग जगह बनाता योनि में घुसा तो ऐसे लगा जैसे खीरा-ककड़ी चटकी हो और ऐसा मज़ा आया जैसे जन्नत मिल गयी हो।

फिर उसने मेरे चूतड़ों को भी उसी तरह मसलते हुए धक्के लगाने शुरू किये। मेरे दिमाग में चिंगारियां छूटने लगीं जबकि अहाना साइड में लेटी हमे देखती अब आहिस्ता-आहिस्ता अपने दूध सहला रही थी.. उसके होंठों पर मुस्कराहट थी लेकिन मैं इस वक़्त सिर्फ अपने मज़े पर एकाग्र होना चाह रही थी।

थप-थप का एक कर्णप्रिय संगीत कमरे में पंखे की आवाज़ के साथ मिक्स हो कर गूंजता रहा और मैं जन्नत की सैर करती रही। नशे से मेरी आँखें तक मुंद गयीं थीं।

थोड़ी देर बाद यह सिलसिला फिर थमा और राशिद मुझसे अलग हो गया। वह बेड से नीचे उतर गया और अहाना को चित लिटा कर उसे एकदम किनारे खींच लिया, उस दिन की तरह.. और खुद नीचे फर्श पर बैठ उसकी जांघों में पकड़ बनाये मुंह से उसकी योनि पहले की तरह चाटने लगा।

“रज्जो.. मेरे दूध मसल और पी।” अहाना ने ऐंठते हुए कहा।मैं पास आ गयी और एक हाथ से उसका एक दूध सहलाने मसलने लगी जबकि दूसरे की घुंडी मुंह में लेके चुभलाने लगी और वह कमान की तरह तन कर सिसकारने लगी।“डालो अब।” फिर वह बोल पड़ी।

और राशिद उठ कर खड़ा हो गया। अपना समूचा बैंगन उसने गचाक से अहाना की मुनिया में पेल दिया और धडाधड़ धक्के लगाने लगा।“ऐसे ही.. और जोर से.. और.. आह.. ऐसे ही.. आह.. आह.. मैं गयी… आह.. आह.”ऐसे ही अनियंत्रित अंदाज़ में बड़बड़ाती अहाना एकदम तन गयी। बिस्तर की चादर उसने नोच डाली और गुर्राती हुई शिथिल पड़ गयी.. उसकी हालत से मैं समझ सकती थी कि वह आर्गेज्म तक पहुँच गयी थी।

“अब तुम आओ रज्जो, ध्यान रखना यह इस राउंड का लास्ट है.. मैं बह जाऊं उससे पहले ही तुम्हे मंजिल तक पहुँच जाना है।” राशिद ने बेड के दूसरे सिरे की तरफ मुझे उसी अंदाज़ में खींचते हुए कहा।

मैंने सहमति में सर हिलाया।

वह नीचे बैठ कर अब अहाना की तरह मेरी योनि भी चाटने लगा और मैं समझ न सकी कि जो मुझे थोड़ी देर पहले “छी” कहने लायक गन्दा लग रहा था, आखिर उसमे इतना मज़ा क्यों आता है।साथ ही उसने एक उंगली मेरे छेद में उतार दी और अंदर बाहर करने लगा।

“उफ़!”मैं बता नहीं सकती कि कैसा अनुभव था.. दिमाग की नसें खिंचने लगीं और सारे शरीर में एक अजीब आनंददायक लहर दौड़ने लगी।और जब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मुझे भी अहाना की तरह आखिर बोलना ही पड़ा- करो अब.. बर्दाश्त नहीं हो रहा।

वह उठ खड़ा हुआ और फिर एक तेज़ मस्ती भरी करह को मैं अपने होंठों से आज़ाद होने से न रोक सकी जब एक गर्म गोश्त की मीनार मेरी योनि में जगह बनाती अंदर तक धंस गयी।योनि पहले से पानी-पानी हो रही थी, वो भचाभच अपनी मुनिया भोंकने लगा और मैं जोर-जोर से सिसकारने लगी।

वैसे ही तेज़ धक्के लगते रहे और मैं कराहती सिसकारती रही.. शायद उन पलों में मैं भी अहाना की तरह कुछ न कुछ बोल ही रही थी लेकिन वह खुद मेरे ही समझ में नहीं आ रहा था और न ही मैं उस तरफ ध्यान दे पाने की हालत में थी।

और फिर वो मरहला भी आया जब दिमाग में एकदम से सनसनाहट भर गयी.. शरीर एकदम अकड़ गया और योनि जैसे बह चली। लेकिन यहाँ वह अहाना की तरह थमा नहीं बल्कि उसे अपना भी निकालना था तो चलता रहा और थोड़ी देर के बाद मैंने महसूस किया कि उसकी मुनिया फूल रही थी और कुछ गर्म-गर्म मेरी योनि में भरने लगा।

वह मेरे ही ऊपर गिर कर भैंसे की तरह हांफने लगा।

यह हमारे पहले राउंड का अंत था जहाँ हम तीनों ही अपनी मंजिल तक पहुंचे थे.. इसके बाद अगले दो घंटे में दो और राउंड चले थे जहाँ हमने उस देखी हुई फिल्म की तरह और भी सारे आसन आजमाये थे और कैसा भी मज़ा बाकी न रखा था.. बस एनल सेक्स को छोड़ कर।

कहानी कैसी लगी, यह ज़रूर बताएं। मेरी मेल आईडी हैsupport@mohakkisse.comफेसबुक: https://www.facebook.com/imranovaish

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Ek Chudai Ka Samjhota
Group Sex Story

Ek Chudai Ka Samjhota

Hello dosto, mera naam Vivek hai aur apne mere baare me toh meri pichli kahani me pad liya hoga par fir bhi main apko aaj apne baare me bta deta hoon.

11 मिनट 1,039
Bhai Behen Aur Group Chudai
Group Sex Story

Bhai Behen Aur Group Chudai

Hello dosto mera naam Rahul hai me mumbai me rehta hoon aur mai sex stories ka regular reader hoon aur mujhe incest stories read krna bahot pasand hai aur mujhe brother sister sex bahot achha lgta hai. Me jb bhi bhai bahen sex stories read krta th...

16 मिनट 782
अपनी गर्लफ्रेंड को बड़े लंड से चुदवाया
Group Sex Story

अपनी गर्लफ्रेंड को बड़े लंड से चुदवाया

कॉलेज गर्ल फक स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड की चूत चुदाई के साथ मेरे एक दोस्त की गर्लफ्रेंड को चोदने की है. हमने अपनी गर्लफ्रेंड बदल कर चोदी, एक साथ भी चोदी.

17 मिनट 1,098

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

नीतीश कुमार 05

4 days ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

शैडो बॉय

3 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।