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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 345 बार

मेरी गांड एक बड़े लंड के नाम- 2

विरेन राठौर

12 Jul 2012 को प्रकाशित

मेरी गांड एक बड़े लंड के नाम- 2
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दोस्तो, आपने मेरी अब तक की एनल सेक्स स्टोरी के पहले भागमेरी गांड एक बड़े लंड के नाम- 1में पढ़ा था कि सुनील भैया मेरी गांड मारने के लिए मुझे लंड चुसा कर तैयार कर रहे थे.

अब आगे की एनल सेक्स स्टोरी:

मुझे आगोश में लेकर मदहोश करते हुए कब न जाने वो आए और कभी मेरी गांड तक का सफर उन्होंने मिनटों में तय कर लिया … मुझे कुछ पता भी नहीं चला.

उन्होंने मेरे गांड की फांकों को पूरा खोला और टांगों को भी जितना दूर कर सकते थे … किया. जब मेरा छेद उनको दिखने लगा, तब उन्होंने मेरे छेद पर एक गरम हवा मारी और मैं मदहोशी में कहीं खो गया.

मुझे पता था कि अब वो मेरी गांड को चाटने वाले हैं … क्योंकि मूवी में मैंने देखा था. लेकिन 3-4 बार सिर्फ गरम हवा ही आयी.

सुनील भैया भी मेरी गांड से पूरी तरह से सुख लेना चाहते थे, तो मेरे को पूरा तड़पा रहे थे.

उसी समय मैंने गांड को कुछ और खोलने की कोशिश की और छेद की कसमसाहट से वो समझ गए कि मुझे क्या चाहिए. पर वो बस हवा मारे जा रहे थे.

‘अब तड़पाओ मत प्लीज..!’

मेरे ये कहते ही भैया ने अपने होंठ मेरी गांड पर रख दिए.मेरी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं. ये वो सुख था … जो रेगिस्तान में प्यासे को पानी से मिलता है, गरीब को लगान माफ़ी से … और भूखे को खाने से मिलता है.

भैया ने अभी सिर्फ होंठ रखे थे और कुछ भी नहीं किया था. मगर मुझे लज्जत मिलने लगी थी.

तभी उनको कुछ नया तरीका सूझ गया, तो उन्होंने मुझे खड़ा होने को कहा.

वो खुद बेड के सहारे वाली जगह पर आए और मुझे अपने सामने खड़ा कर लिया. जिससे कि मेरी गांड उनके मुँह की तरफ हो जाए. मैंने उनके कूल्हों के दोनों और अपने दोनों पैर टिकाए और गांड को उनके मुँह के पास लाकर खड़ा रहा.

अब उन्होंने अपने पैर सीधे किए और मुझे उन पैरों पर लेट जाने को कहा. मैंने घुटने मोड़े … और उनके पैरों पर मुँह के बल लेट गया, जिससे कि मेरा पेट उनके घुटनों पर आ जाए. मेरे सर को उन्होंने अपने पंजों के बीच में फंसा लिया.

अब उन्होंने जोर लगा कर अपने घुटने मोड़े, जिससे मेरा शरीर हवा में हुआ … और मेरी गांड उनके बिल्कुल सामने हो गई. अब वो पूरे आराम से बैठकर मेरी गांड का रसपान कर सकते थे. मैं उनके मुड़े हुए घुटनों पर टंगा हुआ था और पंजों पर सर को एक तरफ करके लेट गया था.

फिर धीरे से उन्होंने अपनी जीभ को मेरी गांड के छेद के नीचे रखा और उसे चाटना शुरू कर प्रिया. मेरी गांड को पूरा गीला होते हुए फील कर रहा था. मैंने उनके पैरों को उनके पिंडलियों से दोनों हाथों से कसकर ऐसे पकड़ लिया, जैसे कि बाइक पर पकड़ा था.

उन्होंने गांड चटाई का जो चरम सुख मुझे प्रिया … उसे याद करके मेरी गांड आज भी उस दिन के लिए मुझे दुआएं देती है.

अपनी जीभ से मेरी गांड चोदते हुए उन्होंने मेरी गांड के पूरा गीला किया और गांड की हर एक नस को अपने लंड के स्वागत के लिए तैयार कर प्रिया.

आधे घंटे की इस जीभ और मुँह से हुई चुदाई से मैं मदहोशी में बस मरने ही वाला था.

मुझे इस तरह अधमरा होता देख, उन्होंने मेरे शरीर को अपने बेड के बीचों बीच ले लिया और चारों दिशाओं में चारों हाथ पैर फैला दिए. मानो मेरा शरीर चुदाई से पहले ही चारों दिशाओं को नमस्कार कर रहा हो.

अब उन्होंने मेरे ऊपर आकर धीरे से अपने लंड को मेरे साफ़ दिख रहे लाल गीले छेद पर रखा और अपना तीखा पैना सुपारा मेरे छेद पर रगड़ प्रिया. लंड अन्दर नहीं गया … बल्कि चिकनाई से फिसल कर मेरी कमर तक आ गया.

मेरी सिसकारी निकल गयी और मैंने एक तीखी सांस में ये जता प्रिया कि मुझे मजा आ रहा था.

फिर मुझे वैसे ही लिटाए रखकर उन्होंने अपना उल्टा हाथ मेरे बायीं ओर बेड पर टिकाया … और दाएं हाथ से लंड को पकड़ कर गांड पर रगड़ना शुरू कर प्रिया.सुनील भैया ने अपने लंड को जब तक रगड़ा, जब तक उनके सुपारे को मेरी गांड पर लैंडिंग के लिए सही पोजीशन न मिल गयी.

फिर थोड़ा जोर लगा कर उन्होंने अपना सुपारा मेरे अन्दर उतार प्रिया. किसी बड़े आंवले सरीखा सुपारा मेरी छोटी सी गांड में घुसा, तो मैं चीख उठा. चारों हाथ पैरों को समेट कर दर्द को सहन करने लगा.

मैंने एक हाथ से सुनील भैया को हटने को कहा और दूसरे हाथ से बेडशीट को कसकर पकड़ लिया. दर्द नाकाबिले बर्दाश्त होने वाला था … पहली गांड चुदाई का टाइम था. ऐसा तो होना ही था, पर न तो सुनील भैया को इस बारे में कुछ पता था … न ही मुझे.

सुनील भैया ने तुरंत मेरे होंठों को किस किया और सान्त्वना दी कि सब ठीक हो जाएगा.

मैं मदहोशी से बेहोशी की ट्रिप पर निकल चुका था और सुनील भैया मेरे हाथ पैरों को पकड़ कर मुझे होश में लाने की कोशिश कर रहे थे.

मेरी हालत ख़राब हो रही थी और दर्द ऐसा कि कोई यमदूत लेने ही आ गया हो.

जैसे तैसे मैंने होश संभाला, तो खुद को सुनील भैया से चिपका लिया. और सुनील भैया ने कस कर मुझे पकड़ लिया.

कुछ देर बाद बाद जब दर्द कम हुआ तो सुनील भैया ने मुझे घूमने को कहा … ताकि वे देख सकें कि हुआ क्या था. मैं पीछे हुआ, तो देखा की गांड से निकला खून का रेला जांघ पर आकर अब सूख चुका था. बेडशीट पर कुछ खून के धब्बे भी थे.

सुनील भैया को पता लगा गया कि गांड की सील टूट चुकी है. अब दर्द नहीं होगा. तो उन्होंने हिम्मत बांधने के लिए मेरा जोश बढ़ाया.

सुनील भैया- बस इतना ही दम था … या अभी कुछ और बची है … अबे शेर का बच्चा है तू … कुछ भी नहीं हुआ. बस ये तो वो दर्द था, जो एक बार होता ही है. वो तुझे हो गया … चल अब तुझे थोड़ी दवाई लगा देता हूँ … ताकि सब ठीक हो जाए.

भैया ने पास ही पड़ा अपना सफ़ेद रूमाल लिया और पानी की बोतल से थोड़ा सा पानी उस पर लगा कर गांड को साफ कर प्रिया … ताकि वे दवाई लगा सकें. करना तो उनको वो खून का रेला साफ़ था, जो मेरे डर का कारण बन सकता था.

सुनील भैया ने पास ही के ड्रावर में से लिग्नोकान नाम की ट्यूब निकाली और मेरी गांड में उसकी पाइप को अन्दर तक डाल कर दवाई को अन्दर तक डाल प्रिया. दवाई की ठंडक अन्दर गई … तो मैंने देखा कि भैया ने वही ट्यूब अपने लौड़े पर भी लगा ली है.

मैंने मिमियाते हुए पूछा- आपको भी लगी क्या?‘अरे नहीं रे … ये तो अब तेरे अन्दर तक दवाई लगानी है न … इसलिए लगा रहा हूँ. तू मेरा विश्वास कर … सब ठीक होगा, चल अब घूम जा.’

मैंने डरते हुए कहा- नहीं भैया … ये मूसल मेरी जान ले लेगा.‘ये चमड़े का इंजेक्शन नहीं लगा, तो तेरी जान चली जाएगी … अन्दर भी दवाई लगाना जरूरी है … तू जल्दी से घूम जा.’

भैया ने मुझे घुमाया और खुद मेरी जांघों पर आकर बैठ गए.

उन्होंने इस बार सुपारा टिकाते ही अन्दर डाल प्रिया. मेरी गांड दवा के प्रभाव से सुन्न हो चुकी थी, तो मुझे पता ही नहीं चला.

फिर भैया ने पूछा- कैसा लग रहा है?‘ठंडा!’मेरी बचकानी बात से भैया हंसने लगे और बोले- ठीक है ये ठंडक अब अन्दर तक जाएगी.

मैं मुस्कुरा प्रिया.

भैया ने कहा- चल अब एक गेम खेलते हैं … मैं तुझे 10 बातें बताता हूँ, जो तुझे नहीं पता हैं … और तू मुझे बताना कि कौन सी सही है और कौन सी गलत है.मैंने कहा- ठीक है.सुनील भैया- बता तेरे लंड कितने हैं?‘एक..’

भैया ने तभी सुपारा गांड के अन्दर और सरका प्रिया.

‘सही, गोलियां कितनी हैं तेरी?’‘दो.’‘सही … टाइम क्या हुआ है अभी?’‘तीन..’‘सही … प्रिंसिपल के कितने बच्चे हैं?’‘चार.’

‘सही … एक हाथ में कितनी फिंगर्स होती हैं?’‘पांच … पर ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हो आप!’‘सही … जो चौका सीधा उड़ते हुए बॉउंड्री से बाहर जाए … तो कितने रन काउंट होते हैं?’‘छह..’

‘सही, ये कौन सा सवाल नम्बर है?’‘सात..’

‘सही … आज तूने कितने पैग पिए थे?’‘आठ..’‘मेरा लंड कितने इंच का है?’‘नौ.’‘तुझे कुछ फील हुआ?’मैंने पूछा- क्या?सुनील भैया- यही कि मेरे 9 इंच का लौड़ा पूरा तेरी गांड के अन्दर है … और तुझे पता भी नहीं चला.

भैया ने हर सवाल के जवाब पर अपना लौड़ा एक इंच अन्दर सरका प्रिया था … और जैली की वजह से सुन्न हुई मेरी गांड में ये चिड़िया बना बाज़ … कब पूरा चला गया, मुझे पता भी नहीं चला.

सुनील भैया अब बिना हिले ऐसे ही बिना मेरे शरीर पर कोई वजन डाले, अपना पूरा नौ इंच का लंड मेरी गांड में फंसाये हुए थे.

कुछ देर में जब मेरी गांड ने कसमसाना बंद किया और दर्द होने लगा, तो भैया ने अपना लंड हिलाना चालू कर प्रिया. वो अपने लंड को थोड़ा सा ही बाहर लाते और फिर वापस अन्दर ले जाते. इसी तरह से उन्होंने एक इंच एक इंच करके पूरा लौड़ा अन्दर कर प्रिया था और अब उसे अन्दर बाहर करना चालू कर प्रिया.

कुछ देर लंड चलाने के बाद उन्होंने खुद को मेरे नीचे लिटाया और खुद मुझे लंड पर हिलने को कहा. मैंने धीरे से लंड को अपने ही हाथ से गांड के छेद पर रखा और वो धीरे धीरे करके मेरी खुली हुई गांड में सरक गया. सुनील भैया का लंड मेरी गांड में था और मैं भैया के ऊपर था.

मैंने अब लंड पर उछलना चालू किया … भैया मेरी गांड को पकड़ कर ऊपर नीचे करने में लग गए. वे मेरी गांड को परफेक्ट रिदम में हिला रहे थे.

कुछ ही देर ये खेल चला होगा कि भैया को अब बस झड़ना था … क्योंकि जैली की वजह से उन्हें ज्यादा मजा नहीं आ रहा था. साथ ही वो नहीं चाहते थे कि मेरी गांड आज ही फट जाए. कल मेरी गांड की फिर से चुदाई की सोच कर उन्होंने मेरी गांड पर धक्कों को बढ़ा प्रिया. जैली का असर कम हो रहा था … और मुझे दर्द होने लगा था.

भैया ने मुझे गांड से बिना लंड निकले धक्का प्रिया, तो मैं बेड पर लेट गया और भैया मेरे सामने आ गए.

भैया ने मुझे मिशिनरी पोजीशन में कुछ दस मिनट तक आराम से धीरे प्यार से जोर से धक्कों से किस करते हुए, मेरे बोबे काटते हुए अच्छे से चोदा और चरम रीमा पर आने से पहले मेरा लंड हिलाने लगे.

अब उनके धक्कों की स्पीड बढ़ गयी थी. भैया ने मेरी जांघों को टाइट पकड़ लिया था और खुद बेड से नीचे खड़े होकर मुझे बेड के कार्नर पर ले आए.

कुछ ही देर में भैया ने एक जबरदस्त किस किया और मेरी गांड में पहली बार मुझे किसी गरम लावा के फूटने का पता पड़ा.

लावा भरा पड़ा था … शायद इसी वजह से कुछ 17-18 झटकों में मेरी पूरी गांड भर गई.

अब भैया ने मेरा लंड हिलाना चालू किया और भैया का बाज़ से चिड़िया बनता लंड मेरी गांड से ढीला होकर धीरे धीरे निकलने लगा. मैंने अपने हाथ से बेडशीट को कसके पकड़ा, तो भैया ने समझ लिया कि मैं रसधार देने के लिए तैयार हूँ.

मैंने कुछ दो मिनट के बाद ही रस की धार चला दी … जो सीधे भैया की आंख के नीचे लगी. दूसरी धार उनकी मूंछों और होंठों पर, तीसरी धार केवल होंठों के नीचे ही पहुंची. तब तक भैया ने झट से मेरे लंड लपक कर अपने मुँह में ले लिया.

मेरे लंड से टपकती आखिरी धार को साफ़ कर लेने के बाद वो मेरे मुँह के पास आए और मुझे चूमकर मेरे ही रस का स्वाद चखा प्रिया.

‘तेरे वाले का अच्छा है या मेरा? बता तूने तो दोनों टेस्ट कर लिए हैं?’

ये कहकर भैया मुस्कुरा कर मुझ पर फिर से टूट पड़े और हम दोनों लिपट कर उसी हालत में सो गए.

मेरी गांड के उद्घाटन पर आपके लंड में कितनी जान आई … या चुत में क्या कुछ हुआ … प्लीज़ झड़ने से पहले मेरी इस गे एनल सेक्स स्टोरी के लिए मेल लिखना न भूलें.

आपका ही प्यारा सा गांडूsupport@mohakkisse.com

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मेरी गांड एक बड़े लंड के नाम

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

प्रकाश वागेश्वरी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

डॉ कामेश

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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