अब तक आपने पढ़ा..सोनिया- क्या.. मुझे चोदने के लिए तुम लोगों ने इतना बड़ा प्लान बनाया था।मैं- क्या करूँ.. तुम हो ही इतनी खूबसूरत.. किसी का भी दिल तुमको चोदना चाहेगा।सूर्या- ये प्लान इसका नहीं.. इसकी बहन का था.. जो मुझसे चुदना चाहती है।मैं- ये भी सही है।
सूर्या- मैं अपना वादा पूरा किया.. अब मैं जा रहा हूँ तुम्हारे घर.. और तुम यहाँ एंजाय करो।मैं- ठीक है जाओ..सोनिया- नहीं सूर्या.. रूको.. मेरे पास एक प्लान है।सूर्या और मैं एक साथ बोले- क्या?अब आगे..
सोनिया- क्यों ना तुम सोनाली को यहीं ले आओ.. वैसे भी घर 4 दिन तो खाली ही रहेगा.. यहीं पर ग्रुप में हम लोग मस्ती करेंगे।सूर्या और मैं- यह भी सही बोल रही है।सूर्या- तो एक काम करो.. तुम सोनाली को ले कर आओ।मैं- ठीक है.. अभी लेकर आता हूँ।
मैं घर चला गया.. सोनाली का चेहरा मुझे देखते ही खिल उठा और मुझसे गले लग गई और बोली- वाउ भाई तुमने तो कमाल कर दिया।मैं- मम्मी-पापा कहाँ हैं?सोनाली- अन्दर हैं।
मैं उनके पास गया तो मुझे देखते ही पूछने लगे- अकेले पार्टी कहाँ करके आ गया?‘नहीं पापा पार्टी आज है.. और वो आप तीनों को भी बुलाया है।’तो पापा बोले- अरे न भाई.. हमारे पास टाइम नहीं है.. तुम सोनाली को ले कर चले जाना.. और हमारी तरफ़ से सॉरी बोल देना.. अब हम ऑफिस चलते हैं।
इतना बोल कर वे दोनों ऑफिस चले गए उनके जाते ही सोनाली फिर से मेरे ऊपर कूद पड़ी।सोनाली- कमाल के लड़के हो तुम यार.. इतनी जल्दी काम कर दिया।मैं- कभी कभी कमाल कर देता हूँ।सोनाली- बिस्तर में कैसी लगी सोनिया?
मैं- मस्त आइटम है यार.. उसके साथ चुदाई में मजा आ गया.. और वो सील पैक भी थी।सोनाली- तब तो तुमने एक और सुहागरात मना ली.. मतलब 12 के चोदू हो गए।मैं- हाँ चलो.. आज तुम भी मना लेना अपनी तीसरी सुहागरात..वो शर्मा गई.. तो मैं बोला शर्माना बंद करो और जल्दी से तैयार हो जाओ.. सूर्या के यहाँ चलना है.. अभी आज तेरे मन की मुराद पूरी हो जाएगी।
हम लोग जल्दी से रेडी होकर सूर्या के घर पहुँच गए और जैसे ही अन्दर गए तो देखा सूर्या और सोनिया एक बिस्तर को सज़ा रहे थे।पूछने पर पता चला आज इन दोनों की पहली चुदाई यादगार रहे.. उसी की तैयारी चल रही है।
तभी सोनिया सोनाली को लेकर चली गई बोली- इसको मैं सज़ा देती हूँ.. और मुझसे बोली- तुम सूर्या को जाकर सज़ा दो।मैं सूर्या को कमरे में ले गया और बोला- खुद से तैयार हो जा..।जब वो रेडी हो गया तो मैंने थोड़ा बहुत उसको सज़ा दिया और खुद भी फ्रेश हो कर बाहर आया।तो पता चला सोनिया अभी भी सोनाली को सज़ा ही रही है.. वो भी बंद कमरे में।
कुछ देर बाद जब वो बाहर निकली.. तो मैं देखता ही रह गया। सोनाली एकदम खूबसूरत दुल्हन की तरह सजी हुई थी। सिल्वर रंग की पारदर्शी साड़ी और उसी रंग की ब्लाउज.. पूरा फेस मेकअप किया हुआ.. साड़ी नाभि से नीचे.. चूत से थोड़ी ही ऊपर बँधी हुई थी।उसकी चूत और नाभि के बीच का चिकना भाग और भी खूबसूरत लग रहा था।
मुझे तो लग रहा था कोई हूर परीलोक से उतर कर आई है.. क्योंकि इतनी खूबसूरत सोनाली को मैंने भी पहले कभी नहीं देखा था।वैसे सोनिया भी तैयार हो कर आई थी.. लेकिन सोनाली के आगे वो कुछ ख़ास नहीं लग रही थी।मुझसे रहा नहीं गया और मैं सोनाली के गले लग गया- अभी तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो कि मन हो रहा है कि पहले मैं ही चोद दूँ।
सोनाली- आज तो मैं सूर्या के लिए सजी हूँ.. आप किसी और दिन..मैं- ओके मेरी जान.. लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।सोनाली- सोनिया है ना.. आज इसी से काम चलाओ।मैं- उसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है।सोनिया- अब तुम हटो इसको बिस्तर पर ले जाने दो।
मैं- हाँ उसको पहुँचा कर मेरे पास आ जाओ.. जल्दी से मेरा राजा खड़ा हो रहा है।सोनिया- हाँ आती हूँ.. मेरे राजा सब्र करो।मैं- नहीं हो पा रहा है।
सोनिया- पिछली बार मिली थी.. तो बहुत छोटी थी.. लगता है कोई मेहनत कर रहा है।मैं- हाँ तुम्हारा वही.. और तुम आओ मैं तुम पर मेहनत करता हूँ।सोनिया- अभी इन दोनों को देखने दो.. पहली बार लाइव सेक्स देख कर मजा आ रहा है।
मैं- अब शायद मैं पहला आदमी होऊँगा जो अपनी ही बहन को चुदते हुए लाइव देखूँगा।
टप्पू सेना का टपाटप वाली चुदाई का खेल- 2
हम दोनों हँसने लगे और वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे। सूर्या सोनाली की चूचियों से खेल रहा था.. कभी मसल रहा था.. तो कभी चूस रहा था।इधर मैं भी सोनिया की चूचियों को दबाने लगा तो ‘आहह..’ बोलते हुए वो मेरी गोद में बैठ गई।मैं उसकी पीठ पर किस करते हुए उसकी चूचियों को मसलने लगा।
उधर वे दोनों अलग होकर बिस्तर पर ही खड़े हो गए… तो हम दोनों भी अलग हो गए ये देखने के लिए कि क्या हो रहा है।
मैंने देखा सोनाली उसके लंड को पैंट के ऊपर से मसल रही थी.. तो सूर्या ने अपनी पैंट उतार को दिया और उसका लंड देख कर सोनाली उसके साथ खेलने लगी।तो सोनिया से भी रहा नहीं गया और वो भी मेरे लंड को निकाल कर खेलने लगी और मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।सोनिया जब तक चूस रही थी, मैंने भी अपनी पैंट उतार दी.. कुछ देर चूसने के बाद सूर्या सोनाली को खड़ा करके उसकी साड़ी उतारने लगा.. तो सोनाली ने उसकी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतारने में मदद कर दी।
मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था.. मैंने भी सोनिया के कपड़े उतार दिए। अब सोनाली सिर्फ़ पैन्टी में थी और सोनिया ब्रा और पैन्टी दोनों में खड़ी थी।
मैंने सोनिया को सोफे पर बिठा कर उसकी दोनों टाँगों के बीच में जाकर उसकी पैंटी को हटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा।तो सूर्या भी पीछे नहीं रहा वो भी शुरू हो गया और दोनों लड़कियां मुँह से सीत्कार निकालने लगी।उनकी सीत्कारें पूरे कमरे में गूंजने लगीं।
सोनिया मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी, कुछ देर ऐसा करने के बाद हम चारों डिसचार्ज हुए और अलग हो गए।कुछ देर बाद फिर दोनों लड़कियों ने हम दोनों को कन्डोम पहनाए और हमारा लंड खाने को रेडी हो गईं।
मैंने उधर देखा कि सोनाली चूत खोल कर बिस्तर पर लेट गई और सूर्या ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।उसको कोई खास दर्द नहीं हुआ.. क्योंकि वो मेरा लंड खा चुकी थी.. तो उसको क्या परेशानी होती भला..सोनिया- अरे वाहह.. इसने तो बड़ी आसानी से लंड खा लिया.. इसको तो दर्द भी नहीं हुआ और मैं तो कल बहुत रोई थी।मैं- अब तुमको भी नहीं होगा मेरी जान..
सोनिया- क्यों.. क्या ये पहले भी लंड खा चुकी है क्या?मैं- हाँ इसको भी पहली बार हुआ होगा!सोनिया- ओह आजकल की लड़कियां बड़ी फास्ट होती हैं।मैं- हाँ सुहाना भी अब तक लंड खा चुकी होगी।सोनिया- पता नहीं शायद..
मैंने उसको लिटा कर उसकी चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया और जोरदार झटके मारने लग गया। पूरे कमरे में ‘आआआहह.. ऊहह.. ओह..’ की आवाजें गूंजने लगीं तो हम दोनों लड़कों ने झटके और तेज कर दिए।फिर कुछ देर बाद हम चुदाई की अवस्था बदल-बदल कर चोदने लगे।
मैंने सोनिया को घोड़ी बनाया तो ये देख कर सूर्या भी सोनाली को घोड़ी बना दिया। जैसे-जैसे मैं सोनिया के साथ कर रहा था.. वैसे ही वो सोनाली के साथ करने लगा।
उन दोनों लौंडियों के मुँह से ‘उऊहह.. ऊहह.. फफ्फ़..’ की आवाजें निकल कर पूरे कमरे में भरने लगीं और कुछ देर के बाद हम चारों लोग डिसचार्ज हो गए।
इस तरह बार-बार चुदाई होती रही और बार-बार झड़ते.. फिर कुछ देर के बाद शुरू हो जाते.. और इसी तरह हम लोगों ने चार-चार राउंड चुदाई की।फिर वहीं नंगे ही निढाल होकर सो गए और मेरी नींद जब तक खुली.. तब तक शाम हो चुकी थी।तो मैंने सबको उठाया और बोला- कहाँ खाना है.. यहीं खाना है या बाहर चलना है?तो सबने एक साथ बोला- बाहर होटल में चलते हैं ना..तो मैं बोला- जाओ.. जल्दी से रेडी हो जाओ.. हम बाहर चलते हैं।
हम सब साथ में ही बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और अच्छे से कपड़े पहन कर बाहर चल दिए।सोनाली सूर्या की बाइक पर और सोनिया मेरी बाइक पर बैठी हुई थी। कुछ देर आगे ही गए होंगे कि बारिश शुरू हो गई सो हमने डिसाइड किया कि मैं और सूर्या जाकर होटल से खाना पैक करवा कर ले आएंगे।तो वो दोनों लौट गईं और हम दोनों खाना पैक करवाने चले गए।
दोस्तो.. मेरी कहानी आपको वासना के उस गहरे दरिया में डुबो देगी जो आपने हो सकता है कभी अपने हसीन सपनों में देखा हो.. इस लम्बी धारावाहिक कहानी में आप सभी का प्रोत्साहन चाहूँगा। आपको मेरी कहानी में मजा आ रहा है ना? तो मुझे ईमेल करके मेरा उत्साहवर्धन अवश्य कीजिएगा।कहानी जारी है।support@mohakkisse.com