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भाभी की चुदाई • पठन समय: 11 मिनट • पढ़ा गया: 1,054 बार

कल्पना भाभी की चुदास और चूत चुदाई -1

अजय सिन्हा

24 May 2024 को प्रकाशित

कल्पना भाभी की चुदास और चूत चुदाई -1
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दोस्तो, मेरा मानना है कि सबके जीवन में कुछ ना कुछ ऐसा होता है जो एक अच्छी कहानी का शक्ल ले सकता है।मेरी बात अभी से 2 साल पहले की है.. जब मेरा ट्रान्सफर राँची हुआ था। मैंने राँची के अच्छे इलाके में एक घर ले लिया था, वहाँ पड़ोस में 3 परिवार और रहते थे।मैंने भी रहना शुरू कर प्रिया.. मेरे घर का डिज़ाइन ऐसा था कि एक परिवार का और मेरा एंट्रेन्स गेट एक की बरामदे से था।उनकी फैमिली में 3 लोग थे। हज़्बेंड.. उनकी वाइफ.. और 6 साल की बेटी।

मेरे आने के 4-5 दिन बाद उन लोगों से परिचय हुआ।भाभी का नाम कल्पना था।

कुछ दिनों के बाद मैं उनसे घुल-मिल गया.. पर घर आना-जाना लगभग ना के बराबर था। मैं रोज़ ठीक 9 बजे नहाता था.. तो अपना तौलिया सूखने डालने बरामदे में आता था।

एक दिन भाभी भी नहा कर बाहर आई थीं। मैं तो उस दिन उनको देखते ही रह गया.. क्या सुंदर लग रही थीं। गीले बाल.. बालों से उनका क्रीम कलर का सूट भी हल्का गीला हो रहा था। मेरी तो नज़र ही नहीं हट रही थी।

उस दिन भाभी मुस्कुराईं.. तभी मेरा ध्यान टूटा..

भाभी के बारे में आपको बता दूँ कि वो एक क़यामत माल थीं। शादी को 13 साल हो गए थे.. उमर 35 की पर लगती थीं बिल्कुल 28 साल की..उनकी चूचियाँ 34 इंच की.. लचकती कमर 32 इंच की.. ऊपर की ओर उठे हुए चूतड़ 36 इंच साइज़ के.. मतलब बिल्कुल चोदने लायक माल..

अब तो रोज़ मैं उनको देखता.. वो भी मुझे कभी-कभी देख लेती थीं। मैं तो अपना सुबह-शाम गेट खोल कर ही रखता और उनके बाहर आने का इन्तजार करता रहता कि कब वो आएं और मैं उनकी मदमस्त जवानी का रस लूँ।ऐसे देखने का सिलसिला 10 दिन तक चला.. अब भाभी भी मुझे देख कर मुस्करा देती थीं और मेरे हाल-चाल पूछ लेती थीं कि सब ठीक है ना?

मैं मन में सोचता कि तुम ठीक रहने दोगी.. तब ना ठीक रहूँगा..

एक दिन उनके पति ऑफिस के काम से बाहर चले गए.. वो भी 15 दिन के लिए..शाम को भाभी ने बताया कि वो चले गए हैं.. तो मैं खुश हुआ कि चलो अब शायद थोड़ा खुल कर बात हो।

एक दिन शाम को भाभी ने मेरा नंबर माँगा- विजय तुम अपना नंबर दे दो.. कभी कोई ज़रूरत होगी.. तो कॉल करूँगी..उसी दिन रात को 11 बजे के आस पास किसी का whatsapp पर मैसेज आया- हैलो..!

मैंने प्रोफाइल की फोटो को देखा तो भाभी की थी.. मैंने भी जबाव प्रिया- हैलो.. और पूछा- अभी तक सोई नहीं हैं?बोली- मुझे देर से सोने की आदत है।

दोस्तो, whatsapp की प्रोफाइल फोटो में वो क्या मस्त माल लग रही थी.. नाभि से नीचे साड़ी बँधी हुई थी.. आअहह..मैंने उनकी थोड़ी तारीफ करनी शुरू की- भाभी.. लगता नहीं कि आपकी एक 6 साल की बेटी भी है।तो उसने पूछा- क्यों?तो मैंने कह प्रिया- आप तो 26-28 साल की लगती हैं और आजकल तो इस उमर में शादी ही होती है।तो उन्होंने कहा- नहीं.. ऐसा नहीं है..फिर कहा- अच्छा कॉल पर बात करते हैं।मैंने कहा- ठीक है कॉल कीजिए..

तुरंत भाभी का कॉल आ गया।भाभी मन ही मन अपनी तारीफ में बहुत खुश थीं। उनके ‘हैलो’ बोलते ही मैंने कहा- भाभी आपकी आवाज़ बहुत प्यारी है.. बिल्कुल आपके जैसे..तो हंस दी.. बोली- अच्छा बात घुमाओ मत.. बोलो की क्या बोल रहे थे।मैंने फिर कहा- आप तो 28 की लगती हो..उसने कहा- अच्छा विजय तुम मेरी असली उम्र का अन्दाजा करो।मैंने कहा- अधिकतम 30-32 साल..।तो बोली- नहीं विजय.. मेरी उमर 35 है..

मैं तो दंग रह गया, मैंने कहा- सच में भाभी आप तो खुद को ग़ज़ब का मेनटेन किए हैं।तो बोली- हाँ.. मुझे अच्छा लगता है.. खुद को मेनटेन करना..

अब बात थोड़ी आगे जाने लगी.. मुझे भी नहीं पता था कि अब बात कितने आगे जाएगी।मैंने अब तो खुल कर उनकी तारीफ करना शुरू कर दी, शायद वो भी अब बातों में या मुझमें इंटरेस्ट ले रही थीं।भाभी ने पूछा- सच में मैं 28 की लगती हूँ क्या?तो मैंने कहा- हाँ जी.. सच में..वो बहुत खुश हुई.. अब बात करते-करते 12 बज गए थे.. तो वो बोली- चलो ठीक है विजय.. कल सुबह बात करते हैं।फिर गुड नाइट बोल कर फोन रख प्रिया।

अब मुझे नींद कहाँ आ रही थी। थोड़ी देर बाद देखा तो अभी भी वो whatsapp पर ऑनलाइन थी।तो मैंने ‘हैलो’ भेज प्रिया.. तुरंत उनका जबाव आया- सोए नहीं क्या?मैंने कहा- नींद ही नहीं आ रही है।भाभी ने कहा- मुझे भी नहीं आ रही।मैंने कहा- आओ बाहर बरामदे में बैठते हैं थोड़ी देर..

तो तुरंत तैयार हो गई.. और बोली- चेंज करके आती हूँ।

मैंने कहा- ऐसा क्या पहना है.. जो चेंज की ज़रूरत है?तो बोली- एक हल्का सा नाईटी है।

मैंने कहा- आ जाइए ना वैसे ही.. मेरा भी आपको वैसे ही देखने का मन कर रहा है।बोली- अच्छा बदमाश.. अच्छा आती हूँ।बरामदे में अंधेरा था.. बाहर से हल्की लाइट आ रही थी.. मैं झटपट पहुँच गया। दो मिनट बाद ही उनका गेट खुला और वो बाहर आई।

‘आअहहाहह…’ उनको यूँ देख कर ही मुँह से ‘आहह..’ निकल गया।जाँघों तक की ही नाईटी थी.. पैर खुले हुए थे.. बिल्कुल गोरे और चिकने पैर। स्लीवलैस नाईटी थी.. जिसे बेबीडाल टाइप फ्रॉक कह सकते हैं.. इसका गला भी काफ़ी खुला हुआ था..अन्दर का नजारा भी साफ़ दिख रहा था.. उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई थी.. तो उसकी आधी चूचियाँ बाहर दिख रही थीं।

मैं तो बस देखता ही रह गया। मुझे ऐसे देखते हुए कटीले अंदाज में बोली- ऐ.. मिस्टर क्या देख रहे हो.. मुझे कभी देखा नहीं क्या?मैंने कहा- हाँ.. मैडम आपका ये सेक्सी बदन नहीं देखा था..तो वो हल्की सी शर्मा गई.. बोली- धत्त..

अब हम दोनों बैठ गए.. बातें होने लगीं, अब बात थोड़ी खुल कर हो रही थी, भाभी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?मैंने कहा- अभी तो नहीं है.. पर जब मैं पुणे में पढ़ाई कर रहा था.. तो वहाँ कई थीं।बोली- कैसी थीं?

मैं बोला- आपके जैसी तो एक भी नहीं थी.. पर एक ठीक थी.. उसका फिगर भी आपके जैसा तो नहीं था।भाभी अब पैर पर पैर चढ़ा कर बैठ गई थीं.. जिससे उनके बगल से जाँघें साफ़ दिख रही थीं…क्या चिकनी जांघ थी यार.. थोड़ी सी पैन्टी भी दिख रही थी।

भाभी- कुछ किया भी था.. कि केवल दोस्ती ही थी?मैं- सब हुआ था भाभी.. कुछ भी बाकी नहीं रहा था।मैंने बातों-बातों में उन्हें बताया कि मुझे अपने से बड़ी भाभी या आंटी अच्छी लगती हैं।उसने पूछा- ऐसा क्यों?मैंने कहा- उन में एक अलग आकर्षण होता है.. जैसे आप में है।

मैंने बताया कि पुणे में भी एक आंटी से मेरा फिजिकल रिलेशन बन चुका था.. दो साल उसे अच्छी तरह जम कर खिलाया भी था.. जबकि उनकी उमर भी 45 की थी।वो बोली- तब तो तुम मास्टर हो..

मैंने कहा- ऐसा भी नहीं है.. बस सेक्स के टाइम मैं खुद से ज़्यादा साथी का ख्याल रखता हूँ।चूंकि अब बात सेक्स पर शुरू हो गई थी.. तो वो भी खुल कर बात कर रही थी।बोली- जरा खुल कर बताओ कि कैसे ख्याल रखते हो?मैंने कहा- भाभी अब मुझे लगता है आपको सब खुल कर नहीं खोल कर ही बताना पड़ेगा।

बोली- हाँ.. तो जब इतना हम लोग खुल कर बात कर रहे हैं तो और खुल कर बताओ ना.. मुझे अच्छा लग रहा है।मैंने कहा- मैं चुदाई में बहुत टाइम लेता हूँ।उसने कहा- कितना?तो मैंने कहा- आराम से करने में 3 घंटा..बोली- बाप रे.. इतनी देर तक करते हो?

मैंने कहा- इस टाइम में फोरप्ले बहुत करता हूँ। औरतों को 2 या 3 बार तो पहले ही झाड़ देता हूँ।वो हैरत से बोली- अच्छा..!अब भाभी आगे झुक कर बैठी थी जिससे उनके चूचे बाहर लटक रहे थे। यार क्या मस्त बोबे दिख रहे थे.. मैं तो ललचाई आँखों से उनको ही देख रहा था।

मैं एक 2 सीटर कुर्सी पर बैठा था, मैंने भाभी से कहा- इसी पर आप भी आ जाओ न.. नहीं तो बात कोई बाहर भी सुनाई पड़ सकती है।वो आ गई.. फिर बोली- अब बताओ..

मैंने कहा- पहले अच्छे से साथ में बैठ के बातें करते हैं, फिर सीने से देर तक कसके चिपका कर चुम्मियाँ करते हैं।

मैंने अपने इतना पास सेक्सी भाभी को देखा तो मेरा लंड बहुत टाइट हो चला था।

मैंने भी इस वक्त बिना चड्डी के एक हाफ-पैंट पहना हुआ था.. तो मेरा लंड ने हाफ पैन्ट में तंबू सा बनाया हुआ था और मैं लगातार उसे धीरे-धीरे सहला भी रहा था।भाभी लौड़े की तरफ देख कर बोली- और बताओ.. कि करते कैसे हो?मैंने कहा- सीने से चिपकाने के बाद मस्त वाली चूमा-चाटी होती है।

अब भाभी भी मेरी बातों से गरम होने लगी थीं। मेरा कंधा उनके कंधे से टकरा रहा था।अचानक मैंने अपना हाथ भाभी की कमर में डाल प्रिया, भाभी थोड़ा हिली.. पर बोली कुछ नहीं।

मैं बताता भी जा रहा था और बगल में भाभी के कमर को सहला रहा था।भाभी थोड़ा काँपते आवाज़ में बोली- और क्या करते हो?मैंने जरा और जोर से कमर को दबाते हुए कहा- उसके बाद.. पूरी बॉडी की मसाज..यह कह कर मैंने भाभी की कमर के बगल में थोड़ा दबा भी प्रिया.. जिससे भाभी के मुँह से ‘आअहह..’ निकला।

अब मैंने भाभी के गले पर अपना होंठ रख प्रिया जिससे भाभी और गर्म होने लगी।मैंने भाभी का हाथ अपनी जाँघ पर अपने लंड के करीब रख प्रिया।अब मैं भाभी की जाँघ को सहला रहा था और उनके गले पर चुम्मी कर रहा था। फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के होंठ की ओर बढ़ रहा था।

आहह.. क्या फीलिंग थी दोस्तो.. अब भाभी के होंठ पर मैंने अपने होंठ रख दिए।अचानक भाभी ने अपने होंठ खोल दिए और मुझसे कसके किस करने लगी, उनका हाथ नीचे मेरे लंड पर आ गया था.. वो लौड़े को सहला रही थी।

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, अन्दर चल कर बाकी कहानी बिस्तर पर बताता हूँ।

दोस्तों भाभी की चुदास बढ़ चुकी थी बस अब उनको बिस्तर तक ले जाकर चोदना बाकी था उनको बिस्तर में किस तरह से गरम किया और पूरी मस्ती से चोदा.. ये सब आपको अगले भाग में लिखूँगा अभी आप बस मुझे अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे ईमेल लिखें.. जिससे मेरा हौसला बढ़ेsupport@mohakkisse.com

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कल्पना भाभी की चुदास और चूत चुदाई

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