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चुदाई की कहानी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 510 बार

सहेली की समस्या

नेहा वर्मा

15 Apr 2008 को प्रकाशित

सहेली की समस्या
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यह पत्र रूपा वर्मा ने कामिनी सक्सेना को लिखा दोनों की एक सहेली मालिनी की समस्या के बारे में :

प्रिय कामिनी,

मैं रूपा वर्मा हूँ, मालिनी की रूम-मेट, मैं उसी के कॉलेज से बीएससी बायलोजी कर रही हूँ।

आज काफ़ी सुबह से उठकर मालिनी नेट पर बैठी थी, मैंने उससे पूछा कि कोई परेशानी है क्या तुझे?

तो फिर उसने सब बताया और आपके बारे में भी बताया।

मालिनी गांव की सीधी सादी एक लड़की है जो इन्दौर आई है पढ़ने के लिये, वो देखने में भी काफ़ी अच्छी है। उसकी फ़िगर ३२ २४ ३४ होगा करीबन। यहां इन्टरनेट पर बैठ कर उसकी जवानी मचल उठी है, जिसकी वजह से उसे परेशानियाँ हो रही हैं।

अब जवान लड़की की चूत है, आग तो लगेगी ही उसमें, उसका तो कोई क्या कर सकता है !

मैं उसके साथ ही सोती हूँ और मैंने उसे कई बार तड़पते हुए महसूस किया है, वो यह समझती है कि मैं सो रही हूँ।

वो अकसर करवट बदल बदल कर अपनी योनि पर सलवार के ऊपर से हाथ फ़ेरती है, रज़ाई डाल लेती है ऊपर से, और कम से कम रात में ६ या ७ बार बाथ रूम जाती है।

आप समझ सकती है कि क्या करने पर उसकी बेचैनी दूर होगी पर उसे पता ही नहीं कुछ और प्यासी ही लौट आती है शायद।

ऐसे में मेरी चूत में भी खुजली होने लगती है, पर मैं कंट्रोल कर लेती हूँ। मै भी अपनी योनि में उँगली करती हूँ कभी कभी !

अकसर नहाने से पहले या सुबह पहले पेशाब करने के बाद, मेरी झिल्ली अभी फ़टी नहीं है पर मैं इतना अन्दर कर लेती हूँ कि मजा आए और शान्ति मिल जाये, पर मालिनी इतना नहीं कर पाती।

ना जाने क्यूँ अब यह तो उसकी चूत देखकर ही पता चलेगा कि क्या प्रोबलम है, पर आज उसने मुझे मना कर दिया चूत दिखाने को, पता नहीं क्यूँ, वो बोली कि नहीं मैं पहले कामिनी जी से बात करूंगी।

और फिर मैने डाक्टर का कहा तो उसने मना कर दिया बोली कि नहीं, मैं डाक्टर के सामने नंगी नहीं होना चाहती हूँ !

अब आप तो समझ ही सकती है कि कोई लड़की कितना भी कर ले, लण्ड का मजा तो लण्ड से ही मिलता है, और वो हमको शादी से पहले नहीं मिलेगा।

वैसे मैं तो बायो की स्टूडेन्ट होने के कारण ये बोल सकती हूँ कि जब तक चूत की झिल्ली नहीं फ़टेगी तब तक पूरा पूरा सेटिस्फ़ेक्शन कभी नहीं होगा क्यूँकि योनि में जो आग लगती है जवानी में, वो अन्दर झिल्ली के पीछे लगती है। जब तक झिल्ली के पीछे तक उंगली य लण्ड नहीं जाता तब तक चूत प्यासी ही रहती है चाहे कोई ऊपर से कितना भी फ़िन्गर कर ले।

झिल्ली यानी हायमन एक पर्दा होता है, चमड़ी या स्किन कह लो, जिसमे बहुत छोटे छोटे छेद होते हैं या एक थोड़ा बड़ा भी हो सकता है,

इन छेदों से ही मासिक-धर्म का खून और चूत का पानी आता है, पर झिल्ली इसके बीच में एक रुकावट का काम करती है।

एक बार झिल्ली फ़ट जाये तो फ़िर सब खुल कर फ़्लो होता है, नहीं तो रुक रुक कर आता है।

मैने मालिनी की चूत अभी देखी तो नहीं है पर ९०% लड़कियों की झिल्ली तो वैसे ही फ़ट जाती है, कभी खेलकूद में या स्कूटी वगैरह की किक लगाने में।

मालिनी की चूत देखकर ही कहा जा सकता है कि उसकी झिल्ली फ़टी है या नहीं।

क्युंकि कभी कभी झिल्ली तो खुली होती है पर बस उसे एक हल्के से झटके की जरूरत होती है रास्ता साफ़ करने के लिये।

मैंने यही सोच कर मालिनी को कहा था कि अपनी योनि दिखा !

हाँ, वैसे हमारे कॉलेज में टायलेट की दिक्कत है थोड़ी,

क्यूंकि इतनी उमर की लड़कियों में शरम लगती है, और मालिनी तो बहुत शर्मीली है,

वो जीन्स भी नहीं पहनती कॉलेज में टायलेट के डर से कि पीछे से खुला दिखता है पेशाब करते वक्त।

मैंने उसको कई बार समझाया कि गर्ल्स टायलेट में गर्ल्स ही आती हैं तो इसमें शर्माना क्या?

तू अपना सू सू किया कर और आ जाया कर, या तो फिर वहाँ पर मत जाया कर,

यहाँ कमरे पर आकर कर लिया कर,

पर वो कहती है कि मुझे ज्यादा बार जाने की इच्छा होती है और रोक नहीं पाती एक घन्टे से ज्यादा।

खैर लड़कियों का ब्लेडर छोटा होता है पर मैं रोक लेती हू तीन घन्टे तक।

और वैसे भी मुझे शरम नहीं आती है वहां पर, मैं तो आराम से करके आ जाती हूँ,

भले ही मेरा मासिक हो रहा हो।

मालिनी को पता नहीं क्या प्रोबलम है, बोलती है कि उठने बाद भी सू सू गिरता है पेन्टी पर।

और यहां कमरे के बाथ रूम में भी पूरे कपड़े उतार के नीचे बैठती है।

वैसे ये प्रोबलम ज्यादा सेक्स की इच्छा के कारण होती है, मुझे भी कभी कभी जब सेक्स की इच्छा होती है

तो ऐसा लगता है कि बाथ रूम जा कर आऊं और थोड़ा सा पेशाब आ भी जाता है।

मालिनी के साथ यही हो रहा है शायद, इसलिये १०-१५ बार जाती है पेशाब के लिये।

और ऊपर से, पहले नीचे से नंगी होती है और फिर वापस कपड़े पहनती है।

वैसे अगर हम कल डाक्टर के पास गये तो भी डाक्टर इसका यही इलाज बतायेगी कि झिल्ली फ़ाड़ लो या किसी से सेक्स करा लो।

वैसे मैं तो जाऊंगी ही, मुझे तो मासिक भी ठीक से नहीं आ रहा है।

मालिनी का पता नहीं कि वो जायेगी या नहीं

आप उस से बोल दें कि वो मुझे एक बार उसकी चूत देखने दे, शायद मैं उसकी समस्या हल कर सकूं।

और अगर वो किसी से चुदवाना चाहती हो तो एक रास्ता और है मेरे पास,

एक लड़के का भी इन्तज़ाम हो जायेगा, और अगर सिर्फ़ उसकी झिल्ली फ़ाड़नी हो तो भी एक रास्ता है मेरे पास,

अब जैसा आप सही समझें मुझे बता देना कि मालिनी का क्या करना है

और हां मेरे दोनों प्लान अभी आपको नहीं बताये है कि मैं कैसे लाऊंगी लड़का या कैसे उसकी झिल्ली फाड़ूंगी

कामिनी आप मुझे मेल करना मैं आपको प्लान बता दूंगी पर आप उसे मत बताना

आपकी सहेली

रूपा

(लिप्यांतर- नेहा द्वारा)

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

समीर हर्ष कुमार

1 week ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

वेन देसल

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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