किस्से पर वापस जाएं
कोई देख रहा है पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 767 बार

अंगूर का मजा किशमिश में-2

सारिका कंवल

13 May 2012 को प्रकाशित

अंगूर का मजा किशमिश में-2
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

सारिका कंवलअगले दिन मेरी सहेली अपने दोस्त के साथ मुझसे मिलने आई, उसने मुझसे मुलाकात करवाई, उसका नाम विजय था।कद काफी लम्बा करीब 6 फ़ीट से ज्यादा, काफी गोरा, चौड़ा सीना, मजबूत बाजू देख कर लगता नहीं था कि उम्र 54 की होगी।बाकी मेरे घरवालों से भी मिलवाया। मैंने उनको नाश्ता पानी दिया फ़िर इधर-उधर की बातें करने लगे।

कुछ देर बाद विजय ने कहा- मुझे गाँव देखना है।इस पर मेरी सहेली ने मुझे साथ चलने को कहा, मैंने मना किया पर मेरी भाभी और भाई के कहने पर कि मेहमान हैं वो.. मैं चलने को तैयार हो गई।जाते समय भाभी ने कहा- खाना हमारे घर पर ही खाना।

मैंने साड़ी पहन रखी थी, पर मेरी सहेली ने सलवार-कमीज। रास्ते में हम गाँव वालों से मिलते गए और सबको बताया कि वो एक समाजसेवक हैं और हमारे गाँव को देखने आए है। गाँव वालों और मेरे घरवालों को बात-व्यवहार से मुझे अब यकीन हो चला था कि हमारे साथ घूमने-फ़िरने से किसी को हम पर शक नहीं होने वाला था।

पर मेरे दिमाग में यह ख्याल था कि कहीं ये लोग मुझे अभी सम्भोग के लिए तो साथ नहीं ले जा रहे, पर मैं शर्म के मारे कुछ नहीं कह रही थी।फ़िर सुधा ने विजय से कहा- नदी किनारे चलते हैं।इस पर विजय बहुत खुश हुआ और अपना कैमरा निकाल कर इधर-उधर की तस्वीरें लेने लगा।

मैं बता दूँ कि हमारे गाँव की नदी चट्टानों वाली है। हम जब नदी के पास पहुँचे तो विजय रुक गया और कहा- मुझे पेशाब लगी है।यह सुन मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया।

उसके पेशाब करने की जब आवाज आई तो मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो हैरान रह गई। वो बस एक हाथ मुझसे दूर था और अपना लिंग बाहर निकाले पेशाब कर रहा था और मेरी सहेली उसको देख कर अपने गाँव के बारे में बता रही थी। वो उससे ऐसे बात कर रही थी जैसे वो पेशाब नहीं कर रहा, बल्कि यूँ ही खड़ा है।

तभी उन दोनों ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराए और फ़िर उसने अपना लिंग हिला कर पेशाब की आखिरी बूँद गिराई और लिंग अन्दर कर लिया और हम चलने लगे।उसी दौरान मैंने उसका लिंग देखा। पेशाब के दौरान उसने अपने लिंग के ऊपर के चमड़े को खींच लिया था, जिससे उसका सुपारा लाल और गोल दिख रहा था।

मैं अब यह सोचने पर मजबूर हो गई कि आखिर इसका ‘ये’ उत्तेजित होने पर कितना विशाल हो जाता होगा।वे लोग आपस में बातें करते जा रहे थे। मैं ज्यादा कुछ नहीं बोल रही थी, मेरे दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। तभी हम नदी के किनारे पहुँच गए। अब हम उसको अपने बचपन की कहानियाँ सुनाने लगे।

मेरी सहेली ने तभी उसको बताया- हम लोग बचपन में इस नदी में नंगी होकर भी नहाती थी।इस पर विजय ने कहा- कितना मजा आएगा अगर अभी तुम दोनों नंगी होकर मेरे सामने नहाओ…हाहा…हाहा…!

तब सुधा ने मुझसे कहा- क्या जरूरी है कि हम दूसरों के लिए ही अपना ख्याल रखें, तुम बिल्कुल गँवारों की तरह बातें करती हो, लोग अपना ख्याल खुद के लिए भी रखते हैं !विजय- देखो सारिका, तुममें अभी बहुत कुछ है, तुम्हारी खूबसूरती तो लाखों मर्दों को पागल कर देगी !मेरी सहेली- हाँ.. बस अपना ये पेट अन्दर कर लो तो !”

यह कह कर वो लोग हँसने लगे, पर मुझे ये अजीब लगा क्योंकि ऐसा मुझे पहले किसी ने नहीं कहा था।फ़िर उन लोगों ने मुझसे माफ़ी माँगी और कहा कि बस मजाक कर रहे थे।मैं भी उनकी बातों को ज्यादा दिमाग में न लेते हुए बातें करने लगी। इधर-उधर की बातें करते काफी समय हो चुका था, तो मैंने वापस चलने को कहा।

तब विजय ने कहा- कुछ देर और रुकते हैं.. काफ़ी रोमाँटिक मौसम है।फ़िर बात चलने लगी कि खुले में सेक्स करने का अलग ही मजा होता है।

विजय ने कहा- अगर मुझे ऐसी जगह मिले तो मैं घर के बिस्तर पर नहीं बल्कि यहीं खुले में सेक्स करूँगा !तब मेरी सहेली ने कहा- सोचते क्या हो, सारिका तो यहीं है, कर लो इसके साथ !तब मैंने शर्माते हुए कहा- पागल है क्या तू.. जो मन में आता है बक देती है !उसने कहा- इसमें शर्माना क्या.. तुम दोनों को मिलवाया ही इसीलिए है !

तब विजय मेरी तरफ़ मुस्कुराते हुए देखने लगा। उसकी मुस्कुराहट में वासना झलक रही थी और मेरा सिर शर्म से झुक गया।अब मेरी सहेली ने कहा- मौका अच्छा है.. मैं पहरेदारी करूँगी.. तुम दोनों मजे करो।

पर मैं सिर झुकाये थी, तब विजय मेरे पास आया और उसने मेरी कमर पर हाथ रख कर, मुझे चूम लिया।मेरा पूरा बदन सिहर गया। जब मेरा कोई विरोध नहीं देखा तो उसने मेरी कमर को कस लिया और मेरे मुँह से मुँह लगा कर मुझे चूमने लगा।मुझे तो जैसे होश ही नहीं रहा था।

पर कुछ देर बाद मैंने उससे खुद को आजाद कराया और कहा- यह जगह सही नहीं है, कहीं और करेंगे।पर विजय ने जोर दिया- सुधा देख रही है, कोई आएगा तो हमें कह देगी !पर मैंने उसको मना कर दिया।

तब मेरी सहेली ने कहा- रहने दो, अगर वो नहीं चाहती यहाँ.. तो कहीं और करना.. अभी अपने पास कुछ दिन भरपूर समय है।विजय ने कहा- मेरा अब बहुत मन कर रहा है, मैं अभी सेक्स करना चाहता हूँ !पर मैंने साफ़ मना कर दिया।

इस पर विजय ने कहा कि अब वो सुधा के साथ करेगा। इसलिए हम वहाँ से चल कर एक ऐसी जगह गए जहाँ छुपा जा सकता था।मेरी सहेली ने मुझसे कहा- यहीं पास में रहो और अगर कोई आए तो बता देना।

अब मेरी सहेली ने अपना पजामे का नाड़ा खोला और उसे नीचे सरका कर बैठ गई। मैंने सोचा ये कौन सा तरीका है, फ़िर देखा कि वो पेशाब कर रही है और वहीं विजय अपनी पतलून नीचे करके लिंग बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिला रहा था। मैंने जैसा देखा था अब उसका लिंग वैसा नहीं था।

अब वह काफी सख्त और लम्बा हो चुका था, करीब 8 इन्च लम्बा।मैं हैरान थी, उसके लिंग के आकार को देख कर और अब मुझे भी कुछ होने लगा था, पर मैंने खुद पर काबू किया।सुधा पेशाब कर रही थी, तब विजय ने झुक कर हाथ से उसके पेशाब को उसकी योनि में फ़ैला दिया। मुझे ये देख कुछ अजीब लगा पर मैं खामोशी से देख रही थी।

अब विजय ने अपने लिंग को मेरी सहेली के मुँह के आगे किया, तो उसने पहले उसके लिंग को अच्छे से चूमा, फ़िर मुँह में भर कर चूसने लगी।विजय उसके बालों को हटा कर उसके मुख में अपना लिंग अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद सुधा खड़ी हो गई और विजय ने उसको आगे की तरफ झुकने को कहा। फ़िर विजय ने झुक कर उसकी योनि को कुछ देर प्यार किया, इस दौरान सुधा भी गर्म हो चुकी थी।कुछ देर के मुख-मैथुन के बाद विजय सीधा हो गया, पर मेरी सहेली उसी तरह एक पत्थर के सहारे झुकी रही।

विजय ने उसके दोनों पैरों को फ़ैला दिया, फ़िर अपने लिंग पर थूक लगा कर अच्छे से फ़ैला दिया और उसकी योनि में अपना लिंग लगा दिया, कुछ देर लिंग से योनि को रगड़ने के बाद धक्का दिया, लिंग अन्दर योनि में चला गया और मेरी सहेली के मुँह से एक मादक आवाज निकली- म्म्म्म्म्स् स्स्स्स्ष्ह्ह्ह्ह् !विजय ने अब पीछे से उसके दोनों स्तनों को दबोचा और धक्के लगाने लगा।वो लगातार 15-20 धक्के लगाता तेजी में फ़िर उसकी योनि में पूरी ताकत से पूरा लिंग घुसा देता और अपनी कमर को गोल-गोल घुमाने लगता।सुधा भी सिसकारी लेते हुए अपने विशाल कूल्हों को उसी तरह घुमाते हुए उसका साथ देती। उनकी कामुकता धक्कों के साथ और अधिक होती जा रही थी।अब वे लोग आपस में बातें कर रहे थे।सुधा कह रही थी- विजय ऊपर और ऊपर हाँ.. वही… वही.. एक बार और जानू प्लीज़ एक और जोर से… आह !विजय भी उसकी कहने के अनुसार धक्के लगा रहा था, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। वो हाँफ़ रहा था, पर इससे उसके धक्कों में कोई बदलाव नहीं आ रहा था।वो तो मस्ती में उसे धक्के मार रहा था और सुधा भी उसका साथ दे रही थी।अब विजय ने उसको कहा- चलो कुतिया बन जाओ !तब सुधा पूरी तरह जमीन पर झुक गई और दोनों हाथ जमीन पर रख दिए।

विजय अब उसके ऊपर चला गया और उसके कमर के दोनों तरफ़ अपने पैर फ़ैला कर झुक गया और लिंग को उसकी योनि में घुसा दिया और सम्भोग करने लगा।दोनों काफी गर्म हो चुके थे। इस बार दोनों इस तरह मेरे सामने थे कि उनके कूल्हे मेरे सामने थे। मुझे विजय का लिंग उसकी योनि में साफ़ साफ़ घुसता निकलता दिख रहा था।अब तो उसकी योनि से चिपचिपा पानी भी दिख रहा था जो उसकी जाँघों से बहता हुआ नीचे जा रहा था।दोनों के मुँह से अब सिसकारियाँ निकलनी तेज़ हो गई थीं।मेरी सहेली बार-बार कह रही थी- जानू सीधे-सीधे बुर में.. ह्ह्ह्ह्ह्म और अन्दर !

करीब 30 मिनट के इस खेल के साथ विजय 10-12 जोरदार धक्कों के साथ शांत हो गया और उसके ऊपर ही हाँफता रहा, फ़िर अलगहुआ।जब उससे अलग हुआ तो उसकी योनि से विजय का वीर्य बह निकला, जिसे बाद में उसने साफ़ किया और पजामा पहन लिया। अब हम वापस आने लगे।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

प्रशंसिका की शादी वाले दिन भी चुदाई
कोई देख रहा है

प्रशंसिका की शादी वाले दिन भी चुदाई

चुदाई चुदाई चुदाई कहानी में पहले मिअने अपनी फैन गर्ल को चोदा. फिर उसने अपने मंगेतर से हुए अधूरे सेक्स की घटना मुझे सुनाई. उसके बाद मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को किसी अनजान लड़के से चुदाई करवाती देखा.

20 मिनट 680
पतिव्रता बीवी की चुदाई पुराने आशिक से- 9
कोई देख रहा है

पतिव्रता बीवी की चुदाई पुराने आशिक से- 9

Xxx डर्टी कहानी में मेरे लंड से चुदाने के बाद मेरी बीवी मेरे वीर्य से भरी चूत लेकर फिर से अपने बॉयफ्रेंड के कमरे में चली गयी. उसका यार मेरे रस से भरी उसकी चूत को चाटने लगा.

18 मिनट 984
दोस्त और उसकी मम्मी की चुदाई देखी
कोई देख रहा है

दोस्त और उसकी मम्मी की चुदाई देखी

Xxx माँ बेटा कहानी में मेरे दोस्त को पोर्न देखने का शौक था. एक बार पढ़ाई के लिए मैं उसके घर रुका. रात को वो अपनी मम्मी के पास सोया. मैं भी उसी बिस्तर पर था.

12 मिनट 299

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

सचिन शर्मीला

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।