कोई देख रहा है

अंगूर का मजा किशमिश में-2

लेखक: सारिका कंवल दिनांक: 17-06-2023 पठन समय: 10 मिनट

सारिका कंवलअगले दिन मेरी सहेली अपने दोस्त के साथ मुझसे मिलने आई, उसने मुझसे मुलाकात करवाई, उसका नाम अजय था।कद काफी लम्बा करीब 6 फ़ीट से ज्यादा, काफी गोरा, चौड़ा सीना, मजबूत बाजू देख कर लगता नहीं था कि उम्र 54 की होगी।बाकी मेरे घरवालों से भी मिलवाया। मैंने उनको नाश्ता पानी प्रिया फ़िर इधर-उधर की बातें करने लगे।

कुछ देर बाद अजय ने कहा- मुझे गाँव देखना है।इस पर मेरी सहेली ने मुझे साथ चलने को कहा, मैंने मना किया पर मेरी भाभी और भाई के कहने पर कि मेहमान हैं वो.. मैं चलने को तैयार हो गई।जाते समय भाभी ने कहा- खाना हमारे घर पर ही खाना।

मैंने साड़ी पहन रखी थी, पर मेरी सहेली ने सलवार-कमीज। रास्ते में हम गाँव वालों से मिलते गए और सबको बताया कि वो एक समाजसेवक हैं और हमारे गाँव को देखने आए है। गाँव वालों और मेरे घरवालों को बात-व्यवहार से मुझे अब यकीन हो चला था कि हमारे साथ घूमने-फ़िरने से किसी को हम पर शक नहीं होने वाला था।

पर मेरे दिमाग में यह ख्याल था कि कहीं ये लोग मुझे अभी सम्भोग के लिए तो साथ नहीं ले जा रहे, पर मैं शर्म के मारे कुछ नहीं कह रही थी।फ़िर सुधा ने अजय से कहा- नदी किनारे चलते हैं।इस पर अजय बहुत खुश हुआ और अपना कैमरा निकाल कर इधर-उधर की तस्वीरें लेने लगा।

मैं बता दूँ कि हमारे गाँव की नदी चट्टानों वाली है। हम जब नदी के पास पहुँचे तो अजय रुक गया और कहा- मुझे पेशाब लगी है।यह सुन मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया।

उसके पेशाब करने की जब आवाज आई तो मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो हैरान रह गई। वो बस एक हाथ मुझसे दूर था और अपना लिंग बाहर निकाले पेशाब कर रहा था और मेरी सहेली उसको देख कर अपने गाँव के बारे में बता रही थी। वो उससे ऐसे बात कर रही थी जैसे वो पेशाब नहीं कर रहा, बल्कि यूँ ही खड़ा है।

तभी उन दोनों ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराए और फ़िर उसने अपना लिंग हिला कर पेशाब की आखिरी बूँद गिराई और लिंग अन्दर कर लिया और हम चलने लगे।उसी दौरान मैंने उसका लिंग देखा। पेशाब के दौरान उसने अपने लिंग के ऊपर के चमड़े को खींच लिया था, जिससे उसका सुपारा लाल और गोल दिख रहा था।

मैं अब यह सोचने पर मजबूर हो गई कि आखिर इसका ‘ये’ उत्तेजित होने पर कितना विशाल हो जाता होगा।वे लोग आपस में बातें करते जा रहे थे। मैं ज्यादा कुछ नहीं बोल रही थी, मेरे दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। तभी हम नदी के किनारे पहुँच गए। अब हम उसको अपने बचपन की कहानियाँ सुनाने लगे।

मेरी सहेली ने तभी उसको बताया- हम लोग बचपन में इस नदी में नंगी होकर भी नहाती थी।इस पर अजय ने कहा- कितना मजा आएगा अगर अभी तुम दोनों नंगी होकर मेरे सामने नहाओ…हाहा…हाहा…!

तब सुधा ने मुझसे कहा- क्या जरूरी है कि हम दूसरों के लिए ही अपना ख्याल रखें, तुम बिल्कुल गँवारों की तरह बातें करती हो, लोग अपना ख्याल खुद के लिए भी रखते हैं !अजय- देखो सारिका, तुममें अभी बहुत कुछ है, तुम्हारी खूबसूरती तो लाखों मर्दों को पागल कर देगी !मेरी सहेली- हाँ.. बस अपना ये पेट अन्दर कर लो तो !”

यह कह कर वो लोग हँसने लगे, पर मुझे ये अजीब लगा क्योंकि ऐसा मुझे पहले किसी ने नहीं कहा था।फ़िर उन लोगों ने मुझसे माफ़ी माँगी और कहा कि बस मजाक कर रहे थे।मैं भी उनकी बातों को ज्यादा दिमाग में न लेते हुए बातें करने लगी। इधर-उधर की बातें करते काफी समय हो चुका था, तो मैंने वापस चलने को कहा।

तब अजय ने कहा- कुछ देर और रुकते हैं.. काफ़ी रोमाँटिक मौसम है।फ़िर बात चलने लगी कि खुले में सेक्स करने का अलग ही मजा होता है।

अजय ने कहा- अगर मुझे ऐसी जगह मिले तो मैं घर के बिस्तर पर नहीं बल्कि यहीं खुले में सेक्स करूँगा !तब मेरी सहेली ने कहा- सोचते क्या हो, सारिका तो यहीं है, कर लो इसके साथ !तब मैंने शर्माते हुए कहा- पागल है क्या तू.. जो मन में आता है बक देती है !उसने कहा- इसमें शर्माना क्या.. तुम दोनों को मिलवाया ही इसीलिए है !

तब अजय मेरी तरफ़ मुस्कुराते हुए देखने लगा। उसकी मुस्कुराहट में वासना झलक रही थी और मेरा सिर शर्म से झुक गया।अब मेरी सहेली ने कहा- मौका अच्छा है.. मैं पहरेदारी करूँगी.. तुम दोनों मजे करो।

पर मैं सिर झुकाये थी, तब अजय मेरे पास आया और उसने मेरी कमर पर हाथ रख कर, मुझे चूम लिया।मेरा पूरा बदन सिहर गया। जब मेरा कोई विरोध नहीं देखा तो उसने मेरी कमर को कस लिया और मेरे मुँह से मुँह लगा कर मुझे चूमने लगा।मुझे तो जैसे होश ही नहीं रहा था।

पर कुछ देर बाद मैंने उससे खुद को आजाद कराया और कहा- यह जगह सही नहीं है, कहीं और करेंगे।पर अजय ने जोर प्रिया- सुधा देख रही है, कोई आएगा तो हमें कह देगी !पर मैंने उसको मना कर प्रिया।

तब मेरी सहेली ने कहा- रहने दो, अगर वो नहीं चाहती यहाँ.. तो कहीं और करना.. अभी अपने पास कुछ दिन भरपूर समय है।अजय ने कहा- मेरा अब बहुत मन कर रहा है, मैं अभी सेक्स करना चाहता हूँ !पर मैंने साफ़ मना कर प्रिया।

इस पर अजय ने कहा कि अब वो सुधा के साथ करेगा। इसलिए हम वहाँ से चल कर एक ऐसी जगह गए जहाँ छुपा जा सकता था।मेरी सहेली ने मुझसे कहा- यहीं पास में रहो और अगर कोई आए तो बता देना।

अब मेरी सहेली ने अपना पजामे का नाड़ा खोला और उसे नीचे सरका कर बैठ गई। मैंने सोचा ये कौन सा तरीका है, फ़िर देखा कि वो पेशाब कर रही है और वहीं अजय अपनी पतलून नीचे करके लिंग बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिला रहा था। मैंने जैसा देखा था अब उसका लिंग वैसा नहीं था।

अब वह काफी सख्त और लम्बा हो चुका था, करीब 8 इन्च लम्बा।मैं हैरान थी, उसके लिंग के आकार को देख कर और अब मुझे भी कुछ होने लगा था, पर मैंने खुद पर काबू किया।सुधा पेशाब कर रही थी, तब अजय ने झुक कर हाथ से उसके पेशाब को उसकी योनि में फ़ैला प्रिया। मुझे ये देख कुछ अजीब लगा पर मैं खामोशी से देख रही थी।

अब अजय ने अपने लिंग को मेरी सहेली के मुँह के आगे किया, तो उसने पहले उसके लिंग को अच्छे से चूमा, फ़िर मुँह में भर कर चूसने लगी।अजय उसके बालों को हटा कर उसके मुख में अपना लिंग अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद सुधा खड़ी हो गई और अजय ने उसको आगे की तरफ झुकने को कहा। फ़िर अजय ने झुक कर उसकी योनि को कुछ देर प्यार किया, इस दौरान सुधा भी गर्म हो चुकी थी।कुछ देर के मुख-मैथुन के बाद अजय सीधा हो गया, पर मेरी सहेली उसी तरह एक पत्थर के सहारे झुकी रही।

अजय ने उसके दोनों पैरों को फ़ैला प्रिया, फ़िर अपने लिंग पर थूक लगा कर अच्छे से फ़ैला प्रिया और उसकी योनि में अपना लिंग लगा प्रिया, कुछ देर लिंग से योनि को रगड़ने के बाद धक्का प्रिया, लिंग अन्दर योनि में चला गया और मेरी सहेली के मुँह से एक मादक आवाज निकली- म्म्म्म्म्स् स्स्स्स्ष्ह्ह्ह्ह् !अजय ने अब पीछे से उसके दोनों स्तनों को दबोचा और धक्के लगाने लगा।वो लगातार 15-20 धक्के लगाता तेजी में फ़िर उसकी योनि में पूरी ताकत से पूरा लिंग घुसा देता और अपनी कमर को गोल-गोल घुमाने लगता।सुधा भी सिसकारी लेते हुए अपने विशाल कूल्हों को उसी तरह घुमाते हुए उसका साथ देती। उनकी कामुकता धक्कों के साथ और अधिक होती जा रही थी।अब वे लोग आपस में बातें कर रहे थे।सुधा कह रही थी- अजय ऊपर और ऊपर हाँ.. वही… वही.. एक बार और जानू प्लीज़ एक और जोर से… आह !अजय भी उसकी कहने के अनुसार धक्के लगा रहा था, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। वो हाँफ़ रहा था, पर इससे उसके धक्कों में कोई बदलाव नहीं आ रहा था।वो तो मस्ती में उसे धक्के मार रहा था और सुधा भी उसका साथ दे रही थी।अब अजय ने उसको कहा- चलो कुतिया बन जाओ !तब सुधा पूरी तरह जमीन पर झुक गई और दोनों हाथ जमीन पर रख दिए।

अजय अब उसके ऊपर चला गया और उसके कमर के दोनों तरफ़ अपने पैर फ़ैला कर झुक गया और लिंग को उसकी योनि में घुसा प्रिया और सम्भोग करने लगा।दोनों काफी गर्म हो चुके थे। इस बार दोनों इस तरह मेरे सामने थे कि उनके कूल्हे मेरे सामने थे। मुझे अजय का लिंग उसकी योनि में साफ़ साफ़ घुसता निकलता दिख रहा था।अब तो उसकी योनि से चिपचिपा पानी भी दिख रहा था जो उसकी जाँघों से बहता हुआ नीचे जा रहा था।दोनों के मुँह से अब सिसकारियाँ निकलनी तेज़ हो गई थीं।मेरी सहेली बार-बार कह रही थी- जानू सीधे-सीधे बुर में.. ह्ह्ह्ह्ह्म और अन्दर !

करीब 30 मिनट के इस खेल के साथ अजय 10-12 जोरदार धक्कों के साथ शांत हो गया और उसके ऊपर ही हाँफता रहा, फ़िर अलगहुआ।जब उससे अलग हुआ तो उसकी योनि से अजय का वीर्य बह निकला, जिसे बाद में उसने साफ़ किया और पजामा पहन लिया। अब हम वापस आने लगे।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com