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भाभी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 1,042 बार

अनोखे चूत लंड की अनोखी दुनिया-3

दीक्षा

01 Jul 2024 को प्रकाशित

अनोखे चूत लंड की अनोखी दुनिया-3
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रमा कुछ नहीं बोली, उसकी आंखों में खुशी और संतुष्टि के आँसू थे।बाबा जी उसकी भावना समझ गए और उसके कान में बोले- पगली, बाबा तीन महीने बाद फिर आयेंगे… पर तुम यहाँ से जाते ही अपने पति के साथ एक बार जरूर सम्बन्ध बना लेना.. वरना उसे शक हो जाएगा.रमा कुछ बोली नहीं, बस उसने हाँ में सिर हिला प्रिया।

बाबा जी तीन साल लगातार आते रहे, रमा को तीन संतानों की प्राप्ति हुई पर फिर वो किसी बाहर देश चले गए और रमा बेचारी फिर अकेली रह गई। और आगे के इन सालों में तो जैसे रमा ने खुद को औरत मानना ही छोड़ प्रिया था, पर आज विकास के मर्दाना लिंग को देख उसकी भावनाएं फिर जाग गई थी, रमा को सारी रात नींद नहीं आई, रात भर बस करवटें बदलती रही।

दूसरी तरफ विकास आने वाली घटनाओं से बेखबर सो रहा था, सुबह कोई 6 बजे उसकी नींद खुली तो उसे हैरानी हुई कि आज माँ ने उसे जगाया नहीं पर उसे लगा कि माँ पक्का उसे जगाने आई होगी और वो जागा नहीं होगा.‘आज तो पिटाई पक्की…’ उसने मन में सोचा और भाग के सीधा रसोई में गया, इस बात से बिल्कुल अनजान कि उसका तम्बूरा अभी भी तना हुआ है और उसकी निक्कर से साफ़ पता चल रहा है. वैसे उसे पता भी होता तो भी वो यही सोचता कि मालिश से उसका लंड कितना ताकतवर हो गया है, उसे इसमें शर्म की कोई बात नज़र नहीं आती।

रसोई में रमा बर्तन धो रही थी और रमा की पीठ उसकी तरफ थी. नाइटी में से उसकी सुडौल गांड साफ़ नज़र आ रही थी.रमा की मांसल गांड देखते ही विकास का मन आया कि वो ज़ोर से दबाये इस उभरी हुई चीज़ को!

वो अभी अपने सपनों में ही खोया हुआ था जब रमा को लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है, वो पीछे घूमी तो विकास की उभरी हुई निक्कर को देख उसकी हँसी छूट गई.‘उठ गया… सो लेता कुछ देर और!’ वो मुस्कुराते हुए बोली।‘सॉरी माँ, आज मैं उठ नहीं पाया, मैं अभी सारा काम कर देता हूँ.’ वो डरते हुए बोला।

‘हम्म… काम तो तू कर ही लेगा, यह तो मैं देख ही रही हूँ… और डर मत, आज मैंने खुद नहीं उठाया तुझे!’ रमा ने विकास के उठे हुए लंड को घूरते हुए कहा और फिर कुछ देर रुक कर बोली- विकास, तू निक्कर के अंदर कच्छा क्यों नहीं पहनता?‘मुझे गर्मी लगती है और मेरा नुन्नु दुखता है कच्छे में!’ विकास ने मासूमियत से जवाब प्रिया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि माँ उसे कच्छा पहने को क्यों कह रही है.‘अच्छा पर अब तू बड़ा हो गया है न इसलिए… कच्छा न पहना गन्दी बात होती है.’ रमा बोली।

रमा ने उसे वहीं खड़ा रहने को कहा और अपने कमरे से अपने पति का एक कच्छा ले आई और विकास को देते हुए बोली- ले पहन ले इसे!विकास ने भी बिना किसी शर्म के निक्कर रमा के सामने ही उतार दी और उसका तनतनाता लंड रमा को सलामी देने लगा. विकास ने कच्छा पहन लिया पर उसका लिंग था ही इतना बड़ा और ऊपर से तना हुआ झट से कच्छे के छेद (जो पेशाब करने के लिये बना होता है) से बाहर आ गया.

‘माँ, मेरा नुन्नु तो कच्छे में आ ही नहीं रहा, क्या करूँ?’ विकास परेशान होते हुए पूछा.‘रुक मैं सिखाती हूँ कि कैसे पहनते हैं… नुन्नु को ऐसे पकड़ के कच्छे की टांग वाली तरफ कर देते हैं.’ रमा ने इशारे से समझाते हुए कहा।विकास ने दो तीन बारी कोशिश की पर बेकार… ऊपर से लंड दुखने लगा वो अलग!

‘माँ मुझे नहीं आता!’ उसने आखिर थक कर कहा।रमा समझ गई कि उसे ही अब इस अजगर को संभालना होगा. यह सोचते ही उसके पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई।रमा विकास के पास गई और उसने विकास के लंड को पकड़ लिया ‘हे राम कितना मोटा है’ रमा ने मन में सोचा और ये सच ही था, लंड उसकी मुट्ठी में आ ही नहीं रहा था, 2 उंगली जितनी जगह खाली थी।

रमा का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक़्त यह मूसल उसकी फ़ुद्दी में घुस जाये पर वो जानती थी कि सभी घर पे हैं इसलिए उसने जल्दी से विकास को बताया कि नुन्नु को कहाँ रखते है कच्छे में।और उसे जल्दी से निक्कर पहनने को कहा.

‘माँ देखो नुन्नु अभी भी नंगा है,’‘बेटा ये ऐसे ही होता है, तू निक्कर पहन ले तो नंगा नहीं रहेगा.’ रमा ने विकास से कहा जो कच्छे की टांग से बाहर झांक रहे अपने लिंग की तरफ इशारा कर रहा था।‘चल जाकर नहा ले, ज्यादा बातें मत बना वरना स्कूल के लिए लेट हो जायेगा.’

सब बच्चों को स्कूल और फिर पति को दुकान भेजने के बाद रमा घर की साफ़ सफाई में लग गई, कोई 11 बजे वो घर के सब काम करके फ्री हुई तो उसने अपनी चिंकी की माँ को आवाज़ लगाई- अरे चिंकी की मम्मी, अगर काम निपट गया हो तो आओ चाये पीते हैं… ‘शांति’ भी बस शुरु होने वाला है.‘आई रमा!’ तरनजीत ने जवाब प्रिया।

तरनजीत 35 साल की भरे बदन की महिला थी, उसका रंग पंजाबियों की तरह साफ़ और कद काठी काफी मजबूत थी। तरनजीत काफी रंगीन मिज़ाज की औरत थी, शादी के बाद भी उसके कई मर्दों के साथ सम्बन्ध थे।

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तरन अपने मोटे कूल्हों को मटकाती हुई रमा के कमरे में दाखिल हुई, उसने रमा के चेहरे को देखते की जान लिया कि रमा के साथ रात को क्या हुआ होगा।‘क्या रमा, आज फिर भाई साहब फुस हो गए?’ उसने रमा को आँख मारते हुए पूछा.‘क्या बताऊँ दीदी इस आदमी से तो तंग आ गई हूँ, मैं आज तो पूरे 93 दिन हो गए.’ रमा ने तरन की तरफ चाय का कप बढ़ाते हुए कहा।

‘रमा तू क्यों इस आदमी के साथ क्यों बरबाद हो रही है, जैसे लहसुन बिना सब्जी नहीं जचती वैसे ही लौड़े बिना औरत की ज़िन्दगी ही क्या!.’ तरन ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा.‘दीदी तुम कह तो सही रही हो… पर मैं कर ही क्या सकती हूँ?’‘रमा तुम भाईसाहब को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाती? आज हर बिमारी का इलाज है… मैं एक दिन भी चुदाई के बिना नहीं रह सकती… तू पता नहीं कैसी जीती है?’‘दीदी अब क्या कहूँ तुमसे, ये किसी डॉक्टर के पास जाते नहीं… पर मैंने सोचा शरमाते होंगे तो इन्हें बिना बताये ही कई डॉक्टरों की दवाई ले आती थी और इनके खाने में मिला देती थी पर कोई लाभ नहीं हुआ. मैं तो पूरी तरह से टूट चुकी हूँ. तुम ही बताओ क्या करूँ मैं?’ रमा ने सिसकते हुए कहा।

‘ओह रमा हिम्मत मत हारो.. तुम बुरा न मानो तो एक तरकीब है मेरे पास कहो तो बताऊँ?’ तरन ने रमा को सहलाते हुए कहा.‘दीदी तुम्हारी किसी बात का बुरा माना है आज तक जो अब बुरा मानूँगी.’ रमा ने आस की नज़रों से तरन की ओर देखते हुए कहा।‘रमा तू मेरे देवर रवि को तो जानती हैं न? बहुत पूछता है तेरे बारे में… मेरी मिन्नतें कर रहा है साल भर से कि तेरी उससे बात करवा दूँ, तू बोले तो करूँ बात?’ तरन ने रमा को आँख मारते हुए कहा।‘नहीं नहीं दीदी रहने दो!’ रमा ने घबराते हुए कहा.

‘क्यों तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?’ तरन सवालिया नज़रों से रमा को घूरते हुए कहा.‘नहीं दीदी, वो बात नहीं, रवि जैसा सुन्दर और जवान लड़का जिस लड़की को मिलेगा, उसकी तो ज़िन्दगी बन जायेगी… पर वो अभी लड़का है कालेज में पढ़ता है… उसकी जिंदगी खराब हो जायेगी.’ रमा ने उत्तेज़ित होते हुए कहा.

‘हा हा रमा, मैं तो तुझे चालाक समझती थी, तू तो बिल्कुल भोली है बच्चों की तरह… जिसे तू लड़का कह रही है न, वो लड़का तेरी मेरी जैसी चार की चुदाई एक साथ कर सकता है.’ तरन ने हँसते हुए कहा.‘क्या दीदी, तुम तो कुछ भी कहती हो!’ रमा तरन को हल्का धक्का देते हुए कहा पर तभी वो सारा मामला समझ गई और हँसते हुए- तो इसका मतलब तुम और रवि करते हो?‘रमा तू करने की बात करती है मैं तो लगभग रोज़ उससे चुदती हूँ, अब ऐसी आदत पड़ गई है कि अगर एक दिन भी उसका लौड़ा न लूँ तो मेरी चूत की हालत बुरी हो जाती है.’‘ओह दीदी तो कल जब दिन में रवि आया था तो तब भी तुमने… अब समझी तभी कल तुम मेरे पास नहीं आई… पर अगर चिंकी के पापा को पता चल गया तो? तुम्हें डर नहीं लगता?’ रमा ने हैरान होते हुए पूछा.रमा मन ही मन सोच रही थी कि ऐसा देवर काश उसे मिला होता.

‘रमा क्या बताऊँ तुझे, कल तो एक पल के लिए मेरी सांसें ही रुक गईं थी. हुआ ये कि रवि आम तौर से 10 बजे के आसपास आता है और 1 बजे तक चला जाता है, उसे घंटी न बजानी पड़े इसलिए मैं दरवाजे पर कुण्डी नहीं लगाती… पर कल वो 11 बजे तक नहीं आया मुझे लगा कि अब नहीं आएगा तो मैं रसोई में खाना बनाने चली गई. मैं आटा गूंथ रही थी कि उसने मुझे पीछे आकर दबोच लिया कस के और मेरे कबूतरों को मसलने लगा। मैंने कहा भी ‘क्या कर रहे हो, चिंकी के पापा आ जाएंगे.’ पर उस पे तो ठरक हावी थी, उसने झट से मेरी नाइटी ऊपर की और घुसा प्रिया अपना बड़ा मोटा लौड़ा मेरी चूत में… उम्म्ह… अहह… हय… याह… कमीने का इतना मोटा है कि हर बार लेते हुए मेरी हालत पतली हो जाती है।मैंने कहा भी रवि से कि तेल-वेल लगा ले पर उसने तो तब तक रेल चलानी शुरू कर भी दी थी.मैं शेल्फ पे झुकी हुई थी और वो मेरे कबूतरों को पकड़ के पूरी ताकत से धक्के दे रहा था।पर तभी घंटी बजी पर मैं करती क्या मेरी तो सिटी-पिटी गुम हो गई, ‘रवि पक्का तुम्हारे भैया होंगे’ पर उसे तो जैसे पहले ही सब पता था, बोला ‘पूछो कौन है’ और भाग कर बाथरूम में चलो.मैंने आवाज लगाई ‘कौन है’ और भाग कर बाथरूम में पहुँच गए हम दोनों।बाहर से ये बोले ‘मैं हूँ तरन दवाजा खोल!’मैं जो पहले डरी हुई थी, और डर गई, मेरा पूरा बदन कांप रहा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूँ। पर रवि ने धीरे से मेरे कान में कहा कि कहो ‘मैं नहा रही हूँ.. आती हूँ’, मैंने ऐसा ही किया।रवि मुझ से ज्यादा चालाक था, उसने इतनी सी देर में सब सोच लिया था, उसने झट से मेरी नाइटी उतारी और पानी से मुझे भिगो प्रिया और तौलिया मुझे देते हुए बोला इसे लपेट लो और जाकर दरवाजा खोलो।मैंने तोलिया लपेटा और जाकर दरवाजा खोला।मैं अभी भी डर रही थी कि चिंकी के पापा गुस्सा होंगे पर भगवान कि दया से ऐसा कुछ नहीं हुआ।मुझे तौलिए में देख कहने लगे कि तुझे इतनी भी क्या जल्दी थी दरवाजा खोलने की… आराम से कपड़े पहन कर खोलती।उनकी बात सुन कर मेरी जान में आई, मक्खन लगाने के लिए मैंने उनसे कहा कि आपको इंतज़ार करना पड़ता इसलिए ऐसे आ गई।उनको बस कुछ कागज़ लेने थे दफ्तर के, उन्होंने वो लिए और चले गए।उनके जाने के बाद हमने अपना अधूरा काम बड़े आराम से पूरा किया।’ तरन ने अपनी बात खत्म की।

‘ओह दीदी तुम्हारे तो मज़े हैं पर देवर से चुदते हुए तुम्हें बुरा नहीं लगता?’ रमा बोली.‘रमा तू किस जमाने में रह रही है, आज के जमाने में कोई रिश्ता नहीं होता, बस चूत और लंड होते हैं… वैसे लंड तो अपने विकास का भी बड़ा मस्त है.’ तरन ने चटकारा लेते हुए कहा.‘हाय राम तुम कैसी बातें करती हो… विकास तो अभी बच्चा है, उसे तो छोड़ दो यार!’ रमा ने कहा वो सोच रही थी कि तरन कितनी बड़ी चुदक्कड़ है, उसके बेटे पर भी नज़र है उसकी।‘नहीं विकास सिर्फ और सिर्फ मेरा है!’ उसने खुद से कहा।

‘मैं कैसे बातें कर रही हूँ? सारी मोहल्ले की औरतों की नज़र है विकास पे, तू उसे कच्छा तो पहनाती नहीं और विकास सारा दिन अपना हथौड़े जैसा लंड लिए इधर उधर घूमता रहता है… कसम खाकर कहती हूँ, अच्छा मौका है तेरे पास… इससे पहले कि कोई पराई औरत तेरे कुंवारे लड़के को मर्द बनाए, तू खुद ही ऐसा कर ले!’ तरन ने रमा को आँख मारते हुए कहा।‘क्या दीदी, कुछ भी बोलती हो? विकास मेरे बेटे जैसा है!’ रमा बोली.‘बेटा तो नहीं है न? और इतना ही बेटा मानती हो तो उसे नौकरों की तरह क्यों रखती हो? फिर बेटा नहीं माँ के दुख दूर करेगा तो क्या दुश्मन करेंगे?’ तरन ने प्यार भरी आवाज़ में रमा से कहा।‘बोल तो तुम सही रही हो… मैंने उसके साथ बड़ा बुरा बरताव किया है पर दीदी मेरा दिल नहीं मानता.. उसका लंड देख लेती हूँ तो सारे बदन में आग लग जाती है पर..’

‘पर वर छोड़ रमा, कसम खाकर कहती हूँ कि कुंवारे लौड़े का मज़ा अलग ही होता है.’ तरन ने रमा के दिल को टटोलते हुए कहा। वो जानना चाहती थी कि आखिर रमा के दिमाग में चल क्या रहा है। वो तो रमा के जरिये विकास तक पहुँचने की बात सोच रही थी पर वो बेहद चालाक थी उसे पता था कि वो सीधे कभी विकास को नहीं पा सकती इसिलए वो रमा को गर्म कर रही थी।

‘दीदी ये क्या कह रही हो रिश्तों में यह सब ठीक नहीं होता’ रमा ने संभलते हुए कहा।‘साली कितना नाटक करती है.’ तरन ने मन में सोचा। वो जानती थी कि रमा कई महीने से सम्भोग नहीं कर पाई है और बस थोड़ा और उकसाने की देर है फिर यह रवि से भी चुदेगी और अपने बेटे से भी।‘रमा रिश्ते तो होते ही हैं हमें सुख देने के लिए… और सोच तू कहीं बाहर चक्कर चलाये तो बदनामी का डर है ऊपर से अगर विकास को भी बाहर चुदाई की लत पड़ गई तो बेचारा कहीं का नहीं रहेगा. तू मोहल्ले की औरतों को नहीं जानती, बड़ी बुरी नीयत है उनकी!’ तरन ने तरूप का इक्का चला।और उसका वार सही जगह जाके लगा।

रमा सोचने लगी कि बात तो यह सही कह रही है, अगर वो विकास के साथ अपनी प्यास बुझाती है तो घर की बात घर में ही रह जायेगी।‘ठीक है दीदी देखती हूँ… पर तुम बताओ क्या तुम कभी घर में चुदी हो?’ उसने अपना बचा-खुचा शक मिटाने के लिए तरन से पूछा।‘मेरी तो पहली ही चुदाई अपने ही घर में हुई थी और देखो किसी को कुछ पता नहीं चला!’ तरन ने उसे कहा।‘दीदी, बताओ न कैसे किया तुमने ये सब और किसके साथ?’

कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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